‘किस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं पंडित जवाहर लाल नेहरू, उन्हीं को वोट दूंगी’

PoliTalks news

वैसे तो सोशल मीडिया पर केवल ट्रोलिंग का फंडा ही चलता है लेकिन कई बार जान-बूझकर दिया गया बयान भी जमकर सुर्खियां बटोर लेता है. सोशल मीडिया पर अपनी बात बेबाकी से रखने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने आज कुछ ऐसा ही किया जिसके चलते वह ​मीडिया में छायी रहीं. दरअसल उन्होंने अपने बयान से मौजूदा राजनीतिक हालातों पर करारा तंज कसा है. लोकसभा चुनाव को लेकर दिया गया उनका यह बयान खूब वायरल हो रहा है. वहीं एक्टर केआरके ने प्रधानमंत्री मोदी पर सोशल मीडिया के जरिए वार किया. @ReallySwara Which constituency is #PanditJawaharlalNehru standing from in #LokSabhaElection2019 ??? Heard about him so much these last 5 years, … Read more

राजस्थान में BJP-RLP का गठबंधन, नागौर से चुनाव लड़ेंगे हनुमान बेनीवाल

PoliTalks news

आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान में कांग्रेस के एक बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने प्रदेश में बीजेपी से गठबंधन कर लिया है. बेनीवाल की पार्टी रालोपा अब एनडीए का घटक दल होगी. दोनों पार्टियां मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगी. इसके तहत हनुमान बेनीवाल नागौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. शेष 24 सीटों पर बीेजेपी अपने उम्मीदवार उतरेगी. राज्य की सभी सीटों पर बेनीवाल और उनके समर्थक बीजेपी के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे. नागौर सीट से बेनीवाल के सामने कांग्रेस की ज्योति मिर्धा चुनावी मैदान में हैं.

गठबंधन को लेकर आज राजधानी जयपुर स्थित बीजेपी मुख्यालय पर बीजेपी और आरएलपी की संयुक्त प्रेसवार्ता हुई. पीसी को केन्द्रीय मंत्री एवं बीजेपी के लोकसभा चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने संबोधित किया. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी गठबंधन की घोषणा की. इससे पहले बेनीवाल के कांग्रेस के साथ गठबंधन की खबरें सामने आई थीं लेकिन सीटों को लेकर बात नहीं बनी.

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होगा. उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने का प्रयास करेंगे. बता दें, आरएलपी को राजस्थान विधानसभा चुनाव में 3 सीटों पर जीत मिली थी.

RSS ऑफिस की सुरक्षा पर क्यों भिड़े कमलनाथ और दिग्गी?

PoliTalks news

मध्य प्रदेश में संघ कार्यालय (RSS) भोपाल में अरेरा कॉलोनी में ‘समीधा’ के नाम से स्थित है. यहां सुरक्षा के लिए पिछले 10 सालों से सुरक्षाकर्मी तैनात रहते थे लेकिन सोमवार को सरकार ने अचानक से फैसला किया कि अब से संघ कार्यालय को सुरक्षा नहीं दी जाएगी. ऐसे में एसएएफ के 4 तैनात जवान वहां से हटा लिए गए. खबर के वायरल होने के बाद तेज होते हंगामे को देखते हुए कांग्रेस सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा. इस मामले के बाद प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने इसे सरकार की साजिश करार दिया. वहीं आरएसएस की तरफ से अधिकारिक तौर पर … Read more

कांग्रेस ने जारी की 20 लोकसभा और 9 विधानसभा उम्मीदवारों की सूची

Politalks News

कांग्रेस ने देर रात अपने 29 उम्मीदवारों की नई सूची जारी की है. इसमें 20 लोकसभा चुनाव और ओडिसा विधानसभा चुनावों के 9 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं. लोकसभा सूची में गुजरात के 4, हिमाचल प्रदेश से एक, झारखंड से तीन, कर्नाटक से दो और पंजाब के आठ, ओडिसा के दो और दादरा एंड हवेली के एक उम्मीदवार का नाम है. लोकसभा सूची के अनुसार, गुजरात की गांधीनगर लोकसभ सीट से डॉ.सी.जे.चावड़ा, अहमदाबाद पूर्व से गीताबैन पटेल, सुरेंद्र नगर से सोमाभाई पटेल और जामनगर से मुरूभाई कनडोरिया को टिकट मिला है. हिमाचल प्रदेश की कांगरा सीट से पवन कजल के कांग्रेस उम्मीदवार बनाया है. झारखंड की राजधानी रांची से सुबोध कांत … Read more

दो-दो सीटों से चुनाव लड़ने की है पुरानी परंपरा, वाजपेयी से हुई थी शुरूआत

PoliTalks news

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी संसदीय सीट अमेठी के अलावा केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ने जा रहे हैं. एक से ज्यादा सीट से चुनाव लड़ने का ट्रेंड कोई नया नहीं है. पहले भी नेता ऐसा करते रहे हैं. बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे नरेंद्र मोदी ने भी दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा था. वह उत्तर प्रदेश की वाराणसी और गुजरात की वड़ोदरा सीट से प्रत्याशी थे. मोदी दोनों जगहों से चुनाव जीते लेकिन इसके बाद उन्होंने खुद के काशी सीट से ही प्रतिनिधि रहने का फैसला किया. एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने की परंपरा के इतिहास में अगर देखा जाए तो इसकी शुरूआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी.

