जींद में अमित शाह के तेजस्वी भाषण के साथ ही विधानसभा चुनाव का बजा बिगुल

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में अपनी जबरदस्त ताल ठोक चुकी बीजेपी अब साल के आखिर में होने वाले हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड राज्यों के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से इसकी शुरुआत की.

केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को हरियाणा के एकलव्‍य स्‍टेडियम में आयोजित आस्‍था रैली में ‘भारत माता की जय’ के जयकारे के साथ आगामी महीनों में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा दिया. अमित शाह के भाषण का अधिकांश हिस्सा कश्मीर से अनुच्छेद370 को हटाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ पर रहा. शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश की जनता और सरदार बल्‍लभ पटेल के सपने को पूरा किया है. मोदी सरकार ने देश को एक किया और जम्‍मू-कश्‍मीर से 370 हटाकर वहां विकास की राह खोली. उन्‍हाेंने चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ को देश की सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम बताते हुए दुश्‍मन के लिए वज्र के समान बताया.

कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुये बीजेपी के चाणक्य ने कहा कि 70 साल तक कांग्रेस की सरकार वोटबैंक के लालच में जम्मू कश्मीर में ये सब नहीं कर पाई. नरेंद्र मोदी वोट बैंक की राजनीति नहीं करते और उनको बस मां भारती की परवाह है. यही कारण है कि उन्होंने जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 खत्‍म करने का निर्णय किया और जो काम 70 साल में नहीं हुआ वो मोदी जी ने 75 दिनों में कर दिखाया.

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘मैं हरियाणा में जब भी आया यहां की जनता ने हमेशा मेरी झोली कमल के फूलों स्व भरी दी. विधानसभा चुनाव में आया तो यहां पहली बार भाजपा की सरकार बना दी. लोकसभा चुनाव में आया तो जनता ने अपार प्यार दिया और मोदी जी के नेतृत्व में 300 पार की फिर से सरकार बना दी. इस बार आया हूँ तो मुझे विश्वास है कि इस बार भी जब चुनाव होंगे तो वीरभूमि के लोग 75 सीटों के साथ मनोहर लाल खट्टर को आशीर्वाद देंगे.’

गृहमन्त्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ की नियुक्ति का बड़ा कदम उठाया है. यह देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा कदम है. इससे देश की तीनों सेनाएं बेहतर तालमेल से काम कर सकेंगी. यह दुश्‍मन के लिए वज्र के समान साबित होगा. अमित शाह ने कहा, आज कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक एकसूत्र में बंध चुका है. पीएम मोदी ने मां भारती का गौरव बढ़ाया है. आज पूर्व प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की आत्‍मा ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनुच्‍छेद 370 को हटाने के लिए आशीर्वाद दे रही होगी.

अमित शाह ने हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल की भी जमकर तारीफ की और हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की. उन्‍होंने कहा कि जाति व वर्ग की राजनीति करने वाले नेताओं ने हरियाणा में नफरत और भेदभाव का माहौल बना रखा था. मनोहरलाल की सरकार ने इसे खत्‍म कर पूरे राज्‍य का समान विकास कराया और जनता में उम्‍मीद की लौ जलाई. साथ ही उन्‍होंने कांग्रेस और चौटाला परिवार पर जमकर हमले किए. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस और चौटाला परिवार ने हरियाणा का सत्‍यानाश किया. मनोहरलाल की सरकार ने नौकरियों में भेदभाव और भ्रष्‍टाचार खत्‍म किया.

अमित शाह ने हुड्डा और चौटाला को खुले मंच से चुनौती देते हुए कहा कि वह विकास के लिए खर्च पैसों का हिसाब किताब और आंकड़े लेकर जनता के बीच जाएं, हमारे मुख्यमंत्री उनसे बहस करने को तैयार हैं. उन्‍होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और चौटाला सरकारों पर उठाए सवाल. उन्‍होंने कहा, पूर्व सरकारों में हरियाणा जमीन के व्यापार के लिए जाना जाता था. सरकारें बिल्डरों के हाथ में कठपुतलियां बनकर खेलती थी और नौकरियां व्यवसाय थीं. लेकिन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार ने भ्रष्टाचार को भूतकाल बना दिया है.

