महाराष्ट्र: ‘क्या सच में भारत-पाक के बंटवारे से भी मुश्किल है भाजपा-शिवसेना गठबंधन’

Pressure politics

महाराष्ट्र (Maharastra) में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा हो चुकी है. 288 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावों में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित होंगे. प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी ने गठबंधन कर सीटें आपस में बांट ली है. दोनों ने 125-125 सीटों पर सहमति बना अन्य 38 सीटें अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ दी. भाजपा सत्ताधारी पार्टी है और शिवसेना सहयोगी पार्टी, इसके बावजूद दोनों में सीटों के बंटवारे का मंथन समुद्र-मंथन से भी मुश्किल लग रहा है. पार्टी के एक नेता ने तो गठबंधन पर यहां तक कहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना (BJP-Shiv Sena Alliance) के बीच महज 288 सीटों का बंटवारा करना भारत-पाक के बंटवारे से भी मुश्किल फैसला लग रहा है.

ये बयान दिया है शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut-Shiv Sena) ने जो सीट बंटवारे से जुड़ी परेशानियों से भली-भांति परिचित हैं. राउत ने कहा, ‘इतना बड़ा महाराष्ट्र है लेकिन ये जो 288 सीटों का बंटवारा है, ये भारत पाकिस्तान के बंटवारे से भी भयंकर है. यदि हम सरकार में होने के बजाय विपक्ष में होते तो तस्वीर दूसरी होती.’ उन्होंने ये भी कहा कि फिलहाल इस बारे में मंथन चल रहा है लेकिन सीटों के बंटवारे पर जो भी फैसला होगा, उसे तुरंत मीडिया को बताया जाएगा.

वैसे महाराष्ट्र की आंतरिक राजनीति को देखा जाए तो राउत के इस बयान से इत्तफाक रखा जा सकता है. विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे का ये विवाद अभी का नहीं बल्कि लोकसभा चुनावों से भी पहले का है. लोकसभा चुनावों में भाजपा और शिवसेना चाहें एक साथ चुनावी जंग लड़ रही थी लेकिन शिवसेना अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए लगातार भाजपा और उनकी नीतियों पर हमला कर रही थी. महाराष्ट्र में भाजपा सत्ताधारी पार्टी है और पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने शिवसेना सहित कांग्रेस और एनसीपी तीनों को एक साथ पटखनी देते हुए 288 में से 122 सीटों पर कब्जा कर लिया. शिवसेना भाजपा की आधी सीटों तक ही पहुंच सकी और 63 पर सिमट गयी. कांग्रेस को 42 और एनसीपी को 41 सीटें मिली.

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लोकसभा चुनाव 2019 में दोनों पार्टियों ने 25-23 के अंतर से चुनाव लड़ा और कुल 41 सीटों पर कब्जा किया. उसके बाद से शिवसेना बीजेपी से 144-144 सीटों पर हक मांगने लगी. सियासी गलियारों में इस खबर से भी बाजार गर्म रहा कि शिवसेना चुनाव जीतने की स्थिति में ढाई-ढाई साल दोनों पार्टियों के मुख्यमंत्री बिठाने के जुगाड़ में है. हालांकि भाजपा ने इस बात पर कभी मुहर नहीं लगाई. इसके बाद शिवसेना ने आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बताना शुरू कर दिया और प्रचार भी उसी तरह से हुआ.

हाल में एक मीडिया कार्यक्रम में महाराष्ट्र के भाजपायी मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री पद किसी को देने और सांझा करने से साफ इंकार कर दिया. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि गठबंधन की स्थिति में शिवसेना चाहे तो डिप्टी सीएम बना सकती है. लेकिन हमारी बात अभी भी वहीं अटकी है…भाजपा-शिवसेना के बीच सीटों का बंटवारा.

उद्दव ठाकरे ने बीच का रास्ता निकालते हुए भाजपा से 150-130 के अनुसार सीट बांटने के बारे में बात की लेकिन भाजपा ​अपने सहयोगी को केवल 110 सीटों पर निपटाना चाहती है. अपने ठस से मस न होने की वजह ये भी है कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव-2014 में भाजपा ने अकेले अपने दम पर तीनों विपक्षी पक्षों को धूल चटाई थी. हालांकि सरकार शिवसेना से गठजोड़ करके ही बनाई लेकिन शिवसेना को हमेशा ये बात याद रही कि भाजपा की सरकार केवल और केवल शिवसेना के सहयोग से बन पायी है.

