सूर्यनगरी में जुटे कांग्रेस के दिग्गज, वैभव गहलोत के समर्थन में जनसभा

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सूर्यनगरी जोधपुर आज कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का गढ़ बनी हुई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, बीडी कल्ला, मानवेंद्र सिंह और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के साथ कई कांग्रेसी नेता और दिव्या मदरेणा सहित कई विधायक यहां मौजूद हैं. मौका है वैभव गहलोत के नामांकन का. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र जोधपुर लोकसभा सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार हैं और आज नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. नामांकन के पहले एक जनसभा रखी गई है जहां सभी राजनेता वैभव गहलोत के पक्ष में जनता से वोट अपील कर रहे हैं. पावटा चौराहे स्थिति जनसभा को वैभव गहलोत खुद भी संबोधित करेंगे. जोधपुर कांग्रेस का … Read more

राजस्थान: राजनीति की दिशा तय करेंगे जोधपुर के चुनावी परिणाम

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देश में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां अहम चुनाव बता रही हैं. कांग्रेस इन चुनावों में लोकतंत्र और संविधान बचाने की दलील देते हुए भाजपा सरकार को हटाने का आह्वान कर रही है तो भाजपा मजबूत और सशक्त सरकार बनाने के नाम पर एक बार पुनः जनता से वोट मांग रही है. इन सबसे बीच जोधपुर सीट के चुनावी परिणाम राजस्थान की राजनीतिक की दिशा और दशा तय करने वाले साबित होंगे.

जोधपुर सीट से एक ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पुत्र वैभव गहलोत की राजनीतिक लॉन्चिंग की है तो दूसरी तरफ बीजेपी ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर दांव खेला है. कहने को तो यह मुकाबला गजेंद्र सिंह शेखावत और वैभव गहलोत के बीच है लेकिन वैभव के पीछे अशोक गहलोत खुद यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. इस वजह से खुद गहलोत की साख इस सीट के चुनावी परिणाम पर टिकी हुई है. इस हिसाब से जोधपुर सीट के चुनावी परिणाम प्रदेश की राजनीति के भविष्य के लिए काफी अहम साबित होंगे.

अशोक गहलोत यदि अपने सुपुत्र वैभव गहलोत को यहां से विजयश्री दिलवाने में सफल रहते हैं तो अशोक गहलोत का न केवल प्रदेश में बल्कि आलाकमान के सामने भी कद बढ़ेगा. साथ ही अपनी ही पार्टी के राजनीतिक विरोधियों के विरोध के स्वर भी धीमे होंगे. अब ऐसा नहीं होता है और वैभव को इस सीट से हार मिलती है तो अशोक गहलोत के राजनीतिक कैरियर में ठहराव आ सकता है. इस पराजय के बाद गहलोत के विरोधी इसे आलाकमान के सामने अशोक गहलोत की असफलता बताएंगे.

इस बार के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर जिस तरह की कशमकश हुई थी, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अशोक गहलोत का चौथी बार मुख्यतंत्री दावेदार बनना मुमकिन नहीं होगा. पिछले लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में बहते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत अपनी नैया को पार लगाने में सफल हुए थे. इस बार भी उनके टिकट को लेकर संशय के बादल थे लेकिन कुशल वाकपटुता और संघ के नजदीकी होने का लाभ उन्हें मिला और एक बार फिर वह जोधपुर लोकसभा सीट से मैदान में हैं.

अगर वैभव को पटखनी देकर शेखावत यहां से जीत दर्ज करते हैं तो निश्चित तौर पर न केवल बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने बल्कि प्रदेश में भी उनका राजनीतिक कद ऊंचा होगा. इसके बाद अगर केंद्र में मोदी की सरकार बनती है तो गजेंद्र सिंह को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल सकता है. साथ ही उन्हें प्रदेश का भावी प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार भी माना जाएगा. वहीं अगर गजेंद्र सिंह यहां से पराजित होते हैं तो उनके राजनीतिक जीवन में ठहराव की स्थिति भी आ सकती है.

पिछले चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह विश्नोई का टिकट काटकर जब उन्हें उम्मीदवार बनाया गया था तो इसका कई जगह पर विरोध हुआ था. इस वजह से गजेंद्र के भविष्य के लिए उन्हें यहां से जीत दर्ज करना जरूरी होगा. यही वजह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों के स्थानीय कार्यकर्ता और सभी विधायकों ने चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. खासतौर पर कांग्रेस विधायकों को इस बात का एहसास है कि यदि वैभव यहां से ​जीत दर्ज करते हैं तो इसका सीधा लाभ उन्हें मिलेगा. वहीं गजेंद्र को विजयश्री दिलाकर बीजेपी नेता केन्द्रीय नेतृत्व के सामने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक शक्ति का एहसास करा सकेंगे जो भविष्य में उनके लिए फायदे का सौदा साबित होगा.