अमित शाह ने कहा कि हरियाणा से सभी लालों के जाने के बाद हमारा लाल (मनोहरलाल) आया है. हरियाणा में अब जातिवाद खत्‍म हो चुका है. जाति के आधार पर नौकरियों नहीं मिलती हैं और न ही जाति व क्षेत्र के आधार पर विकास होता है. तबादलों में पारदर्शिता लाकर मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल ने जनता को भारी राहत दी. लिंगानुपात में सुधार हो या ऑनलाइन तबादले या आशा वर्करों और आंगनबाडी वर्करों के मानदेय में इजाफा, मनोहर सरकार ने शानदार काम किया है.

इससे पहले रैली में पहुंचने पर अमित शाह का नारों से जोरदार स्‍वागत किया गया. रैली के आयोजक पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने अमित शाह हो ‘स्‍टील मैन’ करार दिया. अमित शाह का रैली स्‍थल पर हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल, प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष सुभाष बराला और बीरेंद्र सिंह ने अगवानी की. मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने अमित शाह का स्‍वागत किया और उनको लौह पुरुष बताया. बीरेंद्र सिंह ने जम्‍मू-कश्‍मीर से 370 हटाने के लिए अमित शाह काे हरियाणवी लठ भेंट किया.

गौरतलब है कि इस आस्था रैली का आयोजन जींद में बीजेपी के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह द्वारा करवाया गया. जींद चौधरी बीरेंद्र सिंह का गृह जिला भी है और चौधरी बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता जींद जिले की उचाना सीट से विधायक हैं. हिसार संसदीय क्षेत्र से उनके बेटे बृजेंद्र सिंह भी सांसद हैं. इस रैली में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के प्रभारी महासचिव अनिल जैन सहित तमाम मंत्री और नेता मौजूद रहे.

भाजपा के संगठन चुनाव का कार्यक्रम तय

भाजपा के संगठन चुनाव का कार्यक्रम तय हो गया है. चुनाव प्रक्रिया 11 सितंबर से शुरू होगी और अगले साल की शुरूआत में भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा. फिलहाल अमित शाह भाजपा अध्यक्ष हैं. उनके गृहमंत्री बनने के बाद जेपी नड्डा को अंतरिम तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. मंगलवार 13 अगस्त को दिल्ली में भाजपा के 33 राज्यों के चुनाव अधिकारियों की कार्यशाला हुई थी. इसमें संगठन चुनाव की रूपरेखा विस्तार से बताई गई. कार्यशाला में भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव प्रभारी पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, कार्यवाहक अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन चुनाव के प्रभारी महासचिव बीएल संतोष मौजूद थे. भाजपा का संगठन चुनाव … Read more

कांग्रेस को अब सोनिया गांधी से फायदा कम, नुकसान ज्यादा

कांग्रेस को लेकर जो घटनाक्रम चल रहा है, उससे लगता है कि सोनिया गांधी के अलावा कांग्रेस को और कोई नहीं संभाल सकता. अब कांग्रेस बिखरेगी, क्योंकि राजनीति में सोनिया गांधी की स्थिति पहले जैसी नहीं रही. अब सोनिया की मौजूदगी से कांग्रेस को फायदा कम, नुकसान ही ज्यादा होगा. सोनिया गांधी ने बड़े जतन से कांग्रेस अध्यक्ष संभाला था, यह सोचकर कि उनके बाद उनका बेटा राहुल कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएगा. देश पर परिवार का राज कायम रहेगा. राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बन भी गए, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ. कांग्रेस की हालत ‘ढाक के तीन पात’ जैसी हो गयी है. एक सोनिया गांधी, दूसरे राहुल गांधी और … Read more

शपथ ग्रहण के 18 दिन बाद भी मंत्रिमंडल का गठन तक न कर सके येदियुरप्पा, कांग्रेस के निशाने पर राज्यपाल

कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारास्वामी के इस्तीफा देने के बाद येदियुरप्पा ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. तब से वे अकेले ही सरकार चला रहे हैं. मंत्रिमंडल का गठन न होने पर कर्नाटक कांग्रेस ने प्रदेश गवर्नर वजूभाई वाला पटेल की चुप्पी पर सवाल उठाए.  कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद की शपथ ग्रहण किए पूरे 18 दिन हो चुके हैं लेकिन वे अभी तक सरकार का मंत्रिमंडल तक गठित नहीं कर पाए हैं. ऐसे में येदियुरप्पा के साथ कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला पटेल विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारास्वामी के इस्तीफा देने के … Read more

सूखते पोखर में बैठी भैंस की तरह हो चुकी है कांग्रेस

गई भैंस पानी में और कहां जाएगी? कांग्रेस की यही हालत है. कांग्रेस के पास ऐसा कोई दमदार नेता नहीं बचा, जो पार्टी को संभाल सके. बेचारी सोनिया को ही बुढ़ापे में इतना बड़ा बोझ उठाना पड़ेगा. एक निष्प्राण हो रही पार्टी को सोनिया कैसे प्राणदान दे सकती हैं? सबकुछ उनका ही किया धरा मालूम पड़ता है. भुगतना भी उन्हें ही पड़ेगा. उन्हीं की वजह से कांग्रेस आज एक सूखते पोखर में बैठी हुई भैंस की तरह हो गई है. उसको सोनिया गांधी के अलावा कोई नहीं संभाल सकता. कांग्रेस की ऐसी हालत कैसे हुई? इस तरह के दुर्दिन क्यों आए? कांग्रेस अच्छी भली पार्टी थी. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान … Read more

गहलोत सरकार को भारी पड़ेगा बिजली महंगी करने का फैसला

राजस्थान में गहलोत सरकार ने राज्य की मध्यमवर्गीय जनता पर बिजली की दरों का बोझ बढ़ाने का फैसला अगर कर ही लिया है तो उसे इसके राजनीतिक परिणामों का भी अनुमान कर लेना चाहिए. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूरी तरह बहुमत भी नहीं मिला था. किसी तरह उसकी सरकार बन गई है तो उसे जनता का समर्थन समाप्त करने वाले काम नहीं करने चाहिए. दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने मध्यम वर्ग को बिजली में राहत देकर प्रशंसनीय कार्य किया है, जिसका लाभ उसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिलेगा. ऐसे में पड़ौसी राज्य राजस्थान की गहलोत सरकार के बारे में जनता क्या सोचेगी?

राजस्थान में कोई भी सरकार रही हो, मध्यम वर्गीय जनता को महंगाई के भार से दबाने में उसने कोई कंजूसी नहीं की है. अन्य राज्यों की सरकारें राजस्थान सरकार से प्रेरणा ले सकती है कि आम लोगों की जेब से ज्यादा पैसा किस तरह निकाला जाए. यहां पहले बिजली वितरण का काम बिजली बोर्ड संभालता था. उसके बाद नई नीतियां बनीं. निजी कंपनियां बिजली उत्पादन करने लगीं तो बिजली वितरण का ढांचा भी सरकार को बदलना पड़ा. 2000 में राज्य में जयपुर, अजमेर और जोधपुर में तीन विद्युत वितरण निगम कंपनी की तर्ज पर बना दिए, जिन्हें डिस्कॉम कहा जाता है.

राजस्थान के तीनों डिस्कॉम की कार्यप्रणाली में राज्यहित कम, मुनाफाखोरी ज्यादा है. राजस्थान में 2000 में जो बिजली दरें थीं, उनमें डिस्कॉम 16 साल में 99 फीसदी बढ़ोतरी कर चुके हैं. शायद राज्य सरकार यह समझती है कि राजस्थान में कमाने खाने वाले लोग ज्यादा हैं, जीवन चलाने के लिए इतना अतिरिक्त पैसा तो जेब से निकाल ही सकते हैं. इस तरह सरकार खामोशी से आवाम की जरूरियात का फायदा उठाने पर तुली हुई है. शायद इसलिए कि विधानसभा चुनाव चार साल बाद होंगे.

