बीजेपी मंत्री ने पार्टी पर लगाया गौ हत्या करने का आरोप

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बीजेपी सरकार में एक मंत्री ने खुद अपनी ही पार्टी पर गौ हत्या करने के आरोप लगाएं हैं. मंत्री ने लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद अपने ट्वीटर हैंडल से पार्टी पर निशाना साधते हुए यह आरोप लगाया. नेता का नाम है केन्द्रीय मंत्री विजय सांपला. उन्होंने अपने ट्वीटर अकाउंट से ‘चौकीदार’ भी हटा लिया है. सांपला मोदी सरकार में सामाजिक न्याय अधिकारिता महकमें के मंत्री है. सांपला ने 2014 के चुनाव में पंजाब की होशियारपुर लोकसभा से चुनाव जीता था लेकिन पार्टी ने इस बार उनका टिकट काटकर फगवाड़ा के विधायक सोमप्रकाश को थमा दिया. सोमप्रकाश इस सीट से 2009 में भी चुनाव लड़ चुके है लेकिन तब … Read more

अशोक गहलोत मोदी पर बरसे, 8 ट्वीट कर पीएम को घेरा

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लोकसभा चुनाव के इस समर में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. दिग्गज नेता एक-दूसरे को घेरने के लिए वार-पलटवार में लगे हैं. बीते सोमवार को पीएम मोदी द्वारा उदयपुर की चुनावी सभा के संबोधन में सीएम अशोक गहलोत को लेकर कटाक्ष कर कहा था कि उन्हें अपने बेटे की चिन्ता है, बाकी सीटों की नहीं. इसे लेकर सीएम गहलोत ने भीलवाड़ा के मांडल में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम पर जमकर हमले बोले और एक के बाद एक सवालों के 8 ट्वीट जारी कर पीएम मोदी को घेरा. पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भीलवाड़ा के मांडल में खासे आक्रामक दिखे. यहां चुनावी जनसभा … Read more

बाबरी विध्वंस बयान के जवाब से संतुष्ट नहीं EC, साध्वी प्रज्ञा की मुश्किलें बढ़ी

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मध्यप्रदेश की हॉट सीट भोपाल पर बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. बाबरी विध्वंस मामले पर बयान देकर फंसी साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है. भोपाल के कमला नगर थाने में साध्वी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है. इसमें एक महीने की सजा या 200 रूपये के अर्थदंड या दोनों का प्रावधान है. बता दें कि टीटी नगर एसडीएम ने यह मामला दर्ज करवाया है. बता दें कि बाबरी विध्वंस पर विवादित बयान देकर घिरी बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा को इससे पहले भोपाल जिला निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा … Read more

बेणेश्वर में BJP पर जमकर गरजे राहुल गांधी, गहलोत-पायलट ने भी साधा निशाना

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को एक दिवसीय दौरे पर बांसवाड़ा के बेणेश्वर पहुंचे. यहां आते ही राहुल सबसे पहले बेणेश्वर धाम दर्शन के लिए पहुंचे. दर्शन करने के बाद राहुल गांधी ने सभा स्थल पर पहुंच लोगों को संबोधित किया. जनसभा में जहां एक तरफ वागड़ में गर्मी में तेजी देखने को मिली तो दूसरी तरफ सियासी पारा भी उबाल पर रहा. सभा में राहुल गांधी ने बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर धावा बोला. इस अवसर पर सीएम अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, अविनाश पांडे, गिरिजा व्यास, महेंद्रजीत मालवीय, कांग्रेस प्रत्याशी ताराचंद भगोरा एवं रघुवीर मीणा सहित अन्य कई कांग्रेस नेता-पदाधिकारी मंच पर मौजूद रहे. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल … Read more

राजस्थान: राष्ट्रवाद और कर्जमाफी के बीच फंसे झुंझुनूं के सियासी समीकरण

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राजस्थान के शेखावाटी की झुंझुनूं लोकसभा सीट, वही संसदीय क्षेत्र है जहां विधानसभा चुनाव से पहले ‘मोदी तुझसे बैर नहीं-वसुंधरा तेरी खैर नहीं’ का नारा सियासी फिजा में तैरा था. यहां के मतदाताओं ने इस नारे को सही साबित करते हुए वसुंधरा राजे से बैर निकाल लिया. झुंझुनूं की आठ विधानसभा में से सिर्फ दो पर कमल खिला. बीजेपी का आकलन है कि वसुंधरा से नाराज लोगों का गुस्सा निकल चुका है. लोकसभा चुनाव में मोदी के नाम से वोट मिलेंगे.

