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पहली बार संसद में गांधी परिवार के तीन सदस्य, क्या ‘कमल’ को दबा पाएगा ‘हाथ’?

28 नवंबर 2024
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पहली बार संसद में गांधी परिवार के तीन सदस्य, क्या ‘कमल’ को दबा पाएगा ‘हाथ’?

वायनाड से एकतरफा जीत हासिल करने के बाद प्रियंका गांधी को जीत का सर्टिफिकेट मिल गया है. गुरुवार को उन्होंने लोकसभा में सदस्यता की शपथ ग्रहण की. यह पहली बार होगा कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े गांधी परिवार के 3 सदस्य एक साथ संसद के सदस्य होंगे. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा में विपक्षी खेमे में हैं, जबकि सोनिया गांधी पहले से ही राज्यसभा में विराजमान है. वे राजस्थान से उच्च सदन की सदस्या हैं. राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं. चूंकि भाई बहिन की पॉपुलर जोड़ी अब सदन में एक साथ पहुंच गयी है. ऐसे में बीजेपी और खासतौर पर पीएम नरेंद मोदी की आवाज को दबाना विपक्ष … Read more

वायनाड से एकतरफा जीत हासिल करने के बाद प्रियंका गांधी को जीत का सर्टिफिकेट मिल गया है. गुरुवार को उन्होंने लोकसभा में सदस्यता की शपथ ग्रहण की. यह पहली बार होगा कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े गांधी परिवार के 3 सदस्य एक साथ संसद के सदस्य होंगे. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा में विपक्षी खेमे में हैं, जबकि सोनिया गांधी पहले से ही राज्यसभा में विराजमान है. वे राजस्थान से उच्च सदन की सदस्या हैं. राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं. चूंकि भाई बहिन की पॉपुलर जोड़ी अब सदन में एक साथ पहुंच गयी है. ऐसे में बीजेपी और खासतौर पर पीएम नरेंद मोदी की आवाज को दबाना विपक्ष के लिए थोड़ा सा आसान हो गया है.

केरल के वायनाड लोकसभा उपचुनाव में प्रियंका गांधी की जीत के बाद लोकसभा में दोबारा कांग्रेस के 99 सांसद हो गए हैं. वायनाड सीट राहुल गांधी ने छोड़ी थी, जबकि नांदेड़ सीट कांग्रेस सांसद बसंतराव चव्हाण के निधन के चलते खाली हुई थी. इन पर हाल ही में उपचुनाव हुए हैं और दोनों ही सीटें कांग्रेस के पास वापस आ गई हैं. 18वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र की शुरूआत पहले से ही हंगामेदार रही है. बुधवार को विपक्षी सांसदों के हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही केवल 5 मिनट चल पायी और आगे स्थगित हो गई. राहुल गांधी ने अडाणी पर अमेरिका में 2 हजार करोड़ की रिश्वत देने का आरोप का मुद्दा और विपक्ष ने यूपी के संभल में हिंसा का मुद्दा उठाया और हंगामा शुरू हो गया. अब यह हंगामा प्रियंका के नेतृत्व में कहीं ज्यादा हंगामेदार होने की पूरी पूरी संभावना जताई जा रही है.

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इससे पहले प्रियंका गांधी वाड्रा कभी भी सक्रिय राजनीति में नहीं रही. उन्होंने पहली बार कोई चुनाव लड़ा है. हालांकि पर्दे के पीछे से कांग्रेस को नियंत्रित करने का कार्य प्रियंका ने लंबे अर्से तक बखूबी संभाला है. प्रियंका कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव भी हैं. मल्लिकार्जुन खड़गे के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले तक राहुल-सोनिया की अनुपस्थिति में पार्टी के सभी महत्वपूर्ण निर्णय प्रियंका द्वारा ही लिए जाते रहे हैं.

प्रियंका को आगे कर खेल सकती है कांग्रेस

लोकसभा हो या राज्य सभा, बीजेपी ने महिला राजनीति को सदन में बखूबी खेलने का काम किया है. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हो या स्मृति ईरानी, महिलाओं को लेकर बीजेपी ने विपक्ष को जमकर घेरा है. प्रियंका के तीखे तेवरों से सभी भली भांति परिचित हैं. अब प्रियंका को आगे कर कांग्रेस भी बीजेपी पर तीखा धावा बोल सकती है. प्रियंका की छवि ऐसी है कि उनके सामने से बोल पाना बड़ा कठिन साबित होगा.

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यहां प्रियंका की सदन में उपस्थिति न केवल विपक्ष को जुबानी मजबूती देगी, महिला सांसदों में कांग्रेस की पैठ अधिक मजबूत होगी. यहां प्रियंका के नेतृत्व में सदन में ही इंडिया गठबंधन की अटूट मजबूती देखने को मिल सकती है. इतना ही नहीं, बीजेपी की महिला सांसदों द्वारा दागे गए सवाल और लगाए गए आक्षेप पर बीजेपी को अब मुंह तोड़ पलटवार भी मिलने वाला है. अब देखना होगा कि राहुल-प्रियंका की ये जोड़ी लोकसभा में कांग्रेस की आवाज को कितना बुलंद कर पाती है.

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