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दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने मध्यमवर्गीय जनता का बोझ कम करने का सराहनीय प्रयास किया है, क्योंकि अगले साल ही दिल्ली विधानसभा चुनाव होंगे. पिछले विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी को छप्परफाड़ बहुमत मिला था, जिससे दिल्ली के पूरे राजनीतिक समीकरण बदल गए थे. राजस्थान में हालांकि कोई नई पार्टी नहीं है, लेकिन गहलोत सरकार से लोगों को उम्मीदें रहती हैं. लेकिन उनके सरकार चलाने में कुछ ऐसा होता है कि जनता उनसे नाराज हो जाती है और सरकार बदल देती है. गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस ने दो बार विधानसभा चुनाव हारे. अब गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं. लोगों ने उन पर फिर से भरोसा किया है. उनकी सरकार ने काम संभालते ही सबसे पहले पेट्रोल-डीजल महंगा किया, और अब विधानसभा का पहला सत्र संपन्न होने के बाद बिजली महंगी होने की चर्चा जोर पकड़ रही है.

केजरीवाल सरकार ने इस बात को समझा कि मध्यमवर्गीय लोगों के लिए बिजली कितनी जरूरी है. पिछले साल उनकी सरकार ने बिजली की दरें बढ़ाई थी. जनता की परेशानियों को देखते हुए अब उन्होंने एक झटके में बिजली के बिलों में बड़ी राहत देते हुए दिल्ली के मध्यमवर्गीय परिवारों का दिल जीत लिया है. गहलोत के बारे में लोग क्या सोचेंगे? आजकल मध्यमवर्गीय परिवारों का जीवन बिजली से ही चलता है. ईंधन उपलब्ध नहीं होने पर हीटर विकल्प होता है. पंखा, टीवी, लाइटें, फ्रीज जैसे सामान हर घर में देखे जा सकते हैं. इन सबके लिए बिजली जरूरी है. बिजली महंगी होने से अनिवार्य रूप से आर्थिक बार बढ़ जाता है.

दिल्ली के डिस्कॉम ने दो किलोवाट तक बिजली की दरें 125 रुपए से घटाकर 20 रुपए प्रति किलोवाट कर दी है. 1200 यूनिट से ज्यादा खपत होने पर दरें प्रति यूनिट चार आने बढ़ाकर 7.75 से बढ़ाकर आठ रुपए प्रति यूनिट कर दी है, जिससे संपन्न लोगों पर ही थोड़ा भार बढ़ेगा, जो ज्यादा बिजली खर्च करते हैं. दो से पांच किलोवाट की खपत पर बिजली शुल्क 140 से घटाकर 50 रुपए प्रति यूनिट कर दिया गया है. पांच से 15 किलोवाट के कनेक्शन पर प्रति किलोवाट शुल्क 175 से घटाकर सौ रुपए कर दिया है. 15 से 25 किलोवाट के लिए कोई बदलाव नहीं है.

दिल्ली में चलने वाले ई-रिक्शा और विद्युत वाहनों को चार्ज करने के लिए स्टेशनों पर भी बिजली की दरें घटा दी गई हैं. एलटी लेवल पर चार्ज 5.5 से घटाकर 4.5 रुपए यूनिट और एचटी लेवल पर चार्ज पांच से घटाकर चार रुपए कर दिया गया है. दिल्ली में बिजली की ये दरें एक अगस्त से लागू हो गई हैं. इधर राजस्थान में लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि बिजली की खपत कैसे कम करें, क्योंकि वह जीवन चलाने के लिए जरूरी है. राजस्थान के तीनों डिस्कॉम के अधिकारियों को दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के प्रमुख आरएस चौहान से प्रेरणा लेनी चाहिए और संभव हो सके उनसे मिलकर यह सीखना चाहिए कि लोगों पर बिजली की दरों का भार कम कैसे किया जा सकता है.

