राजस्थान: 13 सीटों पर कल शाम थम जाएगा चुनाव प्रचार, मतदान 29 को

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देश में लोकसभा चुनाव के तीन चरण का मतदान हो चुका है और चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है. राजस्थान में लोकसभा चुनाव दो चरण में सम्पन्न होंगे. जिसमें 29 अप्रैल को 13 लोकसभा सीटों और 6 मई को 12 सीटों पर मतदान होने वाला है. चौथे चरण प्रदेश की 13 सीटों पर भी मतदान होगा. प्रदेश में 29 अप्रैल को जिन 13 सीटों पर मतदान होना है उनमें अजमेर, टोंक-सवाई माधोपुर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चितौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा और झालावाड़-बारां संसदीय सीटें शामिल है. एक नजर डालते हैं इन सीटों पर. जोधपुर संसदीय सीट इस बार प्रदेश के साथ-साथ देश की हॉट सीटों … Read more

उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में पेराशूटी उम्मीदवारों के भरोसे कांग्रेस!

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सत्ता की कुर्सी के लिए जरूरी जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए राजनैतिक दलों के लिए पार्टी की नीति और कार्यकर्ताओं से किए गए वादे कोई महत्व नहीं रखते. जैसे ही चुनाव करीब आते हैं, राजनैतिक दल अपने वादों से उलट जुगाड़ू और जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर देते हैं. ताजा उदाहरण के तौर पर कांग्रेस को ही देख लीजिए. पिछले लोकसभा और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से वादा किया था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी अपने कार्यकर्ताओं पर विश्वास कर उन्हें चुनाव लड़वाएगी लेकिन चुनाव आते ही कांग्रेस अध्यक्ष अपने द्वारा किए गए वादों को भूल बैठे. नतीजा यह रहा कि यहां एक-दो नहीं बल्कि करीब डेढ़ दर्जन ऐसी सीटें हैं जहां पार्टी हाईकमाल ने बाहरी या जुगाड़ू प्रत्याशियों पर दांव खेला है. आइए जानते हैं पेराशूटी उम्मीदवारों के बारे में-

इटावा:
पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को किनारे कर हाईकमान ने इस सीट पर चंद दिनों पहले बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए अशोक दोहरे को मैदान में उतारा है. अशोक दोहरे वर्तमान में यहां से सांसद हैं और टिकट कटने पर कांग्रेस में शामिल हो गए. इस सीट पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह प्रबल दावेदार बताए जा रहे थे.

सीतापुर:
कांग्रेस ने सीतापुर सीट पर भी हाल ही में पार्टी ज्वॉइन करने वाली कैसरजहां को टिकट दिया है. कैसरजहां सीतापुर सीट से बसपा के टिकट पर 2009 में सांसद चुनी गई थीं लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला. नाराज कैसरजहां ने बसपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया. यहां से पूर्व मंत्री अम्मार रिजवी जैसे कई दिग्गज टिकट मांग रहे थे.

देवरिया:
पूर्वांचल की इस सीट पर कांग्रेस ने नियाज अहमद को पंजे का चुनाव चिंह देकर चुनावी दंगल में उतारा है. नियाज अहमद कुछ दिन पहले ही बसपा छोड़ कांग्रेस में आए हैं. पार्टी में शामिल होते ही उन्हें कांग्रेस ने गिफ्ट स्वरूप देवरिया से टिकट थमा दिया. जबकि इससे पहले कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह को यहां से चुनाव लड़ाने का आश्वासन दिया था. विधानसभा चुनावों के बाद से ही अखिलेश लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए थे लेकिन अब सब शांत हो गया है.

बांदा:
बुंदेलखंड की बांदा संसदीय सीट पर कांग्रेस ने दस्यु सरगना बाल कुमार पटेल पर दांव लगाया है. चुनाव से पहले सपा पार्टी छोड़ पार्टी में शामिल हुए पटेल का उस क्षेत्र में खासा वोट बैंक माना जाता है. इस सीट से कांग्रेस के पूर्व मंत्री विवेक सिंह टिकट मांग रहे थे. दिल्ली हाईकमाल सहित आला नेताओं ने उन्हें आश्वासन के ​साथ चुनावी तैयारियों में जुटने का आश्वासन भी दिया था.

