मध्यप्रदेश उपचुनाव में बढ़ी कमलनाथ की मुश्किलें, बसपा ने पहली लिस्ट में उतारे 8 उम्मीदवार

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Politalks.News/MP. मध्यप्रदेश में 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamalnath) की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं. वजह है- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उप चुनावों के लिए अपने 8 उम्मीदवारों को चुनावी समर में उतारा है. सूची में बसपा के पूर्व विधायक सोनेराम कुशवाह का नाम भी शामिल है. सूची के मुताबिक बसपा ने मुरैना की तीन, भिंड व शिवपुरी की दो-दो और ग्वालियर की एक सीट पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं. अभी तक लग रहा था कि सपा-बसपा और कांग्रेस मिलकर सीटों पर बंटवारा करेंगे लेकिन बसपा के चुनाव लड़ने के बाद अब कांग्रेस का अकेले चुनावी … Read more

बसपा प्रकरण में मुख्यमंत्री गहलोत की हुई नैतिक जीत, हाइकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने की एसएलपी खारिज

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Politalks.News/Rajasthan. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 8 विधायकों के कांग्रेस में विलय के मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की एक बार फिर कानूनी जीत हुई है. इसे सीएम गहलोत की नैतिक जीत भी बताई जा रही है. बसपा प्रकरण में कांग्रेस को पहले हाईकोर्ट और उसके तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली. सबसे पहले हाईकोर्ट में जस्टिस महेंद्र गोयल की एकलपीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पीकर को ही मामला तय करने के आदेश दिए. हाईकोर्ट ने कहा कि स्पीकर को ये फैसला करना है कि विलय सही है या गलत. मामला पिछले साल का है जिसे बसपा के साथ बीजेपी विधायक मदन दिलावर … Read more

गोवा में मर्जर हो तो संवैधानिक, राजस्थान में हो तो असंवैधानिक? वाह राजनीतिक महानुभावों, वाह

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Politalks.News/Rajasthan. क्या यह हमारी संवैधानिक विकास के चरण का एक हिस्सा है, कब तक राजनीतिक मामलों में अर्जेंट हियरिंग कोर्ट के माध्यम से फैसले होंगे? राजनीतिक दल खुद ही नैतिकता का परिचय क्यों नहीं देते? राज्यपाल और स्पीकर के सारे निर्णय को क्यों नहीं किया जा पा रहा है स्पष्ट? किसी भी राज्य में सरकार बननी होती है तो संवैधानिक संकट खड़ा हो जाता है. गोवा में बीजेपी ने कांग्रेस के 15 में से 10 विधायकों का अपनी पार्टी में मर्जर करा लिया. बीजेपी की नजर में वो सही है, लेकिन राजस्थान में 6 बीएसपी विधायकों का कांग्रेस में मर्जर बीजेपी की नजर में गलत है, असंवैधानिक है. अब दोनों … Read more

कांग्रेसी बने बसपा के 6 MLAs को वोटिंग से रोकें अन्यथा अपूरणीय क्षति होगी- SC में दायर हुई याचिका

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Politalks.News/Rajasthan. प्रदेश में जारी सियासी घमासान के बीच हर रोज कुछ नया सामने आता है. अब बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय के मामले में फिर एक नया मोड़ आ गया है. भाजपा विधायक मदन दिलावर ने राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ रविवार को विशेष अनुमति से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है, जिस पर आज जस्टिस अरुण मिश्रा की खंडपीठ सुनवाई करेगी. भारतीय जनता पार्टी विधायक मदन दिलावर ने इस तर्क के साथ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका एसएलपी पेश की है, राजस्थान विधानसभा के 14 अगस्त को शुरु होने वाले सत्र में कांग्रेस सदस्य बन चुके बहुजन समाज पार्टी के … Read more

हाइकोर्ट के नोटिस पर बोले विधायक अवाना- कांग्रेस में विधायक दल का विलय हुआ है न कि बसपा का

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Politalks.news/Rajasthan. बहुजन समाज पार्टी (BSP) के 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर हाईकोर्ट की तरफ से उक्त सभी विधायकों को नोटिस तामील करवा दिए गए हैं. बीते दिन रीडर ने पुलिस की मौजूदगी में जैसलमेर के सूर्यागढ़ रिजॉर्ट पहुंच सभी विधायकों को नोटिस थमाए. नोटिस मिलने के बाद बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए नदबई विधायक जोगेंदर सिंह अवाना (Joginder Singh Awana) ने साफ किया कि कांग्रेस में विधायक दल का विलय हुआ है, बसपा पार्टी का विलय नहीं हुआ है. अवाना ने प्रदेश पदाधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें परेशानियां बताई गई थी लेकिन न तो उन्होंने कोई कदम उठाया, न ही बसपा सुप्रीमो … Read more