आजकल की राजनीति मध्यमवर्गीय लोगों की भावना से चलती है. दिल्ली के लोगों के मन में केजरीवाल बैठ चुके हैं. राजस्थान के लोगों को अब तक ऐसा कोई नेता नहीं मिला, जो उनके मन में सम्मानजनक जगह बना सके. पद का सम्मान होता है. पद पर बैठे व्यक्ति का बाद में भी उसी के अनुरूप सम्मान हो तो बात बनती है. गहलोत को राजस्थान के कई लोग पसंद करते हैं. उनकी सरकार के महंगाई बढ़ाने वाले फैसलों से उन्हें नापसंद करने वालों की तादाद बढ़ेगी. महंगाई के जमाने में आर्थिक राहत बहुत बड़ी बात होती है. विधानसभा में गहलोत सरकार ने मंत्रियों, विधायकों के वेतन-भत्ते तुरत-फुरत बढ़वा लिए. राजस्थान की आम जनता ने क्या गुनाह किया है?

बहरहाल बिजली की दरें बढ़ाने का फैसला गहलोत पर बहुत भारी पड़ने वाला है. इससे गहलोत सरकार के खिलाफ जनभावना बनेगी और कांग्रेस में पहले से ही दो गुट बने हुए हैं. सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री पद संभाले हुए हैं. जनता में सरकार का विरोध बढ़ने पर नेतृत्व परिवर्तन से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

मध्यमवर्गीय लोग जैसे तैसे जीवन यापन कर रहे हैं. बाजार में भयंकर मंदी की आहट है. आमदनी और खर्च का संतुलन बिगड़ रहा है. ऐसे में बिजली जैसे जरूरी साधन का महंगा होना किसे पसंद आएगा? सरकार कितने ही तर्क दे कि ऐसा है, वैसा है, इसलिए जरूरी है, लेकिन वह लोगों के गले उतरने वाला नहीं है. सरकार अपना राजस्व बढ़ाने के लिए बिजली, पानी, ईंधन को महंगा करने के अलावा और कोई भी उपाय कर सकती है. लोगों को जबरन परेशान करने में सरकार का क्या लाभ है?

मोदी ने छठी बार लालकिले से फहराया तिरंगा, भाषण में की ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ की घोषणा

?? सभी देशवासियों को पॉलिटॉक्स परिवार के तरफ से 73वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं?? देश के 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार छठी बार लाल किले के प्राचीर से तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया. इस दौरान मोदी ने बड़ा एलान करते हुए ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ की घोषणा की. साथ ही तीन तलाक, अनुच्छेद 370 समेत जल संरक्षण को लेकर बात की. उन्होंने देश में पानी की समस्या से लेकर जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जाताई. पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए देशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई भी दी. सफेद कुर्ता और चुड़ीदार पैजामा पहने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब लाल किला … Read more

मुस्लिम महिलाओं ने पीएम मोदी को लिफाफे में भेजी दो राखी, भड़के मौलाना

भाई-बहन का पवित्र त्यौंहार आगामी 15 अगस्त को देश भर में धूम धाम से मनाने की तैयारी इन दिनों देश भर में चल रहीं हैं. इसी कड़ी में वाराणसी में इस बार राखी का त्यौंहार मुस्लिम महिलाओं के लिए डबल खुशी वाला रहेगा. पिछले लगभग 6 साल से अपने सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी भेज रहीं मुस्लिम महिलाओं ने इस बार अपने भाई मोदी के लिए विशेष राखी तैयार की है. मुस्लिम महिलाओं द्वारा वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिफाफे में दो राखी भेजी जा रहीं हैं, एक तीन तलाक मुक्त और दूसरी 370 मुक्त. हालांकि मुस्लिम महिलाओं द्वारा राखी भेजे जाने से उत्तरप्रदेश के कई मौलाना नाराज हो गए हैं. कुछ मुस्लिम मौलानाओं ने इस नेक काम को खूब सराहा है तो कुछ ने इसे ‘सस्ते प्रचार का तरीका’ बताया है.

