यूपी चुनाव में छोटे दलों की बल्ले-बल्ले, सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने के लिए बड़ों को चाहिए छोटों का साथ

उत्तरप्रदेश में बड़ी दलों की छोटी पार्टियों पर नजर, पीएम मोदी के दांव ने बढ़ाए भाव, बीजेपी की रणनीति ने बढ़ाई छोटे दलों की महत्वकांक्षा भी, भाजपा ने साधा निषाद और अपना दल, सपा के पाले में RLD और महान, कांग्रेस-बसपा के हाथ खाली, चाहते आए साथ तो सपा कांग्रेस गठबंधन में जुटे पीके

एक दांव ने बढ़ाई यूपी में छोटे दलों की डिमांड!
एक दांव ने बढ़ाई यूपी में छोटे दलों की डिमांड!

Politalks.News/Uttarpradesh. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है. चुनाव मुख्य रूप से तीन बड़ी पार्टियों- भाजपा, सपा और बसपा को लड़ना है लेकिन इन तीनों पार्टियों के लिए बाकी छोटी पार्टियों का बड़ा महत्व है. चुनाव से पहले राज्य की छोटी पार्टियों की मांग बढ़ गई है. असल में भाजपा ने खास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटी पार्टियों का भाव ज्यादा बढ़ा दिया. पीएम मोदी ने जुलाई में अपनी मंत्रिपरिषद का विस्तार किया तो दो ऐसे काम किए, जिससे छोटी प्रादेशिक पार्टियों का महत्व बढ़ा. पीएम मोदी ने जाति पर बहुत जोर दिया और इस बात का प्रचार कराया गया कि भाजपा ने ज्यादा ओबीसी मंत्री बनाए हैं. इससे जाति की राजनीति करने वाली छोटी
पार्टियों के नेताओं की महत्वाकांक्षा बढ़ी. प्रधानमंत्री ने दूसरा काम यह किया कि दो साल तक सरकार से बाहर रखी गईं अनुप्रिया पटेल को केंद्र में मंत्री बना दिया.

अभी चर्चा है कि सितंबर के पहले हफ्ते में भी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का भी विस्तार होगा, जिसमें निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद और अपना दल के नेता आशीष पटेल को मंत्री बनाया जा सकता है. आशीष पटेल केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति हैं. भाजपा द्वारा छोटी प्रादेशिक पार्टियों को इतना महत्व दिए जाने का नतीजा यह हुआ है कि अब उत्तर प्रदेश में प्रादेशिक पार्टियों को लगने लगा है कि चुनाव से पहले उन्हें कुछ भी हासिल हो सकता है. इसलिए वे चुनाव के हिसाब से अपनी पोजिशनिंग कर रहे हैं. भाजपा ने तो अपनी पार्टियां चुन ली हैं और उन्हें जो देना था वह दे दिया है. लेकिन मुश्किल समाजवादी पार्टी के सामने है.

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समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव केवल आश्वासन दे सकते हैं. भाजपा की तरह देने को कुछ भी नहीं है. उसके पास सिर्फ उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटें हैं. जिसमें छोटी पार्टियां ज्यादा हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं. राष्ट्रीय लोकदल को भी ज्यादा सीटें चाहिए तो महान दल को भी अपनी हैसियत से ज्यादा सीट चाहिए. इन दोनों पार्टियों के साथ सपा की बातचीत चल रही है. अपना दल के दूसरे धड़े के साथ भी सपा की बात हो सकती है और अगर ओमप्रकाश राजभर तैयार हों तो पार्टी उनसे भी बात करने को तैयार है. लेकिन फिलहाल राजभर दूसरे समीकरण पर काम कर रहे हैं.

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ओमप्रकाश राजभर इस समय भीम आर्मी के चंद्रशेखर से बात कर रहे हैं तो उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया एमआईएम के साथ भी बातचीत जारी रखी है. उत्तर प्रदेश में फिलहाल बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस दो ऐसी पार्टियां हैं, जिनके पास तालमेल के लिए कोई प्रादेशिक पार्टी नहीं है. बसपा प्रमुख बहन मायावती ने अकेले लड़ने का ऐलान किया है पर कांग्रेस तालमेल करना चाहती है. प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था कि उनकी पार्टी समान विचारधारा वाली पार्टियों से तालमेल करने के लिए तैयार है. मुश्किल यह है कि कोई पार्टी उनसे तालमेल को तैयार नहीं है. इधर खबर ये है कि प्रशांत किशोर किसी तरह से फिर सपा के साथ कांग्रेस का तालमेल कराने की कोशिश में लगे हैं और खबर ये भी निकल कर आ रही है कि कांग्रेस 30-40 सीटों पर माने तो बात बन भी सकती है.

 

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