‘जब राज नहीं होता तो जूते के जोर से काम कराना हमें आता है’- सर्राफ, भाजपा विधायक, पूर्व शिक्षामंत्री

राजस्थान (Rajasthan) के भाजपा विधायक (BJP MLA) और पूर्व शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ (Kalicharan Saraf) ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि, ‘जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है‘. इस पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (PCC) प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा की, ‘सर्राफ ने इस तरह का बयान देकर मर्यादित भाषा का हनन करते हुए उनकी औंछी मानसिकता का उदाहरण दिया है.’ वहीं मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि, ‘कालीचरण सर्राफ का यह बयान अलोकतांत्रिक है’.

दरअसल गुरूवार सुबह पूर्व शिक्षा मंत्री एवं राजधानी जयपुर के मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक कालीचरण सर्राफ जयपुर के करतारपुरा फाटक के पास नाले में हो रहे कटाव, अतिक्रमण सहित अन्य मांगो के लिए धरना दे रहे थे धरना खत्म होने के बाद सर्राफ जब पत्रकारों से रूबरू हुए तो उन्होंने कहा- “जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो जूते के जोर पर काम होते है, हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है” सर्राफ का यह बयान धरना स्थल पर चर्चा का विषय बन गया और इसके बाद शुरू हुआ राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला.

पूर्व शिक्षामंत्री सर्राफ के इस अमर्यादित बयान पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अर्चना शर्मा (Archana Sharma) ने एक प्रेस नोट और एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि, ‘सर्राफ ने धरने के दौरान जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वह उनकी औंछी मानसिकता का एक उदाहरण है.’ आगे उन्होंने कहा कि, ‘जब कालीचरण सर्राफ मंत्री थे तब उन्होंने अपनी कलम का इस्तेमाल भ्रष्टाचार व अपराध को संस्थागत करने के लिये किया था, यही कारण है कि जनता ने उनको नकार दिया. आगे उन्होंने कहा कि राजनीति के लम्बे अनुभव के बावजूद इस तरह के विवादित बयानों से स्पष्ट होता है कि उन्हें जनभावनाओं से कोई सरोकार नहीं है. सुर्खियों में बने रहने के लिये वे किसी भी हद तक जा सकते हैं.’

कालीचरण सर्राफ के द्वारा दिये गये धरने के पर अर्चना शर्मा ने कहा कि सर्राफ ने जिस क्षेत्र में धरना दिया वहॉं उनके मंत्री रहते हुए नाले में बहकर एक युवक की मौत हो गयी थी. तब सर्राफ ने इस पुरे मामले की सुध तक नहीं ली थी. आगे शर्मा ने सर्राफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि सर्राफ जब मंत्री थे उस समय उनके एक समर्थक ने व्यापारी को सरेआम गोली मारी थी जिससे जाहिर होता है सर्राफ भ्रष्टाचार को ही पनपाने के माहिर नहीं हैं अपितु अपराधियों के भी संरक्षक है. कालीचरण सर्राफ द्वारा दिया गया धरना अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिये रचा गया प्रपंच मात्र है.

वहीं भाजपा विधायक सर्राफ के विवादित बयान पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने पलटवार करते हुए कहा- ‘कालीचरण सराफ एक वरिष्ठ नेता हैं, उनका यह बयान अलोकतांत्रिक है, सर्राफ को उनकी पार्टी सीरियस नहीं लेती, भाजपा में उनकी स्वीकार्यता का अभाव है इसलिए सर्राफ की जुबान बार बार फिसलती रहती है.’

आपकों बता दें कि कालीचरण सर्राफ व अर्चना शर्मा दोनों एक ही विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनैतिक ताल ठोकते आये हैं. सर्राफ के सामने अचर्ना शर्मा को पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पडा है. कालीचरण सर्राफ भाजपा के वरिष्ट नेता हैं और मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गये हैं, सर्राफ पूर्व में राजे सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं में से एक माने जाते है.

पायलट ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने आरबीआई फंड को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. मीडिया से बात करते हुए पायलट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से आरबीआई से निकाले गए पैसो का हिसाब मांगा. पायलट ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि इतने पैसो का सरकार क्या करने वाली है.

नगर निकाय चुनाव पर क्या बोले सचिन पायलट

राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने नगर निकाय चुनावो को लेकर कांग्रेस की तैयारियों की समीक्षा की. इस मौके पर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर आगामी स्थानीय नगर निकाय चुनाव-2019 से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक ली.

