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सुभासपा में टूट के पीछे हैं अखिलेश, उनके जैसा धोखेबाज कोई नहीं, बता दूंगा उनकी हैसियत- राजभर

15 सितंबर 2022
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सुभासपा में टूट के पीछे हैं अखिलेश, उनके जैसा धोखेबाज कोई नहीं, बता दूंगा उनकी हैसियत- राजभर

Politalks.News/UttarPradesh. समाजवादी पार्टी से अलग क्या हुए कि सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर अकेले से पड़ गए हैं. विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के साथ आये ओमप्रकाश राजभर की पार्टी चुनाव में कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई. इसके बाद से ही अखिलेश और राजभर के रिश्तों में खटास नजर आने लगी. अंत में नतीजा ये निकला कि लोकसभा चुनाव मिली हार के बाद ओमप्रकाश राजभर सपा से अलग हो गए. लेकिन अखिलेश का साथ छोड़ना शायद उनकी पार्टी के कई नेताओं को रास नहीं आया. यही कारण है कि उनकी पार्टी के कई जिलाध्यक्षों समेत बड़े पदाधिकारियों ने पिछले एक महीने में इस्तीफा दे दिया. पार्टी नेताओं के इस्तीफे से … Read more

Politalks.News/UttarPradesh. समाजवादी पार्टी से अलग क्या हुए कि सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर अकेले से पड़ गए हैं. विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के साथ आये ओमप्रकाश राजभर की पार्टी चुनाव में कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई. इसके बाद से ही अखिलेश और राजभर के रिश्तों में खटास नजर आने लगी. अंत में नतीजा ये निकला कि लोकसभा चुनाव मिली हार के बाद ओमप्रकाश राजभर सपा से अलग हो गए. लेकिन अखिलेश का साथ छोड़ना शायद उनकी पार्टी के कई नेताओं को रास नहीं आया. यही कारण है कि उनकी पार्टी के कई जिलाध्यक्षों समेत बड़े पदाधिकारियों ने पिछले एक महीने में इस्तीफा दे दिया. पार्टी नेताओं के इस्तीफे से बोखलाए हुए ओमप्रकाश राजभर ने इसके लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराया. राजभर ने कहा कि, ‘अखिलेश यादव हमारी पार्टी के नेताओं को पैसा, गाड़ी और टिकट का लालच देकर तोड़ रहे हैं. अखिलेश यादव जैसा धोखेबाज कोई नहीं.

पार्टी में चल रही टूट के पीछे है सपा- राजभर
पिछले कुछ दिनों में सुभासपा में भगदड़ और इस्तीफों से ओमप्रकाश राजभर परेशान हो गए हैं. जब से ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोडा है तब से पार्टी के कई नेताओं ने ओमप्रकाश राजभर का साथ छोड़ दिया. लगातार हो रहे इस्तीफों पर अब ओमप्रकाश राजभर ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इसके लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराया. ओमप्रकाश राजभर ने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, ‘हम लंबे समय से पिछड़ों की लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी अब हमें रास्ते से भटकाने के लिए ये नुकसान पर नुक्सान पहुंचाने की कोशिश कर रही है. समाजवादी पार्टी चार बार सरकार में थी, तब अखिलेश यादव ने पिछड़ी जातियों के कितने लोगों को अपना सिपाही बनाया था. मैं सौ फिसदी दावे के साथ कह सकता हूं कि पार्टी में जो टूट चल रही है उसके पीछे सपा ही है.’

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अखिलेश के 9 रत्नों में से 2 रत्न तोड़ने में लगे हैं सुभासपा- राजभर
ओमप्रकाश राजभर ने आगे कहा कि, ‘अखिलेश यादव हमारी पार्टी के नेताओं को पैसा, गाड़ी और टिकट का लालच देकर तोड़ रहे हैं. सुभासपा की बढ़ती हुई लोकप्रियता से सपा परेशान है और बहुत जल्द ही मैं इस बात का सबूत दूंगा. अखिलेश यादव के नौ रत्नों में दो रत्न सुभासपा को तोड़ने में लगे हुए हैं. एक रत्न मऊ का है और एक लखनऊ का रत्न है, जो एक पर्चा नहीं भर पाया.’ ओमप्रकाश राजभर ने आगे कहा कि, ‘जो अपना बूथ नहीं जीता सके, वे हमारा मुकाबला करने आए हैं. वे लोग अपनी-अपनी पार्टी बचा लें. अखिलेश के एक रत्न तो लखनऊ से उदवीर सिंह हैं, जो बाद में भागकर घर चले आए थे. सपा के गुंडों ने ही उनकी पिटाई कर दी थी. तो दूसरा मऊ वाला रत्न राष्ट्रीय प्रवक्ता है राजीव राय, जो विधानसभा में पैसा देकर टिकट मांग रहा था. लेकिन नहीं मिल सका. उसको मेरी पार्टी खत्म करने के लिए लगाया गया है.’

अखिलेश जैसा धोखेबाज कोई नहीं, बताऊंगा उनकी हैसियत- राजभर
ओमप्रकाश राजभर ने आगे कहा कि, ‘अखिलेश यादव अगर अपने रत्न को भेज कर समुद्र में से दो बाल्टी पानी निकाल लें तो क्या कम होगा. हमारे यहां से जो लोग गए हैं वो अखिलेश यादव से मिले हुए हैं. अखिलेश यादव जैसा धोखेबाज कोई नहीं है, मेरे साथ उन्होंने धोखा किया है. चार महीना दौड़ा और केवल 12 सीट दी थी. मैं अखिलेश यादव को उनकी हैसियत बता दूंगा.’ राजभर ने आगे कहा कि, ‘अंगुर जब लोमड़ी नहीं पाती तो कहती है अंगुर खट्टे हैं. जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं ये लड़ाई महात्मा गौतम बुद्ध और ज्योतिबा फुले की है. जब इस देश में वर्ण व्यवस्था बनी तो चार वर्ग आया था. इसमें पिछड़ों को शिक्षा नहीं देने की बात कही गई. ये कौन पिछड़े थे. इन्हीं पिछड़ों की लड़ाई को लेकर हमने अपनी लड़ाई शुरू की थी.’

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सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने आगे कहा कि, ज्योतिबा फुले जब पिछड़ों की लड़ाई लड़ रहे थे तब उनके पिता ने ही उन्हें घर से बाहर कर दिया था. अगर महात्मा ज्योतिबा फुले अगर अपने पिता की बात मानकर लौट गए होते हम आपके सामने बयान नहीं दे रहे होते. बाबा साहेब अंबेडकर का भी विरोध हुआ था, अब उनका बनाया हुआ संविधान पूरा देश पढ़ रहा है. अब कोई बात हो रही है तो संविधान के दायरे में सारे काम हो रहे हैं.

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