नागौर दौरे पर पहुंचे हनुमान बेनीवाल, क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाने का किया वादा

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नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल संसद सत्र के दो दिन के अवकाश के बीच अपने लोकसभा क्षेत्र के दौरे पर हैं. आज हनुमान बेनीवाल ने नागौर की खींवसर विधानसभा का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनी और उन्हें इनके निदान का भरोसा दिया. हनुमान ने लोगों को लोकसभा चुनाव में विश्वास जताने के लिए धन्यवाद दिया. हनुमान ने कहा कि खींवसर से जब भी उन्होंने समर्थन मांगा, यहां की जनता ने हमेशा दिल खोलकर मेरा समर्थन किया है. फिर चाहे वो 2003 और 2008 हो या फिर 2013, 2018 और 2019. मैं आपके इस एहसान को कभी नहीं भूल सकता हूं. उन्होंने कहा, ‘हनुमान बेनीवाल आज … Read more

क्यों मंत्री नहीं बन पाए हनुमान बेनीवाल

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राजस्थान में बीजेपी को बंपर जीत के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रदेश से इस बार करीब पांच से छह मंत्री बनाए जाएंगे. लेकिन मोदी मंत्रिमंडल में राजस्थान से केवल तीन सांसदों को ही जगह मिल पायी. मोदी कैबिनेट में राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल और कैलाश चौधरी को शामिल किया गया है.

राजस्थान में ‘मिशन 25’ पूरा होने के बाद मोदी के मंत्रीमंडल में जिस चेहरे के शामिल होने की सबसे ज्यादा उम्मीद थी, उसे मोदी कैबिनट में जगह नहीं मिली. यहां हम बात कर रहे हैं नागौर सीट से रालोपा के टिकट पर सांसद बने हनुमान बेनीवाल की. बीजेपी ने इस बार के चुनाव में रालोपा के लिए नागौर सीट छोड़ी थी. यहां से चुनाव रालोपा सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने लड़ा था. उनका मुकाबला कांग्रेस की ज्योति मिर्धा से था. मुकाबले में बेनीवाल ने ज्योति मिर्धा को भारी अंतर से मात दी.

हनुमान बेनीवाल के मंत्रीपद में सबसे बड़ा रोड़ा कैलाश चौधरी बने. बाड़मेर सीट पर कैलाश चौधरी ने पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र को बड़े अंतर से चुनाव हराया है. उन्हें बड़े चेहरे को हराने का ईनाम मिला है. चौधरी को मंत्रिमंडल में जाट चेहरे के तौर पर शामिल किया गया है जिसके कारण हनुमान की दावेदारी कमजोर हुई. पहले पार्टी जाट चेहरे के तौर पर हनुमान को शामिल करना चाहती थी लेकिन दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं-सेवक ने खुद कैलाश की पैरवी की और उनको मंत्रिमंडल में शामिल करने का दबाव केंद्रीय नेतृत्व पर बनाया. कैलाश के नाम पर सहमति बनने के साथ ही हनुमान की दावेदारी ठंडे बस्ते में चली गई. इसकी आशंका हमें बीते दिन ही देखने को मिल गई थी जब हनुमान बेनीवाल दिल्ली छोड़ जयपुर वापस लौट आए थे.

हनुमान के मंत्रिमंडल में नहीं आने का कारण मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान भी बने. बालियान को जाटों के बड़े नेता चौधरी अजित सिंह को हराने का ईनाम मंत्रिमंडल का हिस्सा बना कर दिया है. मंत्रिमंडल में पर्याप्त जाट चेहरे होने के कारण ही हनुमान बेनीवाल कैबिनेट में जगह नहीं बना पाए.

राजस्थानः कांग्रेस को अब भी है सात से आठ सीटों पर जीत की उम्मीद

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तमाम एग्ज़िट पोल भले ही राजस्थान में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा छह सीटें मिलने का दावा कर रहे हों लेकिन कांग्रेस के टॉप नेताओं को अभी भी सात से आठ सीटें जीतने का भरोसा है. कांग्रेस करौली, टोंक, दौसा, नागौर, बाड़मेर, जोधपुर, अलवर और सीकर सीट पर जीत मानकर चल रही है.

