जीवंत लोकतंत्र के लिए न्यायपालिका को मजबूत और न्यायाधीशों को सशक्त बनाने की जरूरत- CJI रमना

आज मीडिया चला रहा है कंगारू कोर्ट- सीजेआई एनवी रमना
23 Jul 2022
Politalks.News/NVRamna. देश में चाहे कोई भी मुद्दा हो मीडिया और सोशल मीडिया पर इन दिनों उसे लेकर बहस शुरू हो जाती है. चाहे उस बहस का कोई परिणाम ना निकले लेकिन लोगों के बीच सोशल मीडिया पर वार पलटवार और एक दूसरे को खुद से बेहतर बताने की होड़ मच जाती है. ऐसे में देश कहां जा रहा है किस दिशा में जा रहा है कोई नहीं कह सकता. शनिवार को रांची के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ कॉलेज में 'जस्टिस ऑफ ए जज' पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई एनवी रमना ने कुछ ऐसी ही दलील दी. सीजेआई एनवी रमना ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मीडिया ट्रायल पर सवाल उठाए और कहा कि, 'आज इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं ऐसे में अनुभवी जजों को भी फैसला लेने में मुश्किल आती है.' https://youtu.be/K1xPa16-i3Q 26 अगस्त 2022 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद से रिटायर होने वाले न्यायाधीश एनवी रमना ने शनिवार को अपने बयानों से देश को एक नए मुद्दे पर सोचने पर मजबूर कर दिया है. बता दें, एनवी रमना अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं और यही कारण हैं कि इन दिनों सीजीआई रमना के बयान काफी चर्चाओं में हैं. शनिवार को एनवी रमना ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, 'आज देश में हम देखते हैं कि किसी भी केस को लेकर मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है. इस ट्रायल में जो बहस होती है उसके कारण कई बार अनुभवी जजों को भी फैसला करना मुश्किल हो जाता है.' सीजेआई ने नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणियों के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'जजों के खिलाफ सोशल मीडिया में कैंपेन चल रहे हैं. जज तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकते लेकिन, इसे उनकी कमजोरी या लाचारी नहीं समझना चाहिए.' यह भी पढ़ें: सपा ने किया शिवपाल-राजभर को आजाद, बोले ओमप्रकाश- अखिलेश के तलाक का है स्वागत CJI एनवी रमना ने कहा कि, 'न्याय देने से जुड़े मुद्दों पर गलत सूचना और एजेंडा चलाने वाली बहस लोकतंत्र की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रही है. अपनी जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर आप हमारे लोकतंत्र को दो कदम पीछे ले जा रहे हैं. आज मीडिया कंगारू कोर्ट चला रहा है.' CJI एनवी रमना यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि, 'आज देश में ऐसे हालात हैं कि जजों पर हमले बढ़ रहे हैं. पुलिस और राजनेताओं को रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षा दी जाती है, इसी तरह जजों को भी सुरक्षा दी जानी चाहिए.' अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं का जिक्र करते हुए कहा कि, 'वे राजनीति में जाना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.' हालांकि, जस्टिस रमना ने कहा कि, 'उन्हें जज बनने का मलाल नहीं है.' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनवी रमना ने आगे कहा कि, 'वर्तमान समय की न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक फैसलों के लिए मामलों को प्राथमिकता देना है. जज सामाजिक सच्चाइयों से आंखें नहीं मूंद सकते. सिस्टम को टालने योग्य संघर्षों और बोझ से बचाने के लिए जज को दबाव वाले मामलों को प्राथमिकता देनी होगी.' रमना ने आगे कहा कि, 'हर हफ्ते 100 से ज्यादा केस की तैयारी करना आसान नहीं है. हमारे लिए निर्णय लिखते समय स्वतंत्र शोध करना जरूरी होता है. अगले दिन की तैयारी न्यायालय के उठने के ठीक बाद शुरू होती है. हम वीकली ऑफ और अदालत की छुट्टियों के दौरान फैसले पर शोध करने का काम करते हैं. कई बार फैसलों पर पुनर्विचार करने के लिए रातों की नींद तक उड़ जाती है.' यह भी पढ़े: केंद्रीय मंत्री की बेटी का रेस्टोरेंट शराब लाइसेंस को लेकर विवादों में घिरा, तो कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा CJI ने आगे कहा कि, 'अगर हमें एक जीवंत लोकतंत्र की जरूरत है तो हमें न्यायपालिका को मजबूत करने और न्यायाधीशों को सशक्त बनाने की जरूरत है. मैं मीडिया, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से जिम्मेदारी से व्यवहार करने का आग्रह करता हूं. हम जैसे हैं वैसे ही आप एक महत्वपूर्ण हितधारक हैं. मीडिया बिना जांचे-परखे 'कंगारू कोर्ट' चला रहा है. कृपया अपनी आवाज की शक्ति का उपयोग लोगों को शिक्षित करने और राष्ट्र को ऊर्जावान बनाने के लिए करें.' 27 अगस्त, 1957 को कृष्णा जिले के पोन्नावरम गांव में एक किसान परिवार में जन्मे जस्टिस एनवी रमना ने 24 अप्रैल 2021 को भारत के 48वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली थी. उन्होंने 10 मार्च, 2013 से 20 मई, 2013 तक आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एग्जीक्यूटिव चीफ जस्टिस के रूप में काम किया. उन्हें 27 जून, 2000 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में परमानेंट जज अपॉइंट किया गया था.