बहुमत की गणित में हुए फेल तो अब बीएसपी के 6 विधायकों पर केंद्रीत हुआ सारा सियासी खेल

बीएसपी के 6 विधायकों पर केंद्रीत हुआ सारा सियासी खेल

PoliTalks.News/Rajasthan. हर कोशिश में असफल होने के बाद भी 101 के बहुमत का आंकड़ा जुटाने में नाकाम रहे पायलट और भाजपा खेमा अब गहलोत खेमे में बैठे उन 6 विधायकों पर केंद्रीत हो गया है जो जीतकर तो बीएसपी के टिकट से आए थे, लेकिन सभी कांग्रेस में विलय हो गए. मामला लगभग 10 महीने पुराना हो चुका है लेकिन अब जोर पकड़ रहा है. बीजेपी खेमा अब इस पूरे मसले पर अपनी सारी ताकत झौंकने की तैयारी कर रहा है. भाजपा विधायक मदन दिलावर नई याचिका लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. सोमवार को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था. मदन … Read more

बसपा ने व्हिप जारी कर बढ़ाई गहलोत सरकार की मुश्किलें, गुढ़ा ने कहा हम नहीं मानते व्हिप को

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Politalks.News/Rajasthan. प्रदेश में पल पल बदलते सियासी समीकरण के बीच एक नया राजनीतिक मोड़ आ गया है. बीते दिन रविवार को बहुजन समाज पार्टी ने अपने सभी छ‍ह विधायकों को व्हिप जारी कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुश्किलें ओर बढ़ा दी हैं. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने व्हिप जारी करते हुए पार्टी के सभी 6 विधायकों को निर्देश दिया है कि अगर गहलोत सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता है, तो वो कांग्रेस के खिलाफ अपना वोट दें. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने सभी 6 विधायकों को नोटिस जारी कर ये भी बताया है कि चूंकि बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है और दसवीं अनुसूची … Read more

तो क्या बसपा फिर आ गई कांग्रेस के साथ? NRC के मुद्दे पर मिलाया सुर में सुर

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पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में हुए घटनाक्रम के बाद एक बार तो ऐसा लग रहा था कि जैसे चाहे कुछ भी हो अब बसपा कभी कांग्रेस के साथ खड़ी नहीं होगी. कांग्रेस को न जाने क्या-क्या नहीं कहा था बसपा सुप्रीमो मायावती ने. गौरतलब है कि राजस्थान में बसपा के छः के छः विधायक राजनीति के जादूगर माने जाने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक इशारे पर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. जिसके बाद मायावती का गुस्सा कांग्रेस पर फूट पड़ा था. लेकिन अब NRC के मुद्दे पर फिर एक बार बसपा ने विपक्षियों के साथ सुर में सुर मिलाया है. लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका है जब … Read more

केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने में विपक्ष से आगे निकली देश की जनता

Opposition against Central Government

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. लोकसभा के एकदम बाद हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और 17 राज्यों में हुए उपचुनावों के नतीजों ने ये साबित कर दिया है कि देश की जनता केंद्र सरकार (Central Government) की नीतियों और खोखले दावों से कितनी परेशान है. यही वजह है कि इन चुनावों में देश की सबसे बड़ी पार्टी बहुमत तक को तरस गयी. हरियाणा और महाराष्ट्र के हालात तो सभी ने देखे हैं, उप चुनावों में भी भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. ये परिणाम जनता की आवाज और विरोध के स्वर ही तो हैं. अब विपक्ष के नेता भी इस बात को मानने लगे हैं कि निश्चित तौर पर केंद्र सरकार की … Read more

गहलोत के दिल्ली दौरे के बाद पायलट के सुर पड़े नरम, बसपा से आए विधायकों के प्रति बदला नजरिया

Sachin Pilot and Ashok Gehlot

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए छः विधायकों को लेकर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) का नजरिया अब बदल गया है. इन सभी विधायकों पर किसी समय बेबाकी से बयान दे रहे पायलट के सुर अब नरम पड़ते दिख रहे हैं. रविवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में निकाय चुनाव को लेकर हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने इन सभी विधायकों की तरफदारी करते हुए कहा कि, “बसपा छोड़ कांग्रेस में आये सभी छः विधायक अब हमारी पार्टी का हिस्सा हैं, उनका विलय हो चुका है. वे संगठन में आए हैं तो उन्हें जिम्मेदारी भी दी जाएगी.”