खास बात यह भी है कि बाड़मेर, सीकर, टोंक और अलवर सीट पर कांग्रेस सिर्फ 25 हजार से लेकर 35 हजार के करीबी अंतर से ही जीत का दावा कर रही है. वहीं जोधपुर, करौली और दौसा में अच्छी जीत का भरोसा है. हालांकि 23 मई को साफ हो जाएगा कि एग्ज़िट पोल के दावे सही साबित होते हैं या कांग्रेस के खुद के दावे.
इन सीटों पर जीत तय मानकर चल रही है कांग्रेस
सीकर
कांग्रेस यहां से अपनी जीत को लेकर पूरी आश्वस्त नजर आ रही है. हालांकि मतदान से पहले कांग्रेस यहां से भारी जीत का दावा कर रही थी लेकिन अब कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष महरिया खुद 25 हजार से 35 हजार के अंतर से जीत का दावा कर रहे हैं. कांग्रेस शुरुआत में यहां से एक लाख के अंतर से जीत का सपना देख रही थी. लेकिन संघ ने बीजेपी प्रत्याशी सुमेधानंद सरस्वती के लिए जमकर मेहनत की.
उसके बाद नरेंद्र मोदी की सभा ने सुमेधानंद को टक्कर में ला दिया. महरिया के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ जैसा हो गया है. इस हार के बाद महरिया के सियासी करियर पर ब्रेक भी लग सकता है इसलिए महरिया ने सारी ताकत जीतने में लगा दी. सीकर में एक भी विधायक बीजेपी का नहीं होने से कांग्रेस को खूब फायदा मिला है. हालांकि जानकार और सट्टा मार्केेट इसे बीजेपी की सीट मानकर चल रहे हैं.

नागौर
बीजेपी ने गठबंधन करते हुए आरएलपी के हनुमान बेनीवाल को इस सीट पर टिकट थमाया. इस गठबंधन के चलते कांग्रेस मुकाबले में आ गई. कांग्रेस के पक्ष में बताया जा रहा है कि मुस्लिम और दलित समाज के अच्छे वोट आए हैं. वहीं राजपूत समाज ने भी ज्योति मिर्धा का साथ दिया. हनुमान का माइनस पॉइंट बताया जा रहा है कि बीजेपी का परम्परागत वोट उन्हें नहीं मिला.

वहीं खींवसर से बेनीवाल की लीड भी ज्यादा मिलती नहीं दिख रही. युनूस खान और सीआर चौधरी भी बेनीवाल के साथ मन से नहीं लगे. हालांकि सट्टा मार्केट और एग्ज़िट पोल इस सीट पर बेनीवाल की जीत का दावा कर रहे हैं.

टोंक
चुनाव से पहले कांग्रेस इस सीट पर बेहद मजबूत स्थिति में थी. खुद बीजेपी भी टोंक को कांग्रेस के खाते में मानकर चल रही थी लेकिन मतदान के बाद नमोनारायण मीणा के मुश्किल से सीट निकालने के समीकरण सामने आ रहे है. गुर्जर समाज की एकतरफा वोटिंग के बाद सामान्य वर्ग के मतदाताओं ने बीजेपी के पक्ष में जमकर मतदान किया है. इसके बावजूद मीणा करीब 25 हजार से अधिक वोटों से जीत मानकर चल रहे हैं. जानकार और एग्जिट पोल भी इस सीट पर कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे हैं.
बाड़मेर
इस सीट पर कांग्रेस चुनाव प्रचार के दौरान बेहद मजबूत नजर आ रही थी. लेकिन मोदी की सभा और सनी देओल के रोड शो के बाद मानवेंद्र मुकाबले में फंस गए. हालांकि राजपूत, दलित और मुस्लिम वोटों की बदौलत मानवेंद्र मुकाबले मेें बढ़त बनाते दिखाई दिए. यहां कांग्रेस 25 हजार के करीब से जीत मानकर चल रही है. एग्ज़िट पोल में भी बाड़मेर में कांग्रेस की जीत बताई गई है.