तस्वीरों के साथ मंच से भी गायब हुए वरिष्ठ भाजपायी, अटल-आडवाणी-जोशी नदारद

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बीजेपी पर अकसर आरोप लगता है कि पार्टी वन मैन आर्मी है और इसके कमाण्डर हैं नरेंद्र मोदी. अगर देखा जाए तो यह बात गलत भी नहीं है. कुछ ऐसा ही देखने को मिला आज बीजेपी के दिल्ली मुख्यालय में, जहां पीएम नरेंद्र मोदी सहित पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह और अरूण जेटली ने भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र जारी किया. यहां एक बात तो गौर करने लायक रही, वह थी कि संकल्प पत्र से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की फोटो नदारद थी. फ्रंट पेज पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी थी. यहां तक की बीजेपी के भामाशाह लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी न तो मंच पर … Read more

राजस्थान: कांग्रेस और बीजेपी में से किसकी लंका लगाएंगे हनुमान?

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लोकसभा चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपने अपने दांव खेल दिए हैं. किसी ने वजीर को आगे किया है तो किसी ने प्यादों को आगे बढ़ाकर बिसात बिछाई है. शह और मात के इस खेल राजनीति में राजस्थान भी पीछे नहीं है. आमतौर पर प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही सीधा मुकाबला होता है, लेकिन इस बार बीजेपी गठबंधन के साथ सूबे के सियासी मैदान में है.

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी ने हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी से गठजोड़ कर जीत की व्यूह रचना तैयार की है. बेनीवाल आरएलपी के सिंबल पर नागौर सीट से मैदान में उतर चुके हैं जबकि बाकी बची 24 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी मैदान में हैं. आपको बता दें कि बेनीवाल पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बनी.

‘मिशन-25’ के साथ चुनावी रण में उतरी बीजेपी बेनीवाल के साथ तालमेल को ‘मास्टर स्ट्रोक’ करार दे रही है. बीजेपी के नेता प्रकाश जावड़ेकर ने तो यहां तक दिया कि बेनीवाल की लोकप्रियता राजस्थान ही नहीं, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में है. बेनीवाल ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वे बीजेपी के पक्ष में प्रचार करने के लिए राजस्थान के अलावा दूसरे राज्यों में भी जाएंगे.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि हनुमान बेनीवाल प्रदेश के जाट बेल्ट में खासे लोकप्रिय हैं. विधानसभा चुनाव से पहले हुई रैलियों में उन्हें सुनने के लिए अच्छी खासी भीड़ जुटी. हालांकि यह भीड़ नतीजों में नहीं दिखी. आरएलपी को महज तीन सीटों पर जीत नसीब हुई. अलबत्ता उन्होंने कई सीटों पर हार-जीत के समीकरण जरूर ऊपर-नीचे कर दिए.

खुद हनुमान बेनीवाल को खींवसर सीट पर 82 हजार वोट मिले जबकि उनकी पार्टी को भोपालगढ़ में 67 हजार, मेड़ता में 56 हजार, शिव में 50 हजार, जायल में 49 हजार और सीकर में 28 हजार से अधिक वोट मिले. आरएलपी उम्मीदवारों को कोटपूतली, कपासन, नीमकाथाना, चौहटन में बीस हजार से अधिक और दूदू, चाकसू, बगरु, शेरगढ़, कठूमर व सरदारशहर में 10 हजार से अधिक वोट मिले. पूरे प्रदेश में आरएलपी के खाते में कुल 8 लाख 32 हजार 852 वोट पड़े, जो कुल मतदान का 2.4 प्रतिशत है.

क्या महज 2.4 फीसदी वोट हासिल करने वाली पार्टी राजस्थान में लोकसभा चुनाव के परिणामों को प्रभावित कर सकती है? राजनीति के जानकारों की मानें तो हनुमान बेनीवाल पर इतना बड़ा दांव खेलकर बीजेपी ने बहुत बड़ा खतरा मोल लिया है. पहली बात तो यह कि विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक तर्ज पर नहीं होते और दूसरा बेनीवाल को राज्यव्यापी पकड़ रखने वाला लीडर कहना जल्दबाजी है.

विधानसभा चुनाव में ज्यादातर जाट बाहुल्य सीटों पर हनुमान बेनीवाल की पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. आरएलपी को खाजूवाला में नौ हजार, लूणकरनसर में 2300, श्रीडूंगरगढ़ में एक हजार, पीलीबंगा में 1600, झुंझुनूं में 1500 और नागौर में महज चार हजार वोट मिले. चुनाव में हनुमान बेनीवाल के अलावा जिन दो उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, वे दोनों ही अनुसूचित जाति के हैं. यानी इन सीटों पर आरएलपी उम्मीदवार अपनी जाति और बेनीवाल की वजह से जाट वोट के गठजोड़ से जीते. वह भी तब जब मुकाबला त्रिकोणीय था.