बीजेपी ने झुंझुनूं की सांसद संतोष अहलावत का टिकट काटकर मंडावा विधायक नरेंद्र खींचड़ को मौका दिया है. खींचड़ विशेष रूप से तैयार करवाए गए ‘मोदी रथ’ पर सवार होकर जनता से वोट मांग रहे हैं. प्रचार के दौरान बीजेपी प्रत्याशी वोटर्स से कह रहे हैं कि पीएम भी नरेंद्र हैं और तुम्हारा प्रत्याशी भी नरेंद्र है. यदि दिल्ली में मोदी की सरकार बनानी है तो झुंझुनूं में नरेंद्र को चुनिए.

आपको बता दें कि झुंझुनूं सैनिक, कारोबारी, किसान और सरकारी कर्मचारी बाहुल्य वाला जिला है. लिहाजा रिटायर्ड सैनिक और उनका परिवार मोदी, राष्ट्रवाद और वन रैंक-वन पेंशन के आधार पर बीजेपी के पक्ष में झुका दिखाई दे रहा है. हालांकि कई रिटायर्ड फौजी मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत करने से खुश भी नहीं हैं, लेकिन फिर भी वो मोदी को हीरो मान रहे हैं. झुंझुनूं की सियासत किसान और जवानों की धुरी पर ही घुमती है, जहां राष्ट्रवाद औऱ कर्ज माफी दो बड़े चुनावी मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं.

भीतरघात दोनों दलों के लिए सिरदर्द
बात करें अंदरूनी कलह की तो झुंझुनूं सीट पर भीतरघात दोनों प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द साबित हो रही है. बीजेपी ने मौजूदा सांसद संतोष अहलावत का टिकट काटकर नरेंद्र खीचड़ को मैदान में उतारा है. ऐसे में अहलावत और उनके संबंधी पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी नरेंद्र की राह में रोड़ा साबित हो सकते हैं. उधर कांग्रेस ने पहली बार ओला परिवार को दरकिनार करते हुए 5 बार विधायक रहे श्रवण कुमार को इस बार टिकट दिया है. इससे विधायक बृजेंद्र ओला और फतेहपुर विधायक हाकिम अली पर सबकी नजरें बनी हुई हैं.

जानकारों की मानें तो बृजेंद्र ओला ने अपने समर्थकों को गुपचुप जो संदेश देना था, वो दे दिया है. हाकिम अभी चुप हैं. वे चाहकर भी मुस्लिम वोट कांग्रेस से दूर नहीं करवा पाएंगे. उनकी एक मजबूरी यह भी है कि ऐसा करने का प्रयास करते ही अगले चुनाव में उनके टिकट और जीत, दोनों पर संकट के बादल मंडरा जाएंगे. हालांकि फतेहपुर से बाकी जातियों के वोट बटोरना भी श्रवण कुमार के लिए चुनौती है. मंडावा से खुद नरेंद्र विधायक हैं इसलिए उनको लीड मिलने की पूरी संभावना है.

इसके अलावा, यहां यह भी चर्चा है कि नरेंद्र से हारने वाली कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी भी चाहती हैं कि नरेंद्र चुनाव जीत जाए क्योंकि फिर उपचुनाव होने से रीटा को मौका मिल सकता है. पूर्व पीसीसी चीफ चंद्रभान भी अभी तक श्रवण के समर्थन में प्रचार करते नहीं नजर आए हैं. सूरजगढ़ से श्रवण कुमार चुनाव हारे थे. यहां से बीजेपी विधायक सुभाष पूनिया के लिए बढ़त बनाए रखना जरूरी हो गया है. बाकी सभी विधायक जेपी चंदेलिया, जितेंद्र कुमार और राजकुमार पूरी तरह से श्रवण के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं. वहीं, बसपा विधायक राजेंद्र गुढा भी अंदरखाने कांग्रेस के साथ दिखाई दे रहे हैं.

