शिवराज के तीन मंत्रियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में कमलनाथ सरकार

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मध्यप्रदेश के बहुचर्चित ई-टेंडर घोटाले में ओस्मो कंपनी के संचालकों की गिरफ्तारी के बाद और कई खुलासे होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई नेता, अफसर और ठेकेदारों के नाम सामने आएंगे. सरकार ने इस मामले में 2014 से लेकर अब तक के साढ़े तीन लाख टेंडरों की जांच कराने का फैसला किया है. आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू 2015 से लेकर 2018 तक के टैंडर्स की जांच विशेष रूप से करेगी.

ईओडब्ल्यू ने मैप आईटी से सभी टेंडरों का ब्यौरा मांगा है. माना जा रहा है कि साढ़े तीन लाख टेंडरों में हजारों ऐसे टेंडर हैं, जिसमें इसी कंपनी के जरिए फर्जीवाड़ा किया गया है. उसे आशंका है कि ये घोटाला अरसे से चल रहा था. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और कई बड़े खुलासे होने के साथ शिवराज सरकार के तीन मंत्री जांच के दायरे मेें आ गए हैं. इसके साथ भाजपा के कई नेताओं, अफसरोंं और कई बड़े कांट्रेक्टर्स के नाम सामने आने के आसार हैं.

आपको बता दें कि शिवराज सरकार के दौरान 2014 में ई-टेंडरिंग व्यवस्था की शुरुआत हुई थीं. उस समय विधानसभा में कांग्रेस ने इस मामले को बड़े जोर-शोर उठाया था. जांच की मांग की थी. कमलनाथ द्वारा 14 जून 2018 को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह को पत्र लिखकर इस घोटाले की जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी, लेकिन जांच नहीं हो पाई.

सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि इस मामले की जांच होगी. इसकी सुगबुगाहट कई दिनों से थी, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ और उनके पूर्व सलाहकार आरके मिगलानी के कई ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद सब कुछ फटाफट हुआ. गुरुवार ईओडब्ल्यू की टीम ने भोपाल की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा और उसके तीन डायरेक्टरों को गिरफ्तार किया.

ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड सरकार के ई-टेंडरिंग पोर्टल में ऑनलाइन टेंडरिंग प्रोसेस में तकनीकी और सॉफ्टवेयर के लिए मदद करती थी. ईओडब्ल्यू को शक है कि कंपनी ने पहले भी इसी तरीके से दूसरे टेंडरों में भी घोटाला किया होगा. एक-दो दिन में पुराने टेंडरों के खुलासे होने के आसार हैं.

शिवराज के तीन प्यादे घेरे में

घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब शिवराज सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा, कुसुम मेहदेले और रामपाल भी जांच के दायरे में आ गए हैं. जिन पांच विभागों के 9 टेंडरों में 3000 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ है, उन विभागों की जिम्मेदारी कुसुम मेहदेले, नरोत्तम मिश्रा और रामपाल पर थी. ईओडब्ल्यू ने मामले में अज्ञात राजनेताओं पर एफआईआर दर्ज की है. ईओडब्ल्यू के मुताबिक जल निगम और पीएचई में सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है. पीएचई विभाग की तत्कालीन मंत्री कुसुम मेहदले ने इस मामले का ठीकरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर फोड़ा है. मेहदले ने कहा कि पेयजल के लिए एक हजार करोड़ रुपए के ई-टेंडर पर उन्होंने नहीं बल्कि शिवराज सिंह चौहान ने हस्ताक्षर किए थे. मेहदले ने कहा कि यह टेंडर पीएचई से नहीं बल्कि जल निगम से जारी किए गए थे.

किस विभाग में कितने का घोटाला

जानकारी के मुताबिक जल निगम में 1800 करोड़, सडक़ विकास निगम में 8 करोड़, लोक निर्माण विभाग में 14 करोड़, जल संसाधन विभाग में 1135 करोड़ और पीआईयू में 15 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ है. इस मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद गुरुवार को मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने सुबह ही संबंधित विभागों के अफसरों को तलब किया और मामले से जुड़ी फाइलें बुलवाई. इसके साथ ही विभागों के प्रोजेक्ट संबंधित जानकारी भी अफसरों से मांगी गई है. कमलनाथ सरकार इस मामले में एक्शन में दिख रही है. सीएम अपने स्तर पर भी इस मामले की जांच करवा रहे हैं. एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अफसरों को आरोप पत्र भी जारी करने की तैयारी है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना से टिकट, अब तक 386 उम्मीदवारों की घोषणा

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कांग्रेस ने सात उम्मीदवारों की सूची जारी की है. इसमें बिहार से एक, जम्मू-कश्मीर से एक, मध्यप्रदेश से तीन और पंजाब से दो उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं. सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना से टिकट दिया गया है. आपको बता दें कि सिंधिया वर्तमान में भी गुना सीट से सांसद हैं. उनके लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि वो इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन सूची में नाम सामने आने के बाद सारी अटकलों पर विराम लग गया है. Congress Central Election Committee announces next list of candidates … Read more

देश की सेना का अपमान करने वालों डूब मरो – पीएम मोदी

देश में विभिन्न चरणों में होने वाले लोकसभा चुनावों की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आती जा रहीं है, वैसे-वैसे विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता और स्टार प्रचारक दम-खम लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ने चाहते. वोटरों को लुभाने के लिए बड़े नेता दे-दनादन चुनावी सभाएं और रैलियां करने में जुटे हैं. पीएम नरेन्द्र मोदी भी शुक्रवार को महाराष्ट्र और कर्नाटका के दौरे पर रहे और केन्द्र सरकार की योजनाएं व काम गिनवाते हुए कांग्रेस पर जमकर बरसे. पीएम मोदी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सेना का अपमान करने वालों को डूब मरना चाहिए. पीएम नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के अहमदनगर में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित चुनावी … Read more

