Rajasthan BJP
Bharatiya Janata Party Rajasthan is a state unit of BJP in Rajasthan from Jaipur. Vasundhara Raje was the previous Chief Minister of Rajasthan during 2013-2018, previously she served in the same post from 2003 to 2008. She was the first female Chief Minister of Rajasthan.
राजस्थान: इन 6 नेताओं और संघ की मेहनत से प्रदेश में खिलेगा कमल
तमाम एग्ज़िट पोल राजस्थान में बीजेपी को 25 में से 19 या उससे भी ज्यादा सीटें दे रहे हैं. हालांकि इस बात में कोई शक नहीं है कि बीजेपी प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन करने जा रही है. इसका क्रेडिट जाता है बीजेपी के छह प्रमुख नेताओं को. पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, वसुंधरा राजे, सुंधाशु त्रिवेदी और चंद्रशेखर ने विधानसभा चुनाव में हार होने के बावजूद राज्य में बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया.
मोदी ने जहां ताबड़तोड़ सभाएं करते हुए अपने भाषणों से कार्यकर्ताओं को जोश दिलाया. शाह के नेतृत्व में मजबूत रणनीति को इन नेताओं ने अंजाम दिया. वसुंधरा राजे ने टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक कमान संभाले रखी. वहीं संघ ने कमजोर सीटों पर विशेष फोकस रखते हुए प्रत्याशियों को जीत की दहलीज पर ला खड़ा किया. अगर एग्ज़िट पोल के दावे नतीजों में तब्दील होते हैं तो बीजेपी का कम से कम 20 सीटों पर जीत तय है. पांच महीने पहले ही विधानसभा चुनाव में हारने वाली बीजेपी का कांग्रेस पर यह करारा पलटवार होगा.
आइए जानते हैं प्रदेश में कमल खिलाने में बीजेपी के किन छह नेताओं का अहम योगदान रहा …
पीएम नरेंद्र मोदी
बीजेपी की अगर एग्ज़िट पोल के तहत 20 सीटें आ रही हैं तो इसके रियल हीरो होंगे पीएम मोदी. मोदी का चेहरा और राष्ट्रवाद बीजेपी के लिए राजस्थान में संजीवनी बूंटी बन गया. हर प्रत्याशी बस ‘मोदी को ही वोट’ देने की रट लगा रहा था. जहां बीजेपी कमजोर थी, वहां मोदी ने ताबड़तोड सभाएं करते हुए अपने प्रत्याशियों को टक्कर में ला दिया. मोदी ने अपने ओजस्वी भाषण से कार्यकर्ताओं में जोश फूंक दिया. यह मोदी का ही करिश्मा था कि राजस्थान में फर्स्ट टाइमर्स वोटर्स थोक के भाव बीजेपी के पाले में गए.
अमित शाह
प्रदेश में कमल खिलाने में नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का अहम रोल रहा. शाह ने विधानसभा चुनाव में हार की भनक लगते ही राजस्थान पर ध्यान देना शुरु कर दिया था. इसके लिए शाह लगातार राजस्थान में दौरे करते रहे. इस दौरान शाह ने मौजूदा सांसदों की परफॉर्मेंस जानी. शाह ने ही रणनीति के तहत प्रकाश जावड़ेकर को राजस्थान चुनाव का प्रभारी बनाने का फैसला लिया. शाह की राय से ही टिकट वितरण से लेकर प्रचार प्रसार की रणनीति को अंजाम दिया गया था.
प्रकाश जावड़ेकर
केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर आलाकमान के चयन पर एकदम खरे साबित होते दिख रहे हैं. हर टास्क को जावड़ेकर ने बखूबी अंजाम दिया. जावड़ेकर ने कमान तब संभाली जब विधानसभा चुनाव में बीजेपी हार चुकी थी. जावड़ेकर ने हर सियासी और जातिगत समीकरण पर फोकस रखा. जातिगत समीकरण साधने के लिए नागौर की सीट हनुमान बेनीवाल को देने की चाल जावड़ेकर की ही थी. इसका फायदा बीजेपी को कईं सीटों पर मिलता दिख रहा है.
