राजस्थान: कांग्रेस का पूरा फोकस अब दूसरे चरण की सीटों पर

PoliTalks news

राजस्थान में लोकसभा चुनाव के पहले चरण की सीटों पर मिले फीडबैक के बाद अब कांग्रेस ने पूरा फोकस दूसरे चरण की सीटों के चुनाव पर कर लिया है. इसके तहत कांग्रेस ने अब आक्रामक प्रचार की रणनीति बनाई है. दूसरे चरण की 12 लोकसभा सीटों में कांग्रेस ने कमजोर विधानसभा क्षेत्र में माहौल बनाने की रणनीति अपनाई है और सभी प्रत्याशियों से कमजोर स्थिति वाली विधानसभाओं की बाकायदा लिस्ट भी मंगाई है. उदाहरण के तौर पर सीकर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस चौमूं से बेहद कमजोर है. लिहाजा कल इसकी भरपाई के लिए राहुल गांधी की सभा कराई जा रही है. वहीं सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम एवं पीसीसी … Read more

बांसवाड़ा में बीटीपी के चलते त्रिकोणीय मुकाबला होने से अच्छी वोटिंग

politalks news

राजस्थान में पहले चरण के चुनाव के तहत 13 सीटों के लिए वोटिंग जारी है. दोपहर एक बजे तक तक निर्वाचन विभाग के मतदान प्रतिशत पर नजर डाले तो सबसे ज्यादा 51 फीसदी वोटिंग बाड़मेर लोकसभा सीट पर हुई. उसके बाद बंतदान प्रतिशत बढ़ने से दोनों प्रत्याशियों के धड़कने बढ गई है. शिव, जैसलमेर, पोकरण और बायतु में वोटिंग अच्छी हो रही है. जैसलमेर और शिव में हो रही अच्छी वोटिंग कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है. वहीं बायतु से कैलाश चौधरी विधायक रह चुके हैं. ऐसे में बायतु का बढ़ रहा मतदान प्रतिशत कैलाश चौधरी अपने पक्ष में मानकर चल रहे है. पोकरण में जानकारों की माने तो दोनों … Read more

ग्राउंड रिपोर्ट: ज्योति और हनुमान में से किसे चुनेगी नागौर की जनता?

Politalks News

नागौर के बारे में कहा जाता है कि जिस पर ना करें कोई गौर, वो है नागौर, लेकिन राजस्थान की इस सीट पर इन दिनों सबकी नजर है. कांग्रेस ने यहां से ज्योति मिर्धा को मैदान में उतारा है जबकि बीजेपी ने गठबंधन के तहत यह सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी को दी है. आरएलपी के मुखिया हनुमान बेनीवाल खुद नागौर से ताल ठोक रहे हैं.

आपको बता दें कि हनुमान ने पहले कांग्रेस से हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी तो बीजेपी से राष्ट्रवादी इश्क हो गया. बेनीवाल इधर बीजेपी के साथ हुए और उधर चुनाव आयोग ने आरएलपी से बोतल चुनाव चिन्ह छीन लिया. आयोग ने आरएलपी को चार टायरों की जोड़ी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया है. बेनीवाल इन टायरों पर सवार होकर दिल्ली पहुंचने का दावा कर रहे हैं.

बाबा यानी नाथूराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा और हनुमान बेनीवाल के बीच अदावत पुरानी है. ज्योति मिर्धा लगातार तीसरी बार यहां से चुनाव लड़ रही हैं जबकि बेनीवाल दूसरी बार मैदान में हैं. दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. ज्योति ने हनुमान को कलयुगी भाई और बहरूपिया तक करार दे दिया है जबकि बेनीवाल कह रहे है कि ज्योति पर्यटक प्रत्याशी हैं और वे हार क डर से मानसिक संतुलन खो चुकी हैं.

काबिलेगौर है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बेनीवाल ने निर्दलीय लड़ते हुए डेढ लाख से ज्यादा वोट लेते हुए ज्योति को हराने में अहम भूमिका निभाई थी,  लेकिन इस बार बीजेपी और आरएलपी का गठबंधन ज्योति को फायदा पहुंचाता हुआ दिख रहा है. इलाके की राजनीति के जानकार यह मानते हैं कि बेनीवाल के चुनाव लड़ने से गैर जाट जातियां, खासतौर पर राजपूत ज्योति मिर्धा की ओर रुख कर सकते हैं.

