मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ राजनीतिक अदावत के चलते नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा

पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सिद्धू ने लगभग एक महीने व पांच दिन पहले 10 जून को अपना इस्तीफा राहुल गांधी को सौंप दिया था लेकिन इसका खुलासा आज किया है. सिद्धू ने ट्विट कर रविवार को यह जानकारी सार्वजनिक की, उन्होंने ट्वीट कर यह भी बताया कि अब वे अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेज रहे हैं. लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था, जिसका ठीकरा अमरिंदर सिंह ने सिद्धू पर फोड़ा था और इसकी शिकायत कांग्रेस आलाकमान से करने के साथ ही चुनाव बाद कि पहली कैबिनेट बैठक में ही सिद्धू … Read more

गोवा: कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए विधायकों को मंत्रीपद का तोहफा, सहयोगियों को धोखा

गोवा में चल रही सियासी उठापटक के ​बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने आज कैबिनेट का विस्तार किया. मंत्रीमंडल में उन्होंने चार नए विधायकों को शामिल किया है. साथ ही सहयोगी कोटे से मंत्री बने तीन विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया है. हालांकि अभी उक्त तीनों विधायक गठबंधन में शामिल हैं लेकिन अगर ये चले भी जाते हैं तो भी गोवा सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. 40 सदस्यों की गोवा विधानसभा में 27 बीजेपी विधायक मौजूद हैं. मंत्रीमंडल में शामिल किए तीन मंत्रियों में वे विधायक शामिल हैं जो हाल में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं. जेनिफर मोनसेरात, फिलिप नेरी रॉड्रिग्ज और चंद्रकांत कावलेकर को … Read more

गोवा में मंत्रिमंडल विस्तार आज, कवलेकर बन सकते हैं डिप्टी सीएम

गोवा सरकार के मंत्रिमंडल का आज विस्तार होना है. शपथग्रहण समारोह दोपहर 3 बजे राजभवन में होगा. सत्तारुढ़ बीजेपी में शामिल होने वाले कांग्रेस के तीन असंतुष्ट विधायकों समेत 4 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान डिप्टी स्पीकर माइकल लोबो, बाबूश मोन्सेरात और फिलिप नेरी रॉड्रिग्स को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी. कांग्रेस से आए चंद्रकांत कवलेकर को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है. गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जीएफपी के तीन विधायकों और निर्दलीय विधायक रोहन खुंटे से कैबिनेट से इस्तीफा देने को कहा है. बता दें कि गोवा विधानसभा में अब बीजेपी के विधायकों की संख्या 27 हो गई है. अब … Read more

8 दिन में तीसरी बार कोर्ट में पेश हुए राहुल गांधी, मानहानि मामले में मिली जमानत

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक और मानहानि के मामले में 15 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिली है. आज राहुल गांधी अहमदाबाद पहुंचे और कोर्ट मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हुए. मानहानि का यह मुकदमा पिछले साल तब दायर किया गया था जब राहुल गांधी और रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया था कि अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक नोटबंदी की घोषणा के पांच दिन के अंदर करीब 745 करोड़ रुपये के बंद हो चुके नोटों को बदलने के घोटाले में शामिल था. पिछले आठ दिनों में तीसरी बार है जब राहुल गांधी तीन अलग-अलग मानहानि के मामले में अदालत में पेश हुए हैं. वे पिछले दिनों पटना और … Read more

कभी सियासत की सिरमौर रही कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व आज खतरे में है

कांग्रेस के अस्तित्व पर ऐसा संकट कभी नहीं आया, जैसा आज दिख रहा है. कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है. कभी देश की सियासत की सिरमौर रही कांग्रेस, जिसकी तूती पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण हर दिशा में बोलती थी. वही कांग्रेस आज अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है. 2014 के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस बुरी तरह हारी. इसके बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया तो पार्टी के नेता एक महीने से ज्यादा समय से नया अध्यक्ष चुनने की बजाय उनकी मान-मनुहार में जुटे रहे. राहुल गांधी पर इस मान-मनुहार का कोई असर नहीं हुआ और अब कांग्रेस बिना कप्तान का जहाज बन गई है.

कर्नाटक का सियासी घमासान अपने चरम पर है और गोवा में कई विधायक पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं. कांग्रेस में नया अध्यक्ष चुनने की तैयारी भी नहीं दिख रही है. इस संबंध में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक तक नहीं बुलाई गई. यह ढीला रवैया देखकर कई वरिष्ठ नेता ये मानने लगे हैं कि मौजूदा संकट जल्द ही नहीं सुलझा तो कांग्रेस पार्टी खत्म हो जाएगी.

