देश की जनता की गर्दन काट रहा व्हीकल एक्ट: खाचरियावास

राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने मोटर व्हीकल एक्ट (Moter Vehicle Act) का विरोध करते हुए इसे देश और प्रदेश की जनता के लिए आत्मघाती बताया है. खाचरियावास ने बताया कि मोदी सरकार का व्हीकल एक्ट देश की जनता की गर्दन काट रहा है. उन्होंने कहा कि हाल में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि नियम सभी के लिए एक है और ये एक्ट सभी को मानना पड़ेगा. इसके बाद भी गुजरात सरकार (Gujrat Government) ने बात न मानते हुए जुर्माने की राशि को आधा कर दिया. अब राजस्थान सरकार जुर्माने की राशि को गुजरात सरकार से भी कम करेगी. खाचरियावास ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले का सभी जगहों पर विरोध हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को ये एक्ट वापिस ले लेना चाहिए.

आपको बता दें कि देश के 4 राज्यों ने केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश में लागू करने से मना कर दिया है. इनमें राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और पं.बंगाल शामिल हैं. वहीं ट्रैफिक उल्लंघन के लिए जुर्माना कई गुना बढ़ाए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के बीच गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि को कम करने का ऐलान किया. गुजरात में बीजेपी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कई मामले में जुर्माने की राशि को घटा कर आधा कर दी. हालांकि कुछ नियमों में चालान की राशि नियमानुसार है लेकिन फिर भी सरकार के इस कदम से लोगों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी. हिमाचल सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राहत मांगी है.

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गौरतलब है कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून एक सितम्बर से देशभर में लागू कर दिया गया है. इस एक्ट के अनुसार ट्रैफिक नियम (Traffic rules) तोड़ने पर जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. इनमें हैलमेट न पहनने पर जुर्माना एक हजार (जो पहले 100 रुपये था) और लाइसेंस या गाड़ी के पेपर न होने पर जुर्माना दो हजार (जो पहले 200 रुपये था) शामिल है.

जब से नया एक्ट देश में लागू हुआ है, चारों ओर हो हल्ला मचा हुआ है. कई जगहों से चालान के ऐसे मामले सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं. राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य राज्यों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक चालान की राशि वसूले जाने की खबरे आ रही हैं. इनमें हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और ओडिशा सबसे आगे हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को नए कानून का पालन करना ही होगा. केंद्र सरकार नए नियमों से जागरूकता बढ़ने का हवाला दे रही है.

वहीं दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मोटर व्हीकल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम पड़ी ठंडी

राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Congress President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. पिछले दिनों सचिन पायलट के जन्मदिन से ठीक पहले गहलोत समर्थक मंत्री हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने मीडिया में एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का नियम लागू होना जरूरी है. हालांकि वह खुद गहलोत सरकार में मंत्री होने के साथ ही एआईसीसी सचिव होने के नाते पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी बने हुए हैं. पायलट समर्थकों का कहना था कि जो व्यक्ति यह मुद्दा उठाता है, सबसे पहले उसे एक पद छोड़ना चाहिए.

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एक अखबार में एक कांग्रेस पदाधिकारी के हवाले से खबर छपी है कि एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा गहलोत ने उठवाया था, क्योंकि वह सचिन पायलट (Sachin Pilot) से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. पहले राजीव गांधी की जयंती पर और हाल ही सचिन पायलट के जन्मदिन समारोह में भी पायलट और गहलोत में दूरियां स्पष्ट हो चुकी हैं. गहलोत सोनिया गांधी के नजदीक माने जाते हैं, जबकि सचिन पायलट की राहुल गांधी से मित्रता है. राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो और सोनिया ने बागडोर संभाल ली हो, लेकिन पार्टी में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का दखल बना हुआ है, इसलिए पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना मुश्किल प्रतीत होता है.

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद उम्मीद थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का महत्व बढ़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. न तो राजस्थान में सचिन पायलट का कद कम हो रहा है और न ही मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य (Jyotiraditya Scindia) के समर्थकों के बगावती तेवरों में कमी आई है. राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले ही डांवाडोल हो रही है, ऊपर से गहलोत और पायलट की खींचतान से पार्टी संगठन भी लड़खड़ा रहा है. यह स्थिति कांग्रेस के लिए विकट है.

हाल ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) दिल्ली गए थे, तब सोनिया गांधी ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया. गहलोत राजस्थान में 13 सितंबर को कांग्रेस (Congress) की एक वेबसाइट लांच होने के मौके पर सोनिया गांधी को आमंत्रित करना चाहते थे. वह सोनिया गांधी से समय मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर जयपुर लौटना पड़ा. बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने राजस्थान की यात्रा करने से इनकार कर दिया.

