बेरी सीट पर रघुवीर कादयान की सल्तनत को चुनौती दे पाएंगे मनोहर लाल खट्टर?

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) की घोषणा चुनाव आयोग की तरफ से जल्द की जा सकती है. संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग अक्टूबर और नवंबर के महीने में हरियाणा में विधानसभा चुनाव करवा सकता है. पॉलिटॉक्स न्यूज ने हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर एक विशेष कार्यक्रम शुरु किया है. जिसमें हम आपको रोज एक नए विधानसभा क्षेत्र की ग्राउंड रिर्पोट (Ground Report) से अवगत करवाते है. आज हम आपको हरियाणा की बेरी विधानसभा सीट (Beri Assembly Constituency) के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे.

बेरी विधानसभा क्षेत्र झज्जर जिले के अन्तर्गत आता है, लेकिन बेरी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा क्षेत्र रोहतक लगता है. विधानसभा क्षेत्र पर पिछले काफी समय से कांग्रेस का एक-क्षत्र राज है. कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और भूपेन्द्र हुड्डा के खास सिपहसालार चौधरी रघुवीर सिंह कादयान (Choudhary Raghuveer Singh Kadayan) पिछले चार चुनाव से यहां लगातार अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं.

राजनीतिक इतिहासः
हरियाणा गठन के साथ ही बेरी विधानसभा भी अस्तित्व में आई. बेरी विधानसभा सीट से सर्वप्रथम 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रताप सिंह दौलुता विधायक चुने गए थे. 1968 के चुनाव में पार्टी ने प्रताप सिंह की जगह रण सिंह को प्रत्याशी बनाया और रण सिंह ने प्रताप सिंह को मात दी. साल 1972 में प्रताप सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जीत हासिल की. 1977, 80 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की.

साल 1987 में लोकदल उम्मीदवार के रुप में रघुवीर सिंह कादयान ने जीत हासिल की, लेकिन कादयान जीत के इस सिलसिले को बरकरार नहीं रख पाये और 1991 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश से हार बैठे. 1996 के चुनाव में बाजी वीरेन्द्र ने मारी. साल 2000 को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रघुवीर कादयान को उम्मीदवार बनाया. बेरी की जनता ने इस बार रघुवीर को निराश नहीं किया और रघुवीर बड़े अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब हुए.

साल 2000 में शुरु हुआ रघुवीर कादयान की जीत का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है. साल 2014 के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर होने के बावजूद भी रघुवीर कादयान चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. उन्होंने इंडियन नेशलन लोकदल के चतर सिंह को लगभग 4500 मतों से मात दी थी.

सामाजिक समीकरणः
बेरी विधानसभा सीट रोहतक लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है. बेरी विधानसभा सीट में जाट समाज बहुतायात में है. जाट वोटर्स के कारण ही रघुवीर लगातार चुनाव जीतने में कामयाब हो रहे हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में कादयान को इनेलो के कमजोर होने का भी फायदा मिलेगा. इस चुनाव में रघुवीर कादयान को जाट वोट एकमुश्त मिलने का अनुमान है, जैसा लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से जाट समाज का समर्थन दीपेन्द्र हुड्डा को एकतरफा मिला था.

2019 विधानसभा चुनावः
विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम पार्टियों ने प्रत्याशी चयन की प्रकिया शुरु कर दी है. पार्टियों के वरिष्ठ नेता इलाकों में अपने मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में लग गए है. कांग्रेस के सामने प्रत्याशी चयन में कोई समस्या नहीं है. तंवर के हटने के बाद पार्टी पर पुरा नियंत्रण भूपेन्द्र हुड्डा का होगा इसलिए टिकट एक बार फिर रघुवीर कादयान को मिलना तय है. रघुवीर कादयान, हुड्डा के करीबी है, तो इसलिए भी उनके टिकट पर कोई संशय नहीं है.

बीजेपी की तरफ से बेरी विधानसभा सीट को लेकर दावेदारों की सूची काफी लंबी है. इन दावेदारों में विक्रम सिंह कादयान, प्रदीप अहलावत, शिव कुमार रंगीला प्रमुख दावेदार है. जजपा की तरफ से उपेन्द्र कादयान का टिकट लगभग पक्का है. इनेलो इस बार प्रमोद राठी पर दांव लगाने का मन बना चुकी हैं.