मोहनलालगंज:
लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर कांग्रेस ने राम शंकर भार्गव को दिया टिकट वापिस लेकर पूर्व मंत्री आरके चौधरी को मैदान में उतारा. पहले इस सीट पर भार्गव को टिकट दिए जाने का ऐलान किया जा चुका था और उन्होंने जनसंपर्क भी शुरू कर दिया था. लेकिन पार्टी ने भार्गव से मुंह मोड़कर जिताऊ प्रत्याशी के चक्कर ने बसपा से पार्टी में शामिल हुए आरके चौधरी को टिकट थमा दिया.

बहराइच:
इस सीट पर कांग्रेस में अपनों को छोड़ जुगाड़ू प्रत्याशी के रूप में सावित्री बाई फुले को हाथ का साथ दिया है. फुले 2014 में बीजेपी के टिकट पर यहां से सांसद चुनी गई थीं, लेकिन इस बार टिकट कटने से उन्हें कांग्रेस की याद आयी. टिकट घोषणा से पहले यहां से पूर्व सांसद कमल किशोर कमांडो मजबूत दावेदार माने जा रहे थे.

यूपी की इन सीटों पर पेराशूटर

  • हरदोई : वीरेंद्र कुमार वर्मा – बीजेपी
  • मिश्रिख : मंजरी राही – बीजेपी
  • जौलान : बृजलाल खाबरी – बीएसपी
  • फतेहपुर : राकेश सचान – सपा
  • बासगांव : कुश सौरभ – रिटायर्ड आईपीएस
  • बिजनौर : नसीमुद्दीन सिद्दीकी – पिछले चुनाव के बाद कांग्रेस में आए
  • गौतमबुद्धनगर : डॉ. अरविंद सिंह चौहान – बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह के पुत्र
  • घोसी : बाल कृष्ण चौहान – बीएसपी
  • बस्ती : राज किशोर सिंह – सपा
  • भदोही : रमाकांत यादव – बीजेपी
  • आगरा : प्रीता हरित – भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी छोड़ कर आईं
  • मुरादाबाद : इमरान प्रतापगढ़ी – पहली बार राजनीति में, प्रतिष्ठित शायर

सिंगर दलेर मेहंदी बीजेपी में शामिल, पंजाब से उतरेंगे चुनावी मैदान में

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देश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां जोर पकड़ती जा रही है. राजनीतिक पार्टियां चुनाव की इस सियासी बिसात में काबिल प्रत्याशी उतारने में जुटी हैं. हाल ही में सिंगर हंसराज हंस व अभिनेता सनी देओल के बीजेपी में आने के बाद अब पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी ने आज बीजेपी का दामन थाम लिया है. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की मौजूदगी में दलेर मेहंदी ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. इससे पहले दलेर के समधी पंजाबी गायक हंसराज हंस भी बीजेपी में शामिल होकर दिल्ली की नॉर्थ-वेस्ट सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं बता दें कि हाल ही में पंजाबी सिंगर हंसराज हंस … Read more

‘पीएम नरेंद्र मोदी’ रिलीज बैन बरकरार, SC ने याचिका की रद्द

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीवनी पर आधारित बायोपिक ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की रिलीज पर 19 मई तक बैन लगाने का चुनाव आयोग का फैसला बरकरार रहेगा. ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ फिल्म के निर्माताओं ने चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुताबिक कोर्ट ने कहा कि, अब इस मामले में क्या बचा है? मुद्दा यह है कि क्या फिल्म इस समय दिखाई जा सकती है. चुनाव आयोग ने इस पर निर्णय ले लिया है. हम इस पर सुनवाई के लिए तैयार नहीं हैं.’ एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार … Read more

