गहलोत केबिनेट का फैसला, अब जनता नहीं पार्षद ही चुनेंगे मेयर

राजस्थान में मीसाबंदी पेंशन योजना बंद, भाजपा ने बताया तानाशाही निर्णय

Misabandi

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान की गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने भी आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदियों की पेंशन योजना (Misabandi Pension Scheme) सहित अन्य सुविधाएं बंद कर दी हैं. पिछली वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) सरकार ने मीसा व डीआरआई बंदियों को ‘लोकतंत्र रक्षक’ का नाम देते हुए उन्हें पेंशन, निशुल्क चिकित्सा, निशुल्क बस सुविधा सहित कई अन्य तरह की सुविधाएं प्रदान की थी. सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री गहलोत (Ashok Gehlot) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में रोक लगा दी. प्रदेश सरकार के इस कदम को बीजेपी ने औछी मानसिकता का उदाहरण बताते हुए तानाशाही निर्णय बताया. मीसा बंदियों की … Read more

गहलोत केबिनेट का फैसला- पार्षद ही चुनेंगे महापौर, बीजेपी ने बताया- थूंककर चाटने वाला कदम

Gehlot Cabinet

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण फैसले पर यू-टर्न लेते हुए नया फैसला लिया कि अब पार्षद ही करेंगे महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव. सोमवार को हुई गहलोत केबिनेट (Gehlot Cabinet) की एक अहम बैठक में ये फैसला लिया गया. सीएम गहलोत के पिछले कार्यकाल में बने महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव के कानून को पिछ्ली वसुंधरा राजे सरकार ने सत्ता में आने के बाद खत्म कर दिया था मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. इसी साल यह कानून बनाया गया था जिसके तहत मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा. वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के इस फैसले पर कहा कि निकाय चुनाव में हार के डर से सरकार ने यू-टर्न लिया है. पूर्व मंत्री और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ ने बताया थूंककर चाटने वाला कदम.

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गहलोत मंत्रिमंडल की बैठक (Gehlot Cabinet) में पिछली सरकार के निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली को जारी रखते हुए बैठक में अप्रत्यक्ष प्रणाली से निकाय चुनाव (Nikay Chunav) कराने पर सहमति बनी है. इससे पहले 2009 में राजस्थान की गहलोत सरकार ने प्रत्यक्ष निकाय चुनाव आयोजित कराए थे जिसे वसुंधरा सरकार ने बदल दिया था. मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री धारीवाल ने बताया कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव इसलिए भी जारी रखा गया है ताकि अगर किसी वार्ड में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़े तो वो केवल एक ही इलाके में बिगड़े, उससे आगे न बढ़े. इसी प्रकार किसी एक वार्ड में कोई समस्या होती है तो वो अन्य वार्डो में न फैले. धारीवाल ने इसे लोकतांत्रिक पद्धति बताया.

यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि पार्षद और पूर्व पार्षदों से चर्चा कर नवंबर में होने वाले नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के चुनावों को अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने का फैसला मंत्रीमंडल की बैठक में लिया गया. धारीवाल ने बताया कि मौजूदा समय में विपक्ष द्वारा जनता के बीच भय, आक्रोश, असहिष्णुता और साम्प्रदायिक माहौल पैदा किया जा रहा है, उन परिस्थितियों में प्रत्यक्ष चुनाव कराना कतैई सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि हमने वर्तमान और पूर्व पाषदों के साथ उन संभावित लोगों से भी बात की जो पार्षद का चुनाव लड़ने वाले हैं, उन सभी ने एक स्वर में निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली का समर्थन किया. उक्त का कहना है कि प्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा जीतकर आने वाले व्यक्ति के सामने पार्षद अपने आपको कमजोर महसूस करते हैं. दोनों के बीच तालमेल की कमी भी रहती है. ऐसे में अगर बहुमत ज्यादा हो लेकिन जीतकर आया प्रमुख व्यक्ति दूसरी पार्टी का हो तो विकास का मुद्दा गौण हो जाता है.