जोधपुर
सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव के कांग्रेस से चुनाव लड़ने पर यहां मुुकाबला बेहद रोचक हो गया. हालांकि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह ने मजबूती से उनके सामने अंत तक चुनाव लड़ा. अशोक गहलोत और कांग्रेस इस सीट पर जीत मानकर चल रहे हैं. यहां एग्ज़िट पोल किसी की हार-जीत का दावा नहीं कर रहे बल्कि कड़ी टक्कर बता रहे हैं. हालांंकि सट्टा मार्केट गजेंद्र सिंह की जीत का दावा ठोक चुका है.

करौली-धौलपुर
कांग्रेस इस सीट पर सबसे बड़ी जीत दर्ज मानकर चल रही है. बीजेपी नेता भी दबी जुबान में यहां हार स्वीकार कर रहे हैं. एग्ज़िट पोल में भी करौली सीट कांग्रेस के पाले में गिरती दिख रही है.

दौसा
दौसा सीट भी कांग्रेस अपने खाते में मानकर चल रही है. यहां मुकाबला दो महिलाओं के बीच में था. निर्णायक मीणा वोटर्स ने कांग्रेस की सविता मीणा के पक्ष में ज्यादा वोट डाले हैं. वहीं बीजेपी प्रत्याशी जसकौर मीणा को कद्दावर नेता किरोड़ी मीणा का भरपूर समर्थन नहीं मिला. कांग्रेस एससी और गुर्जर वोटर्स मिलने के चलते अभी भी अपनी जीत सुनिश्चित मानकर चल रही है.

अलवर
इस सीट पर अब भी कांग्रेस को जीत की आस है. कांग्रेस अलवर शहर के वोटर्स अपने पाले में मानते हुए जीत का दावा कर रही है. हालांकि सच यह है कि यहां टक्कर कड़ी है लेकिन बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है.

इस तरह से एग्ज़िट पोल के बाद भी कांग्रेस को प्रदेश में सात से आठ सीटें मिलने की पूरी उम्मीद है. हालांकि पहले कांग्रेस के नेता यहां से करीबन 12 सीटों पर जीत मानकर चल रहे थे लेकिन एग्ज़िट पोल के बाद उनका यह दावा अधिकतम आठ सीटों तक सिमट गया.

वैसे राजनीति के जानकार अभी भी कांग्रेस की केवल पांच से छह सीटें आने का दावा कर रहे हैं. इसके पीछे दलील केवल इतनी सी है कि लोकसभा चुनाव में महज़ 25 हजार की जीत का दावा कैसे टिक पाएगा.

किरोड़ी, हनुमान और राठौड़ की तिकड़ी में कौनसी खिचड़ी पक रही है?

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सियासत में घटनाओं का बड़ा महत्व है. ये घटनाएं ही नेताओं को सियासत में अर्श से फर्श तक और फर्श से अर्श पर ले जाती है. अलवर के थानागाजी में हुए गैंगरेप मामले में भी बीजेपी के भीतर एक तिकड़ी कुछ ऐसे ही सियासी समीकरण पैदा कर रही है. यह जोड़ी बीजेपी के इतर थानागाजी गैंगरेप मामले में जोरदार प्रदर्शन कर पार्टी के मध्य अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में लगी है.

