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दिल्ली की गांधी नगर सीट: कांग्रेस के गढ़ में ‘कमल’ खिलाएंगे लवली!

05 जनवरी 2025
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दिल्ली की गांधी नगर सीट: कांग्रेस के गढ़ में ‘कमल’ खिलाएंगे लवली!

दिल्ली की गांधी नगर विधानसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. 1998 से 2013 तक यहां केवल कांग्रेस की हाथ की धाक रही है. तभी से यह हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गयी थी. खास बात ये भी है कि इस डेढ़ दशक में कांग्रेस के लिए केवल अरविंदर सिंह लवली ने गांधी नगर को पार्टी का अभेद किला बनाया था. उसके बाद 2015 में आम आदमी पार्टी के अनिल कुमार वाजपेयी और 2020 के विस चुनाव में बीजेपी की ओर से वाजपेयी ने ही इसे कांग्रेस से छीन लिया. अबकी बार बीजेपी ने गांधी नगर में कमल खिलाने की जिम्मेदारी चार बार के विधायक रहे अरविंदर … Read more

दिल्ली की गांधी नगर विधानसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. 1998 से 2013 तक यहां केवल कांग्रेस की हाथ की धाक रही है. तभी से यह हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गयी थी. खास बात ये भी है कि इस डेढ़ दशक में कांग्रेस के लिए केवल अरविंदर सिंह लवली ने गांधी नगर को पार्टी का अभेद किला बनाया था. उसके बाद 2015 में आम आदमी पार्टी के अनिल कुमार वाजपेयी और 2020 के विस चुनाव में बीजेपी की ओर से वाजपेयी ने ही इसे कांग्रेस से छीन लिया. अबकी बार बीजेपी ने गांधी नगर में कमल खिलाने की जिम्मेदारी चार बार के विधायक रहे अरविंदर सिंह लवली को दी है. लवली ने हाल में ‘हाथ’ का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है.

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कांग्रेस का गढ़ था गांधीनगर सीट

साल 1993 में पहली बार गांधी नगर सीट पर चुनाव हुआ और बीजेपी ने इस सीट पर जीत दर्ज की. उस समय दर्शन कुमार बहल ने जीत हासिल की थी. इसके बाद यह सीट कांग्रेस के पास चली गई. कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली 1998 से लेकर 2013 तक जीतते रहे. साल 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी और उसके बाद पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत हासिल हुई.

आप के लिए राह आसान नहीं

आम आदमी पार्टी के लिए यह सीट जीतना आसान नही नजर आ रहा है. आम आदमी पार्टी अपनी लहर के लहर के बावजुद यहां केवल साल 2015 में जीत सकी थी. इस बार बीजेपी ने इस सीट से चार बार के विधायक अरविंदर सिंह लवली को मैदान में उतारा है. वहीं आम आदमी पार्टी ने नए चेहरे नवीन चौधरी (दीपू) पर दांव खेला है. कांग्रेस की उम्मीदवारी अभी बाकी है. अब देखना होगा कि कांग्रेस को चार बार लगातार जीत दिलाने वाले अरविंद सिंह लवली बीजेपी को जीत का लवली स्वाद चखा पाते हैं या फिर नहीं.

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