आपको बता दें इससे पहले इन छः विधायकों के बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने पर सचिन पायलट ने मीडिया से कहा था कि, “वे बगैर किसी शर्त, बगैर किसी प्रलोभन और लोभ-लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं तो उनका स्वागत है. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा“. पायलट ने अपनी इस बात को मीडिया के सामने एक नहीं बल्कि कई बार दोहराया था. इस तरह पायलट (Sachin Pilot) ने स्पष्ट सन्देश दिया था कि कांग्रेस सरकार में पार्टी बदलने वाले बसपा विधायकों (BSP MLAs) को राजनीतिक नियुक्तियों से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

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वहीं रविवार शाम निकाय चुनावों को लेकर पीसीसी में हुई बैठक से पहले राजधानी के एक होटल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लम्बी मंत्रणा हुई जहां बसपा से कांग्रेस में विलय हुए छः में से पांच विधायक राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), और विधायक दीपचंद खेरिया भी मौजूद रहे. इस दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के साथ बैठकर इन सभी विधायकों से लंबी मंत्रणा की. इस बैठक में सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल, अर्थव्यवस्था पर केंद्र सरकार को घेरने, राजनीतिक नियुक्तियों, आगामी निकाय चुनाव सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई. यहीं यह निर्णय भी हुआ कि उक्त सभी विधायकों को संगठन स्तर पर पूरा सम्मान दिया जाएगा.

इसके बाद रविवार शाम पीसीसी में हुई बैठक के बाद पायलट ने मीडिया को बताया कि सभी छह बसपा विधायकों ने लिखित में माननीय विधानसभा अध्यक्ष महोदय सीपी जोशी को आग्रह किया था कि वे सभी कांग्रेस में विलय करना चाहते हैं, जिस पर जोशी ने सोच समझकर अपना निर्णय विधायकों के पक्ष में सुनाया जो की अंतिम होता है. इस निर्णय के बाद उनका सीधे ही कांग्रेस पार्टी में विलय हो गया है. जहां तक कांग्रेस की बात है, सभी विधायक एक नए संगठन में आए हैं. पायलट ने कहा कि जहां-जहां कांग्रेस पार्टी उन सभी विधायकों को जिम्मेदारी सौंपेगी, उसे वे ग्रहण करेंगे. उन्होंने कहा कि इसमें औपचारिकता की कोई बात नहीं है लेकिन उनके कांग्रेस में विलय होने से निकाय चुनावों में निश्चत तौर पर पार्टी को लाभ मिलेगा.

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इससे पहले जब बसपा विधायकों का कांग्रेस में विलय हुआ था, तब पायलट ने उन सभी के कांग्रेस की सदस्यता न लेने की बात पर नाराजगी भी जाहिर की थी. यहां तक कि बसपा विधायकों के कांग्रेस में इस तरह विलय की जानकारी न तो संगठन के आला अधिकारियों को थी और न ही राजस्थान कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट को. इसके बाद पायलट और मुख्यमंत्री गहलोत के बीच की खींचतान भी खुलकर सामने आई थी. इस दौरान पायलट ने साफ तौर पर कहा था कि खून-पसीना बहाकर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार लाने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा. इसके अलावा रविवार से पहले तक पायलट की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि अभी तक इन सभी 6 विधायकों ने न तो कांग्रेस की सदस्यता ही ग्रहण की है और न ही पीसीसी चीफ (Sachin Pilot) से मुलाकात.

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रविवार को पीसीसी में हुई बैठक के बाद अविनाश पांडे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश के बाद ही इन 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय हुआ है और अब ये सभी कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं. पांडे ने भी ये भी साफ किया कि सत्ता और संगठन में इन विधायकों को पूरा सम्मान मिलेगा और प्रदेश के निकाय चुनाव में भी इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी. इस तरह अविनाश पांडे्य और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के रविवार को सामने आए ताजा बयानों के बाद अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस महीने में होने जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में इन सभी छः विधायकों को सम्मानजनक पद मिलना तय है. जिसके तहत इनमें से 2-3 को मंत्री पद और 3-4 को राजनीतिक नियुक्ति के तहत मलाईदार पद मिलना पक्का है.