बीच रास्ते से वापस लौटे राहुल गांधी, विमान में आई खराबी

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लोकसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मियों के बीच राजनीतिक पार्टियों के नेता धुंआधार चुनावी रैलियों में जुटे हैं. हर मतदाता तक पहुंचने में कोई पार्टी पीछे नहीं रहना चाहती है. इसी बीच आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बिहार यात्रा पर जा रहे थे कि अचानक उनके विमान के इंजन में खराबी आ गई. अचानक इंजन में आई इस दिक्कत के कारण उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा. खुद राहुल ने इस घटना की जानकारी अपने ट्विटर पर दी है. वे आज बिहार के अलावा ओड़िसा व महाराष्ट्र में होने वाली चुनावी सभाओं में भी शामिल होंगे. Engine trouble on our flight to Patna today! We’ve been forced to return to Delhi. Today’s … Read more

राहुल गांधी के मोदी पर हमले, कोटा-जालोर-अजमेर में सभा

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लोकसभा चुनाव के दंगल में हर राजनीतिक पार्टी पूरे जोर-शोर से लगी है. एनडीए फिर से सत्ता वापसी की आस लगाए हुए है तो यूपीए देश की बागडोर अपने हाथ में लेने की जद्दोजहद में लगी है. शीर्ष नेता लगातार चुनावी रैलियों के जरिए मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं और चुनावी सभा भी की जा रही है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरूवार को राजस्थान में तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया. कोटा में रामनारायण मीणा, जालोर में रतन देवासी, और अजमेर में रिजु झुनझुनवाला के समर्थन में चुनावी रैलियां की. इन सभाओं के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर हमला बोला. चुनावी सभाओं के दौरान कांग्रेस … Read more

पांच साल में अब अयोध्या जाएंगे पीएम मोदी, करेंगे चुनावी रैली

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लोकसभा चुनाव का रोमांच चरम पर है. सभी नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक रखी है. अब तक तीन चरणों का मतदान हुआ है जिनमें देश की लगभग आधी सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं. वहीं इस बार उत्तर प्रदेश का चुनावी रण भी रोचक है. यहां साल 2014 के चुनावों में 80 में से 73 सीटें लाने वाले बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है. इसी चुनौती को पार करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं. पीएम मोदी ने आज वाराणसी में बड़ा रोड़ शो किया है इसके अलावा वे 1 मई को अयोध्या जाएंगे. 5 साल के मोदी सरकार के कार्यकाल … Read more

27 अप्रैल को जोधपुर में रोड शो करेंगी प्रियंका गांधी!

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राजस्थान की ‘हॉट सीट’ में शुमार जोधपुर संसदीय क्षेत्र पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को घेरने और मोदी सरकार में मंत्री रहे गजेंद्र सिंह शेखावत को जिताने के लिए बीजेपी अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सीट पर पहले ही बड़ी जनसभा कर चुके हैं. अब 26 अप्रैल को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का रोड शो होना भी है. ऐसे में अब कांग्रेस इस सीट पर अतिरिक्त ध्यान दे रही है. खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर की सीट पर पल-पल नजर बनाए हुए हैं. अब पीएम मोदी की सभा और अमित शाह के रोड … Read more

तीन चरणों के मतदान का रुझान कर रहा बीजेपी की उम्मीदों को तीन तेरह

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क्या भाजपा की हार अब तय हो चुकी है? क्या प्रधानमंत्री के पद से नरेंद्र मोदी की विदाई सुनिश्चित है? देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? क्या राहुल गांधी की किस्मत चमकने वाली है या फिर ‘डार्क हॉर्स’ के तौर पर शरद पवार का नाम सामने आ सकता है? आखिर कांग्रेस इस चुनाव में कितनी सीटें हासिल कर सकती है? 2019 के लोकसभा चुनाव में तीन चरणों के मतदान के बाद ऐसे तमाम सवाल सियासी फ़िज़ाओं में उभरने लगे हैं.

मतदाताओं के बीच चुनावी नतीजों को लेकर कयास तो लग ही रहे हैं, सियासी गलियारों में परिणाम के बाद की परिस्थितियों के लिए जोड़-घटाव अभी से शुरू हो चुके हैं. जब तीन सौ से ज्यादा सीटों पर मतदान संपन्न हो चुके हैं तो नतीजों को लेकर कुछ-कुछ संकेत भी नज़र आने लगे हैं. आने वाले संकेत राजनीति में काफी हद तक बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं. यानी कि केंद्र की सत्ता बदल भी सकती है या यूं कहें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी छिन सकती है.

