राजस्थान: बीजेपी ने घोषित किए 4 उम्मीदवार, दौसा पर पेंच फंसा

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बीजेपी ने राजस्थान में शेष रही पांच लोकसभा सीटों में से चार पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. दौसा सीट पर प्रत्याशी का नाम की घोषणा अभी नहीं हो पाई ह़ै. जैसी की संभावना थी, राजसमंद लोकसभा सीट से पूर्व विधायक दीया कुमारी को टिकट दिया है. भरतपुर सीट से रंजीता कोली को उतारा गया है. बाड़मेर से कैलाश चौधरी और करौली-धौलपुर से मनोज राजौरिया को बीजेपी चेहरा बनाया है. नागौर सीट से हनुमान बेनीवाल बीजेपी के पक्ष में बतौर आरएलपी प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगे. यह भी पढ़ें: राजस्थान में BJP-RLP का गठबंधन, नागौर से चुनाव लड़ेंगे हनुमान बेनीवाल बता दें, बीजेपी इससे पहले 19 सीटों … Read more

कांग्रेस का कैसे होगा मिशन-25 पूरा, हर सीट पर नेताओं के हैं कई गुट

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राजस्थान में मिशन-25 में जुटी कांग्रेस का खेल उसके अपने ही बिगाड़ सकते हैं. हर लोकसभा सीट पर अपनों की नाराजगी का सामना कांग्रेस प्रत्याशियों को करना पड़ रहा है. एक-दो सीटों पर छोड़कर हर सीट पर कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है. गुटबाजी के चलते ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटों की गाड़ी सरकार बनाने लायक सीटों तक आकर रुक गई थी लेकिन दो धड़ों में बंटी कांग्रेस और टिकट नहीं मिलने से नाराज नेता अंदरखाने हिसाब चुकता करने की तैयारी में बैठे हैं. दिखावे के तौर पर नाराज नेता कांग्रेस प्रत्याशी के साथ मंच जरुर शेयर कर रहे है लेकिन जीत के लिए मेहनत नहीं कर रहे. … Read more

राजस्थान: बसपा ने जारी की 6 प्रत्याशियों की लिस्ट

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने राजस्थान लोकसभा चुनाव के लिए अपनी नई सूची जारी की है. इस लिस्ट में 6 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. लिस्ट में जोधपुर, जालौर, जयपुर शहर, पाली, चित्तौडगढ़ और बाड़मेर लोकसभा सीटें शामिल हैं. बीएसपी ने बाड़मेर से बखास्त आईपीएस पंकज चौधरी को टिकट देकर चौंका दिया है. जोधपुर से उनकी पत्नी मुकुल चौधरी को टिकट मिला है. बसपा की लिस्ट के अनुसार, जालौर से भागीरथ विश्नोई, जयपुर शहर से रिटायर्ड आईएएस उमराव सालोदिया, चित्तौड़गढ़ से डॉ.जगदीश चंद्र शर्मा और पाली से शिवाराम मेघवाल को टिकट दिया गया है. यह भी पढ़ें: यूपी में सपा-बसपा गठबंधन को झटका इससे पहले बीएसपी ने राजस्थान के लिए … Read more

मध्य प्रदेश: बीजेपी से उठा संघ का भरोसा, प्रचारकों ने खुद संभाला मोर्चा

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लगता है कि एमपी में विधानसभा चुनावों में हुई हार के बाद संघ का बीजेपी से भरोसा उठ सा गया है. शायद यही वजह रही कि संघ ने लोकसभा के सियासी समीकरणों को समझते हुए प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर अपने पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई है. इस मुहिम में संघ से जुड़े सभी संगठनों के ज्यादातर बड़े नाम शामिल हैं, जो हर लोकसभा सीट पर जाकर एक और बीजेपी के पक्ष में माहौल तैयार करेंगे. साथ ही भीतरघात और बगावती सुरों को साधने की कोशिश करेंगे. ऐसा करने की सबसे बड़ी वजह है, विधानसभा चुनावों के समय संघ ने मंत्रियों को डैमेज कंट्रोल करने की जिम्मेदारी सौंपी थी जिसमें … Read more

वसुंधराजी कहती थी-गहलोत सड़कों पर घूमकर भीख मांग रहा है: गहलोत

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आखिरकार अपने बेटे वैभव गहलोत को प्रदेश की सक्रिय राजनीति में प्रवेश कराने के लिए जोधपुर आ ही गए. उन्होंने वैभव की लोकसभा सीट और अपनी कर्मस्थली में वैभव के लिए शहर की जनता के आशीर्वाद के साथ वोट भी मांगे. इस दौरान उन्होंने प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुन्धरा राजे पर भी निशाना साधा. वसुंधराजी कहती थी ‘गहलोत सड़कों पर घूमकर भीख मांग रहा है।’ मैंने कहा कि वसुंधराजी, मुझे गर्व हो रहा है कि मैं लोगों के बीच जा रहा हूं. यह भी पढ़ें: जोधपुर में गर्माया ‘स्थानीय’ का मुद्दा, एक-दूसरे पर बाहरी होने का तंज जोधपुर से मेरा … Read more