अब इन चुनावों में भी शिवसेना इस बात का अहसास भाजपा को करा रही है कि अकेले दम पर वो प्रदेश में सरकार नहीं बना सकती और उन्हें शिवसेना के साथ की जरूरत है. हालांकि कहीं न कहीं शिवसेना को इस बात का अहसास भी है कि वो खुद भी आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में कांग्रेस, एनसीपी के साथ मोदी आंधी का सामना नहीं कर पाएंगे. ठीक ऐसा ही इल्म भाजपा को भी है कि तीन पुरानी पार्टियों को अकेले टक्कर दे पाना बिना किसी सहारे के पहाड़ चढ़ने जैसा है. यही वजह है कि शिवसेना के इतने आघातों के बाद भी भाजपा गठबंधन के लिए पूरी तरह से तैयार है.

बड़ी खबर: नहीं बन पाई सहमति, शायद अब शिवसेना की जरूरत नहीं बीजेपी को

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तो करोड़ों लोगों की आवाजों पर अपने कान बंद करते हुए आजाद भारत के सीने पर एक लाल लकीर खींचते हुए हिंदूस्तान-पाकिस्तान बना दिया लेकिन महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का ये अटूट बंधन बंधा रहेगा या टूट जाएंगा, जल्दी ही मोदी-शाह बिग्रेड इससे पर्दा उठा देगी.

नासिक में पीएम मोदी ने शिवसेना पर साधा निशाना, शरद पवार को लिया आड़े हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को महाराष्ट्र के नासिक जिले में थे. यहां उन्होंने महाजनादेश यात्रा के समापन के अवसर पर इशारों-इशारों में शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे और शरद पवार पर निशाना साधा. रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर पर बयानबाजी करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस समय राम मंदिर पर कई ‘बयान बहादुर’ सामने आ रहे हैं. मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि प्रभु राम के लिए वे सिर्फ देश की न्याय प्रणाली पर श्रद्धा रखें. अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई चल रही है. याद दिला दें, 16 सितंबर को शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया था, ‘शिवसैनिक … Read more

महाराष्ट्र: दो डूबती नावों को एक दूसरे का सहारा, राह नहीं आसान

कहते हैं, डूबते हुए को तिनके का सहारा भी काफी है लेकिन महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनावों में तो इससे भी कहीं बढ़कर होने जा रहा है. यहां दो डूबती नावों को एक दूसरे का सहारा मिला है. वो भी उनके खिलाफ जो उससे चार गुना बड़ा है. राह कतई भी आसान नहीं है लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. इन होल वाली नावों में सेंध लगाने के लिए शिवसेना भी है जिससे भी पार पाना सरल नहीं होगा.

दरअसल महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है. दोनों पार्टियों ने 125-125 सीटें आपस में बांटी है. शेष 38 सीटें सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी गयी है जिनपर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगी. इस भागीदारी को एनसीपी चीफ शरद पवार और कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वीकृति दे दी है. हालांकि अन्य सहयोगी पार्टियों का निर्णय फिलहाल अधर झूल में है. बता दें, महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं. चुनाव का कार्यक्रम 19 सितम्बर तक घोषित होने की उम्मीद जताई जा रही है.

अब इन दोनों पार्टियों के साथ जो अहम दिक्कत है वो ये कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी रह गयी हैं. पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 122 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. वहीं शिवसेना ने 62, कांग्रेस ने 42 और एनसीपी ने 41 सीटों पर कब्जा जमाया. अन्य 31 सीटों में से बहुजन विकास अगाड़ी को तीन, एआईएमआईएम को दो, सीपीआईएम, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, समाजवादी पार्टी और आरएसपी को एक-एक सीट मिली. सात सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की.

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लोकसभा चुनाव-2014 में बीजेपी को 23, शिवसेना को 18, एनसीपी को चार, कांग्रेस को दो और अन्य को एक सीट पर जीत मिली. हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भी स्थितियां इससे अलग नहीं रही. हालांकि बीजेपी और शिवसेना ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन गठबंधन में दोनों पार्टियों ने मिलकर 41 जीतों पर अपना कब्जा जमाया. कांग्रेस व सहयोगियों को पांच और दो सीटों पर अन्य को जीत मिली.