ऐसे में नागौर का चौधरी कौन होगा, इसका फैसला जाट मतदाता करेंगे.  अब देखना रोचक होगा कि जाट हनुमान बेनीवाल के साथ जाते हैं या फिर ज्योति मिर्धा के साथ. फिलहाल दोनों के बीच मुकाबला बराबरी का है. विश्लेषकों के अनुसार नागौर सीट पर मुकाबला कांटे का है. जीत-हार का अंतर 25  से 50 हजार तक रहने की संभावना है.

हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रखी है. दोनों को भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है. ज्योति को महेंद्र चौधरी, चेतन डूडी और रिछपाल मिर्धा की नाराजगी भारी पड़ सकती है तो हनुमान को सीआर चौधरी,  यूनुस खान और गजेंद्र सिंह खींवसर से खतरा है.

नागौर में सीएम अशोक गहलोत के नामांकन सभा में बेनीवाल को लेकर दिए गए बयान की खूब चर्चा हो रही है. गहलोत ने कहा था कि  मैंने हनुमान को खूब समझाया पर वो कहां मानने वाला था. हमारे साथ आता तो मंत्री भी बन सकते थे, लेकिन अब उन्हें जीवनभर पछताना होगा.’  ज्योति मिर्धा के लिए ससुराल पक्ष हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पूरा जोर लगा रखा है.

पूरे नागौर में चर्चा टक्कर होने की हो रही है.  हालांकि दोनों के समर्थक अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं. ऐसे में परिणाम को लेकर कयास ही लगाया जा सकता है. दोनों के लिए मुकाबला करो या मरो जैसा है.  हनुमान के लिए खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि वे विधायक हैं. यदि ज्योति मिर्धा चुनाव हारीं तो उनकी सियासी लौ ही बुझ जाएगी.

वर्तमान राजनीति पर क्या बोले सचिन पायलट-Exclusive

PoliTalks news

पॉलीटॉक्स के पॉलिटिकल एडिटर दिनेश डांगी ने राजस्थान के डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ सचिन पायलट से खास बातचीत की. अपने खास इंटरव्यू में सचिन ने बताया कि बीजेपी की हालत प्रदेश और देशभर में बहुत ज्यादा खराब है. राजस्थान में मिशन 25 की सफलता पर भी उन्होंने पूरी तरह भरोसा जताते हुए केन्द्र में कांग्रेस सरकार बनने का विश्वास जताया. उन्होंने बीजेपी सरकार को घमंडी सरकार भी बताया. सेना पर हो रही राजनीति और चुनाव आयोग की नेताओं पर की गई कार्रवाई पर भी उन्होंने खुलकर बात की.

आइए जानते हैं सचिन पायलट से हुई बातचीत के संपादित अंश-

1. लोकसभा चुनाव में किस तरह का कांग्रेस को रेसपोंस मिल रहा है?
बदलाव की लहर प्रदेश और पूरे देश में है. हाल ही में तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनी है. दक्षिणी राज्यों में बीजेपी का खाता भी नहीं खुलेगा और उत्तर भारतीय राज्यों में भाजपा का आंकडा कम होगा. जाहिर सी बात है कि कांग्रेस को लाभ मिलेगा. राहुल गांधीजी ने पार्टी को जो नेतृत्व दिया है, उसका राजनीतिक फायदा कांग्रेस को जरूर मिलेगा.

2. मिशन 25 के तहत कुछ कमजोर उम्मीदवारों को उतारा गया है, ऐसा लोगों का कहना है?
कमजोर तो बीजेपी के सेनापति हैं. टिकट काटने पड़ गए. बाहर के प्रत्याशियों को लेकर आए हैं. कई सीटों पर विरोधाभास की स्थिति है जैसे दौसा लोकसभा सीट. इस सीट पर बीजेपी के नेताओं के बीच ही इतना झगड़ा हो चुका है कि चुनाव बन ही नहीं पाएगा. बीजेपी अभी भी घमंड एवं अहंकार में है और उसे इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा.

3. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद क्या देश का माहौल बदला है?
बालाकोट की स्ट्राइक किसी पार्टी ने तो की नहीं थी, वह तो भारतीय सेना ने की थी. इनपर हमें फखर है. सैनिकों की शहादत को हम सलाम करते हैं. सेना देश की होती है किसी दल या पार्टी की नहीं होती. मुझे लगता है कि इस तरह का राजनीतिक फायदा जो दल लेने की कोशिश करते हैं उनको जमीन, किसान, नौजवान, महंगाई, भष्टाचार, अर्थव्यवस्था और रोजगार के सवालों का जवाब देना चाहिए.

4. इस बार चुनाव आयोग ने चार नेताओं पर प्रचार करने से प्रतिबंध लगाया है, क्या आयोग अच्छा काम कर रहा है?
क्या अच्छा काम है. यह कार्रवाई बहुत ज्यादा देरी से की गई है. अगर सच में नेताओं को दंडित करना था तो ठीक से करते जो एक उदाहरण बनता. एक या दो दिन किसी को प्रतिबंधित कर भी दिया जाए तो मुझे नहीं लगता कि जो नेता बदजुबानी की बाते करते हैं या जो राजनीति में अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करते हैं, इससे कोई संदेश जाने वाला है.

आज नामांकन दाखिल करेंगे भाजपा-कांग्रेस के कई दिग्गज

PoliTalks news

दो दिन की छुट्टी के बाद सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी नामांकन दाखिल कराने की होड़ में लग गए हैं. राजस्थान में भी दिग्गजों के नामांकन दाखिल कराने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. इस सूची में जयपुर शहर से बीजेपी प्रत्याशी रामचरण बोहरा रामचरण बोहरा और कृष्णा पूनिया सहित कई दिग्गज शामिल हैं जो आज अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे. सबसे पहले बात करें बोहरा की तो नामांकन से पहले उनके समर्थन में बीजेपी मुख्यालय में एक जनसभा रखी गई है जिसे पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सहित अन्य बीजेपी नेताओं ने सभा को संबोधित किया. यहां राजे ने कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा. सभा के बाद बोहरा अपना नामांकन … Read more

घर वापसी की तैयारी में कर्नल सोनाराम, आलाकमान से हरी झंडी का इंतजार

Politalks News

बाड़मेर से टिकट कटने पर नाराज कर्नल सोनाराम ने घर वापसी की तैयारी कर ली है. हाथ का दामन थामने के लिए कर्नल ने दो दिन से दिल्ली में डेरा डाल रखा है. उन्होंने सीधे आलाकमान के जरिए कांग्रेस में वापसी की कवायद की है. हालांकि सीएम अशोक गहलोत उनके पक्ष के नहीं माने जाते हैं, लेकिन जोधपुर से वैभव गहलोत के चुनाव लड़ने के चलते वे पुरानी बातें भूलने को तैयार हो गए हैं. आपको बता दें कि जोधपुर लोकसभा सीट पर जाटों के अच्छी संख्या में वोट हैं. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का एलान होने से पहले जब अशोक गहलोत जोधपुर दौरे पर थे … Read more

बीकानेर में अर्जुन मेघवाल की तीसरी जीत में अपने ही लगा रहे अडंगा

PoliTalks news

चुनाव सिर पर हैं तो राजनीतिक पार्टियों में आपसी फूट और आतंरिक नाराजगी कोई नई बात नहीं है. यही वजह है कि लोकसभा सीटों पर चुनावों में उतरे प्रत्याशियों को प्रतिद्वंद्वी से कम और अपने ही लोगों से अधिक खतरा है. बीकानेर सीट पर ही कुछ यही हाल है जहां बीजेपी के प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल मछली की आंख पर सटीक निशाना लगाएं, उससे पहले खुद ही अपनों का निशाना बनते जा रहे हैं. यहां से दो बार के सांसद अर्जुनराम मेघवाल लाख विरोध के बावजूद फिर से तीसरी बार मैदान में हैं. वह एक दलित नेता हैं और बीजेपी ने फिर से उन पर दांव खेला है. वहीं तीन बार … Read more

राजस्थान: कांग्रेस नेतृत्व को 8 से 10 सीटों पर जीत की उम्मीद

politalks news

राजस्थान में लोकसभा चुनाव के रण में प्रचार परवान पर है. चिलचिलाती धूप में उम्मीदवार जीत के लिए पसीना बहा रहे हैं. इस गहमागहमी के बीच सबके मन में एक ही सवाल है कि सूबे में कांग्रेस और बीजेपी की कितनी-कितनी सीटें आ रही हैं. वहीं, मिशन-25 में जुटी कांग्रेस के दिग्गज नेता लगातार हर सीट का लेटेस्ट फीडबैक लेने में लगे हैं. प्रचार के मौजूदा वक्त में अगर संभावित परिणाम की बात करें तो कांग्रेस को 25 में से आठ से दस सीटें ही मिलने की संभावना है.