बीजेपी एक बार खोल सकी खाता
शेखावाटी की झुंझुनूं सीट वैसे तो कांग्रेस का मजबूत किला रही है, लेकिन पिछली बार मोदी लहर में यहां पहली बार बीजेपी का कमल खिल गया. संतोष अहलावत ने शीशराम ओला की पुत्रवधू राजबाला ओला को करीब 2 लाख 34 हजार वोटों से चुनाव हराया. इस बार भी बीजेपी की यहां से जीत होती है तो सिर्फ मोदी मैजिक के बलबूते ही होगी जहां मुकाबला फिलहाल काफी रोचक होने की उम्मीदें है. श्रवण कुमार ने विधायक के तो चुनाव खूब लड़े हैं, लेकिन सांसद का चुनाव पहली बार लड़ रहे हैं इसलिए उन्हें जीतने के लिए बहुत ज्यादा जोर लगाना होगा. सियासी उठापठक में माहिर श्रवण कुमार के दांव-पेंचों पर सबकी नजर है.

झुंझुनूं के अन्य सियासी समीकरण
झुंझुनूं भी राजस्थान की राजनीति का जाट लैंड है, इसीलिए दोनों ही दलों ने जाट उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. ऐसे में जाटों के वोट आधे-आधे दोनों उम्मीदवारों के जाने के आसार है. मुस्लिम मतदाता यहां पर काफी निर्णायक है लेकिन एससी और जनरल वर्ग का झुकाव बीजेपी के पक्ष में दिखाई दे रहा है. जानकार मानते है कि जातियों के आधार पर किसी का पलड़ा भारी होने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता क्योंकि यहां कि जनता बेहद समझदार और पढ़ी-लिखी है. यहां का मतदाता सोच-समझ कर अपना वोट इस्तेमाल करता है.

एक नज़र पिछले आंकड़ों पर भी
बात करें साल 2014 के लोकसभा चुनावों की तो झुंझुनूं सीट पर बीजेपी के संतोष अहलावत 4 लाख 88 हजार 182 वोट लेकर विजयी रहे. कांग्रेस प्रत्याशी राजबाला ओला को 2 लाख 54 हजार 347 वोट मिले और वे चुनाव हार गईं. 2009 के चुनावों में कांग्रेस के शीशराम ओला ने जीत दर्ज की थी. ओला को 3 लाख 6 हजार 330 वोट मिले. बीजेपी के दशरथ शेखावत को 2 लाख 40 हजार 958 मतों के साथ हार का सामना करना पड़ा. 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नज़र डालें तो यहां की कुल 8 सीटों में से 5 पर कांग्रेस का कब्जा है और दो सीटें बीजेपी के पास है जबकि 1 सीट बसपा के खाते में गई. झुंझुनूं, नवलगढ़, पिलानी, खेतड़ी व फतेहपुर पर कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहे तो सूरजगढ़ व मंडावा सीट पर बीजेपी ने बाजी मारी. उदयपुरवाटी सीट पर बसपा प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे.

लोकसभा चुनाव: तीसरे चरण का मतदान आज, 15 राज्यों की 116 सीटों पर वोटिंग

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लोकसभा चुनावों का तीसरा चरण आज से शुरू हो गया है. 17वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनावों में 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान होगा. इन सीटों पर 1612 प्रत्याशियों की किस्मत दाव पर लगी है. 142 महिला उम्मीदवार भी मैदान में हैं. मतदाना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक अपने मत का इस्तेमाल कर सकेंगे. त्रिपुरा की एक सीट पर भी वोटिंग होगी. इस सीट पर दूसरे चरण में वोटिंग रद्द कर दी गई थी. इन राज्यों की निम्न सीटों पर होंगे मतदान गुजरात – 26 केरल – 20 कर्नाटक – 14 महाराष्ट्र – 14 उत्तर प्रदेश – 10 छत्तीसगढ़ – 6 ओडिशा – 6 … Read more