गुजरात: बीजेपी विधायक का चुनाव रद्द, नामांकन पत्र में थी अधूरी जानकारी

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गुजरात में एक वर्तमान बीजेपी विधायक की विधायकी को रद्द कर दिया गया है. वजह रही कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अधूरी जानकारी भरी थी. इस मामले के चलते गुजरात हाईकोर्ट ने द्वारका से बीजेपी विधायक पाबुभा मानेक का चुनाव रद्द कर दिया है. कोर्ट 2017 में द्वारका विधानसभा क्षेत्र से मानेक के प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस उम्मीदवार मरामन अहीर की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. ऐसे में इस सीट पर उपचुनाव हो सकते हैं. मानेक ने 2017 के विधानसभा चुनावों में 5,739 वोटों से जीत हासिल की थी. कोर्ट के अनुसार, गुजरात में 2017 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के मरामन अहीर ने बीजेपी के … Read more

पूर्व सैनिकों की चिट्ठी पर ट्विस्ट, कुछ ने भरी हामी तो कुछ ने किया किनारा

राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर सेना के पराक्रम व अभियानों के राजनीतिकरण को रोकने के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है. पत्र में शामिल नामों में से कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को ऐसी कोई चिट्ठी लिखने से मना किया है. वहीं कुछ ने इसे लिखने पर हामी भरी है. बता दें कि, राष्ट्रपति को लिखी इस चिट्ठी में पीएम मोदी और यूपी सीएम योगी के बयानों का जिक्र करते हुए भारतीय सेना के राजनीतिकरण को रोकने की अपील की गई थी. इससे पहले राष्ट्रपति भवन ने भी ऐसी किसी चिट्ठी मिलने से इनकार किया था. कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस चिट्टी को शेयर कर … Read more

राजस्थान: कांग्रेस नेतृत्व को 8 से 10 सीटों पर जीत की उम्मीद

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राजस्थान में लोकसभा चुनाव के रण में प्रचार परवान पर है. चिलचिलाती धूप में उम्मीदवार जीत के लिए पसीना बहा रहे हैं. इस गहमागहमी के बीच सबके मन में एक ही सवाल है कि सूबे में कांग्रेस और बीजेपी की कितनी-कितनी सीटें आ रही हैं. वहीं, मिशन-25 में जुटी कांग्रेस के दिग्गज नेता लगातार हर सीट का लेटेस्ट फीडबैक लेने में लगे हैं. प्रचार के मौजूदा वक्त में अगर संभावित परिणाम की बात करें तो कांग्रेस को 25 में से आठ से दस सीटें ही मिलने की संभावना है.

यह दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि कांग्रेस और उसके आलाकमान को अब तक मिली रिपोर्ट के आधार पर यह सामने आया है. जिसके तहत कांग्रेस पांच सीटों पर जीत तय, दस सीटों पर टक्कर और बाकी बची दस सीटों पर मुकाबले में अभी खुद को बाहर मानकर चल रही है. आइए अब आपको बताते है कि कांग्रेस किन सीटों पर जीत की स्थित में और किन पर कमजोर हालात में है.

पांच सीटों पर जीत लगभग तय:
बात करें कांग्रेस और उसके आलाकमान को फील्ड से मिल रहे फीडबैक की तो राजस्थान में कांग्रेस की सबसे मजबूत स्थिति सीकर लोकसभा सीट पर है. उसके बाद टोंक-सवाईमाधोपुर पर जीत मानी जा रही है. इसके बाद बाड़मेर, जोधपुर और भरतपुर में भी अच्छी जीत का फीडबैक मिला है.

10 सीटों पर आमने-सामने की टक्कर :
वहीं, बात करें प्रदेश की अन्य लोकसभा सीटों की तो झुंझुनूं, अलवर, जयपुर ग्रामीण, बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़, डूंगरपुर-बांसवाड़ा, करौली-धौलपुर, दौसा और उदयपुर सीटों पर मुकाबला रोचक और बराबरी की टक्कर का है. इन सीटों के परिणाम कह सकते है कि 25 हजार से 50 हजार के बीच रहने के पूरे आसार है. यानी जो प्रत्याशी ढंग से प्रचार और मतदाताओं को प्रभावित करने में कामयाब हो जाएगा जीत उतनी ही करीब आती जाएगी.

10 सीटों पर भाजपा मजबूत :
अब बात करें प्रदेश की बाकी बची लोकसभा सीटों की तो कांग्रेस के पसीने छूटे हुए हैं. कह सकते है कि फिलहाल इन सीटों पर मुकाबला एकतरफा बरकरार है. जिसके चलते बारां-झालावाड़, भीलवाड़ा, अजमेर, चूरू, राजसमंद, चितौड़गढ़, कोटा-बूंदी, जयपुर शहर, जालौर-सिरोही और पाली पर भाजपा मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं.

दरअसल, जिन सीटों पर कांग्रेस पहले से कमजोर थी वहां कमजोर प्रत्याशी उतारकर और स्थिति खराब कर ली है. अजमेर और झालावाड़ में पैराशूटर को मौका देने से स्थानीय नेता साथ नहीं रहने से गणित बिगड़ गया. बाकी जगह जातिगत समीकरण और मोदी फैक्टर भारी पड़ रहा है. खैर अब देखना होगा कि कांग्रेस इस फीडबैक के आधार पर जीत के लिए अब क्या रणनीति अपनाती है. अगर कांग्रेस की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अगर आठ से दस सीटें आती है तो यह पहली बार होगा कि राज्य में सरकार होने के बावजूद कोई पार्टी दस के आंकड़े में सिमट जाएगी.