PoliTalks News
बड़ी खबर

पश्चिम बंगाल में बढ़ी बागियों की मुश्किल, क्या ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों पर गिरेगी गाज?

16 सितंबर 2026
साझा करें:
पश्चिम बंगाल में बढ़ी बागियों की मुश्किल, क्या ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों पर गिरेगी गाज?

ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत करने वाले विधायकों पर अब कानूनी कार्रवाई की तलवार, विधानसभा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा TMC का अंदरूनी सत्ता संघर्ष

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अंदरूनी संघर्ष अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. पार्टी के भीतर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में सामने आए बागी गुट और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे के बीच जारी टकराव अब विधानसभा की औपचारिक कार्यवाही और अदालत तक पहुंच चुका है.

इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. यह कार्रवाई ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से दायर अयोग्यता याचिका के बाद हुई है. नोटिस पाने वाले विधायकों में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रतिन घोष शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अयोग्यता का मामला

विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई से एक दिन पहले वरिष्ठ TMC विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की है.

चट्टोपाध्याय ने इससे पहले 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रथिन बोस को पत्र लिखकर इन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी. वहीं, विपक्ष के नेता के पद पर ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति का मामला पहले से ही कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है. चट्टोपाध्याय ने स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत ऋतब्रत को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी गई थी.

80 में से 65 विधायकों के समर्थन का दावा

TMC के भीतर विवाद की जड़ विधानसभा में नेतृत्व को लेकर पैदा हुए टकराव में है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने विपक्ष के नेता पद के लिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने उनका समर्थन किया. बागी खेमे का दावा है कि TMC के 80 में से 65 विधायक उसके साथ हैं. इसके बाद इस गुट ने अखरुज्जमान अंसारी को मुख्य सचेतक चुना और समानांतर संगठनात्मक गतिविधियां भी शुरू कीं. इस घटनाक्रम ने पार्टी नेतृत्व और विधानसभा में आधिकारिक स्थिति को लेकर विवाद को और गहरा कर दिया है.

हालांकि, केवल किसी गुट के साथ विधायकों की संख्या जुड़ जाना अपने आप में अयोग्यता का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता. अब महत्वपूर्ण यह होगा कि संबंधित विधायकों के खिलाफ लगाए गए आरोप, उनके जवाब और दल-बदल विरोधी कानून के तहत लागू प्रावधानों पर सक्षम प्राधिकारी क्या निष्कर्ष निकालता है.

बागी विधायकों के सामने अब क्या विकल्प?

विधानसभा सचिवालय का नोटिस सदस्यता खत्म होने का अंतिम फैसला नहीं है. 10 विधायकों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया गया है. इसके बाद उनके जवाब, याचिका में लगाए गए आरोप और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी.

ऋतब्रत गुट ने इस कार्रवाई को सामान्य प्रक्रियात्मक कदम बताया है. उसके प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा है कि स्पीकर ने केवल जवाब मांगा है और फिलहाल इससे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता. यानी फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि इन विधायकों की सदस्यता जाएगी या नहीं, बल्कि यह है कि उनके खिलाफ लगाए गए दल-बदल के आरोपों पर आगे की कानूनी और विधानसभा प्रक्रिया किस दिशा में जाती है.

संसद तक पहुंच चुका है TMC का संघर्ष

TMC का यह अंदरूनी विवाद केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है. बागी खेमे से जुड़े 20 लोकसभा सांसदों के TMC छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का मामला भी अयोग्यता की मांग के साथ लोकसभा सचिवालय तक पहुंच चुका है. इन सांसदों के खिलाफ भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है. इस तरह पार्टी के भीतर चल रहा संघर्ष अब विधानसभा, लोकसभा, अदालत और चुनाव आयोग—चार अलग-अलग मंचों पर दिखाई दे रहा है.

TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी घमासान

इसी बीच TMC के नाम और उसके 'जोड़ा फूल' चुनाव चिन्ह को लेकर भी दोनों गुट चुनाव आयोग के सामने आमने-सामने हैं. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे हैं. आयोग के फैसले का इंतजार है. खास बात यह है कि अक्टूबर में होने वाले उपचुनावों से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर यह विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है. दोनों गुट खुद को वास्तविक TMC बताते हुए संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश कर रहे हैं.

अब आगे क्या?

ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को जारी नोटिस ने TMC के अंदर चल रहे सत्ता संघर्ष को अब औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचा दिया है. लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन विधायकों की विधायकी निश्चित रूप से जाएगी. अब सबकी नजरें तीन जगहों पर रहेंगी—विधानसभा सचिवालय में विधायकों के जवाब, अदालतों में चल रही सुनवाई और चुनाव आयोग के सामने TMC के नाम व चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही लड़ाई.

आने वाले दिनों में इन तीनों मोर्चों पर होने वाले फैसले यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि पश्चिम बंगाल में TMC का यह अंदरूनी संघर्ष केवल संगठनात्मक विवाद बनकर रह जाता है या पार्टी के राजनीतिक ढांचे में बड़ा बदलाव सामने आता है.

PoliTalks News - Authoritative News Portal