जीत की संभावनाः
रघुवीर कादयान के लिए इस बार का चुनाव पिछले चुनावों की तरह आसान नहीं होने वाला है. हमारे इस तर्क के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश कांग्रेस के अंदर मची भारी गुटबाजी है. कादयान हुड्डा गुट के नेता हैं तो दुसरे गुट के नेता उन्हें चुनाव में कमजोर करने के पुरे प्रयास करेगें. जिसका नुकसान सीधा-सीधा रघुवीर सिंह कादयान को चुनाव में होगा. 2019 में बीजेपी और कांग्रेस के मध्य रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा यह तय है.

मैं मध्य प्रदेश का सुपर सीएम नहीं हूं: दिग्विजय सिंह

Digvijay Singh on Mohan bhagwat

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने इन आरोपों का जोरदार शब्दों में खंडन किया है कि वह मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) में सुपर सीएम के रूप में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमलनाथ (Kamalnath) अपने आप में मजबूत नेता हैं और उन्हें किसी सुपर सीएम की जरूरत नहीं है. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन पर आरोप कि वह गैर जरूरी तरीके से सरकार के काम में रुकावटें पैदा करते रहते हैं. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh)  ने कहा कि मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला है. वे सरकार … Read more

तीन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए भाजपा की मजबूत तैयारी

देश में तीन राज्यों हरियाणा (Haryana), झारखंड (Jharkhand) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) होने वाले हैं. भाजपा की तैयारियां जोरों पर है जबकि विपक्ष लड़ाई से पहले ही हारने की स्थिति में दिख रहा है. चुनाव आयोग ने इन राज्यों में चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं किया है. लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने अपने चुनाव अभियान का पहला चरण करीब-करीब पूरा कर लिया है. विपक्षी पार्टियां अभी सीटों के तालमेल में ही उलझी हुई हैं और किस नेता के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा, यह तय नहीं है.

हरियाणा में भाजपा के चुनाव अभियान के तहत बड़े नेताओं के दौरे शुरू हो चुके हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दो रैलियां कर चुके हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोहतक में विजय संकल्प रैली कर रहे हैं. इस तरह भाजपा का चुनाव अभियान पूरी गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस स्थानीय नेताओं के आपसी मतभेदों को दूर करने में जुटी हुई है. हाल की कांग्रेस ने नेताओं के आपसी विवाद थामने के लिए कुमारी शैलजा को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hooda) को विधायक दल नेता बना दिया है. चुनाव अभियान समिति के प्रमुख भी हुड्डा ही रहेंगे.

इसके बावजूद यह पूरी तरह तय नहीं है कि कांग्रेस के भीतरी मतभेद, विवाद आसानी से हल हो पाएंगे. हरियाणा में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस कभी भी किसी भी मुद्दे पर भाजपा सरकार को न तो घेर पाई है और न ही चुनौती दे पाई है. एक स्थानीय कांग्रेस नेता का कहना है कि इतने सालों से चल रहे झगड़े एकदम से खत्म होना मुश्किल है.

हरियाणा में राजनीतिक रूप से मजबूत चौटाला परिवार (Chautala Family) में भी फूट पड़ी हुई है. इसको देखते हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो अपनी मौजूदगी दिखा पाएगी, इसमें संदेह है. अजय चौटाला (Ajay Chautala) ने अपनी अलग जननायक जनता पार्टी (JJP) बना ली है. उनकी पार्टी का बसपा से तालमेल हो चुका है. उनका दावा है कि इस बार हरियाणा में चारकोणी मुकाबला होगा. भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जेपीपी के बीच टक्कर होगी.

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस अपनी महाजनादेश यात्रा पूरी कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ राज्य के हर क्षेत्र के लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की. दूसरी तरफ महाराष्ट्र का मुख्य विपक्षी गठबंधन कांग्रेस और राकांपा आपसी झगड़ों में उलझा हुआ है. दोनों ही पार्टियों के प्रमुख नेताओं में पार्टी छोड़ने का रुझान बढ़ता जा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद दोनों ही पार्टियों में उत्साह की कमी नजर आ रही है.

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिया है, लेकिन पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं. दोनों ही पार्टियां प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीएस) से तालमेल करना चाहती हैं. लोकसभा चुनाव में वीबीएस के कारण दोनों पार्टियां कम से कम आठ सीटों पर नुकसान उठा चुकी हैं. कांग्रेस के सामने वीबीएस ने शर्त रखी है कि वह राकांपा को गठबंधन से अलग करे. यह शर्त मानना कांग्रेस के लिए मुश्किल है.

महाराष्ट्र में एक हद तक राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MANS) का भी असर है. लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार किया था. विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर मनसे के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस और राकांपा, दोनों पार्टियां अभी राज ठाकरे से गठबंधन के बारे में कोई फैसला नहीं ले पाई है.