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समझा जाता है कि राजस्थान में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए गहलोत ने सोनिया के पास तीन नामों का पैनल भेजा है, जिनमें हरीश चौधरी (Harish Choudhary) का नाम भी शामिल है, जो खुद चुनाव हार गए थे. पार्टी पर भी उनकी मजबूत पकड़ नहीं है. हरीश चौधरी के अलावा लालचंद कटारिया और महेश जोशी के नाम भी पैनल में शामिल हैं. गहलोत के प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है की गहलोत प्रदेश में पार्टी पर भी अपना नियंत्रण चाहते हैं, जो पायलट के कारण संभव नहीं हो पा रहा है. पंचायत चुनाव नजदीक हैं और उम्मीदवार तय करने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अहम भूमिका रहती है.

गौरतलब है कि सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार चलाने की प्रक्रिया में सक्रिय नहीं हैं. सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में पायलट की कोई भूमिका नहीं रहती है. इसके अलावा गहलोत की तरफ से जारी होने वाले विज्ञापनों में सचिन पायलट का जिक्र नहीं होता है. इस परिस्थिति में गहलोत और पायलट की खींचतान कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.

लॉ एंड ऑर्डर पर क्या बोले सचिन पायलट

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने प्रदेश की कानून व्यवस्था (Low and Order) के लचीलेपन पर कहा कि पिछले कुछ महीनों में कानून व्यवस्था शिथिल हुई है जिसपर ध्यान देने की जरूरत है. इसे गंभीरता से लेना चाहिए फिर चाहे वो धौलपुर की घटना हो या बहरोड की या फिर अलवर की. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में कुछ कदम उठाए हैं ताकि इस तरह की कोई और वारदात न हो. सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने केंद्र सरकार के यातायात नियमों का पालन न करने वालों पर 10 गुना चालान राशि बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा.

वीडियो खबर: देखिए बाड़मेर की ‘जूता पॉलिटिक्स’

बाड़मेर (Barmer) जिला मुख्यालय में करीब 8 महीने बाद हुई जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में जिला परिषद सदस्य और विधायक के बीच जूता पॉलिटिक्स (Shoes Politics) देखने को मिली और बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई. मामूली बात पर शुरू हुई बहस के बाद जिला परिषद सदस्य नरसिंग कड़वासरा (Narshing Karwasara) और बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन (Mewaram Jain) और बाड़मेर विधायक आमने-सामने हो गए. तैश में आकर कड़वासरा ने विधायक को जूता दिखा दिया. वहीं मेवाराम ने ‘मेरे पास भी हैं’ कहकर उत्तर दिया.

वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष

PoliTalks news

अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने RCA अध्यक्ष बनेंगे  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (AshokGehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के रास्ते होकर आरसीए का रास्ता तय करेंगे. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. ये पद करीब डेढ़ माह से खाली चल रहा था. यह पद 22 जुलाई को तत्कालीन कोषाध्यक्ष प्रदीप पालीवाल के निधन से खाली हो गया था.

गौरतलब है कि जोधपुर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद से Vaibhav Gehlot Vaibhav-Gehlotक्रिकेट की राजनीति में आने का मौका तलाश रहे थे. वैभव को क्रिकेट की राजनीति में लाने के लिए सीपी जोशी ने पूरी मदद की. इससे पहले वैभव को जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के थ्रू RCA में लाने के प्रयास किये गए. शायद इसीलिए सीपी जोशी के सुझाव पर ही जोधपुर जिला क्रिकेट संघ को भंग कर अंतरिम समिति बना दी गई. राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस बारे में आदेश भी जारी कर दिया था.

अंतरिम समिति के संयोजक भी राजस्थान रॉयल्स के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना को बनाया गया था, जो जोधपुर के ही हैं और गहलोत परिवार के काफी निकट माने जाते हैं. Vaibhav Gehlot को पहले जोधपुर जिला क्रिकेट संघ में पदाधिकारी बनाया जाता, लेकिन हाइकोर्ट की रोक होने से अब वैभव गहलोत को राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन से प्रवेश कराया गया है. इसके बाद आरसीए में जोशी का इस महीने कार्यकाल समाप्त होने पर Vaibhav Gehlot को RCA का अध्यक्ष बनाया जाएगा.