1952 में हुए उपचुनाव में लखनऊ लोकसभा सीट से हारने के बाद उन्होंने 1957 में हुए लोकसभा चुनाव में लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर सहित तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था. वह बलरामपुर सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे जबकि लखनऊ में दूसरे स्थान पर थे. मथुरा में उनकी जमानत जब्त हो गई थी. दरअसल एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने की यह व्यवस्था रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट, 1951 के सेक्शन 33 में की गई है. इसी अधिनियम के सेक्शन 70 में कहा गया है कि चुनाव लड़ने के बाद वह एक बार में केवल एक ही सीट का प्रतिनिधित्व कर सकता है. ऐसे में साफ है कि एक से ज्यादा जगहों से चुनाव लड़ने के बावजूद प्रत्याशी को जीत के बाद एक ही सीट से अपना प्रतिनिधित्व स्वीकार करना होता है. उन सीटों को उपचुनाव के जरिए भरा जाता है.

देश में आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी आश्चर्यजनक रूप से रायबरेली सीट से अपना चुनाव हार गई थीं. 1980 के चुनावों में उन्होंने किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए रायबरेली के साथ मेडक (अब तेलंगाना में) से नामांकन भरा. यहां उन्होंने दोनों सीटों से चुनाव जीत लेकिन प्रतिनिधित्व करने के लिए रायबरेली सीट बरकरार रखी और मेड़क सीट छोड़ दी. इसी तरह तेलगू देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामा राव ने 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था. उन्होंने गुडीवडा, हिंदुपुर और नलगोंडा सीट से दावेदारी की थी. एनटीआर तीनों सीटें जीतने में सफल रहे थे. बाद में उन्होंने हिंदुपुर सीट को बरकरार रखा और बाकी दोनों सीटें छोड़ दी थीं.

एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने वालों में हरियाणा के पूर्व उप मुख्यमंत्री देवी लाल का नाम भी शामिल है. 1991 के चुनावों में उन्होंने एक साथ तीन लोकसभा और एक विधानसभा सीट से नामांकन भरा था. उन्होंने सीकर, रोहतक और फिरोजपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवारी पेश की जबकि घिराई विधानसभा सीट से भी प्रत्याशी थे. देवी लाल सभी सीटों पर चुनाव हार गए थे. वैसे 1996 के पहले तक अधिकतम सीटों की संख्या तय नहीं थी. बस केवल यही नियम था कि जनप्रतिनिधि केवल ही एक ही सीट का प्रतिनिधित्व कर सकता है. 1996 में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट, 1951 में संशोधन किया गया कि कोई भी उम्मीदवार अधिकतम दो सीटों पर चुनाव लड़ सकता है लेकिन प्रतिनिधित्व एक ही सीट पर कर सकता है.

दो सीटों से चुनाव लड़ने वाले दिग्गज

  • अटल बिहारी वाजपेयी (1991) : विदिशा और लखनऊ. दोनों ही जगहों से जीते. लखनऊ से सांसदी बरकरार रखी.
  • लाल कृष्ण आडवाणी (1991) : नई दिल्ली और गांधीनगर. दोनों ही जगहों से जीते. गांधीनगर से सांसदी बरकरार रखी.
  • अटल बिहारी वाजपेयी (1996) : लखनऊ और गांधीनगर. दोनों ही जगहों से जीते. लखनऊ से सांसदी बरकरार रखी.
  • सोनिया गांधी (1999) : बेल्लारी और अमेठी. दोनों ही जगहों से जीतीं. अमेठी ही सांसदी बरकरार रखी.
  • लालू प्रसाद यादव (2004) : छपरा और मधेपुरा. दोनों ही जगहों से जीते. छपरा सीट बरकरार रखी.
  • लालू प्रसाद यादव (2009) : सारण और पाटलीपुत्र. सारण सीट जीतने में सफल रहे. पाटलीपुत्र हार गए.
  • अखिलेश यादव (2009) : कन्नौज और फिरोजाबाद. दोनों सीटें जीतीं. कन्नौज सीट बरकरार रखी.
  • मुलायम सिंह यादव (2014) : आजमगढ़ और मैनपुरी. दोनों से जीते. आजमगढ़ से सांसद रहे.