RCA तो सिर्फ बहाना, कहीं ओर ही है निशाना

राजस्थान क्रिकेट संघ RCA सीपी जोशी CP Joshi रामेश्वर डूडी Rameshwar Dudi वैभव गहलोत Vaibhav Gehlot कांग्रेस की अंदरूनी का एक नया मोर्चा खुल गया है. कहने को तो यह क्रिकेट संबंधी विवाद है, लेकिन इसकी गहराई में देखें तो यह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति मालूम पड़ती है.

राजस्थान क्रिकेट संघ RCA सीपी जोशी CP Joshi रामेश्वर डूडी Rameshwar Dudi वैभव गहलोत Vaibhav Gehlot राजस्थान में कांग्रेस की अंदरूनी का एक नया मोर्चा खुल गया है. कहने को तो यह क्रिकेट संबंधी विवाद है, लेकिन इसकी गहराई में देखें तो यह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति मालूम पड़ती है. राजनीति एक तरफ सीपी जोशी (CP Joshi) हैं, दूसरी तरफ रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi). सीपी जोशी राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) के अध्यक्ष हैं. रामेश्वर डूडी नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बन गए हैं. उधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत भी राजनीति में जमीन तलाश रहे हैं और क्रिकेट संघ की तरफ उनकी निगाहें हैं. इस तरह क्रिकेट की राजनीति में कांग्रेस नेता आपस में भिड़े हुए हैं. इस बीच आरसीए के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी के समर्थकों का दखल भी बना हुआ है, जिससे मामला और भी ज्यादा उलझ गया है. कांग्रेस के नेता कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना की तर्ज पर राजनीति कर रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आरसीए को निलंबित कर रखा है. सीपी जोशी आरसीए के अध्यक्ष हैं और इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष भी हैं. देर-सवेर उन्हें एक पद छोड़ना होगा. इसको देखते हुए डूडी ने नागौर जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बनते हुए क्रिकेट की राजनीति में अपने कदम रख दिए हैं. डूडी के नागौर जिला क्रिकेट संघ (Nagaur District Cricket Association) अध्यक्ष चुने जाने के पीछे आरसीए के सचिव राजेन्द्र सिंह नांदू की भूमिका रही है, जो ललित मोदी के समर्थक हैं. ललित मोदी के आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद नांदू सचिव बने हुए हैं. नांदू की पहल पर नागौर जिला क्रिकेट संघ भंग कर 8 अगस्त को डूडी को अध्यक्ष चुना गया. लेकिन सीपी जोशी इस चुनाव को मान्यता नहीं देते हैं. वहीं डूडी के समर्थक कहते हैं कि जोशी विधानसभा अध्यक्ष बन गए हैं, इसलिए उन्हें आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिए.

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जोशी का कहना है कि नांदू ने जिस तरह से नागौर जिला क्रिकेट संघ के चुनाव कराए वह अवैध है. इसके बाद से ही डूडी जोशी विरोधी कांग्रेसी नेताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं. वह खुद खुलकर सीपी जोशी के खिलाफ बयानबाजी नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके समर्थक जोशी पर आरसीए से हटने का दबाव बनाए हुए हैं. डूडी को नांदू के साथ ही भाजपा नेता और आरसीए के कोषाध्यक्ष पिंकेश पोरवाल का समर्थन भी हासिल है. जोशी के बयान को डूडी ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है. जोशी का कहना है कि नांदू नाम का कोई व्यक्ति आरसीए में सचिव नहीं है. वह नागौर जिला क्रिकेट संघ से निर्वाचित हुए थे. आरसीए ने नागौर जिला क्रिकेट संघ और नांदू दोनों को निलंबित कर दिया है. वहीं, नांदू का कहना है कि जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिश के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद जोशी आरसीए अध्यक्ष नहीं रह सकते हैं. उन्होंने कहा, मैं चुनाव में सचिव निर्वाचित हुआ हूं, जोशी को मुझे हटाने का अधिकार नहीं है.