Vaibhav Gehlot के RCA अध्यक्ष बनने की राह में अगर कोई रोड़ा बन सकता है तो वो हैं नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi). डूडी को RCA में सीपी जोशी के कट्टर दुश्मन नान्दु और उनकी टीम का पूरा सपोर्ट है जो कि चाहते हैं कि डूडी RCA अध्यक्ष के लिये चुनाव लड़ें. लेकिन जानकारों की मानें तो डूडी को खींवसर से होने वाले विधानसभा उपचुनाव से सदन में पहुंचाने के कमिटमेंट के बाद अब वैभव के RCA अध्यक्ष बनने में कोई रोड़ा नहीं बचा है.

जैसा कि लग रहा है, अगर Vaibhav Gehlot आरसीए अध्यक्ष बनते हैं तो फिर से RCA का नया अध्यक्ष फिर राजसमंद से ही होगा. फिलहाल ये पद प्रदेश विधानसभा स्पीकर और राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सीपी जोशी के पास है. हाल में बीबीसीआई ने RCA से बैन हटाया है. इसके बाद जोशी ने आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा कर दी है.

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चूंकि कि सी.पी. जोशी अब विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं, ऐसे में उन्हें ये पद छोड़ना पड़ेगा. RCA को 12 सितम्बर तक चुनाव की घोषणा करनी है. 28 सितम्बर तक चुनाव करा लिए जाएंगे.

वहीं सोमवार देर शाम जेके स्टेडियम में हुई राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में वैभव गहलोत को निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के पर्यवेक्षक उदयपुर के महेंद्र शर्मा, जिला खेल अधिकारी चांद खां पठान और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक की मौजूदगी में निर्वाचन प्रक्रिया हुई जिसमें 19 में से 16 सदस्यों के समर्थन से वैभव को कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के संयुक्त सचिव महेंद्र नाहर ने वैभव गहलोत को राजसमंद का कोषाध्यक्ष बनाए जाने की पुष्टि की.

बीजेपी ने जारी किया- ‘राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज’

राजस्थान (Rajasthan) में बिगडती कानून व्यवस्था (Law-&-Order) को लेकर प्रदेश भाजपा (BJP) का गहलोत सरकार (Gehlot Government) पर हल्ला बोल जारी है. इसी कडी में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाब चन्द कटारिया (Gulab Chand Katariya) ने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर बीजेपी की आईटी सेल द्वारा प्रकाशित “अपराध टाइम्स” अखबार का विमोचन किया. जिसका शीर्षक है – “राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज (Crime Times in Rajasthan – Gehlot’s Government, fun of criminals)“.

राजस्थान में इन दिनों अपराध तंत्र पुलिस तंत्र पर हावी होता दिखाई दे रहा है. प्रदेश में इन दिनों अपराध का बोलबाला है और अपराधियों के हौसले बुलंद है. प्रदेश में बढ़ते गैंगरेप जैसे संगीन अपराध हों या प्रदेश का बिगडा साम्प्रदायिक सौहार्द, मामूली बातों पर दंगे, झगडा, आगजनी, लूट, हत्या अब प्रदेश में आम बात हो गयी है. इसी को लेकर आज प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था की स्थिती को प्रकाशित करते हुए “अपराध टाइम्स” नामक अखबार का विमोचन किया गया. जिसमें प्रदेश में हो रहे अपराध से जुड़ी सभी बड़ी खबरों को प्रकाशित किया गया है.

प्रदेश में बढ़ा अपराधों का ग्राफ:

प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने प़त्रकार वार्ता में प्रदेश के लाॅ-एंड-आॅर्डर को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का संयुक्त जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान कटारिया ने कहा कि केवल जुलाई 2018 के साथ 2019 की तुलना करें तो अपराधों का ग्राफ 54 प्रतिशत बढ़ा है वहीं अगर जनवरी से जुलाई तक सभी 7 महीने के आंकड़े जोड़ें तो 32 प्रतिशत इजाफा आईपीसी के अपराधों में हुआ है. वहीं जुलाई 2018 से 2019 के जुलाई तक के आंकड़ों को जोड़ें तो प्रदेश में 31 फ़ीसदी अपराध बढ़े हैं.

महिला अपराधों में स्थिति भयावह:

नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में महिला अपराधों के मामले में तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह है. जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में 87 प्रतिशत महिला अपराधों में इजाफा हुआ है. वहीं एसटी के अपराधों के मामलों की बात करें तो अपराधों की बढ़ोतरी में हद ही पार हो गई है, जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में एसटी के खिलाफ 123 प्रतिशत अपराध बढ़े हैं.