ऐसे नतीजे की आशंका बीजेपी के भीतर भी जताई जा रही है. यह अलग बात कि मतदान के चार चरण शेष होने के कारण सार्वजनिक तौर पर ऐसा कहने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है. हां, सामान्य बातचीत में एनडीए के कई नेता यह ज़रूर स्वीकार कर रहे हैं कि इस बार बीजेपी गठबंधन की सीटें 200 के आसपास ठहर सकती है. ऐसी आशंकाएं निराधार भी नहीं हैं.

तीन दौर के मतदान से एक चीज़ तो स्पष्ट है कि इस बार मतदाताओं के बीच मोदी नाम की कोई लहर नहीं है. अलग-अलग सूबों में बीजेपी ने जो गठबंधन किए हैं, उससे भी अधिक लाभ मिलता नज़र नहीं आ रहा. उलटे सहयोगी दलों की किसी न किसी ग़लती से खेल और खराब ही हुआ है. उदाहरण के लिए बिहार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की आलोचना के लिए जद (यू) नेताओं ने लगातार जैसी भाषा का इस्तेमाल किया, उससे महागठबंधन ने पूरे चुनाव को अगड़ा बनाम पिछड़ा करने में कामयाबी हासिल कर ली. वर्ना चुनाव के पहले दौर के मतदान तक एनडीए यहां बढ़त बनाए हुए था.

उत्तरप्रदेश में बीजेपी ने स्वयं के लिए चुनौती को समझते हुए ओबीसी वोटर्स पर दांव लगाया था लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों में उसके छोटे-बड़े सहयोगियों ने ऐसा कारनामा किया कि ओबीसी वोट सपा-बसपा गठबंधन की ओर जाता दिखायी दे रहा है. महाराष्ट्र में शिवसेना सहयोगी होने के बावजूद अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए मोदी सरकार को लेकर जैसी भाषा इस्तेमाल हो रही है, इससे भी वहां का मतदाता भ्रमित हुआ है. ऊपर से शिवसेना से अलग हुई राज ठाकरे की पार्टी जिस तरह खुलकर एनडीए के ख़िलाफ़ नयी-नयी तकनीकों के सहारे प्रचार कर रही है, उससे कांग्रेस-राकांपा की संभावनाएं बढ़ी हैं.

बंगाल से ख़बरें आ रही हैं कि ममता बनर्जी के तृणमूल पर थोक से वोट पड़ रहे हैं. पूर्वोत्तर में नागरिक संशोधन विधेयक के मसले पर बीजेपी अपने पैर पर पहले ही कुल्हाड़ी चला चुकी है. गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे सूबों में पिछली बार के मुकाबले बीजेपी को कुछ न कुछ नुकसान होने के आसार प्रबल हैं. दक्षिण में लाख कोशिशों के बावजूद पार्टी बेहतर होते हुए नहीं दिख रही. ओडिशा को लेकर पार्टी नेता जरूर आशान्वित हैं लेकिन लेकिन वहां से जैसी खबरें आ रही हैं, बीजेपी के लिए मुसीबत पैदा होने वाली हैं.

शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में वोटरों का उत्साह भी इस ओर इशारा करता है कि सत्ताधारी सरकार के लिउए चुनौतियां बढ़ी हैं. शहरी वोटरों को बीजेपी का प्रबल समर्थक माना जाता रहा है लेकिन इस वोट बैंक की चुनावों में अरूचि देखते हुए संभव है कि बीजेपी की सीटों का आंकड़ा पिछली बार के मुकाबले काफी नीचे लुढ़क सकता है. लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या सच में कांग्रेस इतनी सीटें ला रही है कि वह अपने नेतृत्व में सरकार बनाने में कामयाब हो सके. मतदान के हालिया रुझान को देखते हुए इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता कि उसका प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले काफी बेहतर होने वाला है. हां, पार्टी बहुमत से काफी दूर रहे, इसमें कोई संदेह नहीं है. कांग्रेसी नेता भी मान कर चल रहे हैं कि पार्टी का आंकड़ा 200 तक पहुंच सकता है. पार्टी भी इसी रणनीति पर काम कर रही है.