झारखंड की राजधानी रांची में 12 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी की रैली का कार्यक्रम तय हो चुका है. विपक्षी खेमे को अब तक कांग्रेस के साथ बैठक का इंतजार है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) के नेता हेमंत सोरेन अपने स्तर पर 26 अगस्त को साहेबगंज से राज्य में बदलाव यात्रा शुरू कर चुके हैं. वह पूरे राज्य का दौरा करने के बाद 19 सितंबर को रांची में बड़ी रैली को संबोधित करेंगे. कांग्रेस अभी तक अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझी हुई है. पार्टी को एकजुट करने के लिए कांग्रेस ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार को हटाकर उनकी जगह रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. लेकिन इसका उलटा असर हो रहा है. कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में जाने की योजना बना रहे हैं.

इस तरह तीनों राज्यों में साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी अभी से काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. एक तरफ तीनों राज्यों में जहां कांग्रेस या अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं और जो बचे हुए हैं वो आपसी खींचतान के चलते एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी लोकसभा में मिले भारी बहुमत और उसके बाद के ताबड़तोड़ लिए गए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (Jammu Kashmir Reorganization) जैसे कई बिलों को लागू करवाने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज है.

प्रदेश में अपराध का बोलबाला, अपराधियों के हौसले हैं बुलन्द

गहलोत सरकार में अपराध का बोलबाला बढ़ता जा रहा है. वहीं अपराधियों के हौसले बुलन्द हैं. जयपुर के खो-नागोरियन में न्यूजपेपर हॉकर की हत्या और अलवर में बढ़ता अपराध का ग्राफ इस बात को साबित करते हैं.

गहलोत-वसुंधरा एक ही थाली के चट्टे-बट्टे: बेनीवाल

लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) का बड़ा बयान- ‘गहलोत को देना चाहिए इस्तीफा, अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) एक ही थाली के चट्टे-बट्टे, 2023 में दोनों को घर बैठा कर किसान का बेटा बनेगा मुख्यमंत्री’

किरोड़ी मीणा ने नैतिकता के आधार पर मांगा गहलोत से इस्तीफा

BJP के राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने प्रदेश में बढ़ती अपराधिक घटनाओं पर राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है.

राजधानी नहीं महफूज़, अखबार के पैसे मांगने पर युवक की निर्मम हत्या, राजनीति शुरू

राजस्थान (Rajasthan) प्रदेश में कानून व्यवस्था (Law & order) की स्थिति दिनोंदिन भयावह होती जा रही है. पिछले एक महीने में ही कई अन्य अपराधों (Crime) के अलावा राजधानी जयपुर (Jaipur) में तीन बार और गंगापुर सिटी में एक साम्प्रदायिक उन्माद की गम्भीर स्थिति बनी. ये हालत तो तब हैं जब गृह विभाग (Home Department) की जिम्मेदारी खुद प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पास है. एक तरफ सरकार (Government) जहां राज्य में अच्छा शासन देने के दावे के साथ राजधानी जयपुर में प्रदेश के आला पुलिस अधिकारियों (Police Officers) के साथ दो दिवसीय संवाद कर रही है तो वहीं को राजधानी के जयपुर के खोह-नागोरियान थाना क्षेत्र … Read more

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को दी चेतावनी

मध्यप्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) के कद्दावर नेता और ग्वालियर महाराज के नाम से मशहूर पूर्व लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अवैध खनन को लेकर कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) पर बोला हमला. सिंधिया ने सरकार को चेतावनी (Warned) देते हुए कहा कि अगर अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका तो वह आगे आने को मजबूर होंगे. उन्होंने रेत के अवैध खनन पर अपनी ही सरकार को घेरा और इस कारोबार में लगे लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. बड़ी खबर: मध्यप्रदेश में भाजपा के सहयोग से ज्योतिरादित्य सिंधिया बन सकते हैं मुख्यमंत्री! बता दें, पूर्व केन्दीय मंत्री और पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने दो दिवसीय बहुप्रतीक्षित ग्वालियर … Read more

पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में कभी भी आ सकती SIT की रिपोर्ट, होगी कार्रवाई: गहलोत

राजस्थान (Rajasthan) की कानून व्यवस्था को लेकर आईजी एवं जिला पुलिस अधीक्षकों की दो दिवसीय कॉफ्रेंस (Confrense) बुधवार को प्रदेश पुलिस मुख्यालय (Police Headquarter) में शुरु हुई. इस कांफ्रेंस में गृहमंत्री का जिम्मा संभाल रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने डीजीपी, आईजी, एसपी सहित गृह सचिव से प्रदेश की कानून व्यवस्था की जानकारी ली. पुलिस मुख्यालय पर आयोजित इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री गहलोत ने बुधवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि आज सभी से जिले वार चर्चा की हैं. कल सभी पुलिस अधिक्षकों से वन टु वन चर्चा की जायेगी. सीएम गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार की मंशा प्रदेश … Read more

