आंध्र प्रदेश: पहली बार किसी प्रदेश में 5 डिप्टी CM, जगन रेड्डी का ऐतिहासिक फैसला

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आंध्र प्रदेश की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा प्रदेश की जनता के लिए किए गए ऐतिहासिक फैसले सुर्खियों में है. चाहे वो आशा कर्मियों के 3 गुना वेतन वृद्धि का फैसला हो या फिर प्रदेश के किसानों को सरकार द्वारा दी जाने वाली 10 हजार की राशि का निर्णय, जगन रेड्डी ने जनता के मन तक पहुंचने की कोशिश की है. अब सीएम जगन ने प्रदेश को 5 उप मुख्यमंत्री देने का निर्णय लेकर सभी को हैरत में डाल दिया है. यह पहली बार होगा जब किसी प्रदेश में 5 डिप्टी सीएम नियुक्त किए जाएंगे.

शुक्रवार को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की बैठक में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने मंत्रिमंडल गठन की चर्चा का बाद प्रदेश में नए उप मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला लिया. जिसके अनुसार प्रदेश में पांच डिप्टी सीएम पदस्थापित किए जाएंगे. सीएम जगन मोहन रेड्डी का ये फैसला इसलिए ऐतिहासिक कहा जा रहा है कि किसी प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है.

खास बात यह है कि ये पांचों उप मुख्यमंत्री अलग-अलग जाति वर्ग के होंगे. ये अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय में से एक-एक नियुक्त किए जाएंगे. बता दें कि इन उप मुख्यमंत्रियों में से दो पिछली एन चंद्रबाबू की टीडीपी सरकार में भी काम कर चुके हैं. इनमें से एक पिछड़ी जाति और एक कापू समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.

साथ ही पार्टी मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि आने वाले ढाई सालों में वे अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे. साथ उन्होंने इस दौरान कहा कि पार्टी के विधायक जनता की शिकायतों और समस्याओं पर ध्यान देकर उनका समाधान करें. सीएम ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर प्रदेश ही नहीं देशभर की नजर है. हम हर हाल में पहले की सरकार और अब की सरकार में अंतर दिखाना चाहते हैं.

गौरतलब है कि अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने वाले वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के लिए प्रदेश में खूब मेहनत की और जनता ने उन्हें इसका फल हाल ही में हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव में दिया. जिसमें जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने प्रदेश की 175 विधानसभा सीटों में से 151 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सत्ता पर काबिज होने में सफलता हासिल की.

साथ ही पार्टी ने लोकसभा की 25 सीटों पर रिकॉर्ड जीत करते हुए 22 पर कब्जा किया. देश में मोदी लहर के इतर दोनों चुनाव में आंध्रप्रदेश की सत्ताधारी एन चंद्रबाबू की टीडीपी जगन मोहन रेड्डी की सुनामी में कहीं नहीं टिक पाई.

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…तो क्या अब विदेश मंत्री एस जयशंकर गुजरात से भेजे जाएंगे राज्यसभा?

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प्रचंड जीत हासिल कर सत्ता में लौटी बीजेपी ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार का गठन कर काम शुरू कर दिया है. कैबिनेट को मंत्रालय सौंपे जाने के बाद से ही मोदी का मंत्रिमंडल भी सक्रिय नजर आ रहा है. इस कैबिनेट में हर किसी को हैरत में डालने वाला नाम था विदेश सचिव एस जयशंकर का. तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले जयशंकर को पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम में बतौर विदेश मंत्री शामिल किया है. बता दें कि उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था. पार्टी अब उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाकर संसद भेजने की कवायद में जुटी है. पहले अटकलें लगाई जा रही थी कि उन्हें उनके गृह … Read more

बाड़मेर MP कैलाश चौधरी मोदी कैबिनेट में मंत्री, गांव से दिल्ली तक का सफर

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बाड़मेर सांसद कैलाश चौधरी को नरेंद्र मोदी के दूसरे प्रधानमंत्री कार्यकाल के मंत्री मंडल में जगह दी गई है. उन्हें राज्यमंत्री के रूप में मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया है. प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण से पूर्व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा कई सांसदों को फोन किया गया था. शाह ने कैलाश चौधरी को भी फोन कर बुलाया था. उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद व गोपनियता की शपथ ली. बाड़मेर-जैसलमेर में उनके मंत्री बनाए जाने को लेकर खुशी का माहौल है. क्षेत्र में विकास को लेकर कैलाश चौधरी से अब जनता को नई आस जगी है. भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के जिले बाड़मेर की बायतू तहसील के … Read more

