Prashant Kishor Priyanka Gandhi Meeting: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे एनडीए के अलावा किसी के लिए भी सुखद नहीं रहे. जनसुराज और कांग्रेस के लिए तो ये परिणाम किसी दुखद स्वप्न से कम नहीं. कांग्रेस को बिहार में जहां 6 सीट मिली, वहीं चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) के नेतृत्व वाली जनसुराज पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया. राजद की ओर से आ रहे हालिया बयानों से राजद और कांग्रेस की बिहार में राह अलग होने के संकेत मिल रहे हैं. इसी बीच प्रशांत किशोर और कांग्रेस एक नई राह तलाश रहे हैं. इसी कड़ी में दिल्ली में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और जनसुराज के संस्थापक पीके के बीच हुई दो घंटे की गुपचुप मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और पीके के बीच कोई नया राजनीतिक तालमेल बनने वाला है.
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हालांकि करीबियों का यही कहना है कि दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक हालात और भविष्य की संभावनाओं पर बातचीत हुई. फिर भी इस मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ किसी तरह का राजनीतिक तालमेल या गठबंधन कर सकते हैं? खासकर तब, जब हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और पार्टी खाता तक नहीं खोल पाई. वहीं कांग्रेस की स्थिति भी बेहद कमजोर रही और पार्टी सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई. ऐसे में माना यही जा रहा है कि प्रियंका गांधी और पीके की यह मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि बिहार में हार के बाद प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच एक बार फिर नई सियासी खिचड़ी पकने लगी है.
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हालांकि यह पहली बार नहीं है जब प्रशांत और कांग्रेस को लेकर अटकलें तेज हुई हों. करीब चार साल पहले भी पीके के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें सामने आई थीं. उस समय उन्होंने स्वयं इस बार का खुलासा किया था कि सोनिया गांधी ने उन्हें पार्टी के लिए एक प्रेजेंटेशन देने के लिए बुलाया था और उन्होंने करीब 9 घंटे तक अपना विजन और रणनीति पेश की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व उनके प्लान को जमीन पर उतारने के लिए तैयार नहीं थी. ऐसे में उन्होंने सोनिया गांधी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. उनका यह भी कहना था कि उनके पास कोई राजनीतिक विरासत नहीं है, इसलिए वे किसी एक व्यक्ति या विचारधारा से बंधकर राजनीति नहीं करना चाहते.
बिहार विस चुनाव के जो नतीजे अब आए हैं, उसके बाद एक बार फिर पीके और प्रियंका गांधी की मुलाकात ने पुराने सवालों को जिंदा कर दिया है. फिलहाल कोई भी इस मुलाकात को तूल नहीं देना चाहता, इसलिए ऑफ रिकॉर्ड इस मुलाकात से प्रियंका गांधी इनकार तक कर रही हैं, जबकि ऑन रिकॉर्ड इस पर पीके भी चुप्पी साधे हुए हैं. इसके बाद भी यह सवाल सियासी गलियारों में रह रहकर गूंज रहा है कि क्या यह बातचीत सिर्फ विचार-विमर्श तक सीमित थी या आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कोई नया समीकरण देखने को मिलेगा.. इस पर सभी की नजर टिकी हुई है.