गहलोत सरकार अपने ही मंत्रियों पर नहीं कर पा रही है नियंत्रण – राठौड़

प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर निकाय चुनाव प्रबंधन कार्यशाला को संबोधित करते हुए राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान सरकार में गुटबाजी चरम पर है. अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot) सरकार अपने ही मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है. निकाय चुनाव की पूर्व तैयारी को लेकर आयोजित इस चुनाव प्रबंधन कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई एवं चुनाव की रणनीति पर मंथन हुआ.

भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर बुधवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर निकाय चुनाव प्रबंधन कार्यशाला को संबोधित किया. निकाय चुनाव की पूर्व तैयारी को लेकर आयोजित इस चुनाव प्रबंधन कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई एवं चुनाव की रणनीति पर मंथन हुआ. कार्यशाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजेंद्र राठौड़ ने क​हा कि सदस्यता अभियान के बाद प्रदेश में भाजपा परिवार संगठन की दृष्टि से करोडपति हो गया है. आने वाले निकाय चुनाव को भारतीय जनता पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता सिर पर कफन बांधकर एकजुट होकर चुनाव लडेगा.

इस कार्यशाला में प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष अल्का सिंह, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता व विधायक सतीश पूनियां, विधायक अनिता भदेल, वासुदेव देवनानी सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं चुनावी जिला संगठन प्रभारी व बूथ प्रबंधन प्रभारी मौजूद रहे.

कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करें कार्यकर्ता: राठौड़
राठौड ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर भी चर्चा छेड़ते हुए कहा कि प्रदेश से अनुच्छेद 370 हटाये जाने से देश का आम नागरिक खुश है. जनता को खुशी है कि लोकसभा चुनाव में उन्होनें जिस पार्टी को वोट दिया, वो देश के लिए अच्छा काम कर रही है. आगामी निकाय चुनाव में भी प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी को वोट देगी. इसके लिए पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करे. उन्होंने कार्यकर्ताओं से आव्हान किया कि निकाय चुनाव के समय सरकार की विफलताओें को जनता के सामने रखें एवं केंद्र सरकार द्वारा देशहित में किये जा रहे कार्यों को से उन्हें मुखाबित कराएं. राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से मतदाता सूचियों पर भी नजर बनाए रखने को कहा.

गहलोत सरकार पर साधा निशाना
कार्यशाला के बाद राजेन्द्र राठौड़ ने पत्रकारों से वार्ता कर गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान सरकार में गुटबाजी चरम पर है. ‘एक व्यक्ति एक पद’ के नाम पर जो बहस इन दिनों छिड़ी हुई है, उसमें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री खेमा एक दूसरे के ऊपर ताल ठोंक रहे हैं. गहलोत सरकार अपने ही मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है. प्रदेश में अपराधों का ग्राफ दिनों दिन बढ़ रहा है फिर चाहे वो यौन उत्पीडन के मामले हों या दलितों पर हत्याचार. महिला उत्पीड़न के मामले में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. इन सब पर लगाम लगाने के बजाय मुख्यमंत्री एसपी और आईजी से संवाद कर रहे हैं.

हाईकोर्ट के फैसले पर कहा ‘अध्ययन नहीं किया’
पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास और अन्य सुविधाओं पर आये हाईकोर्ट के फैसले पर राठौड ने गहलोत सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस राजस्थान के महत्वपूर्ण व्यक्तियों में पूर्व मुख्यमंत्री इस तरह की सुविधा लेते रहे है. कांग्रेस सरकार के समय में बरकतुल्लाह खान साहब की पत्नी उशी खान सहित जगन्नाथ पहाड़िया को भी विशेष रूप से मकान आवंटन हुए. अन्य सुविधाएं बढ़ाने का काम भी गहलोत सरकार ने अपने पहले कार्यकाल से शुरू कर दिया था.  वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सरकारी आवास को खाली करने के पत्रकारों के सवाल पर राठौड ने कहा, ‘हाईकोर्ट के निर्णय का अध्ययन अभी तक मैंने नहीं किया है. फैसले को पूरी तरह पढ़ने के बाद सारी बात सामने आ पायेगी. न्यायालय के निर्णय की पालना हर एक व्यक्ति करता है. हम भी करते है.’