पीएम मोदी दूसरे दिन भी मेवाड़ के दौरे पर, कांग्रेस पर किये जमकर वार

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एक के बाद एक चरण में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है और राजनीतिक पार्टियां भी बाकी बची सीटों पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. पार्टी के स्टार प्रचार धुंआधार रैलियों के साथ-साथ चुनावी सभाओं में लगे हैं. मतदाताओं के मन तक पहुंचने के लिए हर जुगत लगाई जा रही है और हर क्षेत्र तक पार्टी के शीर्ष नेताओं का भी पहुंचना जारी है. इसी क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी आज दूसरे दिन भी प्रदेश में मेवाड़ के दौरे पर आए. जहां उदयपुर में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे और देश में एक मजबूत सरकार बनाने की बात कही. पीएम … Read more

आखिर क्यों है सीकर में कांग्रेस की जीत का मजबूत दावा

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सीकर, राजस्थान में एकमात्र ऐसी सीट है जिसपर कांग्रेस ही नहीं बल्कि बीजेपी नेताओं का भी मानना है कि कांग्रेस की जीत का खाता यहीं से खुलेगा. जब से सुभाष महरिया को टिकट मिली, तभी से यही चर्चा है कि कांग्रेस यहां से एक लाख वोटों से जीत सकती है. आखिर ऐसा क्या है? इसके लिए पॉलिटॉक्स न्यूज ने सीकर के गांव और शहरों का दौरा करते हुए आम लोगों की राय जानी और इसकी तह में जाने की कोशिश की. इस दौरान बड़ी वजह यही सामने आई कि सीकर हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रहा है. सूबे में सरकार किसी की बने, यहां से कांग्रेस के दो से तीन विधायक जीतकर जरूर आते हैं और विधानसभा का टिकट कटाते हैं.

दोनों दलों ने जाट पर खेला दांव
लोकसभा चुनाव में जातिगत समीकरण साधने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही जाट प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. बीजेपी ने मौजूदा सांसद सुमेधानंद सरस्वती और कांग्रेस ने सुभाष महरिया पर दांव खेला है. यहां जाट जाति के वोट यहां काफी निर्णायक माने जाते हैं लेकिन बीजेपी प्रत्याशी पूरी तरह से मोदी लहर के ही सहारे हैं. सुमेधानंद के साथ बीजेपी संगठन और पार्टी के दिग्गज नेता सिर्फ अनमने मन से जा रहे हैं. खुद महाराज को भी इस बात का पूरा-पूरा एहसास है. लिहाजा उनके प्रचार की कमान पूरी तरह से संघ और उसके आनुषांगिक संगठनों ने संभाल रखी है.

भगवा वस्त्र धारण किए सुमेधानंद सरस्वती पूरी तरह से राष्ट्रवाद और सेना के शौर्य के सम्मान की चर्चा अपने भाषणों में कर रहे हैं. उधर सियासत और मैनेजमेंट के महारथी सुभाष महरिया के लिए हर हालात मुफीद नजर आ रहे हैं. गुटबाजी का डर भी उनके सामने नहीं है. लिहाजा पूरी टीम के साथ चुनावी प्रचार में जोश-ख़रोश से जुटे हुए हैं. बता दें कि कांग्रेस के पक्ष में यह बात भी है कि इस बार तो विधानसभा चुनाव में बीजेपी का जिले से सूपड़ा ही साफ हो गया था. हालांकि चौमूं से एकमात्र भाजपा विधायक जरूर है.

6 विधानसभा में कांग्रेस को बढ़त के आसार
आगे जब पॉलीटॉक्स ने ‘कांग्रेस ही क्यों जीत सकती है’ पर चर्चा की तो सामने आया कि सीकर संसदीय क्षेत्र की आठ में से 6 विधानसभा सीटों से कांग्रेस बढ़त ले सकती है. इसके अलावा श्रीमाधोपुर और चौमूं विधानसभा क्षेत्र में खुद कांग्रेस प्रत्याशी पीछे रहने की बात स्वीकार कर रहे हैं क्योंकि चौमूं से बीजेपी विधायक है और हाल ही में हुए हिंदू-मुस्लिम विवाद के बाद स्थिति बदली हुई है. वहीं श्रीमाधोपुर में गुर्जर समाज सचिन पायलट को सीएम नहीं बनाने की नाराजगी के चलते बीजेपी के साथ दिख रहा है.