जोशी 2017 में आरसीए के अध्यक्ष बने थे और कार्यकारिणी की पहली ही बैठक में उन्होंने नांदू को निलंबित कर दिया था. इसके बाद से नांदू और जोशी गुट के बीच विवाद अब तक जारी है. जोशी गुट ने आरसीए को फिर से मान्यता दिलाने के नाम पर ललित मोदी की अध्यक्षता वाले नागौर जिला संघ को भी निलंबित कर दिया था. नागौर में दोनों ही गुटों ने अलग-अलग जिला संघों का गठन किया है. नांदू का कहना है कि नागौर जिला संघ के चुनाव के लिए आरसीए की ओर से पाली जिला संघ के धर्मवीर को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. नागौर जिला संघ के अध्यक्ष शिवशंकर व्यास ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस्तीफा दे दिया था. उनके स्थान पर डूडी को अध्यक्ष बनाया गया है. डूडी स्टार क्लब के अध्यक्ष है और उनका चुनाव पूरी तरह वैध है.

वहीं आरसीए के संयुक्त सचिव और जोशी समर्थक महेन्द्र नाहर का कहना है कि हमें नागौर जिला संघ के चुनाव की जानकारी मीडिया से ही मिली. इस संबंध में नागौर जिला संघ ने हमसे कोई पत्राचार नहीं किया. नांदू जिस जिला संघ का सचिव होने का दावा कर रहे, उसे पहले ही निलंबित किया जा चुका है. चुनाव में आरसीए ने किसी को भी पर्यवेक्षक के रुप में नहीं भेजा. इस तरह नांदू ने डूडी को भी गुमराह किया है. महेन्द्र नाहर सी.पी.जोशी के समर्थक हैं.

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इसी प्रकर खुद रामेश्वर डूडी का कहना है कि, ‘मैं नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के रूप में जिले में क्रिकेट खेल को अधिक लोकप्रिय बनाने और जिले में क्रिकेट खेल एवं खिलाड़ियों की उन्नति के लिए कार्य करूंगा. मेरे नागौर जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष निर्वाचित होने पर बधाई देने वाले सभी शुभचिंतकों का मैं धन्यवाद व्यक्त करता हूं. मैं हमेशा से क्रिकेट प्रेमी रहा हूं और अब क्रिकेट खेल की मुख्य धारा में आकर ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट खेल को बढ़ावा देने के लिए कार्य करूंगा. मैं आरसीए अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी जो कि अत्यंत अनुभवी एवं प्रेरक राजनेता, खेल प्रशासक और मार्गदर्शक हैं . उनके नेतृत्व एवं सानिध्य में क्रिकेट खेल एवं खिलाड़ियों के हित को नई दिशा देने में पूरी तरह सक्रिय एवं समर्पित रहूंगा.’

निशाना-1

इस विवाद के बीच जोधपुर से लोकसभा चुनाव हार चुके वैभव गहलोत भी अब क्रिकेट की राजनीति में आने का मौका तलाश रहे हैं. जोशी उनकी मदद करेंगे. शायद इसी लिए सीपी जोशी के सुझाव पर ही जोधपुर जिला क्रिकेट संघ को भंग कर अंतरिम समिति बना दी गई है. राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया है. अंतरिम समिति के संयोजक राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना बनाए गए हैं, जो जोधपुर के हैं और गहलोत परिवार के काफी निकट माने जाते हैं. राजीव खन्ना को समिति का संयोजक बनाने के पीछे यह गणित मालूम पड़ता है कि वैभव को पहले जोधपुर जिला क्रिकेट संघ में पदाधिकारी बनाया जाएगा. उसके बाद आरसीए में जोशी का कार्यकाल समाप्त होने पर वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) आरसीए के अध्यक्ष बन सकते हैं. लगता है यह गणित डूडी की समझ में आ चुका है, इसलिए उन्होंने भी अपनी रणनीति बदल दी है.

डूडी की अपनी राजनीतिक मजबूरी है. वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद नोखा विधानसभा सीट से पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे. उसके बाद से ही वह हार के कारणों की तलाश कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला, सरकार बनी, फिर भी वह चुनाव क्यों हार गए. राजनीति में बने रहने के लिए वह नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने. जोशी ने उनके निर्वाचन को ही अवैध ठहरा दिया, जिससे जोशी के साथ उनकी नाराजगी भी बढ़ी है. नागौर जिला क्रिकेट संघ उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब ललित मोदी यहां से क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने थे. बाद में वह आरसीए के अध्यक्ष बने और बीसीसीआई में पदाधिकारी और आईपीएल के कमिश्नर बने थे.

