Rajasthan Congress
Rajasthan Pradesh Congress Committee or or Rajasthan PCC is the Pradesh Congress Committee of the Indian National Congress serving in the state of Rajasthan.
कांग्रेस में होगी बड़ी सर्जरी, हटेंगे एक दर्जन से ज्यादा प्रदेशाध्यक्ष और प्रभारी
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान संगठन की सर्जरी करने में जुटे हुए हैं. हाईकमान राहुल गांधी ने अपना इस्तीफा मंजूर होने से पहले कईं राज्यों के पीसीसी चीफ और प्रदेश प्रभारी बदलने का खाका तैयार कर लिया है. बताया जा रहा है कि करीब एक दर्जन से ज्यादा राज्यों के चीफ और प्रभारी नए बनाए जाएंगे. जब तक नई नियुक्तियां इन पदों पर नहीं हो जाती, तब तक इस्तीफा दे चुके पीसीसी चीफ को पद पर रहते हुए काम करने के निर्देश दिए गए हैं.
गौरतलब है कि 24 मई से 30 मई के बीच करीब एक दर्जन पीसीसी चीफ अपना इस्तीफा राहुल को भेज चुके हैं. नए पीसीसी चीफ और प्रभारियों में मेहनती नेताओं को इस बार ज्यादा मौका दिया जाएगा. यह तमाम बदलाव राहुल गांधी के इस्तीफा मंजूर होते ही शुरु हो जाएगा. इसे लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कवायद में जुटे हुए हैं.
अधिकतर राज्यों में राहुल गांधी अपनी पसंद के नेताओं को कमान सौपेंगे. वहीं मुकुल वासनिक जैसे अच्छा काम करने वाले नेताओं का प्रमोशन हो सकता है. इस बदलाव पर तमाम नेताओं की नजरें बनी हुई हैं. सभी एक-दूसरे से संपर्क साध ‘क्या हो सकता है’ इसकी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं.
इन राज्यों के बदले जाएंगे पीसीसी चीफ:
कांग्रेस जिन राज्यों में पीसीसी चीफ नए बनाएगी उनमें महाराष्ट्र, बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश और पंजाब के चीफ बदले जाने तय हैं. इनमें से कई राज्यों के अध्यक्ष तो अपना इस्तीफा भी भेज चुके हैं. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के पीसीसी चीफ सीएम बन चुके हैं. राजस्थान के पीसीसी चीफ के कार्यकाल को साढ़े पांच साल हो चुके हैं. वहीं जाटलैंड हरियाणा में दलित चेहरे अशोक तंवर के पीसीसी चीफ बनाने का प्रयोग असफल होने पर उन्हें भी बदला जाना तय है. महाराष्ट्र के पीसीसी चीफ अशोक चव्हाण खुद ही चुनाव हार गए हैं. ऐसे में पीसीसी चीफ बनाने के लिए राहुल गांधी नया प्रयोग भी कर सकते हैं.
प्रदेश प्रभारी भी होंगे चेंज:
प्रदेशाध्यक्ष के साथ एक दर्जन से अधिक राज्यों के प्रभारी भी बदले जा सकते हैं. जिन राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया या उम्मीद से कम सीटें आई हैं, वहां नए नेताओं को प्रभारी बनाया जाना तय है. हालांकि छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मौजूदा प्रभारियों को बरकरार रखा जा सकता है. प्रभारियों के साथ सहप्रभारी लगाने का प्रयोग एकदम बंद किए जाने की तैयारी है.
राजस्थान: आलाकमान ने गुटबाजी को बढ़ावा देने वाले बयानवीरों की मांगी रिपोर्ट
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी को लेकर आलाकमान बेहद नाराज है. हाईकमान ने बाकायदा संगठन महासचिव वेणुगोपाल से हार के बाद बयान देने वाले नेताओं के नामों की लिस्ट मांगी है. राहुल गांधी ने पार्टी के फैसले के खिलाफ बयानबाजी को अनुशासनहीनता के दायरे में माना है. माना जा रहा है कि आलाकमान रिपोर्ट मिलने के बाद इन बयानवीरों पर कड़ी कार्यवाही कर सकता है.
बयानबाजी से कार्यकर्ता हो रहे हताश
हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल वैसे ही कमजोर हो गया है. उसके बाद मंत्रियों और विधायकों के आए बयानों से वे अधिक निराश हो रहे हैं. राजस्थान में जब से नेतृत्व परिवर्तन के बयान आने लगे हैं, तब से कार्यकर्ता और पशोपेस में पड़ गए हैं. उनमें यह मैसेज भी जा रहा है कि आलाकमान का अपने नेताओं पर कोई प्रभाव नहीं रह गया है. लिहाजा आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल के लिए बयानवीर नेताओं पर एक्शन लेने का मन बना लिया है. इससे न केवल नेताओं की जुबान पर कंट्रोल होगा, आलाकमान का कद भी बना रहेगा.