तीन तलाक जैसी सामाजिक कुप्रथा और देश को तोडऩे वाली अनुच्छेद 370 खत्म होने से पूरा देश की अधिकांश मुस्लिम महिलाएं बहुत खुश हैं, इनकी इसी खुशी का प्रभाव रक्षाबंधन त्योहार पर भी पड़ा है. वाराणसी की मुस्लिम महिलाएं पिछले छः साल से अपने सांसद भाई को राखी भेज रहीं है लेकिन इस बार तीन तलाक और 370 से मुक्ति दिलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इन मुस्लिम बहनों के दिल में एक अलग जगह बना ली है. चूंकि इस बार आजादी के दिन ही रक्षाबंधन उत्सव है, इसलिए तीन तलाक और 370 से आजादी वाली राखी का निर्माण किया गया ताकि सामाजिक कुप्रथा और राष्ट्रीय कलंक से आजादी का अहसास राखी बांधने वाले कर सकें.

राखी बनाने वाली मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि “जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने तीन तलाक जैसी कुप्रथा को खत्म करवाया है, यह नेक काम एक अच्छा भाई ही कर सकता है. अपने भाई के लिए हम बहनें अपने हाथों से राखी बनाकर भेज रही हैं।” अपने हाथों से बनाई राखीयों पर महिलाओं ने मोदी की फोटो भी लगाई है. प्रधानमंत्री मोदी के लिए राखी भेजने वाली इन महिलाओं का कहना है कि, “मोदीजी ने हमारी दयनीय हालत को खत्म किया है. इससे महिलाएं तीन तलाक जैसी कुप्रथा से बच सकती हैं. इसी कारण हम लोगों ने भाई बहन के इस पवित्र त्यौहार पर मोदी जी को राखी भेजी हैं.” राखी बनाने वाली समाजसेवी महिला हुमा का कहना है, “मोदी ने तीन तलाक जैसी कुरीति को खत्म करवाया है, नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद होने के साथ साथ देश की सभी मुस्लिम महिलाओं के बड़े भाई हैं. अपने भाई के लिए हम बहनों ने राखी तैयार की है.”

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महिलाओं ने मोदी पर यकीन जताते हुए कहा कि जैसा अभी तक देश मे अच्छा काम हुआ है, आगे भी ऐसे ही होता रहेगा. तीन तलाक को लेकर खौफ के सवाल पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा, “हमारे मन से तीन तलाक का खौफ अब खत्म हो गया है. आने वाले समय में सारा डर भी खत्म हो जाएगा. बुरे वक्त में मोदी जी ने हमारा साथ दिया है, इससे बड़ा काम हम मुस्लिम महिलाओं के लिए और क्या हो सकता है।”

राखी बनाने वाली समाजसेवी हुमा बानो ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर वहां भी बहुत सारे बंधनों से लोगों को मुक्त कराया है. मैं देशभर के लोगो को यह संदेश देना चाहती हूं कि राखी एक पवित्र रिश्ता है. इस बंधन को निभाना है, चाहे वह कश्मीर की बेटी हो या कहीं और की. प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी रक्षा के लिए इतना कुछ किया है, हम मुस्लिम बहनें भी उनकी और देश की रक्षा के लिए जो हो सकेगा, करेंगी।”

तीन तलाक बिल हो या 370, समाज में जब भी चर्चा हुई, कोई न कोई विवाद जरूर सामने आया. एक पक्ष हमेशा ही इसका समर्थन करता रहा तो दूसरा पक्ष इसे लेकर अपना विरोध दर्ज कराता रहा है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष मतीन खान ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा मोदी को राखी भेजने पर कहा कि, “आरएसएस का अनुषांगिक संगठन मुस्लिम मंच इस तरह की हरकतें करवा रहा है. वे नकाब और टोपी पहनकर इस तरह की हरकतें करते हैं, जिससे मुस्लिमों में आपस में बगावत हो. इसमें किराये पर लाए गए मुस्लिम भी होते हैं. ये बिकाऊ माल सत्ताधारी लोगों के दबाव में ऐसा काम कर रहे हैं.”

खान ने आगे कहा कि कुछ लोग प्रधानमंत्री को खत भेजेंगे, फिर उसका प्रचार करेंगे. इस तरह की हरकत ये सिर्फ सत्ता के प्रचार के लिए करते हैं. उनमें से राखी भिजवाना भी एक कड़ी है.” दूसरी तरफ ऑल इंडिया महिला मुस्लिम लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा, “राखी भेजने से किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए. तीन तलाक जैसी कुप्रथा के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है.” उन्होंने कहा, “सबका अपना-अपना नजारिया है, देश में सबको अपनी-अपनी आजादी जाहिर करने का हक है.”