उत्तर प्रदेश: जातिगत और सांप्रदायिक राजनीति से हाशिए पर पहुंचे वाम दल

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में लेफ्ट पार्टियां (वामदल) हाशिए पर आ खड़ी हुई हैं. कभी यूपी की राजनीति का केंद्र बिन्दु रहने वाली लेफ्ट पार्टियां (वाम दल) 1991 के बाद एक सांसद तक को जिता कर दिल्ली नहीं भेज पाईं. स्थिति यह है कि आज सीपीआई के अलावा कोई यहां से लोकसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारने की स्थिति में भी नहीं हैं. सीपीआई ने तीन सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं और सात से आठ सीटों पर प्रत्याशियों की घोषित करने जा रहे हैं. यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं. आजादी के बाद की बात करें तो 1957 से 1991 के बीच हुए लोकसभा चुनावों में यूपी से … Read more

राजस्थान: जोधपुर में गर्माया ‘स्थानीय’ का मुद्दा, एक-दूसरे पर बाहरी होने का तंज

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देश में होने वाले आम चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों का अपना महत्व होता ही है लेकिन राजस्थान की सबसे हॉट सीट जोधपुर में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ ही इस बार स्थानीय होने का मुद्दा काफी गर्मा रहा है. हालांकि इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे वैभव गहलोत और बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत दोनों ही प्रत्याशियों की जन्मभूमि जोधपुर नहीं है. इसके बावजूद दोनों अपने आप को स्थानीय बताने के लिए अलग-अलग दलीलें पेश कर रहे हैं. जोधपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को फिर एक बार मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों को दरकिनार करते हुए प्रदेश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे को चुनावी मैदान में उतारा है.

एक अप्रैल को जब वैभव गहलोत जोधपुर आए तो बीजेपी प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि प्रवासी (बाहरी) का जोधपुर में स्वागत है. शेखावत की ओर से वैभव गहलोत को बाहरी बताए जाने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ता भी आक्रामक नजर आ रहे हैं. इसके बाद तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गजेंद्र सिंह को ही बाहरी प्रत्याशी बताना शुरू कर दिया है. वैसे देखा जाए तो वैभव और गजेंद्र सिंह दोनों की जन्मभूमि जोधपुर नहीं है.

बात करें गजेंद्र सिंह शेखावत की तो वह मूल रूप से सीकर जिले के मेहरोली से हैं. उनका जन्म जैसलमेर में हुआ था. उनके स्कूली शिक्षा बीकानेर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में हुई थी. कॉलेज शिक्षा जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में हुई और यही से उन्होंने छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ते हुए अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. छात्रसंघ अध्यक्ष चुने जाने के बाद शेखावत ने जोधपुर संभाग के अलग-अलग जिलों में संगठनात्मक दृष्टि से काम किया और इसी को आधार बनाते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत अपने आप को जोधपुर का साबित कर रहे हैं.

बात की जाए वैभव गहलोत की तो उनका जन्म जयपुर में हुआ. स्कूल शिक्षा दिल्ली तो उच्च शिक्षा पूना में हुई. वैभव लंबे समय से जयपुर में ही रह रहे हैं लेकिन 2003 के बाद से सभी विधानसभा, लोकसभा और नगर निगम के चुनावों में वैभव गहलोत जोधपुर की राजनीति में सक्रिय नजर आए. खुद वैभव भी अपने हर संबोधन में खुद को जोधपुर का बेटा बताते हुए कहते हैं कि उनके दादा बाबू लक्ष्मणसिंह में जोधपुर की सेवा की और उसके बाद उनके पिता अशोक गहलोत पिछले 40 वर्षों से जोधपुर की जनता के बीच रहकर कार्य कर रहे हैं. गजेंद्र सिंह के तंज का जवाब देते हुए वैभव गहलोत कहते हैं कि उन्हें प्रवासी बताने वाले पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें कि वह स्वयं कहां से आए हैं.

खैर, कौन प्रवासी है, यह मुद्दा तो चुनावी है लेकिन इस बार जोधपुर में दोनों ही पार्टियों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा है. यह सीट अशोक गहलोत के होने से कांग्रेसी गढ़ है और वैभव खुद अपने पिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं. वहीं गजेंद्र सिंह को भी इस बात का अहसास है और वें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों एक-एक वोट को अपने पक्ष में करने के लिए दमखम लगा रहे हैं. ज्यो-ज्यो चुनाव की तारीख नजदीक आती जाएगी, जबानी हमले तो तेज होंगे ही लेकिन प्रवासी और स्थानीय का यह मुद्दा अपनी गर्माहट बनाए रखेगा.