Politalks.News/Rajasthan. प्रदेश में कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त मामले में जबरदस्त बयानबाजी का दौर जारी है. एसओजी द्वारा दो मोबाइल नम्बरों पर हुई बातचीत को तथ्य मानकर बीते दिन शुक्रवार को कांग्रेस व कांग्रेस समर्थित विधायकों की खरीद फरोख्त प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर ली है. इस पूरे प्रकरण में जिस बातचीत को तथ्य मानकर एफआईआर दर्ज की गई है उसे नागौर सांसद व रालोपा मुखिया हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मनगढंत कहानी बताया है. सांसद बेनीवाल ने एक के बाद एक बारह ट्वीट कर विधायक खरीद फरोख्त मामले में मुख्यमंत्री गहलोत पर जबरदस्त निशाना साधा है. वहीं सीएम गहलोत व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर आंतरिक गठजोड़ के आरोप भी लगाए हैं.
सांसद हनुमान बेनीवाल ने ट्वीट करते हुआ कहा कि राजस्थान में एसओजी द्वारा अशोक गहलोत जी के निर्देश पर विधायकों की फोन टेपिंग करवाकर मनगढ़ंत षड़यंत्र रचा जा रहा है. इस पूरे प्रकरण में मनगढ़ंत पटकथा के नायक व निर्माता-निदेशक स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत ही हैं. बेनीवाल ने आगे कहा कि खलनायक राज्य के डिप्टी सीएम सचिन पायलट को बनाया जा रहा है.
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जब से अशोक गहलोत सरकार आई है तब से हमारे व अन्य सांसदों तथा विधायकों के फोन टेप करवाये जा रहे हैं, जो संवैधानिक अधिकारों का हनन है और यह कृत्य राजस्थान सरकार का निंदनीय कृत्य है.
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विधायक खरीद फरोख्त की इस पटकथा के पूरे मामले में 2 निजी व्यक्तियों की आपसी बातचीत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है. जबकि लोकायुक्त जैसी सरकारी संवैधानिक संस्था द्वारा सिफारिश के बावजूद 4 साल से एफआईआर दर्ज नहीं की गई.
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सांसद हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार में तत्कालीन लोकायुक्त की एक सिफारिश का जिक्र करते हुए कहा कि लोकायुक्त की यह सिफारिश परोक्ष रुप से वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ व उनके करीबी सीपी कोठारी को रीको का निर्देशक बनाने से जुड़ी हुई थी. यह सिफारिश झालरापाटन से वर्तमान विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री को 2015 में की गई थी, जिस पर आज तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ.
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ऐसा कैसे सम्भव है कि 2 निजी व्यक्तियों की बातचीत के आधार पर जिसमें सीएम व डिप्टी सीएम के नाम का जिक्र करके मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है. यह कूटरचित मामला सीएम अशोक गहलोत व पूर्व सीएम राजे के आपसी तालमेल का हिस्सा है.
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बेनीवाल ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि हाल ही के दिनों में आई आईएएस व आईपीएस के तबादलों की सूची से इस पटकथा का सीधा सम्बन्ध है, क्योंकि तबादला सूची से पूर्व जिन अफसरों ने यह मुकदमा दर्ज करने से इनकार किया उन्हें हटाकर पूर्व सीएम के चहेतों को पुनः बड़े पदों पर पदस्थापित कर दिया गया.
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सांसद बेनीवाल ने आगे कहा कि सूत्रों के हवाले से माने तो एसओजी ने फोन टेपिंग में वर्तमान सीएम और पूर्व सीएम के आपसी गठजोड़ और सीएम गहलोत की पूर्व सीएम के साथ नियमित कई बार दूरभाष पर बात होना भी पाया.
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पूर्ववती सरकार के आखिरी महीनों में तत्कालीन सीएम के भरोसेमंद अफसर जो एसओजी के मुखिया थे उन्हें अशोक गहलोत जी ने खुद के वर्तमान विश्वस्त अफसर को हटाकर पुनः एसओजी की कमान दे दी जो अपने आप मे गहलोत-वसुंधरा गठजोड़ की कहानी को बयां करते है.
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अशोक गहलोत जी द्वारा खरीद फरोख्त करने की मनगढ़ंत पटकथा में उनकी स्वयं की भूमिका जनता में जगजाहिर हो गई साथ ही उनके पूर्व सीएम के साथ गठजोड़ को भी पुनः सार्वजनिक कर दिया.
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इस पूरी पटकथा में सीएम अशोक गहलोत जी ने खरीद फरोख्त को लेकर हमारे सहयोगी दल बीजेपी पर जो आरोप लगाए वो पूर्ण रूप से निराधार है और यह आरोप स्वयं गहलोत जी की बौखलाहट को बयां कर रहे है.
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खुद अशोक गहलोत जी ने 2 बार बसपा पार्टी से निर्वाचित विधायकों की खरीद फरोख्त करके कुर्सी को बचाया और आरोप लगा रहे है दुसरों पर, क्या गहलोत जी खुद के द्वारा की गई खरीद फरोख्त के मामले में कुछ बोलेंगे ?
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सांसद बेनीवाल ने अपने अंतिम टवीट में कहा कि लोकायुक्त ने यह सिफारिश तत्कालीन सीएम को एक गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज करने व जांच स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की बात कही मगर आज तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई. यह उदाहरण वर्तमान सीएम और पूर्व सीएम के आंतरिक गठजोड़ को बयां कर रहा है.
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