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बिहार की सियासी बिसात पर तेजस्वी का ‘BB’ दांव, क्या लिख पाएगा नई गाथा?

22 अगस्त 2025
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बिहार की सियासी बिसात पर तेजस्वी का ‘BB’ दांव, क्या लिख पाएगा नई गाथा?

बिहार विधानसभा चुनाव-2025 की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव एक नया सियासी मास्टर स्ट्रोक ‘BB’ खेलने की तैयारी में हैं. BB का मतलब है स्वर्ण समुदाय, जिसमें खासतौर पर ब्रह्मामण और भूमिहार आते हैं. पार्टी इस बार बड़ी संख्या में ब्रह्ममण और भूमिहार समुदाय से आने वाले प्रतियाशियों को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है. अब तक परंपरागत रूप से मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर निर्भर राजद इस बार रणनीति में नया परिवर्तन करने की सोच रही है जो पार्टी को एक नई सामाजिक पहचान देने का भी प्रयास कहा जा रहा है. दरअसल, बिहार में महागठबंधन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में उमड़ रही … Read more

बिहार विधानसभा चुनाव-2025 की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव एक नया सियासी मास्टर स्ट्रोक ‘BB’ खेलने की तैयारी में हैं. BB का मतलब है स्वर्ण समुदाय, जिसमें खासतौर पर ब्रह्मामण और भूमिहार आते हैं. पार्टी इस बार बड़ी संख्या में ब्रह्ममण और भूमिहार समुदाय से आने वाले प्रतियाशियों को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है. अब तक परंपरागत रूप से मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर निर्भर राजद इस बार रणनीति में नया परिवर्तन करने की सोच रही है जो पार्टी को एक नई सामाजिक पहचान देने का भी प्रयास कहा जा रहा है.

दरअसल, बिहार में महागठबंधन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में उमड़ रही भीड़ और बदलते सामाजिक समीकरणों को देखते हुए राजद ने इस बार अपने टिकट वितरण में सवर्ण चेहरों को प्रमुखता से शामिल करने का फैसला किया है. अनुमान है कि पार्टी अपने कोटे की सीटों में से कम से कम 5-6 भूमिहार और इतनी ही संख्या में ब्राह्मण नेताओं को टिकट दे सकती है. यह कदम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी है क्योंकि सवर्ण हमेशा से भारतीय जनता पार्टी का परंपरागत वोटर रहा है. ऐसे में तेजस्वी यादव की अगुवाई में पार्टी ने इस बार सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है.

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नयी रणनीति पर काम कर रहे तेजस्वी यादव प्राय: कहते हुए सुने भी गए हैं कि राजद सिर्फ ‘MY’ यानी मुस्लिम-यादव की पार्टी नहीं है, बल्कि बाप (BAAP) B का मतलब-बहुजन, A का मतलब अगड़ा, A का मतलब आधी आबादी और P का मतलब POOR यानी गरीब की पार्टी है. हालांकि बिहार में मुस्लिम और यादव को जोड़कर लालू ने एक नया समीकरण बनाया था और सालों तक प्रदेश की सत्ता पर एकछत्र राज किया था. ऐसे में पार्टी के लिए भूमिहार और ब्राह्मण समुदायों को लुभाना आसान नहीं है.

अपनी इस रणनीति ​के क्रियान्वयन के लिए राजद ने कई प्रभावशाली भूमिहार और ब्राह्मण नेताओं से संपर्क साधा है. इनमें कुछ पूर्व नौकरशाह भी शामिल हैं, जिनका अपने क्षेत्रों में अच्छा-खासा प्रभाव है. बिहार की सियासत में हाल के वर्षों में रिटायर्ड नौकरशाहों की भागीदारी बढ़ी है. कई पूर्व IAS और IPS अधिकारी विभिन्न दलों, खासकर प्रशांत किशोर की जन सुराज, बीजेपी और जेडीयू में शामिल हो रहे हैं. ऐसे में राजद भी इस बहती गंगा में हाथ धोना चाह रही है. 2023 में तमिलनाडु कैडर के वरिष्ठ आईपीएस डॉ. करुणा सागर ने हाल में राजद ज्वॉइन की है. सागर भूमिहार जाति से आते हैं. एक पूर्व CRPF डीजी को मुंगेर या लखीसराय से टिकट देने की चर्चा है. कुछ अन्य रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारियों से भी बातचीत चल रही है, जिनका अपने क्षेत्रों में प्रभाव है. हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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जिस तरह से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी ने प्रभावशाली भूमिहार और ब्राह्मण नेताओं को टिकट देने की योजना बनाई है, यह बताता है कि वह इस समुदाय को कितना महत्व देने वाले हैं. माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में ब्राह्मण समुदाय से कुछ नए चेहरों, जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं या स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली नेताओं को मौका मिल सकता है. पार्टी का फोकस ऐसे उम्मीदवारों पर है, जो न केवल अपने समुदाय में प्रभाव रखते हों, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी वोट जुटा सकें. इससे स्थानीय स्तर पर पार्टी की राजनीतिक पैठ भी मजबूत होगी. अब देखना ये होगा कि युवा नेता तेजस्वी यादव की पिता की राजनीति से अलग सोच क्या एनडीए को एक बार फिर करारी टक्कर दे पाती है या फिर नहीं.

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