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आखिर CM गहलोत और उनके खेमे को क्यों आई सियासी संकट की याद, क्या आलाकमान ने कही कोई बात?

27 जून 2022
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आखिर CM गहलोत और उनके खेमे को क्यों आई सियासी संकट की याद, क्या आलाकमान ने कही कोई बात?

Politalks.News/Rajasthan. सत्ता का संग्राम तो महाराष्ट्र में जारी है लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में भी बहुत जल्द बड़ा परिवर्तन होने वाला है. साल 2020 में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सियासी संकट के दौरान की गई कथित फ़ोन टैपिंग को लेकर एक बार फिर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है. फोन टेपिंग मामले में नामजद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को मिले ACB के नोटिस के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि, ‘आपने खुद सरकार गिराने का षड्यंत किया और अब आप सचिन पायलट का नाम रहे हैं. ये आपने बड़ी चूक कर दी इससे प्रूफ … Read more

Politalks.News/Rajasthan. सत्ता का संग्राम तो महाराष्ट्र में जारी है लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में भी बहुत जल्द बड़ा परिवर्तन होने वाला है. साल 2020 में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सियासी संकट के दौरान की गई कथित फ़ोन टैपिंग को लेकर एक बार फिर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है. फोन टेपिंग मामले में नामजद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को मिले ACB के नोटिस के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि, ‘आपने खुद सरकार गिराने का षड्यंत किया और अब आप सचिन पायलट का नाम रहे हैं. ये आपने बड़ी चूक कर दी इससे प्रूफ हो गया कि आप उनके साथ मिले हुए थे.’ सीएम गहलोत के इस बयान पर विपक्ष तो निशाना साध ही रहा है साथ में अब पायलट और गहलोत गुट के नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है. सीएम गहलोत के करीबी महेश जोशी ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, ‘न केवल साल 2020 बल्कि कुछ दिन पहले हुए राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा राजस्थान में हॉर्स ट्रेडिंग की फ़िराक में थी.’

एक तरफ जहाँ एक हफ्ते के बाद महाराष्ट्र की सत्ता का संग्राम सुप्रीम कोर्ट पहुंच चूका है. तो वहीं राजस्थान की सत्ता में 2 साल पहले आया सियासी उबाल अब भी जस की तस नजर आ रहा है. सियासी जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहुंचे महाराष्ट्र पॉलिटिकल क्राइसिस का एक दो दिन में पटाक्षेप हो जाएगा क्योंकि SC के आदेश के साथ ही मामला शांत हो जाएगा. वहीं सियासी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट को 30 जुलाई तक का वक़्त दिया है और शायद इसकी भनक कहीं न कहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पड़ गई जिसके बाद से खुद सीएम गहलोत और उनके खेमे के नेता 2020 में आए सियासी संकट की याद दिलाते हुए सचिन पायलट का नाम उछाल रहे हैं.

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शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर बोलते हुए 2 साल में पहली बार सचिन पायलट के सरकार गिराने में शामिल होने की बात कही तो वहीं यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो सही कहा है और हमने तो देखा भी है. वहीं सीएम गहलोत के बयान पर विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष जो हर समय सचिन पायलट के समर्थन में बयानबाजी करते आए हैं उन्होंने कहा कि, ‘कुछ दिन पूर्व कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने सचिन पायलट के धैर्य की तारीफ क्या कर दी, इससे गुस्साए मुख्यमंत्री जी पायलट जी के सरकार गिराने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाकर सीधे-सीधे कांग्रेस नेतृत्व को ही चुनौती दे डाली. देखना नीलकंठ बने हुए पायलट जब जहर उगल जायेंगे तो सरकार के तबाह होने की संभावना प्रबल हो जायेगी.’

राजस्थान में आए सियासी संग्राम का इशारों इशारों में जिक्र करते हुए जहां गहलोत गुट और विपक्ष मुखर है तो वहीं इशारों इशारों में पायलट गुट की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है. बिना किसी नेता का नाम लिए कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि, ‘विष पान करने वाले “नील कंठ” का अभिषेक “श्रावण” मास में किया जाता है, हर हर महादेव.’ वहीं पायलट गुट के नेता एवं विराटनगर से कांग्रेस विधायक इंद्राज गुर्जर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘ज़मीन पर बैठा हुआ आदमी कभी नहीं गिरता, फ़िक्र उनको है जो हवा में है!!’ इंद्राज गुर्जर के ट्वीट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.

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वहीं सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री महेश जोशी ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि, ‘न केवल साल 2020 बल्कि कुछ दिन पहले हुए राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा राजस्थान में हॉर्स ट्रेडिंग की तैयारी कर चुकी थी, लेकिन हमारे एसीबी में दिए गए परिवाद से उनके मंसूबे नाकामयाब हुए. अब चाहे गजेंद्र सिंह हो या कोई और…अगर फिर से कोई राजस्थान में हॉर्स ट्रेडिंग का प्रयास करेगा तो राजस्थान की जनता, कांग्रेस के विधायक और समर्थक दलों की ओर से ऐसा प्रयास करने वालों को फिर से करारा जवाब मिलेगा.’ आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को अपने सीकर दौर के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए सचिन पायलट और गजेंद्र सिंह शेखावत के सियासी संकट के दौरान एक होने का आरोप लगाया था.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि, ‘कानून अपना काम कर रही है. वह काफी समय से बचते रहे. आखिर में कोर्ट की ओर से उन्हें नोटिस सर्व हो ही गया. इनको वॉइस सैंपल देने में तकलीफ क्या है? वे स्वीकार कर चुके हैं कि ये इनकी वॉइस है. लोकेश शर्मा के खिलाफ जो केस इन्होंने दर्ज करवाया है, उलटा चोर कोतवाल को डांटे वाली बात है. आप सरकार गिराने के प्रयास के मुख्य किरदार थे. सबको मालूम है कि आप एक्सपोज हो गए हैं. आपने खुद सरकार गिराने का षड्यंत्र किया. अब आप सचिन पायलट का नाम ले रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्होंने चूक कर दी, इसके बाद तो और प्रूफ हो गया और आपने खुद ठप्पा लगा दिया कि आप उनके साथ मिले हुए थे.’

वहीं सोशल मीडिया पर चर्चा ये भी है कि महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में कुछ बड़ा होने वाला है. सूत्रों का कहना है कि या तो सचिन पायलट अगले माह कुछ बड़ा निर्णय लेंगे या फिर कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर कोई बड़ा निर्णय लेगा. हालांकि राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन के कयास ज्यादा लगाए जा रहे हैं क्योंकि हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी के धैर्य की परिभाषा से जोड़कर बयान दिया था. सूत्रों का तो ये भी कहना है कि एक दम से गजेंद्र सिंह शेखावत को मिला ACB का नोटिस और सियासी संकट के नाम पर गहलोत के नेताओं का पायलट की रट लगाना कहीं न कहीं ये इशारा करता है कि सीएम गहलोत राहुल गांधी के बयान से ज्यादा खुश नहीं है. यहीं कारण है कि राजस्थान के सियासी गलियारों में फिलहाल पायलट ही पायलट सुनाई दे रहा है.

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