Indore water contamination: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में इन दिनों दूषित पानी कहर ढहा रहा है. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. शहर में दूषित पानी से अब तक 2800 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं. इनमें 32 लोगों की हालत गंभीर है जिनका ICU में इलाज चल रहा है। हालांकि मामले के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है. विभाग की 21 टीमें घर-घर जाकर लोगों को उबला पानी पीने और बाहर का खाना न खाने की सलाह दे रही हैं। भागीरतपुरा में दूषित पानी की घटना को लेकर लोग अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर भयभीत है और हालत ये है कि लोग टैंकर के पानी को भी सेफ नहीं मान रहे हैं.
दूषित पानी से तबीयत बिगड़ने के बाद अब तक 15 मरीजों की मौत हो चुकी है और ये आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है. आलम ये है भागीरथपुरा के स्वास्थ्य केन्द्र में सुबह से शाम तक मरीजों के पहुंचने का सिलसिला चल रहा है. स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचने वाले मरीजों में ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग हैं. दूषित पानी से लोगों को उल्टी दस्त की शिकायत हो रही है. वहीं इस पूरे मामले में लापरवाही के चलते लोगों में भारी आक्रोश है.प्रशासन द्वारा अब एतियात के तौर पर कदम उठाये गए हैं. यहां सप्लाई के लिए पानी का टैंकर भेजा जा रहा है, लेकिन लोग टैंकर के पानी का उपयोग करने में भी डर रहे हैं. लोग पीने के लिए अब आरओ प्लांट से पानी मंगवा रहे हैं.
यह भी पढ़ें: भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला: स्टूडेन्ट्स पढ़ेंगे देश-दुनिया की खबरें, प्रार्थना सभा में पढ़े जाएंगे अखबार
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 21 टीमें बनाई है, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल, एएनएम व आशा कार्यकर्ता शामिल है जो घर-घर जाकर उबला पानी पीने एवं बाहर का भोजन ना खाने के लिए समझाइश कर रहे हैं.
अब तक कुल 272 मरीजों को भर्ती किया गया है, इनमें से 71 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। अभी विभिन्न अस्पतालों में 201 मरीज भर्ती है, जिनमें 32 मरीज आईसीयू में है.
भागीरथपुरा में दूषित जल से दर्जनों मौत के बाद निगम के अधिकारियों ने जल संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेना शुरू किया है. साल के पहले दिन दोपहर 2.30 बजे तक इंदौर-311 हेल्पलाइन पर पिछले 24 घंटे में 206 शिकायतें मिली है और सबसे ज्यादा शिकायतें जोन 5 से मिली है.
उधर, इंदौर में गंदे पानी से मौत के मामले में सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में पेश कर दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि गंदे पानी से सिर्फ चार मौतें हुई हैं. जबकि 15 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है.
16 बच्चों समेत 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. सभी 15 मौतें दूषित पानी से होने की पुष्टि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट से हो गई.
CMHO डॉ. माधव हसानी ने कहा- सैंपल की जांच रिपोर्ट से साफ है कि लोग दूषित पानी से ही बीमार हुए और उनकी मौत हुई। वहीं, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना कि भागीरथपुरा के पेयजल में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े हैं. उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।



