सीएम अशोक गहलोत से अपील:

कटारिया ने मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री का भी जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत से अपील करते हुए कहा कि सीएम गहलोत को पुलिस की साख गिरने से बचाना चाहिए, जो भी लोग पुलिस को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है, उनके खिलाफ सख्ती से काम करना चाहिए, इसमें प्रदेश की पूरी जनता, राजनीतिक दल सरकार के साथ होंगे.

बहरोड की घटना थी सुनियोजित:

बहरोड थाने पर फायरिंग कर पुलिस कस्टडी में बंद अपराधि को छुडा ले जाने के मामले पर कटारिया ने कहा कि इस घटना से सारी हदें पार हो गयी. यह केस सुनियोजित था, पुलिस की मिलीभगत से ये सब हुआ. पुलिस ने अपराधियों पर एक भी गोली नहीं चलाई यह एक बडा सवाल है. आगे कटारिया ने कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने सिपाही कह रहा है कि उसे हथियार चलाना नहीं आता, इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या होगी?, थानेदार कहता है कि उनकी रिवॉल्वर अचानक जाम हो गई, यह कहना भी शर्मनाक है, इससे पुलिस की छवि खराब होती है.

कार्रवाई से मिला संताष:

बहरोड थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर करने और डिप्टी व एसएचओ को सस्पेंड करने तथा दो हैडकांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त करने की कार्रवाई पर कटारिया नें कहा कि पहली बार इस कार्रवाई से कुछ संतोष मिला है. आगे कटारिया ने कहा कि इस मामले पर कल ही मेरी डीजी से बात हुई थी मैनें उनसे इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया था.

पुलिस पर जताया भरोसा:

गुलाब चन्द कटारिया ने आगे कहा कि हमारी पुलिस निकम्मी नहीं है, लेकिन कई बार अधिकारी समय पर एक्शन नहीं करते है. इससे अपराध में बढ़ोतरी होती है और अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं. इसके साथ ही कटारिया ने कहा कि प्रदेश में अपराध हमेशा होते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, वह चिंताजनक और सवाल उठाने लायक है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सलाह:

कटारिया ने पत्रकार वार्ता के दौरान सीएम अशोक गहलोत को सलाह देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी गृहमंत्री का जिम्मा भी संभाल रहे हैं ऐसे में समय अभाव के कारण कानून व्यवस्था पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते इसलिए उन्हें अपने एक सहयोगी को कानून व्यवस्था का जिम्मा दे देना चाहिए ताकि प्रदेश में कानून पर नियंत्रण रखा जा सके.

13 नंबर बंगले पर कटारिया का कूटनीतिक जवाब:

पूर्व मुख्यमंत्रीयों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को हटाये जाने के हाइकोर्ट के फैसले पर पत्रकारों ने कटारिया से सवाल करते हुए पूछा कि क्या पूर्व सीएम वसंधरा राजे 13 नंबर बंगला खाली करेगी ? इस पर कूटनीतिक जवाब देते हुए कटारिया ने कहा कि जिसे बंगला खाली करवाना है उनसे पूछो मुझे तो खाली करवाना है नहीं. कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए, इस मामले में सरकार ही ढीली पड रही है तो मैं क्या करूँ. कटारिया के इस जवाब में उनके मन में छिपी उनकी मंशा को राजनीति के विशेषज्ञ समझ सकते हैं.

जानिए क्यों है सचिन पायलट को राजस्थान से इतना प्यार

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) का जन्म उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ. उनकी प्रारंभिक और कॉलेज शिक्षा नयी दिल्ली और मास्टर्स अमरीका स्थित पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के व्हॉर्टन स्कूल में हुई. राजनीति में आने से पहले सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने दिल्ली (Delhi) में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन और उसके बाद दो साल जनरल मोटर्स के लिए काम किया. इसके बावजूद उन्हें राजस्थान (Rajasthan) की मरूभूमि से अथाह प्यार है और यही उनकी कर्मस्थली भी है. ऐसा क्यों, इसका उत्तर वीडियो में छिपा है.

क्यों पायलट का खुलकर समर्थन नहीं कर पा रहे उनके करीबी

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) की अंदरूनी राजनीति में सत्ता के केंद्र बदल गए. सोनिया के विश्वस्त माने जाने वाले एक गुट को मानो अभय दान मिल गया हो. सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद एक खेमा अधिक पावरफुल हो गया. यही वजह रही कि पहले जो नेता और कार्यकर्ता सचिन पायलट (Sachin Pilot) का खुल कर समर्थन करते थे यहां तक कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाये जाने की खुलकर पैरवी करते थे, उनमें से कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर उनके जन्मदिन के मौके पर भी कन्नी काटते नजर आये.

