दिग्गी राजा को राज्य की राजनीति में फिर से उतारने का फैसला सही या दबाव भरा फैसला?

दिग्विजय सिंह हुए कोरोना संक्रमित
13 Jan 2026
Madhyapradesh Politics: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है. वे दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. खबर आ रही है कि आलाकमान अब दिग्गी राजा को तीसरी बार उच्च सदन भेजने के मूड में नहीं है. सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य कमलनाथ को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि दिग्गी राजा को राज्य की राजनीति में एक बार फिर से सक्रिय किए जाने की तैयारी की जा रही है. https://www.youtube.com/watch?v=C52VwA1CWlQ सूत्रों की मानें तो दिग्गी ने खुद पार्टी नेतृत्व को इस संबंध में जानकारी दी है और उच्च सदन जाने से इनकार किया. यह भी बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह ने आगामी 2028 में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते ग्राउंड लेवल पर उतरकर रणनीति बनाने की इच्छा जताई है. उन्होंने पार्टी आलाकमान से कहा है कि वे राज्य में ही पूरा टाइम देना चाहते हैं और विधानसभा चुनाव तक अलग-अलग चरणों में प्रदेश के दौरे करके कांग्रेस की जमीन तैयार करना चाह रहे हैं. यह भी पढ़े: राघव चड्डा की मुहीम लाइ रंग, अब 10 मिनट में डिलीवरी बंद, सरकार ने टाइम लिमिट की शर्त हटाई हालांकि दिग्गी ने अपनी रणनीति के पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं लेकिन माना यह जा रहा है कि इस कदम से वे राज्य की राजनीति में सक्रिय होना चाह रहे हैं. अगर कांग्रेस कमलनाथ को राज्यसभा की राह दिखाती है तो दिग्गी के एक तीर से दो शिकार भी आसानी से हो जाएंगे. 2018 में जब कांग्रेस करीबी मुकाबले में मध्य प्रदेश में जीत दर्ज करने में कामयाब हो गयी थी तो दिग्गी की वरिष्ठता को किनारे रख पार्टी ने कमलनाथ पर भरोसा जताया और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया था. वैसे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच खींचतान के चलते सिंधिया बीजेपी की गोंद में जा बैठे और सरकार गिर गयी. अंदरुनी चर्चा ये भी थी कि इस बात का पता दिग्विजय सिंह को पता था लेकिन उन्होंने अंत तक विवाद को सुलझाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. कमलनाथ दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. अब दिग्गी राजा राज्य की राजनीति में सक्रिय होने की इच्छा जताकर पार्टी पर दबाव भी बना रहे हैं. एमपी की राजनीति पर गौर करें तो कांग्रेस के पास दिग्गी और कमलनाथ के अलावा कोई अन्य वरिष्ठ सदस्य नहीं है जो कांग्रेस को बांध पाने में कामयाब हो सके. जीतू पटवारी पहले से प्रदेशाध्यक्ष हैं लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी सीट तक नहीं बचा पाए थे. ऐसे में दिग्विजय सिंह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं. दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक लगातार दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाल चुके हैं. वैसे भी एमपी एक ऐसा राज्य हैं जहां कांग्रेस का वोट बैंक बीजेपी की टक्कर का है. यहां थोड़ी भी कुर्ताफाड़ राजनीति होगी तो पार्टी को खास नुकसान होगा. ऐसा पिछले विस चुनाव में हो भी चुका है. कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और संगठनात्मक सुधारों को लेकर दिग्विजय पिछले महीने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रजेंटेशन दे चुके हैं. उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में यात्राएं निकालने और सीधे कार्यकर्ताओं से जुड़ने पर जोर दिया. अब देखना ये होगा कि दिग्गी राजा के इस निर्णय को कांग्रेस पार्टी किस तरह से स्वीकार करती है और राज्य की सक्रिय राजनीति में उतरने का कितना फायदा दिग्विजय सिंह को हो पाता है.