बीजेपी से बगावत पड़ी महंगी, जनता ने नकारे सात पूर्व सांसद

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प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रही बीजेपी चुनाव नतीजों के चलते खुशियां मनाने में लगी है. साल 2014 से भी बड़ी विजय हासिल करने वाली बीजेपी ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ पर मुहर लगा दी है. बड़ी जीत के उत्साह के बीच हाल ही में बीजेपी से बगावत करने वाले नेताओं के पास अब हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं है. जनता ने इस चुनाव में इन्हें सिरे से नकार दिया है जबकि 2014 में इसी पार्टी से जीतकर वे लोकसभा पहुंचे थे. जीत के उत्साह में डूबी बीजेपी के मोदी नेतृत्व को सत्ता से दूर करने की विपक्ष ने भरपूर कोशिश की. पूरे यूपीए … Read more

ओडिसा में फिर पटनायक सरकार, रुझानों में बीजद बहुमत के पार

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देश में लोकसभा चुनाव का रोमांच चरम पर है. आज नतीजों में बीजेपी क्लीयर स्वीप कर देश में फिर से सरकार बनाती हुई दिख रही है. वहीं एनडीए 300 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है. इसी बीच ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी हुए हैं. जिसकी भी आज मतगणना जारी है. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजद ने रूझानों में सरकार बनाने का जादूई आंकड़ा पार कर लिया है. वहीं बीजेपी यहां दूसरे नंबर की पार्टी के रूप में उभर कर आ रही है. विधानसभा चुनाव परिणामों के रूझान आंकड़े जीत में तब्दील होते नजर आ रहे हैं. जिससे ओडिशा में एक बार फिर से नवीन पटनायक सरकार … Read more

तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट, एग्जिट पोल के बाद घाट-घाट घूमने में लगे चंद्रबाबू नायडू

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लोकसभा चुनाव के समर में अब सिर्फ नतीजे ही बाकी रहे हैं. इसी बीच सामने आए विभिन्न न्यूज चैनल्स व सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल ने सियासी पारा चढ़ा कर रख दिया है. एक ओर एनडीए खासी उत्साहित नजर आ रही है तो वहीं यूपीए भी एग्जिट पोल को नकारते हुए धड़ाबंदी में जुटी है. एग्जिट पोल के बाद से ही आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री व टीडीपी नेता एन चंद्रबाबू नायडू खासे बैचेन नजर आ रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों से मिलने का सिलसिला धुंआधार मुलाकात में तब्दील हो गया है. नायडू के इस तूफानी संपर्क के कार्यक्रम से तीसरे मोर्चे के गठन की सुगबुगाहट सुनाई दे रही … Read more

ममता बनर्जी: दूध बेचने से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

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लोकसभा चुनाव में मैदान मारने के लिए राजनीतिक दलों के बीच जोर आजमाइश लगातार जारी है. चुनाव के आखिरी पड़ाव में अब सातवें चरण का मतदान होना बाकी है. इस दौरान पश्चिमी बंगाल खासा चर्चित बना हुआ है. देश के सबसे बड़े सियासी अखाड़े का रूप ले चुके वेस्ट बंगाल पर हर किसी की नजर बनी हुई है. पीएम नरेंद्र मोदी व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा दिग्गज बीजेपी नेता यहां कमल खिलाने के लिए दम-खम लगाने में जुटे हैं लेकिन उनके सामने चट्टान सी चुनौती साफ देखी जा रही है. पश्चिम बंगाल की ‘दीदी’ कही जाने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बीजेपी शीर्ष नेता अक्सर हर मंच से … Read more

दिल्ली: सात सीट पर तीन बड़े राजनीतिक दल, कौन मार रहा चुनावी मैदान

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देश की राजधानी और केंद्र शासित प्रदेश के अलावा दिल्ली राजनीति का केंद्र माना जाता है. हर किसी की निगाहें दिल्ली में जीत पर रहती है. राजनीतिक दल भी यहां अपना वर्चस्व बनाए रखने या बनाने के लिए दम-खम लगाते दिखते हैं. यहां की सातों संसदीय सीटों पर हर राजनीतिक दल जीत के सारे समीकरणों को ध्यान में रखकर ही उम्मीदवार उतारता है. इस बार के लोकसभा चुनाव में भी दिल्ली का दंगल हर किसी के लिए जिज्ञासा बना हुआ है. जहां सातों लोकसभा सीटों पर 12 मई को मतदान है और शुक्रवार शाम प्रचार थमने के बाद उम्मीदवार दिल्ली के वोटर्स की नब्ज टटोलने के लिए जनसंपर्क में जुटे … Read more

क्रिकेट के बाद खेली सियासी पारी, कोई रहा नाबाद तो कोई फिसड्डी

देश की राजनीति में फिल्मी सितारों और साधु-संतों के अलावा क्रिकेटर्स ने भी अपनी किस्तम आजमाई है. इसी कड़ी में दिग्गज क्रिकेटर गौतम गंभीर भी राजनीतिक पारी खेलने के लिए चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. गंभीर बीजेपी से सियासी डेब्यू करते हुए पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं. अपने घर में पूजा-पाठ के बाद गंभीर ने नामांकन दाखिल कर दिया है. गौतम गंभीर की टीम इंडिया को 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 में 50 ओवर वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका रही है. साल 2019 का लोकसभा चुनाव फिर एक क्रिकेटर को सियासी दंगल में लाया है. 2007 टी20 वर्ल्‍ड कप और 2011 … Read more