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बाड़मेर में ‘जूता पॉलिटिक्स’, सदस्य ने भरी मीटिंग में विधायक को दिखाया जूता

बाड़मेर (Barmer) जिला मुख्यालय में करीब 8 महीने बाद हुई जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गयी. मामूली बात पर शुरू हुई बहस के बाद जिला परिषद सदस्य नरसिंग कड़वासरा (Narshing Karwasara) और बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन (Mewaram Jain) आमने-सामने हो गए. दोनों के बीच तीखी नोकझोक के बाद कड़वासरा ने विधायक को जूता दिखाया जिसपर विधायक ने भड़कते हुए कहा कि मैंने भी पहन रखा है. सिवाना विधायक हमीरसिंह, जिला प्रमुख प्रियंका मेघवाल सहित सदन के अन्य सदस्यों के बीच बचाव करने के बाद कहीं जाकर मामला शांत हुआ.

दरअसल हुआ कुछ यूं कि सोमवार को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक हुई जिसमें जिला परिषद के सदस्य अपनी-अपनी समस्याओं को रख रहे थे. इसी दौरान सदस्य नरसिंह कड़वासरा ने जिला मुख्यालय के आदर्श स्टेडियम के पीछे बनाए गए कचरा पॉइंट की समस्या पर अपनी बात रखते हुए बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन पर गंभीर आरोप लगाए. कड़वासरा ने कहा कि जिला परिषद सदस्य मृदुरेखा चौधरी के आवास के सामने जानबूझकर कचरा पॉइंट बनाया गया है जिसके लिए कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. जोश में आते हुए कड़वासरा ने ये भी कह दिया कि विधायक जैन नगर परिषद विस्तार में रोड़ा बन रहे हैं. जब माहौल थोड़ा गर्माने लगा तो जिला परिषद सदस्य के बार-बार बोलने पर उन्हें टोका गया. खुद उप जिला प्रमुख सोहनलाल चौधरी ने कड़वासरा को डांटते हुए कहा कि आप मुद्दे पर नहीं बोलकर सदस्यों को गुमराह कर रहे हैं. अन्य सदस्यों को भी बोलने का मौका दें लेकिन कड़वासरा ने बोलना जारी रखा.

आरोपों की झड़ी के बीच विधायक ने कहा, ‘ सदन में और भी सदस्य है. सब अपनी बात रख रहे है. आपने हर किसी की बात रखने का ठेका ले रखा है क्या? आप और किसी को बोलने देंगे क्या?’ इसी बात पर दोनों में कहासुनी होने लगी. इसी बीच कड़वासरा ने अपना जूता उतारकर मेवाराम को दिखाते हुए कहा कि मुझे रोकने की कोशिश ना करें. तनातनी में विधायक जैन ने भी कहा कि मैंने भी पहन रखा है.

इसके बाद सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया. यह माजरा देख कलेक्टर, एसपी समेत बैठक में मौजूद सभी जनप्रतिनिधि व अधिकारी चौंक गए. अन्य प्रतिनिधियों ने बीच बचाव शुरू किया. माहौल बिगड़ता देख एसपी ने सुरक्षाकर्मी बुला लिए. वहीं विधायक जैन कड़वासरा के खिलाफ कार्रवाई की जिद पर अड़ गए. घटना को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रमुख प्रियंका मेघवाल, जिला कलक्टर समेत सदन के सदस्यों ने कड़वासरा से से माफी मांगने की बात रखी. बाद में जिला परिषद सदस्य नरसिंह कड़वासरा ने विधायक मेवाराम जैन और सदन में उपस्थित अन्य सदस्यों व अधिकारियों से माफी मांफी जिसके बाद आगे की कार्यवाही शुरू हो सकी.

इनका कहना है

जिस तरह सदन में जन​प्रतिनिधियों और कलेक्टर के सामने जिला परिषद सदस्य ने इस तरह की हिमाकत की, जूता दिखाया, मैं इस घटना की निंदा करता हूं. साथ ही भगवान से सदस्य को सदबुद्धि देने की प्रार्थना करता हूं.
– मेवाराम जैन, विधायक बाड़मेर

मैंने सदन में बिना कोई भेदभाव किए अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में रखा है. बस आवेश में ऐसा हो गया. मेरा मेवारामजी से कोई द्वेश नहीं है. उन्होंने जिस तरह से मेरी बातों का विरोध किया, वो गलत था. मैंने केवल सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए माफी मांगी. विधायक से माफी वाफी की कोई बात नहीं हुई है.
– नरसिंह कड़वासरा, जिला परिषद सदस्य