झूठे मुकदमे लगाकर आजम को किनारे करने की कोशिश भाजपा को पड़ेगी भारी- अखिलेश की चेतावनी

आजम को मिला अखिलेश का साथ
30 Oct 2022
Politalks.News/UttarPradesh. समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता एवं उत्तरप्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक आजम खान की मुश्किलें हैं की ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. 3 साल पुराने हेट स्पीच केस में अपनी विधायकी खो चुके आजम खान के सियासी सफर की अगर बात की जाए तो ये पहली बार होगा जब आजम विधानसभा और संसद के दोनों सदनों से बाहर नजर आएंगे. आजम खान को 3 साल की सजा भी हो चुकी है और उसके साथ ही विधायकी भी जा चुकी है, इसी बीच अब उनके खिलाफ 2007 का एक और मामला सामने आया है जिसमें वे बसपा सुप्रीमो पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन इन सभी मुसीबतों के बीच आजम खान को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का साथ मिला है. अपने पिता मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पहली बार अखिलेश यादव का बयान सामने आया है. अखिलेश ने कहा कि, 'आजम खां भाजपा की नफरती व साम्प्रदायिक राजनीति का विरोध करते थे, इसलिए वह भाजपा सरकार की आंखों में खटकने लगे.' https://youtu.be/j3HXmQKSb98 आपको बता दें कि बीते गुरूवार को रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने हेट स्पीच मामले में आजम खान को दोषी करार दिया था. जिसके तहत आजम को तीन साल की कैद और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. सजा की आधिकारिक कॉपी मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने रामपुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया. 3 की सजा और विधायकी जाने के बाद भी आजम खान की मुश्किलें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. 2007 में सपा नेता मोहम्मद आजम खां के खिलाफ टांडा थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया गया था. जिसमें आरोप था कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में स्वार टांडा में हुई जनसभा के दौरान बसपा सुप्रीमों मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है. यह केस एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है. जिसमें शनिवार को आजम खां के उस बयान की सीडी चलवाकर आडियो सुनी गई. अब इस केस की सुनवाई नौ नवंबर को होगी. वहीं मुसीबतों में घिरे आज़म खान को अखिलेश यादव का साथ मिला है. यह भी पढ़े: ‘तुरंत गिरफ्तार करो अमित शाह को, विधायकों की खरीद-फरोख्त करने वाले BJP के दलाल ने लिए ये नाम’ नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पहली बार अखिलेश यादव का कोई राजनीतिक बयान सामने आया है. आजम खान नेता जी के बेहद करीबी थे. ऐसे में अखिलेश यादव आजम के मुसीबत के वक़्त में उनकी आवाज बनकर खड़े हो गए हैं. शनिवार को अखिलेश यादव ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि, 'विधानसभा में उनके अकाट्य तर्कों और तीखे बयानों से भाजपा नेता असहज रहते थे. इसलिए उनके खिलाफ षडयंत्र के बीज बोए जाने लगे हैं. आजम खां भाजपा की नफरती व साम्प्रदायिक राजनीति का हमेश विरोध करते थे, इसलिए वह भाजपा सरकार की आंखों में खटकने लगे.' रामपुर का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि, 'भाजपा को चिढ़ है कि रामपुर में मोहम्मद आजम खां ने एक उच्चस्तरीय शैक्षिक संस्थान मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय बना दिया जिससे इस क्षेत्र के नोजवानों को आगे बढ़ने का मौका मिलना तय था. इस बड़े काम की प्रशंसा के बजाय भाजपा सरकार विश्वविद्यालय को ही मटियामेट करने पर तुल गई.' आजम खान पर लगे मुकदमों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि, 'आजम खान पर ना जाने कितने झूठे मुकदमे लगा दिए हैं. भाजपा मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने में लगी है. लेकिन राजनीति में उनको किनारे करने की कोशिश भाजपा को भारी पड़ेगी. भाजपा सरकार को याद रखना चाहिए कि राजनीति में विद्वेष की भावना का कोई स्थान नहीं है. आजम खां 10 बार विधायक, तीन बार सांसद, राज्य सरकार में कई बार मंत्री, नेता विपक्ष भी रहे हैं. भाजपा ने उनको राजनीति में किनारे करने की जो साजिश की है, वह उन पर ही भारी पड़ेगी.' यह भी पढ़े: CMO द्वारा पत्रकारों को मिठाई के डिब्बे में ‘कैश गिफ्ट’ मामले में कांग्रेस ने निशाने पर आई बोम्मई सरकार कुम्भ मेले का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि, 'जब प्रदेश में कुम्भ का महापर्व आया तब समाजवादी सरकार में बतौर मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कुम्भ की तैयारियों पर निगाह रखी और लोगों की सुविधाओं का विस्तार किया. इसकी साधु संतों ने भी प्रशंसा की. इस पर हावर्ड विश्वविद्यालय ने विशेष रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें समाजवादी सरकार व आजम खां की प्रशंसा थी और उन्हें अपने हावर्ड विश्वविद्यालय में इस सम्बंध में प्रस्तुति के लिए भी आमंत्रित किया था.'