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शाइस्ता अंबर ने आगे कहा कि “हमारे मुल्क में ये सब चीजें होनी जरूरी हैं, इससे हिंदू मुस्लिम एकता और संस्कृति को बढ़ावा मिलता है. यह हमारी अभिन्न संस्कृति का एक हिस्सा है, यह एक अच्छा कदम है।” वहीं, शैखू आलम साबरिया चिश्चितिया मदरसा के मौलाना इस्तिफाक कादरी ने कहा कि हिंदुस्तान बहुत बड़ा देश है, तीन तलाक नहीं होना चाहिए. इसका लोग गलत इस्तेमाल कर रहे थे. लेकिन मोदी को राखी भेजने का तरीखा सिर्फ दिखावा है. यह राजनीती का एक हिस्सा है, ऐसा लोग सिर्फ अपने प्रचार के लिए करवाते हैं. मुस्लिम महिलाओं के सामने और भी बहुत सारे मसले हैं, हुकूमत को उन पर भी ध्यान देना चाहिए.

मुस्लिम महिलाओं द्वारा वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिफाफे में दो राखी भेजी जा रहीं हैं, एक तीन तलाक से मुक्ति के लिए और दूसरी 370 से मुक्ति के लिए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता इंद्रेश कुमार को तीन तलाक मुक्त राखी भेजी गई वहीं गृहमंत्री अमित शाह को 370 मुक्त और 35ए मुक्त राखी भेजकर अपना भाई होने पर गर्व किया. इसके अलावा कश्मीरियों के लिए मोदी राखी, लद्दाखियों के लिए इंद्रेश राखी, भारतीय सेना के जवानों के लिए सुभाष राखी और रामभक्तों के लिए श्रीराम राखी बनाई गई. प्रधानमंत्री मोदी के लिए अनुच्छेद 370 मुक्त और तीन तलाक मुक्त राखी मुस्लिम बहनों ने बड़े मनोयोग से बनाकर यह संदेश दिया कि हर तीज, त्यौहार, धर्म और रिश्ते से ऊपर है देश से रिश्ता है.

प्रियंका के सहयोगी ने की पत्रकार के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा के सहयोगी संदीप सिंह के खिलाफ सोनभद्र जिले के घोड़ावल पुलिस थाने में पत्रकार के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने का मामला दर्ज हुआ है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है. बताया जाता है कि प्रियंका मंगलवार को सोनभद्र जिले की यात्रा पर थीं. उनभा गांव में एक टीवी पत्रकार कैमरामैन के साथ उनके पास पहुंचा और धारा 370 के बारे में पूछने लगा. प्रियंका ने बात करने से इनकार किया तो पत्रकार कुछ न कुछ कहने के लिए जोर देने लगा. इस पर प्रियंका के सहयोगी संदीप सिंह को गुस्सा आ गया. उसने पत्रकार और कैमरामैन के साथ मारपीट शुरू कर दी … Read more

कश्मीर में अभी फोन और नेट से पाबंदी हटाना ठीक नहीं

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मामले में जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया, वहीं राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि 15 अगस्त के बाद पाबंदियां कम होने की उम्मीद है. मंगलवार को उन्होंने राजभवन में पत्रकारों से मुलाकात की और कई पत्रकारों को इंटरव्यू दिए. जम्मू-कश्मीर में जारी पाबंदियों से जुड़े सवाल पर राज्यपाल ने कहा, फोन-इंटरनेट उपद्रवियों, दुश्मनों और पाकिस्तानियों का हथियार है. हम उनके हाथ में अपना गला काटने का हथियार नहीं पकड़ा सकते. कश्मीर को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर उन्होंने कहा कि वायनाड के सांसद सीमापार से हो रहे प्रोपेगंडा के आधार पर बात कर रहे हैं. उन्हें जम्मू-कश्मीर का दौरा … Read more