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सरकार के इस फैसले पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार केवल डर और तबादलों की आड में निकाय चुनावों में जीत का ख्वाब देख रही है जो मुंगेरीलाल के हसीन सपने से ज्यादा कुछ भी नहीं. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ये साफ-साफ लिखा है कि सरकार में आने के बाद निकाय चुनाव प्रत्यक्ष पद्धति से कराए जाएंगे लेकिन सरकार ने निकाय चुनाव में हार के डर से यु-टर्न लेकर प्रदेश की जनता को ठगा है.

वहीं पूर्ववर्ती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे कालीचरण सर्राफ ने भी निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली पर गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा. सर्राफ़ ने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के बाद सरकार ने विपक्ष के विरोध के बावजूद बिल को विधानसभा में पास कराया था. (Gehlot Cabinet) अब अपने ही लिए गए फैसले पर यू टर्न लेना न सिर्फ जनता को धोखा देना है, बल्कि ये एक थूक कर चाटने जैसा कदम है.

वीडियो खबर: – जो नेता आज राज कर रहे हैं, वो पांच साल विधानसभा आये भी नहीं थे- डूडी

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डूडी ने कहा कि मैंने जाट नेता के रुप में 20 साल तक जाट समाज और किसानों के लिए संघर्ष किया, पिछले पांच साल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मैंने किसानों की आवाज उठाई है, मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई है

वीडियो खबर: बेनीवाल ने दी गहलोत को चेतावनी- पुलिस के दम पर चुनाव करवाने की मत सोचना

राजस्थान (Rajasthan) में विधानसभा उपचुनाव (Assembly By-Poll Election) के मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने कहा है कि खींवसर में मेरा मुकाबला हरेंद्र मिर्धा (Harendra Mirdha) से नहीं है बल्कि इस चुनाव में मेरा मुकाबला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) से है, वहीं मंडावा में यह मुकाबला किसानों और गहलोत के बीच है. इसके साथ ही बेनीवाल ने कहा कि अशोक गहलोत इस उपचुनाव में पुलिस के दम पर मतदान करवाने की सोच रहे हैं तो मैं यह चेतावनी देना चाहता हूं कि ऐसी गलती मत करना, नहीं तो इसका खामियाजा पूरे राजस्थान में सरकार को भुगतना पडेगा.

वीडियो खबर: मंडावा विधानसभा उपचुनाव में कांटे की टक्कर, बीजेपी में हो सकता भितरघात

मंडावा (Mandawa) विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर होने के बावजूद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने का रीटा चौधरी का फायदा मिल सकता है, वहीं सुशीला सिंगड़ा चूंकि डेढ़ घण्टे पहले पार्टी में शामिल हुईं ऐसे में टिकट की आस लगाए बैठे भाजपा के अन्य दावेदारों की नाराजगी पड़ सकती है सिंगड़ा को भारी. अब ये तो 24 अक्टूबर की सुबह ही पता चलेगा कौन पड़ा किस पर भारी.

वीडियो खबर: ‘हनुमान मंत्री बनने के लिए नहीं, आंदोलन करने के लिए पैदा हुआ है’- बेनीवाल

खींवसर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल अपने छोटे भाई नारायण बेनीवाल के चुनाव प्रचार में जी-जान से जुटे हुए हैं….

वीडियो खबर: राजस्थान के बेरोजगारों के लिए किरोड़ी ने भरी हूंकार

राजस्थान (Rajasthan) से राज्यसभा सांसद किरोडी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने जयपुर के जवाहर सर्कल के पास आयोजित एक सभा में प्रदेश के 41 हजार बेरोजगारों के समर्थन में गहलोत सरकार पर निशाना साधा. मीणा ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बेरोजगारों को जल्दी नियुक्ति नहीं दी तो आंदोलन किया जाएगा और गहलोत (Ashok Gehlot) को बेरोजगार किया जाएगा.