बता दें कि यहां करीब बीस से पच्चीस हजार गुर्जर वोटर्स हैं. विधायक दीपेंद्र सिंह सुभाष महरिया से सचिन पायलट की सभा करवा गुर्जर वोटर्स को मैनेज करने की बात भी कह चुके है. वहीं सीकर शहर से भी कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष महरिया के संघ की रणनीति के चलते थोड़ा सा पीछे रहने के आसार है. यहां विधानसभा चुनाव के दौरान महरिया की विधायक राजेन्द्र पारीक से कथित नाराजगी का फैक्टर काम कर रहा है. वहीं लक्ष्मणगढ़, खंडेला, नीमकाथाना, धोद और दांतारामगढ़ से महरिया को अच्छी बढ़त मिलने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं.

साधु की सियासत संघ के भरोसे
बात करें बीजेपी प्रत्याशी की तो पार्टी द्वारा सुमेधानंद सरस्वती को टिकट देने से जिले के बीजेपी नेता बेहद नाराज हैं. संघ और योगगुरू बाबा रामदेव की दखल के चलते सुमेधानंद एक बार फिर टिकट लाने में कामयाब हो गए. सुमेधानंद की पूरी रणनीति संघ ने अपने हाथ में ले ली है. लिहाजा मैनेजमेंट के माहिर कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष महरिया को परास्त करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा लिया जा रहा है. सुबह-सुबह पार्क में लोगों से संघ के पदाधिकारी मुलाकात कर रहे हैं. वरिष्ठ नागरिकों से भी संपर्क में बने हुए हैं. तो इमरजेंसी में बंद हुए लोगों से भी फीडबैक लिया जा रहा है. उसके बाद से ही सुमेधानंद राष्ट्रवाद और मोदी के गुणगान पर सवार हुए है.

एक लाख के आस-पास जीत का अंतर
सीकर संसदीय सीट पर कांग्रेस द्वारा पक्की जीत के दावों के बीच शेखावाटी के सट्टा मार्केट, आमजन की चर्चा और सियासी गणित के जानकारों की मानें तो इस सीट पर परिणाम बड़ा रहने वाला है, जिसमें जीत का अंतर 70 हजार से लेकर एक लाख वोटों तक के बीच रहेगा. चुनावी एक्सपर्ट्स भी कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे हैं जिसमें संसदीय क्षेत्र की 6 विधानसभा सीट पर 10 से 15 हजार वोटों की बढ़त कांग्रेस को मिलने का आंकलन करते हुए परिणाम के अंतर की बात कही जा रही है.

महरिया-सरस्वती का करो या मरो जैसा चुनाव
चाहे बीजेपी प्रत्याशी सुमेधानंद सरस्वती हो या कांग्रेस के सुभाष महरिया, ये चुनाव सियासी नज़रिए से दोनों के लिए ही अहम माना जा रहा है.  महरिया लगातार चुनाव हारते आ रहे हैं इसलिए उनकी राजनीतिक विरासत दांव पर है. वहीं महाराज सरस्वती चुनाव में शिकस्त पाते हैं तो फिर सियासत नहीं साधु बनकर ही गुजारा करना होगा. सियासी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय बीजेपी नेता इसी फैक्टर के चलते साधु का साथ नहीं दे रहे हैं.

क्या माकपा होगी गेमचेंजर?
इस बार भी माकपा ने सीकर से पूर्व विधायक अमराराम को मैदान में उतारा है. वे कर्ज माफी और बिजली की दरें सस्ती करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे हैं. ऐसे में उन्हें धोद, लक्ष्मणगढ़ और दांतारामगढ़ में अच्छे वोट मिलने की उम्मीदें है लेकिन फिर भी उनकी जीत असंभव नजर आ रही है. हां, गेमचेंजर होकर किसी एक प्रत्याशी का खेल जरूर बिगाड़ सकते हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कॉमरेडों के फिक्स वोट हैं और वो उनको जाने ही है.