यह दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि कांग्रेस और उसके आलाकमान को अब तक मिली रिपोर्ट के आधार पर यह सामने आया है. जिसके तहत कांग्रेस पांच सीटों पर जीत तय, दस सीटों पर टक्कर और बाकी बची दस सीटों पर मुकाबले में अभी खुद को बाहर मानकर चल रही है. आइए अब आपको बताते है कि कांग्रेस किन सीटों पर जीत की स्थित में और किन पर कमजोर हालात में है.

पांच सीटों पर जीत लगभग तय:
बात करें कांग्रेस और उसके आलाकमान को फील्ड से मिल रहे फीडबैक की तो राजस्थान में कांग्रेस की सबसे मजबूत स्थिति सीकर लोकसभा सीट पर है. उसके बाद टोंक-सवाईमाधोपुर पर जीत मानी जा रही है. इसके बाद बाड़मेर, जोधपुर और भरतपुर में भी अच्छी जीत का फीडबैक मिला है.

10 सीटों पर आमने-सामने की टक्कर :
वहीं, बात करें प्रदेश की अन्य लोकसभा सीटों की तो झुंझुनूं, अलवर, जयपुर ग्रामीण, बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़, डूंगरपुर-बांसवाड़ा, करौली-धौलपुर, दौसा और उदयपुर सीटों पर मुकाबला रोचक और बराबरी की टक्कर का है. इन सीटों के परिणाम कह सकते है कि 25 हजार से 50 हजार के बीच रहने के पूरे आसार है. यानी जो प्रत्याशी ढंग से प्रचार और मतदाताओं को प्रभावित करने में कामयाब हो जाएगा जीत उतनी ही करीब आती जाएगी.

10 सीटों पर भाजपा मजबूत :
अब बात करें प्रदेश की बाकी बची लोकसभा सीटों की तो कांग्रेस के पसीने छूटे हुए हैं. कह सकते है कि फिलहाल इन सीटों पर मुकाबला एकतरफा बरकरार है. जिसके चलते बारां-झालावाड़, भीलवाड़ा, अजमेर, चूरू, राजसमंद, चितौड़गढ़, कोटा-बूंदी, जयपुर शहर, जालौर-सिरोही और पाली पर भाजपा मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं.

दरअसल, जिन सीटों पर कांग्रेस पहले से कमजोर थी वहां कमजोर प्रत्याशी उतारकर और स्थिति खराब कर ली है. अजमेर और झालावाड़ में पैराशूटर को मौका देने से स्थानीय नेता साथ नहीं रहने से गणित बिगड़ गया. बाकी जगह जातिगत समीकरण और मोदी फैक्टर भारी पड़ रहा है. खैर अब देखना होगा कि कांग्रेस इस फीडबैक के आधार पर जीत के लिए अब क्या रणनीति अपनाती है. अगर कांग्रेस की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अगर आठ से दस सीटें आती है तो यह पहली बार होगा कि राज्य में सरकार होने के बावजूद कोई पार्टी दस के आंकड़े में सिमट जाएगी.

मोदी ने धर्म के नाम पर सिर्फ झूठी बातें की हैं: गहलोत

PoliTalks news

राजस्थान लोकसभा चुनाव की तारीख जिस तरह करीब आती जा रही है, कांग्रेस के चुनावी तेवर धार पकड़ रहे हैं. आज एक ही दिन में कांग्रेस ने जयपुर सहित झुंझूनूं और लूणकरणसर (बीकानेर) में  3 चुनावी सभाओं का आयोजन किया और जमकर विपक्ष पर धावा बोला. राजधानी के सिविल लाइंस इलाके में जयपुर शहर की कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल के समर्थन में हुए एक जनसभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार हिंदुत्व और राष्ट्रप्रेम की बातें करती है. क्या हम हिंदू नहीं हैं या राष्ट्रप्रेम नहीं है. राष्ट्रप्रेमी कौन नहीं है. मोदी ने धर्म के नाम पर … Read more