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जोशी ने आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद 24 जून 2017 को नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की पहली बैठक में नागौर जिला क्रिकेट संघ को निलंबित कर दिया था. मोदी के खास माने जाने वाले राजेन्द्र नांदू को भी आरसीए के सचिव पद से हटा दिया था. यह कदम आरसीए का निलंबन खत्म करने के लिए उठाया गया था. गौरतलब है कि आरसीए ने निलंबन खत्म करने के लिए बीसीसीआई को पत्र लिखा था. बीसीसीआई ने 20 जून 2017 को जवाब दिया था कि ललित मोदी को पद से हटाने के बाद ही इसे स्वीकार किया जा सकता है.

राजस्थान क्रिकेट राजनीति में नया मोड़ उस समय आया जब नांदू गुट ने 22 सितंबर को आरसीए चुनाव कराने की बाद कही. इसके बाद सीपी जोशी ने मंगलवार 26 अगस्त को आरसीए कार्यकारिणी की बैठक बुलाई. इस बैठक से पहले डूडी अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करने पहुंच गए. तनाव की आशंका के मद्देनजर आरसीए अकादमी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. डूडी ने बैठक में भाग नहीं लिया और कहा कि वह ट्रायल देखने आए हैं. जोशी ने कहा, उनका पहला काम आरसीए से प्रतिबंध हटवाना है. प्रतिबंध हटते ही वह आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ देंगे. उसके बाद नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी. फिलहाल चुनाव कराने की स्थिति नहीं है.

क्रिकेट की राजनीति में वैभव गहलोत के आने की संभावनाओं पर डूडी का कहना है कि आरसीए के विवाद को मिलकर सुलझाया जाएगा. चुनाव की प्रक्रिया जारी रहेगी. अगर वैभव गहलोत आरसीए में आते हैं तो निर्विरोध कार्यकारिणी चुनी जाएगी. उन्होंने कहा कि ललित मोदी का राजस्थान में कोई पट्टा नहीं है. जोशीजी सीनियर लीडर हैं. आरसीए उनके नेतृत्व में काम करेगा. वहीं नांदू का कहना है कि जोशी का कार्यकारिणी की बैठक बुलाना गलत है. लोगों को भ्रमित किया जा रहा है. जोशी अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते. इस तरह सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है. वहीं जोशी का कहना है कि कुछ लोग जो खुद को क्रिकेट प्रेमी बताते हैं, वे नहीं चाहते कि आरसीए से प्रतिबंध हटे. अभी भी ललित मोदी का क्रिकेट से जुड़ाव है. मेरी किसी से व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है. जो लोग नियम विरुद्ध काम करेंगे, उनके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे.

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निशाना-2

गौरतलब है कि नोखा से चुनाव हारने के बाद डूडी नागौर में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं. सूत्रों के अनुसार वह दिसंबर में खींवसर और मंडावा विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनावों में खींवसर से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा भी चल रही है. डूडी को अगर खींवसर से टिकट मिलता है तो इस बात की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि डूडी क्रिकेट की पिच से विधानसभा का चौका मारने में सफल हो जाएं, यहां विधानसभा का चौका से मतलब उपचुनाव के बाद सरकार के बचे हुए चार साल से है.

अब देखना ये है कि रामेश्वर डूडी क्रिकेट की अपनी इस पारी में कितना सफल हो पाते हैं. रामेश्वर डूडी जिला प्रमुख, बीकानेर से सांसद और नोखा से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से बेदखल होने के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था. नांदू का दावा है कि डूडी का निर्वाचन पूरी तरह वैध है. जबकि जोशी पहले ही कह चुके के नांदू नाम के व्यक्ति का आरसीए से कोई लेना-देना नहीं है. जोशी की अध्यक्षता वाले आरसीए के अनुसार डूडी प्रदेश के किसी भी जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी नहीं हैं. बहरहाल बीसीसीआई में आरसीए की मान्यता समाप्त होने के बाद राजस्थान में लंबे समय से घरेलू प्रतियोगिताएं भी ठप पड़ी है और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति क्रिकेट के बहाने सतह पर आ रही है.

मायावती एक बार फिर बनीं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर लगी मुहर

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुन लिया गया है. लखनऊ स्थित बसपा (BSP) कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान देश भर से आये बसपा प्रतिनिधियों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. बसपा सुप्रीमो मायावती अब नए सिरे से राष्ट्रीय कार्यकारिणी बाद में घोषित करेंगी. बैठक में यह तय किया गया कि बसपा विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी.