सीएम गहलोत ने भी जताई नाराजगी
बताया जा रहा है कि सीएम अशोक गहलोत ने भी आलाकमान से नेताओं की बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग की है. गहलोत ने कहा कि आलाकमान जो फैसला करता है, वो सर्वमान्य होगा. लेकिन बयानबाजी से गलत संदेश जा रहा है और माहौल पार्टी के खिलाफ बन रहा है. उसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव वेणुगोपाल से रिपोर्ट तलब की है. जल्द ही प्रदेश कांग्रेस की तरफ से संगठन महासचिव को इस बारे में रिपोर्ट भेज दी जाएगी.
कई मंत्रियों और विधायकों ने की थी बयानबाजी
चुनाव के परिणाम आते ही मंत्री उदयलाल आंजना और रमेश मीणा ने हार की जिम्मेदारी तय करने को लेकर सीएम पर निशाना साधा था. उसके बाद हरीश मीणा ने अपनी ही सरकार को हत्यारी बताते हुए मोर्चा खोल दिया था. एक ओर रामनारायण मीणा ने सरकार बर्खास्त होने का दावा कर डाला तो वहीं विधायक पी.आर. मीणा ने सीधे सीएम को टार्गेट कर दिया. ऐसे में विपक्ष का रोल कांग्रेस विधायक ही निभाने लग गए थे. आनन-फानन में प्रभारी अविनाश पांडेय ने भी एडवायजरी जारी की लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ. ऐसे में अब आलाकमान को दखल देना पड़ा. रिपोर्ट मिलने के बाद बयानवीरों पर अनुशासन का डंडा चलाया जा सकता है.
गहलोत ही बने रहेंगे सीएम, मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट होकर बिना बोले दे दिया बड़ा मैसेज
8 सिविल लाईंस. वो बंगला जिसमें रहते हैं राजस्थान के मुख्यमंत्री. करीब साढे पांच साल से वीरान पड़ा यह सीएम हाउस फिर से गुलजार हो गया है. क्योंकि सीएम अशोक गहलोत इसमें विधिवत रुप से शिफ्ट हो गए. पिछले बीजेपी राज में पूरे पांच साल यह खाली पड़ा रहा. क्योंकि सीएम वसुंधरा राजे ने 13 नंबर बंगले को ही सीएम हाउस में तब्दील कर दिया था. हालांकि सरकारी दस्तावेजों में आधिकारिक रुप से 8 नंबर बंगला ही मुख्यमंत्री आवास है.
गहलोत के सीएम हाउस में शिफ्ट की टाइमिंग देखिए. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद डिप्टी सीएम सचिन पायलट गुट के विधायक उनके खिलाफ मुखर हो रहे हैं. लिहाजा जिस सियासी घटनाक्रम में गहलोत मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट हुए, उसके मायने तो यही निकल रहे है कि अगले पांच साल तक वहीं मुख्यमंत्री बने रहेंगे.
गहलोत करते हैै मैसेज,संदेश औऱ संकेतों की सियासत
अशोक गहलोत मैसेज देने और संकेतों की राजनीति करने के उस्ताद माने जाते हैं. अगर गहलोत कोई भी कदम उठाते हैं तो उसके पीछे कोई न कोई मैसेज जरुर होता है. गहलोत ने सीएम हाउस में रहने का कदम तब उठाया, जब उनके खिलाफ एक दिन पहले ही विधायक पी.आर. मीणा ने खुलकर खिलाफत की थी. लेकिन गहलोत ने अगले ही दिन सीएम हाउस में एंट्री मार बिना बोले ही विरोधियों को जवाब दे दिया.
जानकारों का कहना है कि गहलोत ने जिस सियासी माहौल में यह कदम उठाया, उसके मायने अलग निकलते हैं. गहलोत ने साफ-साफ संदेश दे दिया है कि उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है और कोई किसी मुगालते में नहीं रहे. कांग्रेस ही नहीं, बीजेपी के गलियारों में भी सीएम गहलोत के मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट होने की चर्चाएं हो रही हैं.
ब्यूरोक्रेट्स भी समझ गए हैं कि गहलोत का राजस्थान कांग्रेस में कोई तोड़ नहीं है. लेकिन गहलोत के इस कदम से विरोधी धड़े में खलबली जरुर मच गई है.
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राजस्थान कांग्रेस के नेताओं में अब कमरों के लिए जंग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने दिखाया टशन
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच बंटे विधायकों की बयानबाजी के बाद अब पीसीसी पदाधिकारियों में भी पावरगेम शुरु हो गया है. आलम ये है कि अब सीएम और डिप्टी सीएम के पदाधिकारियों के बीच जंग शुरु हो गई है. पीसीसी में हाल का बदला नजारा बहुत कुछ बयां कर गया. दरअसल पीसीसी उपाध्यक्ष मुमताज मसीह जिस कमरे में पिछले 20 साल से बैठते आए थे, रातोरात उन्हें उस कमरे से रुखसत कर दिया गया. उनके पुराने वाले रुम को वरिष्ठ उपाध्यक्ष कक्ष में तब्दील कर दिया गया. इतना ही नहीं, रातोंरात कमरे के आगे नई प्लेट भी लगा दी गई. खास बात ये … Read more