देखा जाए तो यह चर्चा आधारहीन भी नहीं. राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने से लेकर अभी तक के घटनाक्रम और कांग्रेस नेताओं के बयान इसी तरफ इशारा कर रहे हैं कि पार्टी आजाद भारत में अपने सबसे बुरे दौर गुजर रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने यहां तक कह दिया कि ऐसा लग रहा है जैसे भाजपा कांग्रेस को खत्म करने के लिए ही सत्ता में आई है.

लोकसभा चुनाव हारने के बाद निराश होकर राहुल गांधी ने इस्तीफा दिया. उसके बाद पार्टी पदाधिकारियों में एक के बाद एक पद छोड़ने की होड़ लग गई. तब मौके के नजाकत को देखते हुए नए अध्यक्ष के चुनाव का सिलसिला शुरू होना चाहिए था. लेकिन पूरी पार्टी का ध्यान राहुल गांधी को मनाने पर रहा. पार्टी बगैर अध्यक्ष चलती रही और इसी का परिणाम है कि पार्टी टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है.

कर्नाटक में कांग्रेस के 13 विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे वहां की जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार संकट में आ गई है. कर्नाटक उथल-पुथल के बीच गोवा में भी कांग्रेस के 15 में से 10 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए.

अन्य राज्यों में भी कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग गुट बने हुए हैं. कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश में पार्टी नेताओं की गुटबाजी जगजाहिर है. मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ पर पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण इस्तीफा देने का दबाव है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक इस दिशा में सक्रिय हो गए हैं. गुरुवार को सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट के बंगले पर हुए भोज के बाद गुटबाजी के कयास तेज हो गए हैं. हालांकि इस भोज में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही सरकार को समर्थन दे रहे सभी निर्दलीय, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के विधायक भी शामिल थे.

बताया जाता है कि कर्नाटक और गोवा के घटनाक्रम से सतर्क कांग्रेस मध्य प्रदेश में सभी विधायकों को एकजुट रखने का प्रयास कर रही है. इसीलिए सिलावट ने सभी विधायकों के लिए भोज का आयोजन किया था. लेकिन कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि इस भोज के जरिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया है. सिंधिया ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह समय कांग्रेस के लिए गंभीर है और जल्द से जल्द कोई फैसला होना चाहिए. राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच चल रही आपसी खींचतान किसी से छुपी हुई नहीं है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी भी पार्टी की मौजूदा स्थिति से दुखी हैं. उन्होंने राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नया पार्टी अध्यक्ष चुनने के लिए अब तक कांग्रेस कार्य समिति की बैठक नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की है. संकेत यही है कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष नहीं चुना गया तो आगे पार्टी का अस्तित्व बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा.

विधायक क्यों छोड़ रहे हैं कांग्रेस, प्रकाश जावड़ेकर की जुबानी जानिए सवाल का जवाब

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद ऐसा क्या हो गया है कि विधायक और सांसद समेत बड़े पदाधिकारी तक ‘हाथ’ का साथ छोड़ रहे हैं. शायद यह सवाल इस समय सभी के दिमाग में चल रहा है. खुद कांग्रेस नेताओं और आलाकमान के दिलोदिमाग पर भी यह सवाल छाप छोड़ रहा है लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है. खुद राहुल गांधी इन सवालों से बचते फिर रहे हैं. हाल में कर्नाटक एवं गोवा के विधायकों ने कांग्रेस का साथ छोड़ बीजेपी का आसरा लिया है. इसके बाद तो इस तरह के सवाल और भी गहरे हो गए हैं. लेकिन इन सभी सवालों के प्रकाश जावड़ेकर ने दिए हैं. … Read more

कांग्रेस अध्यक्ष तय करने में जितनी देर होगी उतनी गुटबंदी बढ़ेगी और शुरू होगा बिखराव

2019 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद पार्टी का नेतृत्व कौन संभालेगा, अब तक तय नहीं हो पा रहा है. नेहरू-गांधी परिवार की चार पीढ़ियों से कांग्रेस के साथ रहे कर्ण सिंह का इस बारे में कहना है कि पार्टी के नेतृत्व को लेकर जल्दी फैसला नहीं हुआ तो इससे पार्टी में भ्रम फैलेगा और कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ेगी. इससे कई कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं.

राहुल गांधी के बाद पार्टी को कौन संभालेगा, इस पर भारी असमंजस बना हुआ है. यह साफ नहीं है कि पार्टी में महत्वपूर्ण फैसले कौन करेगा. औपचारिक तौर पर कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण फैसले कांग्रेस कार्य समिति करती है. नई परिस्थितियों में CWC रबर स्टांप की तरह काम करेगी या इसमें शामिल नेता आपसी सलाह-मशविरे से फैसला करेंगे, यह तय नहीं है. राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी की निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे.