बसपा की केन्दीय कार्यकारिणी समिति ने बैठक में यह भी तय किया कि बसपा उत्तर प्रदेश की सभी 13 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव लड़ेगी. इसी के तहत बैठक उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगी. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी दिल्‍ली, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी.

बैठक में उत्तरप्रदेश (UttarPradesh) में 13 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए घोषणा की – हमीरपुर-नौशाद अली, जैदपुर (बाराबंकी)-अखिलेश अम्बेडकर, मानिकपुर (चित्रकूट)- राज नारायण निराला, प्रतापगढ़-रणजीत सिंह पटेल, घोषी-कयूम अंसारी, बलहा (बहराइच)- रमेश गौतम, टुंडला-सुनील चित्तौर, रामपुर सदर-जुबेर अहमद, एगलस-अभय कुमार, लखनऊ कैंट -अरुण द्विवेदी, गोविंद नगर (कानपुर)- देवी प्रसाद तिवारी को चुनाव लड़ाया जाएगा वहीं जलालपुर और गंगोह के लिए प्रत्याशियों की घोषणा बाद में होगी.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने 28 अगस्त को जोनल व मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई थी. इसमें संगठन विस्तार और भाईचारा कमेटियों के गठन के बारे में चर्चा होनी थी. इसके साथ ही विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों के बारे में भी समीक्षा होनी थी. बसपा सुप्रीमो ने उप चुनाव वाले क्षेत्रों में सबसे पहले विधानसभा, सेक्टर गठन के साथ ही भाईचारा कमेटी बनाने का निर्देश दिया है.

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गुर्जर समाज ने दी गहलोत को चेतावनी

लगातार विपक्ष के निशाने पर चल रही राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है. दरअसल, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में अगर कोई फेरबदल हुआ तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं.

‘अधीरजी ने अपनी पार्टी को कब्र में लिटा दिया’

'अधीरजी ने अपनी पार्टी को कब्र में लिटा दिया'

अधीरजी ने अपनी पार्टी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के कश्मीर दौरे को लेकर लोकसभा में कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन (Adhir Ranjan Chowdhury) और जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) आमने-सामने हो गए हैं. सत्यपाल मलिक के बयानों पर कटाक्ष करते हुए अधीर रंजन ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) का जम्मू कश्मीर का प्रदेश अध्यक्ष बनने तक की सलाह दे दी. अधीर रंजन ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट करते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को वहां का बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए, क्योंकि उनके व्यवहार के साथ-साथ उनके बयान भी बीजेपी नेता की तरह हैं.’ अधीर रंजन ने केंद्र … Read more

जयपुर में नए कांग्रेस के नेता के रूप में उभर रहे महेश जोशी के पुत्र रोहित

जयपुर में एक नए और कांग्रेस नेता का उदय हो रहा है. ये हैं महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी. महेश जोशी लोकसभा सांसद रह चुके हैं और फिलहाल विधानसभा में मुख्य सचेतक हैं. रोहित जोशी काफी पहले से कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और युवा कांग्रेस के महासचिव हैं. हाल ही उन्होंने अपने जन्मदिन पर कांग्रेस में धमाकेदार पारी खेलने के संकेत दे दिए हैं.

सोमवार 26 अगस्त को रोहित जोशी के जन्मदिन पर जयपुर में करीब दो दर्जन अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां रोहित जोशी का स्वागत किया गया. मंदिर और मस्जिद भी इनमें शामिल थे. इन सभी कार्यक्रमों की पूर्व सूचना पहले से जारी कर दी गई थी. इस तरह इन स्वागत कार्यक्रमों के जरिए जयपुर में युवा नेता की लोकप्रियता प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया. समझा जाता है कि रोहित जोशी जयपुर के महापौर पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं और इन एक दर्जन कार्यक्रमों को उसी सिलसिले में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

बड़ी खबर: गहलोत सरकार के सामने आने वाली है एक नई समस्या

रोहित जोशी को युवा कांग्रेस महासचिव नियुक्त करने के बाद संगठन चुनाव अधिकारी बनाकर गोवा भेजा गया था. इसके बाद रोहित ने संसदीय चुनाव में जयपुर से उम्मीदवारी का दावा पेश किया था और पूरे शहर में होर्डिंग और पोस्टर लगवा दिए थे. हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिला था. तब महेश जोशी ने कहा था कि वह कभी भी अपने पुत्र की राजनीतिक रूप से मदद नहीं करेंगे. रोहित में योग्यता होगी तो वह खुद राजनीति में अपनी जगह बना लेंगे.

