राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया राघव चड्ढा का पद से हटाया जाना, अब चड्ढा के अगले कदम पर टिकी सियासी नजर – चुप्पी, संघर्ष या कोई नया सियासी रास्ता
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में पार्टी के युवा सांसद राघव चड्ढा को सदन के उप नेता (डिप्टी लीडर) पद से हटाने पर सियासत गरमा गयी है. हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता खुलकर चड्ढा के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा के बाद यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी आम नेता के पक्ष में बयान दे रहे हैं. राजभर ने न केवल चड्ढा का समर्थन किया, बल्कि आम आदमी पार्टी पर हमला भी बोला. उन्होंने कहा, ‘जब राघव चड्ढा सदन में अपनी मर्जी की बात करने लगे, तो केजरीवाल को बुरा लगने लगा है.’
मामले में ओमप्रकाश राजभर ने आप पर तीखा हमला करते हुए कहा, ‘एक समय था जब अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा पर पूरा विश्वास किया. उन्हें राज्यसभा भेजा और सदन में उपनेता (डिप्टी लीडर) का पद भी दिया. जब राघव चड्ढा सदन में अपनी मर्जी से बात रखने लगे तो पार्टी को यह बुरा लगने लगा. यह आम आदमी पार्टी के अंदर की असली तस्वीर दिखाता है.’
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उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसी सांसद को उपनेता बनाने का मतलब क्या यह नहीं है कि वह अपनी समझ और विवेक से काम करे?
इससे पहले एक कार्यक्रम के दौरान यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से भी राघव चड्ढा की तारीफ की. उन्होंने उन्हें अच्छा वक्ता बताया. शर्मा ने कहा कि राघव चड्ढा ने संसद में कुछ अच्छे मुद्दे उठाए थे लेकिन आम आदमी पार्टी को यह पसंद नहीं आया. उनकी लोकप्रियता आप नेताओं को नहीं पसंद आया.
क्या है पूरा मामला
राघव चड्ढा को 2023 में डिप्टी लीडर बनाया गया था. वे पार्टी के चेहरे के रूप में सदन में सक्रिय रहते थे. हाल के दिनों में पार्टी की कुछ बड़े मुद्दों पर चुप्पी और पार्टी लाइन से अलग रुख को लेकर अंदरूनी नाराजगी बढ़ गई थी. पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि चड्ढा कुछ मुद्दों पर बीजेपी/एनडीए के खिलाफ सख्ती से नहीं बोल रहे थे. वहीं राघव चड्ढा के समर्थक इसे पार्टी के अंदर स्वतंत्र सोच को दबाने की कोशिश बता रहे हैं. चड्ढा की जगह पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को सदन में नया डिप्टी लीडर बनाया गया है.
पार्टी की ओर से राघव चड्ढा को सदन में पार्टी की ओर से बोलने का समय न देने की भी मांग की गई. यह फैसला पार्टी के अंदरूनी कलह को लेकर चर्चा का विषय बन गया है. अब इस मुद्दे पर पार्टी में ही वार/पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया है.
पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया. वीडियो में उन्होंने अपने संसद में दिए गए भाषणों के अंश दिखाते हुए लिखा, ‘खामोश कराया गया हूं, हारा नहीं हूं.. ‘आम आदमी’ को मेरा संदेश.’ इस संदेश से साफ है कि वे खुद को पार्टी के अंदर दबाव का शिकार मान रहे हैं.राघव चड्ढा को पद से हटाने का फैसला अब सिर्फ एक आंतरिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है. बीजेपी नेताओं का समर्थन इस मुद्दे को और राजनीतिक रंग दे रहा है. अब नजर इस बात पर है कि चड्ढा का अगला कदम क्या होगा – चुप्पी, संघर्ष या कोई नया सियासी रास्ता, देखने वाली बात होगी.