बीजेपी भले ही आरएलपी से गठबंधन कर लोकसभा चुनाव में राज्यव्यापी फायदा देख रही हो, लेकिन राजनीति के जानकारों की मानें तो खुद हनुमान बेनीवाल के लिए नागौर से चुनाव जीतना बड़ी चुनौती है. एक तो उनका मुकाबला मिर्धा परिवार की बेटी ज्योति मिर्धा से है और दूसरा विधानसभा चुनावों में आरएलपी कई सीटों पर धराशायी हुई थी. आरएलपी को नागौर से महज चार हजार वोट मिले जबकि लाडनूं में पार्टी के उम्मीदवार को 19 हजार वोटों से संतोष करना पड़ा.

नागौर में हनुमान बेनीवाल के सामने आरएलपी का वोट बैंक बढ़ाना बड़ी समस्या है. बेनीवाल को जानने वाले कहते हैं कि उनकी राजनीति विरोध पर आधारित है, चाहे वह वसुंधरा राजे का विरोध हो या फिर अशोक गहलोत का. उनकी यही खासियत लोकप्रियता की वजह भी है, लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन उनकी इस पहचान को परेशानी में डाल सकता है. अब वे चाहकर भी वसुंधरा राजे के खिलाफ नहीं बोल पाएंगे. उनके भाषणों में अब एक ही सामग्री होगी- पीएम मोदी की तारीफ. इसे सुनकर बेनीवाल के प्रसंशकों में ​कितना जोश जागेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.

राजनीति के जानकारों का मानना है कि बेनीवाल की एंट्री से बीजेपी के मूल वोट बैंक राजपूत और ओबीसी पर सीधा असर पड़ेगा. कहा जाता है कि जब नागौर से हवा चलती है तो राजनीतिक मौसम पूरे मारवाड़ का बदलता है. ऐसे में बेनीवाल के बीजेपी के साथ जाने का असर जोधपुर और बाड़मेर सीट पर भी होगा. आपको बता दें कि अशोक गहलोत से व्यक्तिगत रिश्तों के बावजूद जोधपुर में राजपूत अभी तक कांग्रेस के साथ खड़ा नजर नहीं आ रहा था, लेकिन अब जब बीजेपी ने अपने तुरुप के पत्ते को जनता को दिखा दिया है, तो वे अपना रुख मोड़ सकते हैं.

हनुमान बेनीवाल के बीजेपी में जाने का सबसे बड़ा फायदा मानवेंद्र सिंह को होगा. राजपूत– मुस्लिम–दलित वोटों की गणित कागज पर तो अब तक सुहानी नजर आ रही थी पर हकीकत में उसका साकार होना मुश्किल था. मगर बदले हुए हालात में बाड़मेर में न केवल राजपूत पूरी तरह से मानवेंद्र सिंह के साथ खड़ा हो गया है, बल्कि मूल ओबीसी और सामान्य वर्ग भी भाजपा से छिटका हुआ नजर आ रहा है.

कुल मिलाकर बीजेपी के हनुमान बेनीवाल से गठबंधन से नागौर ही नहीं बल्कि समूचे मारवाड़ के सियासी समीकरण गड़बड़ा गए हैं. यदि दोनों ने इसकी काट नहीं ढूंढ़ी तो लोकसभा चुनाव के परिणाम निराश कर सकते हैं. वहीं, कांग्रेस यहां नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटी है. पार्टी के नेताओं को लगता है कि बीजेपी-आरएलपी के बीच हुए गठबंधन ने उनके लिए संभावना के दरवाजे खोल दिए हैं. यह देखना रोचक होगा कि ऊंट आखिरकार किस करवट बैठता है.

लोकसभा चुनाव: BJP का संकल्प पत्र जारी, राष्ट्रवाद और किसानों पर फोकस

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लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी का अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है. इस घोषणा पत्र का नाम ‘संकल्पित भारत सशक्त भारत’ दिया है. 48 पन्नों के संकल्प पत्र को 12 श्रेणियों में बांटा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यालय दिल्ली में इस संकल्प पत्र का उदघाटन किया. कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, अरूण जेटली और राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे. राजनाथ सिंह की अगुवाई में संकल्प पत्र को तैयार किया गया है. मंच को सबसे पहले अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरूण जेटली और सुषमा स्वराज ने संबोधित किया. राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में संकल्प पत्र पर प्रकाश डालते हुए इसे प्रेक्टिकल दस्तावेज बताया. उन्होंने बताया … Read more