इससे पहले जयपुर में पंडित नवल किशोर शर्मा ने अपने पुत्र बृजकिशोर शर्मा को राजनीति में स्थापित किया था. बृजकिशोर शर्मा 2008 में जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे और तत्कालीन गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री थे. उसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ था, तब बृजकिशोर शर्मा भी हार गए थे. अगले 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी जगह हवामहल से महेश जोशी को टिकट दे दिया गया था.
बृजकिशोर शर्मा ने फिर से टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी और हवामहल विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रचार करने से इनकार कर दिया था. अब उनकी जगह जयपुर में रोहित जोशी नए कांग्रेस नेता के रूप में उभर रहे हैं.

गहलोत सरकार के सामने आने वाली है एक नई समस्या

गहलोत सरकार के सामने  गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास (एमबीसी) के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में कोई फेरबदल किया गया तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं. बैठक में सरकार से मांग की गई है कि गुर्जर समाज की मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. इनमें पिछले आंदोलनों के दौरान जिन लोगों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए गए थे, उन्हें समाप्त करने की मांग भी शामिल है.

समिति के महासचिव वकील शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि हमें न्यायपालिका और सरकार में पूरा भरोसा है. हमें उम्मीद है कि गुर्जर समाज के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है, वह समाप्त नहीं की जाएगी. अगर गुर्जरों को न्याय नहीं मिला और पांच फीसदी आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ हुई तो हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा.

राजस्थान में पहले भी गुर्जरों के आंदोलन होते रहे हैं, जिसके तहत रेल की पटरियां रोकने का पुराना इतिहास है. पिछले फरवरी में भी गुर्जर समाज ने रेल पटरियों पर धरना दिया था. तब कांग्रेस सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों के लोगों को शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में पांच फीसदी आरक्षण देने का विधेयक पारित किया था. ओबीसी कोटे के 21 फीसदी आरक्षण में भी गुर्जर आरक्षण के पात्र हैं.

बड़ी खबर: जयपुर में नए कांग्रेस के नेता के रूप में उभर रहे महेश जोशी के पुत्र रोहित

एमबीसी कोटे के तहत पांच फीसदी आरक्षण का विधेयक पारित होने के बाद राजस्थान में आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हो गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय सीमा से ज्यादा है. इस मुद्दे पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण को चुनौती दी गई है. इस याचिका पर सुनवाई चल रही है. सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद याचिका पर फैसला किया जाए.

शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि फरवरी में आरक्षण आंदोलन खत्म करने पर राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस ने जो मुकदमे दर्ज कर लिए हैं, वे वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन सराकर ने अभी तक वह वादा पूरा नहीं किया है. हाईकोर्ट में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही है. इस परिस्थिति में सरकार को एमबीसी कोटे में पांच फीसदी आरक्षण देने का वादा भूलना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में गुर्जरों ने कांग्रेस का समर्थन किया था, लेकिन दुख की बात है समाज के वोटों से चुनाव जीतने वाले गुर्जर विधायक विधानसभा में गुर्जरों की मांगों को नहीं उठा रहे हैं. इस स्थिति में आंदोलन की परिस्थितियां बन रही हैं.

 

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मोदी सरकार को मिला मायावती का साथ, सोशल मीडिया पर विपक्ष को बनाया निशाना

बसपा सुप्रीमो मायावती इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और करीब-करीब प्रत्येक घटनाक्रम पर अपने विचार प्रकट करती हैं. अपने ताजा बयानों में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने मोदी सरकार के जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का समर्थन करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा. साथ ही पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य पार्टी के नेताओं का बिना अनुमति कश्मीर दौर पर जाने को पूरी तरह अनुचित बताया. अपने अन्य ट्वीट में मायावती ने यूपी की बीएसपी को छोड़ सभी अन्य सरकारों पर कानून व्यवस्था को लेकर दुरूपयोग का आरोप लगाया. सोमवार सुबह एक के बाद एक ट्वीट करते हुए मायावती ने कहा कि जम्मू कश्मीर … Read more