सुधांशु त्रिवेदी
सुधांशु त्रिवेदी को सहप्रभारी बनाकर चुनाव से पहले राजस्थान में भेजा गया था. त्रिवेदी ने हर जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए लगातार गहलोत सरकार पर आक्रामक हमले किए. कर्ज माफी और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने जैसे वादों की जमकर पोल खोली. साथ ही जमकर केंद्रीय योजनाओं के फायदे गिनाएं. त्रिवेदी ने प्रदेश सरकार पर जमकर आरोप लगाते हुए कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाए रखा.
वसुंधरा राजेे
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का प्रदेश की हर रणनीति में अहम रोल रहा. राजे ने टिकटों के बंटवारों से लेकर जातिगत समीकरण साधने और तूफानी चुनाव प्रचार तक पूरी कमान संभाले रखी. प्रदेश के तमाम नेताओं को राजे ने एकजुट बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां तक की राजे नाराजगी के बावजूद राज्यवर्धन सिंह और गजेंद्र सिंह का प्रचार करने गई थी.
चंद्रशेखर
बीजेपी प्रदेश संगठन मंत्री चंद्रशेखर के प्रयास भी पार्टी के लिए काम आए. चंद्रशेखर के प्रयासों के चलते ही संघ का बीजेपी को पूरा साथ मिला. शाह के निर्देशन में चंद्रशेखर पर्दे के पीछे हर रणनीति को अंजाम देते बखूबी नजर आए. चंद्रशेखर संघ के साथ मिलकर प्रत्याशियों को जिताने में जुटे रहे. यही वजह रही कि इस बार राजस्थान में संघ ने बीजेपी के लिए जमकर पसीना बहाया.
आरएसएस का रोल
जानकारों की माने तो संघ ने पहली बार राजस्थान में सक्रिय होकर अपना रोल निभाया. इस बार वसुंधरा राजे के बजाय चुनाव की कमान केंद्रीय नेताओं के हाथ में थी इसलिए संघ ने मोदी को दोबारा पीएम बनाने के लिए जी-जान से मेहनत की. बीजेपी का जीत के लिए अन्य राज्यों के स्वयंसेवक भी राजस्थान में आए. संघ ने सबसे ज्यादा ध्यान कमजोर सीटों पर दिया. यह संघ की मेहनत का ही कमाल था कि जहां कांग्रेस लाखों से जीत का दावा कर रही थी, वहां अब जीत का टोटा पड़ रहा है. यही वजह रही कि सीएम अशोक गहलोत ने संघ को राजनीतिक पार्टी बनाने की नसीहत दे दी.
अगर एग्ज़िट पोल के दावे सही साबित होते हैं तो इन छह धुंरधंर बीजेपी नेताओं का कद बढ़ना तय है. क्योंकि भीषण गर्मी में भी इन नेताओं ने दिन-रात एक कर दिया और सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस के ‘मिशन 25’ को फेल करने की दिशा में जुट गए.
खर्चे के खौफ से बीजेपी ने की राजस्थान में पीएम मोदी की सभाओं में कटौती!
आगामी लोकसभा चुनाव में राजस्थान बीजेपी नेतृत्व पिछली बार की तरह इस बार भी 25 सीटें जीतने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके लिए तैयारी में कई झोल दिखाई दे रहे हैं. यह जानते हुए कि चुनाव में मोदी ही पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं, स्थानीय नेता उनकी सभाओं से कतरा रहे हैं. गौरतलब है कि मोदी ने पिछले दिनों टोंक और चुरू में सभाएं की थीं. उनका तीन और सभाएं करने का कार्यक्रम तय था, लेकिन ये हो नहीं पाईं. पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके पीछे सभाओं में होने वाले खर्च था. आमतौर पर इस प्रकार की सभाओं के खर्च की रकम का इंतजाम पार्टी फंड से होता … Read more