पार्टी में सभी लोग यह मानते हैं कि जो भी नया अध्यक्ष होगा, वह नेहरू-गांधी परिवार की पसंद का होगा. समझा जाता है कि इसी लिए नए अध्यक्ष की ताजपोशी में समय लग रहा है. कांग्रेस में इस समय पीढ़ियों का स्थानांतरण भी हो रहा है. अगर नई पीढ़ी के नेता कांग्रेस की निर्णय प्रक्रिया में शामिल हुए तो क्या पुराने नेता इसे स्वीकार कर पर पाएंगे?
एक मुद्दा यह भी है कि नया कांग्रेस अध्यक्ष उत्तर भारत से होगा या दक्षिण भारत से. कांग्रेस को दक्षिण भारत में अच्छी सफलता मिली है. इसके मद्देनजर कांग्रेस का नया अध्यक्ष दक्षिण भारत से हो सकता है. लेकिन इसके साथ ही पार्टी को उत्तरी और पूर्वी भारत में भी मजबूत बनाने की जरूरत होगी. यह कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. इस लिए मध्य भारत से भी नया कांग्रेस अध्यक्ष चुना जा सकता है. जो भी हो, लेकिन कांग्रेस को इस समय नेतृत्व पर तत्काल फैसला करने की जरूरत है. इसमें देर करने से पार्टी में गुटबंदी बढ़ेगी और बिखराव शुरू हो सकता है.
इसका संकेत जनार्दन द्विवेदी ने दे दिया है. जनार्दन द्विवेदी वरिष्ठ नेता हैं और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के पूर्व महासचिव रह चुके हैं. उन्होंने नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए चल रही अनौपचारिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए हैं. उन्होंने इस प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया है. उनका कहना है कि राहुल गांधी इसके लिए कुछ नेताओं को मनोनीत कर देते तो ठीक होता. जब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थी और इलाज के लिए विदेश गई थी, तब उन्होंने पार्टी के चार वरिष्ठ नेताओं को रोजमर्रा का काम देखने के लिए नियुक्त किया था. राहुल गांधी भी इस्तीफा देने के बाद ऐसा कर सकते थे.
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं की एक समन्वय समिति का गठन किया था. उस समिति में शामिल वरिष्ठ नेता ही विचार-विमर्श की प्रक्रिया में लगे हुए हैं. लेकिन पार्टी संविधान के मुताबिक इन नेताओं को ऐसा करने का अधिकार नहीं है. समिति के सदस्य वरिष्ठ नेता एके एंटनी इस विचार-विमर्श में भाग नहीं ले रहे हैं. जनार्दन द्विवेदी का सवाल है कि फिर इस समिति की वैधता क्या है? उन्होंने मंगलवार को एक पत्र भी जारी किया, जो उन्होंने 2014 में लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा था.

15 सितंबर, 2014 को लिखे गए इस पत्र के मुताबिक उस समय द्विवेदी कांग्रेस महासचिव पद छोड़ना चाहते थे. उन्होंने सोनिया गांधी से नई पीढ़ी के नेताओं के साथ मिलकर पार्टी का पुनर्गठन करने और बुजुर्ग नेताओं को कम मेहनत वाली जिम्मेदारियां सौंपने का अनुरोध किया था. उस समय सोनिया गांधी ने पत्र को सार्वजनिक नहीं करने के लिए कहा था. अब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं हैं, इसलिए उन्होंने वह पुराना पत्र सार्वजनिक करने का फैसला किया है.

जनार्दन द्विवेदी का कहना है कि जब किसी समाज या संगठन में व्यक्तिगत विचार प्रकट करने की आजादी नहीं होती, तब उस संगठन में लोकतंत्र मृतप्राय हो जाता है. उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस कार्यसमिति ऐसा नेता का चुनाव करेगी, जो पार्टी कार्यकर्ताओं को स्वीकार्य हो. अगर नेता पार्टी को ही स्वीकार नहीं होगा तो देश उसे कैसे स्वीकार करेगा. गौरतलब है जनार्दन द्विवेदी पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे हैं.

कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी की राहुल गांधी को नसीहत, कहा ‘इस्तीफे से पहले करना था यह काम’

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिन्दर सिंह का कांग्रेस अध्यक्ष पर बयान क्या आया, दिग्गज़ नेताओं ने भी बयान देना और नसीयत देना शुरू कर दिया है. हाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने पत्र लिखकर कहा था कि राहुल के इस्तीफा देने के 6 हफ्तों के बाद भी कांग्रेस अनिर्णय की स्थिति में है. ऐसे में जल्दी से जल्दी मनमोहन सिंह के नेतृत्व में CWC की बैठक बुलाकर फैसला लिया जाए और एक अध्यक्ष के साथ चार संभागों के लिए उपाध्यक्ष बनाया जाए. अब कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी का बयान सामने आया है. उन्होंने राहुल गांधी को नसीयत देते हुए कहा कि राहुल गांधी … Read more