कांग्रेस चाह रही है कि किसी भी तरह उसकी सीटों की संख्या बीजेपी की सीटों से अधिक हो ताकि चुनाव पश्चात गठबंधन का रास्ता उसके पक्ष में बनाने में आसानी हो. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कहा है, ‘कांग्रेस बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी लेकिन कांग्रेस को अपने दम पर बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. इसलिए दिल्ली में नयी सरकार के लिए चुनाव के बाद गठबंधन ज़रूरी है.’ ऐसे में यह तो तय हो ही गया है कि सत्तारूढ़ बीजेपी शासन में वापसी करने में सफल नहीं होगी. वजह है कि न तो इन्हें पर्याप्त सीटें मिलेंगी और न ही इनके साथ कोई गठबंधन करने जा रहा है.

अगर एनडीए या यूपीए में से किसी को बहुमत हासिल नहीं होता तो त्रिशंकु स्थिति में संसद का सिरमौर कौन होगा, इसके लिए 23 मई का इंतज़ार करना ज़रूरी है. माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस यूपीए गठबंधन को मिलाकर 200 का आंकड़ा पार करेगी तो राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनाने का फैसला ले सकती है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस एनडीए के उन सहयोगियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी जिनकी राजनीति का मिज़ाज धर्मनिरपेक्षतावादी हो. लेकिन यह स्थिति तब आयेगी जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए 200 सीटों का आंकड़ा आराम से पार कर पाए.

कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस ने इसके लिए विचार-मंथन करना शुरू कर दिया है. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में अगर उसके पास बहुत उपयुक्त आंकड़ा नहीं रहा तो वह विपक्षी गठबंधन की सरकार बनाने की ओर मदद का हाथ बढ़ाएगी. ऐसे में कुछ नाम सामने आ सकते हैं. इनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, तृणमूल की ममता बनर्जी, बीजद के बीजू पटनायक, आंध्र से चंद्रबाबू नायडु, उत्तर प्रदेश से मायावती शामिल हैं. जाहिर है इसमें शरद सबसे आगे हो सकते हैं.

वजह- उनकी छवि ऐसी है जिस पर शायद ही किसी विपक्षी पार्टी को ऐतराज हो. इसके अलावा प्रधानमंत्री बनने की उनकी ख्वाहिश के बारे में भी सभी जानते हैं. थक-हारकर इस बार उन्होंने एक तरह से राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया और चुनाव से दूरी बनायी, मगर यह कोई बड़ी बाधा नहीं है. अगर उनके नाम पर सहमति बनी तो वें उपचुनाव जीतकर संसद के सदस्य बन सकते हैं. जैसे-जैसे मतदान के दौर बीत रहे हैं, उनको लेकर सुगबुगाहट भी शुरू हो गयी है. एक खेमा अभी से उनकी राह बनाने में जुट गया है.

बहरहाल, बीजेपी का एक खेमा मोदी की जगह नितिन गड़करी को आगे करने की कोशिश कर रहा है. इस आशंका में कि बहुमत न आने की स्थिति में पार्टी गड़करी के चेहरे को आगे कर समर्थन जुटा सकती है. संघ ने तो बहुत पहले इस ओर इशारा कर दिया था. शायद मतदान से पहले ही संघ को अंदेशा हो चुका था कि मोदी की विदाई तय है. उनके तमाम आंतरिक सर्वेक्षण इस ओर इशारा कर रहे थे कि नोटबंदी, जीएसटी, बेरोज़गारी जैसे मसलों ने बीजेपी का नुकसान कर दिया है और उसकी भरपायी शायद अब संभव नहीं. मतदान के बीतते चरणों के साथ वह आशंका धरातल पर उतरती साफ नज़र भी आ रही है. फिर भी आखिरी तस्वीर के लिए 23 मई का इंतज़ार करना होगा क्योंकि लोकतंत्र में चुनाव का खेल भी अब टी-20 क्रिकेट की तरह रोमांचक हो चला है.