जिस तरह के पिछले तीन चुनावों के परिणाम हैं, उससे देखते हुए तो कांग्रेस और एनसीपी बीजेपी व शिवसेना की टक्कर में कहीं टिक नहीं पा रही. हां, इस बार भाजपा और शिवसेना में सीटों के बंटवारे को लेकर जो खबरे आ रही हैं, उससे शरद पवार और कांग्रेस आलाकमान पर राहत के छीटे जरूर लगे होंगे. अगर बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन टूटता है तो इसका थोड़ा फायदा तो कांग्रेस-एनसीपी को जरूर होगा. हालांकि नंबर तीन और चार की पार्टियां होने के बावजूद ये दोनों मिलकर नंबर एक और दो को कितनी टक्कर दे पाएंगी, ये तो भविष्य के गर्भ में छुपा है.

दोनों पार्टियों की शेष 38 सीटों पर बंटवारे को लेकर एक एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के बयान के मुताबिक दोनों दलों के नेताओं ने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना की आंधी को रोकने के लिए फैसला लिया है कि अलांइस में वाम दल (क्षेत्रीय पार्टियां) को भी शामिल किया जाएगा. गठबंधन में बीजेपी विरोधी राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है.

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा में खींचतान, शिवसेना को समझ नहीं आ रहा बीजेपी का गणित

महाराष्ट्र (Maharastra) में जहां विपक्षी कांग्रेस-राकांपा गठबंधन (Congress-NCP Alliance) ने 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तालमेल कर लिया है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) में सीटों को लेकर भारी खींचतान चल रही है. अब शिवसेना आरे कॉलोनी की जमीन पर मेट्रो 3 कारशेड निर्माण परियोजना का विरोध करने में जुटी है, जिसका फैसला देवेन्द्र फड़नवीस सरकार कर चुकी है. सोमवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस परियोजना का हस्र भी नानार रिफाइनरी परियोजना की तरह होने वाला है. महाराष्ट्र सरकार कुछ माह पूर्व नानार रिफाइनरी परियोजना रद्द करने की घोषणा कर चुकी है. रिफाइनरी का निर्माण सिंधुदुर्ग के नानार में प्रस्तावित था. … Read more

वीडियो खबर: शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले ने फिर बदली पार्टी

महाराष्ट्र (Maharastra) में शरद पवार (Sharad Pawar) की पार्टी NCP के एक और कद्दावर नेता उदयनराजे भोसले (Udayanraje Bhosle) BJP में शामिल हो गए. शिवाजी के 13वें वंशज भोसले के पिछले कुछ दिनों से भाजपा में जाने की अटकलें चल रही थीं. अब इन अटकलों पर पूर्ण रूप से विराम लग गया है.

महाराष्ट्र के NCP सांसद उदयनराजे भोसले BJP में शामिल

महाराष्ट्र (Maharashtra) में शरद पवार (Sharad Pawar) की पार्टी राकांपा (NCP) के एक और कद्दावर नेता उदयनराजे भोसले (Udayanraje Bhosale) शनिवार को BJP में शामिल हो गए. पिछले कुछ दिनों से भोसले के भाजपा में जाने की अटकलें चल रही थीं. अब इन अटकलों पर विराम लग गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला (OM Birla) को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद वह विधिवत भाजपा के सदस्य बन गए. दिल्ली में अमित शाह (Amit Shah), भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस (Devendra Fadnavis) ने उनका पार्टी में स्वागत किया. महाराजा शिवाजी के वंशज माने जाने वाले उदयनराजे भोसले सतारा से लोकसभा सांसद हैं.

भोसले का भाजपा में शामिल होना उनकी घर वापसी जैसा ही है. पहले वह भाजपा में थे और 1995 से 1999 तक तत्कालीन भाजपा-शिवसेना सरकार में राजस्व मंत्री रहे. गुरुवार को भोसले ने राकांपा प्रमुख शरद पवार से उनके घर जाकर मिले थे. इस मौके पर धनंजय मुंडे और श्रीकांत शिंदे भी मौजूद थे. उसके बाद से अनुमान लगाया जा रहा था कि पवार भोसले को पार्टी छोड़ने से रोकने में सफल हो जाएंगे. गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में राकांपा के सिर्फ चार उम्मीदवार सांसद चुने गए थे, जिनमें भोसले शामिल हैं. भोसले के पार्टी छोड़ने के बाद लोकसभा में राकांपा के सिर्फ तीन सांसद रह गए हैं.

