‘टाइगर नहीं, खदान-रिसॉर्ट्स का कारोबार बचा रही सरकार’- SCTH पर जूली का बड़ा हमला

Sariska Tiger Reserve। Rajasthan Wild life : कांग्रेस ने राजस्थान सरकार पर सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (SCTH) के साथ छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है. इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि सरिस्का के मूल संरक्षित क्षेत्र को कमजोर करने का कोई भी प्रयास न केवल पर्यावरण विरोधी है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के नाम पर चल रहे सरकारी दावों की पोल भी खोलता है. टीकाराम जूली ने इसे खदानों और रिसॉर्ट्स संचालकों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार सुनियोजित तरीके से CTH क्षेत्र को बफर जोन में बदलने की साजिश कर रही है, ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंद की गई 104 खदानों और लगभग 100 रिसॉर्ट्स को दुबारा चालू किया जा सके. उन्होंने आरोप लगाया कि बाघों और जैव विविधता की सुरक्षा को दरकिनार यह पूरा खेल कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खेला जा रहा है.

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टीकाराम जूली ने कहा आज तक किसी क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट को नहीं बदला गया है. उन्होंने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सरिस्का में बाघ संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए. बाघ विशेषज्ञों, वन्यजीव प्रेमियों ने मिलकर CTH बनाया था, लेकिन आज यहां कमेटी में माइनिंग के लोग हैं, माइनिंग के लोग तय करेंगे कि CTH कहां बनेगा. टीकाराम जूली ने क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट से छेड़छाड़ को बहुत बड़ा घोटाला करार दिया है. जूली ने बाघों के बढ़ते विचरण क्षेत्र को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की रिपोर्ट संख्या 09/2024, दिनांक 22 जुलाई 2024 में भी सरिस्का बाघ परियोजना के CTH के युक्तिकरण का उल्लेख है. उस समय जहां बाघों की संख्या लगभग 40 थी, वहीं अब यह बढ़कर 52 हो चुकी है. ऐसे में बाघों के विस्तार और प्रजनन को देखते हुए CTH को और मजबूत किया जाना चाहिए, न कि उसे सीमित करने की कोशिश की जानी चाहिए.

टीकाराम जूली ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाघों की नियमित आवाजाही है और जहां शावकों का जन्म हुआ है, उन्हें अनिवार्य रूप से CTH में शामिल किया जाना चाहिए. इसके विपरीत सरकार इन क्षेत्रों को CTH से बाहर करने की दिशा में काम कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है. जूली ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव के संबंध में कोई प्रारूप अधिसूचना ( Draft Notification) जारी नहीं किया और न ही आम जनता, पर्यावरण विशेषज्ञों एवं संबंधित हितधारकों से सुझाव या आपत्तियां आमंत्रित की है. यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के अभाव और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी को दर्शाती है.

टीकाराम जूली ने सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India ) के 8 सितंबर 2025 के निर्णय की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जाए. साथ ही, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 38-V के प्रावधानों के अनुरूप पूर्ण पारदर्शिता के साथ CTH की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाए, ताकि सरिस्का के बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा सुनिश्चित हो सके. टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी इस जनहित के मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक जोरदार संघर्ष करेगी.