बिहार में विधान परिषद चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है और उनके पक्ष में प्रचार करने की बात कही है.
अनंत सिंह के इस रुख ने जदयू नेतृत्व के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि जिस सीट पर पार्टी ने अपने मौजूदा विधान पार्षद और वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को फिर से मैदान में उतारा है, उसी चुनाव में पार्टी का एक मौजूदा विधायक उनके खिलाफ प्रचार करने की बात कह रहा है.
मामला अब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है. 29 सितंबर को जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और मंत्री श्रवण कुमार ने नीतीश कुमार को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. इसके बाद श्रवण कुमार ने कहा कि मामले की जानकारी पार्टी के बड़े नेताओं को है और आगे का फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा.
नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह का खुला रुख
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू ने तीन बार के विधान पार्षद नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है. नीरज कुमार पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और इस सीट से उनका मुकाबला जन सुराज के अनुज कुमार सिंह समेत अन्य उम्मीदवारों से है.
इसी बीच अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि कौन चुनाव लड़ रहा है और वह अनुज कुमार सिंह के लिए समर्थन करेंगे. रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह ने पटना स्नातक क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में अनुज के पक्ष में प्रचार करने की बात भी कही है.
अनंत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध जदयू के बजाय नीरज कुमार से व्यक्तिगत स्तर पर है. उनके अनुसार, नीरज कुमार ने पहले उनके लिए मदद नहीं की, इसलिए वह भी इस चुनाव में उनका समर्थन नहीं करेंगे. हालांकि, नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों से अलग-अलग आरोप और दावे सामने आते रहे हैं.
नीतीश कुमार तक पहुंचा मामला
अनंत सिंह के सार्वजनिक रुख के बाद यह विवाद सिर्फ दो नेताओं के बीच का मामला नहीं रह गया. जदयू नेतृत्व ने भी घटनाक्रम का संज्ञान लिया है.
29 सितंबर को प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और मंत्री श्रवण कुमार ने नीतीश कुमार से मुलाकात कर पार्टी के भीतर चल रहे विवाद की जानकारी दी. बैठक के बाद श्रवण कुमार ने कहा कि जो स्थिति बनी है, वह नहीं होनी चाहिए थी और मामले से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया गया है. आगे क्या फैसला होगा, यह नेतृत्व तय करेगा.
विधानसभा में जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल पार्टी का ध्यान विधान परिषद चुनाव पर है. जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने भी कहा कि मामले का समय रहते समाधान निकाला जाएगा.
पार्टी के सामने क्या हैं विकल्प?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जदयू नेतृत्व अनंत सिंह के इस खुले विरोध पर क्या कदम उठाता है. फिलहाल पार्टी की ओर से उनके खिलाफ किसी कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में नेतृत्व के सामने संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी समीकरण-दोनों को ध्यान में रखने की चुनौती है.
एक तरफ नीरज कुमार पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं. दूसरी तरफ अनंत सिंह पार्टी के मौजूदा विधायक हैं और उन्होंने सार्वजनिक रूप से एक प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान किया है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व के फैसले का असर केवल इस चुनाव तक सीमित रहने के बजाय संगठन के भीतर आगे की राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है.
हालांकि, भाजपा की ओर से इस विवाद को जदयू का आंतरिक मामला बताया गया है. भाजपा नेता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि जदयू नेतृत्व आपसी समन्वय के जरिए इसका समाधान निकालेगा.
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुराना विवाद
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक मतभेद नया नहीं है. दोनों के बीच पटना-मोकामा क्षेत्र की राजनीति को लेकर लंबे समय से टकराव की चर्चा रही है. हालिया विवाद में अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं, जबकि नीरज कुमार ने इन आरोपों पर सबूत की मांग की है. दोनों नेताओं के दावों को उनके-अपने पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए.
अनंत सिंह की राजनीतिक ताकत का एक महत्वपूर्ण पहलू मोकामा क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत राजनीतिक आधार रहा है. उन्होंने अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग राजनीतिक पहचान के साथ चुनाव लड़ा है. 2015 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी, जबकि 2020 में वे आरजेडी के टिकट पर मोकामा से निर्वाचित हुए थे. बाद में वे जदयू में शामिल हुए और मौजूदा समय में पार्टी के विधायक हैं.
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि की वजह से पटना स्नातक चुनाव में उनका नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर उतरना जदयू के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है.
मोकामा के बाहर कितनी चलेगी अनंत सिंह की अपील?
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव केवल मोकामा विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है. यह निर्वाचन क्षेत्र पटना, नालंदा और नवादा जिलों के मतदाताओं से जुड़ा है. इसलिए अनंत सिंह के व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव का इस व्यापक निर्वाचन क्षेत्र में कितना असर पड़ेगा, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा.
दूसरी ओर, नीरज कुमार के पास जदयू के आधिकारिक संगठन और पार्टी प्रत्याशी होने का आधार है. जन सुराज के अनुज कुमार सिंह को अनंत सिंह का समर्थन मिलने से मुकाबले में एक अलग राजनीतिक समीकरण जरूर बना है. जन सुराज ने पटना स्नातक सीट से अनुज कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.
अब निगाहें जदयू नेतृत्व के अगले फैसले पर
अनंत सिंह के खुले विरोध के बाद फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि जदयू नेतृत्व इस मामले को किस तरह संभालता है. पार्टी के शीर्ष नेताओं ने मामले की जानकारी होने की बात कही है, लेकिन अब तक अनंत सिंह के खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
एक ओर जदयू के लिए अपने आधिकारिक प्रत्याशी के समर्थन में संगठन को एकजुट रखना महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर अनंत सिंह जैसे क्षेत्रीय प्रभाव वाले विधायक के साथ राजनीतिक संबंधों को लेकर भी नेतृत्व को निर्णय लेना होगा.
फिलहाल पार्टी का रुख साफ है कि मामला शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में है और आगे का फैसला वहीं से होगा. ऐसे में पटना स्नातक MLC चुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि जदयू के भीतर उभरे इस राजनीतिक मतभेद के अगले अध्याय पर भी नजरें टिकाए हुए है.