समझा जाता है कि भोसले भाजपा की महाजनादेश यात्रा में शामिल होंगे, जो 15 सितंबर को सतारा पहुंचने वाली है. सूत्रों की मानें तो भोसले राकांपा में चल रही गुटबंदी से परेशान थे. भाजपा ने उनके सामने पार्टी में शामिल होने के लिए लोकसभा सीट से इस्तीफा देने की शर्त रखी थी. इस संबंध में उन्होंने पुणे में अपने समर्थकों के साथ बैठक भी की थी. बैठक के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि वह पार्टी में बने रहेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भोसले सतारा जिले के कद्दावर नेता हैं. भोसले के भाजपा में शामिल होने से मराठा समुदाय में भाजपा का जनाधार बढ़ेगा.

बता दें, उदयनराजे भोसले (Udayanraje Bhosale) को पुलिस ने 1999 में हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. बाद में वह अदालत से बरी हो गए थे. भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस में भी रह चुके हैं. 2009 में वह राकांपा में शामिल हुए थे और पहली बार सतारा से लोकसभा चुनाव लड़ा था. इसके बाद उन्होंने 2014 और 2019 में भी लोकसभा चुनाव जीता था.

वीडियो खबर: महाराष्ट्र में बीजेपी का बढ़ता ग्राफ

महाराष्ट्र (Maharastra) में BJP विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) से पहले ही तेजी से बढ़त बनाती दिख रही है. एक तरफ उसने तूफानी चुनाव प्रचार पहले ही शुरू कर दिया है, दूसरी तरफ उसने विपक्षी नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. इसके साथ ही कई नेताओं के कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला भी तेज हो गई है. कांग्रेस (Congress) छोड़ने वालों में कृपाशंकर सिंह (Kripa Shankar Singh) और उर्मिला मातोंड़कर (Urmila Matondkar) प्रमुख हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है लेकिन किसी अन्य पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है. इस तरह कांग्रेस-राकांपा (NCP) गठबंधन चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही बैकफुट पर दिखने लगी है.

महाराष्ट्र में कांग्रेस को फिर लगे झटके तो बीजेपी में बल्ले-बल्ले

महाराष्ट्र (Maharastra) में BJP विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) से पहले ही तेजी से बढ़त बनाती दिख रही है. एक तरफ उसने तूफानी चुनाव प्रचार पहले ही शुरू कर दिया है, दूसरी तरफ उसने विपक्षी नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. इसके साथ ही कई नेताओं के कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला भी तेज हो गई है. कांग्रेस (Congress) छोड़ने वालों में कृपाशंकर सिंह (Kripa Shankar Singh) और उर्मिला मातोंड़कर (Urmila Matondkar) प्रमुख हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है लेकिन किसी अन्य पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है. इस तरह कांग्रेस-राकांपा (NCP) गठबंधन चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही बैकफुट पर दिखने लगी है.

बुधवार को कांग्रेस नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री हर्षवर्धन पाटिल (Harshvardhan Patil) और राकांपा नेता गणेश नाइक (Ganesh Naik) भाजपा में शामिल हो गए. मुख्यमंत्र देवेन्द्र फड़नवीस (Devendra Fadnavis) ने उनका पार्टी में स्वागत किया. दोनों के पुत्र पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं. हर्षवर्धन पाटिल पुणे के इंदापुर क्षेत्र के दिग्गज नेता हैं. वह तीन बार निर्दलीय विधायक चुने गए. उसके बाद वह कांग्रेस में शामिल होकर विधायक चुने गए और कैबिनेट मंत्री बने. इस बार राकांपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत उन्हें इंदापुर सीट से टिकट नहीं मिल रहा था. हर्षवर्धन पाटिल 2014 का विधानसभा चुनाव राकांपा के दत्ता भरणे से करीबी अंतर से हार गए थे. उस समय महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था.

हर्षवर्धन पाटिल ने 2014 का चुनाव हारने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में बारामती से राकांपा उम्मीदवार सुप्रिया सुले (Supriya Sule) का समर्थन किया था. इंदापुर बारामती लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत है. उन्हें उम्मीद थी कि शरद पवार की मदद से उन्हें फिर से इंदापुर सीट से चुनाव जीतने का मौका मिल सकता है. बताया जाता है कि इंदापुर सीट पर राकांपा और कांग्रेस में कोई फैसला नहीं होने से हर्षवर्षधन पाटिल ने भाजपा में शामिल होने का फैसला कर लिया. अब वह इंदापुर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. हर्षवर्थन पाटिल ने 1995 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीता था. 1999 से 2004 तक वह कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार में मंत्री रहे. 2009 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे. चुनाव बाद कांग्रेस-राकांपा सरकार बनने पर वह फिर मंत्री बने थे.