पहले तो इस तिकड़ी के दो किरदारों ने जयपुर मे गैंगरेप मामले को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन की तस्वीरें राजनीति के जानकारों के साथ-साथ बीजेपी के लिए भी चौंकाने वाली रही. वजह- इस प्रदर्शन में किरोड़ी लाल मीणा और राजेंद्र राठौड़ कंधे से कंधा मिलाए दिखे. कुछ लोग कह सकते हैं कि इसमें चौंकने जैसा क्या है जबकि दोनों नेता बीजेपी के हैं. अगर ऐसा है तो बता दें कि किरोड़ी लाल मीणा और वसुंधरा राजे के बीच अदावत और राजेंद्र राठौड़ की वसुंधरा राजे के साथ नजदीकियों से पूरा प्रदेश वाकिफ है. ऐसे में मीणा और राजेंद्र राठौड़ का साथ एक मंच पर आना ऐसा आभास पैदा कर रहा है जैसे दोनों दिग्गज़ प्रदेश बीजेपी के भीतर कुछ नए समीकरण पैदा करने के प्रयास कर रहे हैं.

गैंगरेप मामले को लेकर किरोड़ी लाल मीणा ने दौसा में विशाल प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण किरोड़ी-राजेंद्र-हनुमान की तिकड़ी रही. बेनीवाल और किरोड़ी तो कई बार एक मंच पर साथ देखे जा चुके हैं लेकिन इस जोड़ी में वसुंधरा गुट के राजेंद्र राठौड़ की एंट्री प्रदेश बीजेपी में नई संभावनाओं को जन्म देता हुआ दिखाई दिया. राजेंद्र राठौड़ प्रदेश की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के काफी नजदीकी माने जाते रहे हैं लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद उनके संबंध उतने मधुर नहीं बचे हैं.

हालांकि इस तिकड़ी के तीसरे किरदार हनुमान बेनीवाल बीजेपी में नहीं है लेकिन उनकी पार्टी रालोपा एनडीए में शामिल है. उन्होंने एनडीए प्रत्याशी के तौर पर नागौर से लोकसभा चुनाव लड़ा है. हनुमान बेनीवाल की राजेंद्र राठौड़ के साथ राजनीतिक अदावत भी रही है लेकिन नागौर चुनाव में राजेंद्र राठौड़ ने बेनीवाल के चुनाव प्रचार में जमकर पसीना बहाया है. हनुमान बेनीवाल पूर्व में बीजेपी से विधायक भी रह चुके है लेकिन उन्हें अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद बेनीवाल खींवसर से निर्दलीय विधायक चुने गए. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने ‘आरएलपी’ का गठन कर प्रदेश की अनेक सीटों पर प्रत्याशी उतारे. इनमें तीन उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस तिकड़ी पर ट्वीट कर हमला बोला है. गहलोत ने कहा, ‘किरोड़ीलालजी, बेनीवालजी और राठौड़जी. ये बेचारे क्या कर सकते हैं जब मोदीजी ही झूठ बोल रहे हैं और थानागाजी प्रकरण को लेकर राजनीति कर रहे हैं. ऐसे में उनको तो करना पड़ेगा क्योंकि बीजेपी में एक-दूसरे को डाउन करने के लिए राजनीति चल रही है कि अब आगे नेता कौन बने. पार्टी के अंदर ये लड़ाई हो रही है. गहलोत ने इस ट्वीट में साफ—साफ कहा कि बीजेपी के भीतर सत्ता संघर्ष चल रहा है. नेता गुट बनाकर प्रदेश बीजेपी की कमान अपने हाथ में लेना चाहते है लेकिन वो इसके लिए पीड़ित परिवार की भावनाओं से खिलवाड़ ना करें.

दौसा में बवाल के बाद गिरफ्तार हुए किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल

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दौसा में आज बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अलवर गैगरेंप मामले को लेकर प्रदर्शन किया लेकिन इस प्रदर्शन में बवाल मच गया और पुलिस ने किरोड़ी लाल मीणा के साथ हनुमान बेनीवाल को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया है. इससे पहले पुलिस और मीणा समर्थकों में जमकर पत्थरबाजी हुई. भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज भी किया. दरअसल, थानागाजी गैंगरेप मामले को लेकर किरोड़ी लाल ने दौसा में विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया. मीणा के इस प्रदर्शन में खींवसर विधायक और नागौर संसदीय सीट से प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल के साथ विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ … Read more