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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया अजित पवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. उनकी पार्टी के सात विधायकों ने एक साथ पार्टी का साथ छोड़ सत्ताधारी पार्टी में विलय कर लिया है. हालांकि ये विलय महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि नागालैंड में हुआ, जहां एनसीपी के सभी सात विधायक सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) में शामिल हो गए. इससे मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली एनडीपीपी को 60 सदस्यीय विधानसभा में पूर्ण बहुमत मिल गया. इस विलय के साथ ही सत्ताधारी पार्टी के विधायकों की संख्या 25 से बढ़कर 32 हो गई है. शरद पवार की संयुक्त एनसीपी में टूट के बाद नागालैंड इकाई ने अजित पवार गुट का साथ दिया था.
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एनडीपीपी द्वारा एनसीपी में सेंधमारी करने से अजित पवार काफी नाराज है. एनसीपी का आरोप है कि एनडीपीपी ने उनकी पार्टी में पोचिंग कर गठबंधन धर्म का उल्लंघन किया है. एनडीए की अगली बैठक में अजित पवार इस मुद्दे को उठाएंगे.
विधानसभा अध्यक्ष शारिंगैन लोंगकुमेर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सातों विधायकों ने स्वयं उपस्थित होकर विधानसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंपे, जिनमें NDPP में विलय का उनका निर्णय बताया गया. उन्होंने कहा कि यह विलय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करता है. नगालैंड विधानसभा के सदस्य (दलबदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 2019 के अनुरूप, विधानसभा अध्यक्ष ने विलय को मंजूरी दे दी और विधानसभा सचिवालय को पार्टी संबद्धता रिकॉर्ड को उस अनुसार अद्यतन करने का निर्देश दिया है.
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राज्य सरकार में मंत्री के जी केन्ये ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'आज शाम, 7 NCP विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना विलय पत्र सौंपा, जिसे उन्होंने विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही 14वीं नगालैंड विधानसभा में NDPP के सदस्यों की संख्या 25 से बढ़कर 32 हो गई है.'
बता दें कि इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा में NDPP के 32 और बीजेपी के 12 विधायकों के अलावा, NPP के 5, LJP (रामविलास), नगा पीपुल्स फ्रंट और RPI (आठवले) के दो-दो सदस्य, जद(यू) का एक और चार निर्दलीय विधायक हैं. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में NDPP और उसकी सहयोगी बीजेपी के बाद NCP राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने 12 सीट जीती थी.