गणेश नाइक ठाणे जिले के कद्दावर नेता हैं. पहले वह शिवसेना में थे. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे (Bal Thackeray) के निधन के बाद वह राकांपा में शामिल हो गए थे. उनके पुत्र संजीव नाइक ने कहा कि इस समय जो भी भाजपा के साथ जुड़ रहा है, वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास है. हम बिना शर्त भाजपा में शामिल हुए हैं. यह साफ दिखने लगा है कि जो काम मोदी कर सकते हैं, वह और कोई नेता नहीं कर सकता. उन्होंने कहा, हम शरद पवारजी का बहुत सम्मान करते हैं. उन्होंने हमें (नाइक परिवार) आगे बढ़ाने में बहुत योगदान दिया है. लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं और हम अपने क्षेत्र की जनता की उम्मीदें पूरी करना चाहते हैं.

हर्षवर्धन पाटिल ने कहा कि मोदी सरकार ने दूसरी बार सरकार बनने के बाद पहले सौ दिनों में जो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, उनसे जनता समझने लगी है कि इस समय देश को चलाने के लिए मोदी से बेहतर और कोई नेता नहीं हो सकता. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और सख्त मोटर वाहन कानून के तहत जुर्माना बढ़ाने जैसे फैसले मोदी सरकार ही कर सकती है. यही कारण है कि उन्होंने बगैर पूर्व शर्त भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है.

राकांपा नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत पवार (Ajit Panwar) ने कहा कि इंदापुर सीट को लेकर हर्षवर्धन पाटिल बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और राकांपा को झूठा बदनाम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पाटिल पहले ही भाजपा में शामिल होने का फैसला कर चुके थे. कांग्रेस-राकांपा इंदापुर सीट को लेकर फैसला करने ही वाले थे, इससे पहले ही पाटिल भाजपा में चले गए. पवार ने कहा, शरद पवार (Sharad Panwar) , सुप्रिया सुले, मैंने और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने उन्हें आश्वस्त किया था कि थोड़ा इंतजार करें. मैं खुद उनसे मिलने उनके घर पुणे गया था, लेकिन उन्होंने मिलने से ही इनकार कर दिया.

इस बीच सूत्रों ने बताया कि सतारा के राकांपा सांसद उदयनराजे भोसले (Udayanraje Bhosle) भी भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं. उनकी भाजपा नेताओं के साथ बातचीत चल रही है. राकांपा के विधान परिषद सदस्य आनंदराव पाटिल भी जल्दी ही भाजपा में शामिल होने वाले हैं. भाजपा-शिवसेना सरकार के एक मंत्री ने कहा कि हाल ही कांग्रेस छोड़ने वाले कृपाशंकर सिंह भी भाजपा में आने वाले हैं. वह दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होंगे. पूर्व मुंबई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने यह कहते हुए इस्तीफा दिया है कि वह कश्मीर को लेकर कांग्रेस के रवैये के खिलाफ पार्टी छोड़ रहे हैं.

 

पलवल विधानसभा सीट पर इस बार करण सिंह दलाल को करना पड़ सकता है हार का सामना

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election) – पलवल (Pawal) विधानसभा सीट हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनावों (Assembly Election) की तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है, ऐसी संभावना है की हरियाणा में नवंबर माह में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके मद्देनजर विभिन्न दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क अभियान छेड़ दिया है, प्रचार साधनों के माध्यम से वे उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. आज हम आपको हमारी खास रिपोर्ट में हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में हरियाणा के पलवल जिले की पलवल (Palwal) विधानसभा सीट के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे. हरियाणा के पलवल (Palwal) जिले के अंदर तीन विधानसभा सीटें आती … Read more

महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी

महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) से पहले राजनीतिक उथल पुथल का दौर जारी है. आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने प्रकाश अंबेडकर (Prakash Ambedkar) की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (VBS) से तालमेल समाप्त कर दिया. AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील (Imtiaz Jalil) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है कि सीटों का तालमेल नहीं होने के कारण VBS से संबंध समाप्त कर लिए गए हैं. इस बीच राकांपा (NCP) और कांग्रेस (Congress) में बगावत की आवाजें उठ रही हैं. कई नेताओं के भाजपा में शामिल होने के आसार नजर आ रहे हैं. हालांकि छगन भुजबल (Chhagan Bhujbal) ने स्पष्ट का कि वह कहीं … Read more