वीडियो खबर: सुरक्षा के बहाने गांधी परिवार की निगरानी करा रही मोदी सरकार!

इस आदेश के निकलने के बाद कांग्रेस ने विरोध जताना शुरू कर दिया है. कांग्रेस (Congress) का कहना है कि केंद्र सरकार अपने इस कदम से गांधी परिवार (Gandhi Family) पर निगरानी करने की साजिश कर रही है, वहीं केंद्र सरकार ने 24 घंटे सुरक्षा का अलाप गाया. अब सरकार सच में गांधी परिवार को सुरक्षा ही दे रही है या इन पर हर पल की निगरानी बढ़ा रही है, इसमें बड़ा झोल नजर आ रहा है.

हरियाणा में भाजपा का चुनाव अभियान शुरू करते हुए अमित शाह की ललकार

देश के गृहमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को पूरे देश में लागू किए जाने को लेकर उठ रहे विवादों को दरकिनार करते हुए हरियाणा (Haryana) में कैथल जिले की एक चुनावी सभा में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश से एक-एक अवैध घुसपैठिए को बाहर निकाल दिया जाएगा. उन्होंने कहा, फिर से हम 2024 में आपके सामने वोट मांगने आएंगे, उससे पहले देश से एक एक घुसपैठिए को चुन चुन के निकालने का काम ये भाजपा सरकार करेगी.

अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का साहस ही है जो धारा 370 को हटा दिया गया और तीन तलाक के खिलाफ कानून बना. उन्होंने कहा कि पिछले सत्तर साल से इस देश में अवैध घुसपैठिए आते रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते रहे हैं. भाजपा की सरकार का, मोदीजी का संकल्प है कि घुसपैठियों को एनआरसी बनाकर हम देश के बाहर निकालेंगे. उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वह तीन तलाक के खिलाफ कानून, धारा 370 और 35ए हटाने और अवैध घुसपैठियों के को बाहर निकालने का विरोध क्यों कर रही है? गौरतलब है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पिछले माह कह चुके हैं कि पूरे हरियाणा में एनआरसी लागू किया जाएगा.

अमित शाह ने बुधवार को हरियाणा में भाजपा के चुनाव अभियान की शुरूआत की. उन्होंने कैथल, लोहारू और मेहम में आमसभाओं को संबोधित किया. तीनों आमसभाओं में उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा कि वह भाजपा सरकार के कार्यों का विरोध क्यों कर रही है? उन्होंने गांधी, हुड्डा और चौटाला परिवारों पर आरोप लगाया कि वे स्वार्थ की राजनीति करते हैं. उनके लिए देशहित की बजाय अपने परिवार का हित ज्यादा महत्वपूर्ण है.

कैथल में अमित शाह ने कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला के बारे में कहा कि जब भी हम कुछ करते हैं सुरजेवालाजी के पेट में दर्द होने लगता है. सुरजेवाला कैथल में फिर से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. शाह ने हुड्डा और चौटाला के परिवारों के बारे में कहा कि ये लोकतंत्र में दीमक की तरह हैं. मनोहर लाल खट्टर की तारीफ करते हुए शाह (Amit Shah) ने कहा कि मनोहर लाल के कार्यकाल में कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादलों का काम पारदर्शी तरीके से हुआ है, जबकि पिछले मुख्यमंत्री सरकारी नौकरी में भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं. वह नाम लिए बगैर ओम प्रकाश चौटाला का जिक्र कर रहे थे, जो इन दिनों शिक्षक भर्ती घोटाले में जेल काट रहे हैं.

तीनों आम सभाओं में अमित शाह (Amit Shah) ने लोगों से मोदी के नाम पर वोट देने की अपील की. उन्होंने कहा कि धारा 370 हटने के बाद यह पहला चुनाव है. आप लोगों के सामने यह चुनाव धारा 370 हटाने के फैसले पर मोदीजी को धन्यवाद देने का अवसर भी है.