राजस्थान : श्रीगंगानगर में अंदरूनी कलह से परेशान बीजेपी और कांग्रेस

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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र में इन दिनों मौसम अलग-अलग करवटें ले रहा है, वहीं चुनावी मौसम में राजनीतिक पारा भी चढ़ता दिख रहा है. एक तरफ बीजेपी ने यहां से जीतकर चार बार दिल्ली पहुंचने वाले निहालचंद चौहान पर दांव खेला है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी खासे विचार-विमर्श के बाद पूर्व सांसद भरत मेघवाल पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है. बता दें कि, गंगानगर लोकसभा सीट का एक दिलचस्प इतिहास रहा है कि यहां से कभी कोई गैर मेघवाल सांसद नहीं बना. वर्तमान में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के निहालचंद मेघवाल यहां से सांसद हैं.

प्रदेश की गंगानगर लोकसभा सीट पर भले ही शुरू से ही कांग्रेस हावी रही हो, लेकिन बात की जाए पिछले दो दशकों की तो बीजेपी ने यहां अच्छी खासी पैठ जमाई है. बीजेपी के यहां पैर जमाने का श्रेय वर्तमान सांसद व केन्द्रीय मंत्री निहालचंद चौहान को दिया जाता है, जिन्हें यहां की जनता ने चार बार जितवाकर दिल्ली भेजा है. वहीं, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में निहालचंद को पटकनी देने वाले कांग्रेस प्रत्याशी भरत मेघवाल अब फिर से मैदान में है. यहां कांग्रेस के मजबूत नेता की छवि रखने वाले भरत समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों में भी अच्छी पकड़ वाले माने जाते हैं.

श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के दबदबे के तिलिस्म को तोड़ने वाले निहालचंद को इस बार टिकट की पूरी उम्मीद थी और वे पहले से ही लोगों से संपर्क में जुट चुके थे. पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषणा के बाद निहाल ने अपना प्रचार अभियान और तेज कर दिया. इस क्षेत्र में पड़ने वाली कृषि मंडी क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर मत व समर्थन के लिए डटे हुए हैं और केन्द्र सरकार की योजनाओं और मोदी लहर के चलते अच्छे रेसपोंस का दावा भी किया जा रहा है.

वहीं खासी कसमकश के बाद कांग्रेस का टिकट पाने वाले पूर्व सांसद भरत मेघवाल भी प्रचार में जुटे हैं और पार्टी के घोषणा पत्र के साथ किसान कल्याण जैसे दावों की बात कर लोगों के बीच पहुंच रहे हैं. हांलाकि भरत मेघवाल का चुनाव प्रचार अभी निहालचंद के मुकाबले धीमा बताया जा रहा है. आलम ये है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में तो भरत मेघवाल के चुनाव कार्यालय तक अभी नहीं खोले गए हैं. लेकिन जनता के बीच पहुंचना जारी है.

वहीं, दोनों ही प्रत्याशियों के लिए पार्टी की अंदरूनी नाराजगी चिन्ता का विषय है. जिससे भितरघात तक का खतरा दोनों उम्मीदवारों के लिए मंडरा रहा है. हांलाकि प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कहीं दिखाई नहीं पड़ रहा है. बात करें, गांव-गली और कस्बे-शहर के आम मतदाता की तो कहीं मोदी लहर और एयरस्ट्राईक के बाद माहौल में तब्दिली देखी जा रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस भी जनता के मूड को अब साफ तौर पर सत्ता बदलने वाला बता रही है. अपने-अपने दावे ठीक है लेकिन आखिरी फैसला तो जनता को ही करना तय है.

बता दें कि, बीते साल के विधानसभा चुनाव में जीत कर प्रदेश की सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं. वहीं कम मत प्रतिशत अंतर से हारी बीजेपी इस हार की भरपाई करने की रणनीति अपनाने में लगी है. गौरतलब है कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत कर आने वाली बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन 2018 में हुए लोकसभा उपचुनाव में अलवर और अजमेर की सीट कांग्रेस के हाथों गंवा बैठी. वहीं, साल 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने 73 सीटों के साथ बीजेपी को विपक्ष बिठाया और 99 सीटों के साथ कांग्रेस को सत्ता सौंपी.

गौरतलब है कि, श्रीगंगानगर जिले की पांच और हनुमानगढ़ की तीन विधानसभा को मिलाकर कुल 8 विधानसभा श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र में आती हैं. जिसमें गंगानगर जिले की सादुलशहर, गंगानगर, करनपुर, सूरतगढ़ और रायसिंह नगर विधानसभा और हनुमानगढ़ जिले की सांगरिया, हनुमानगढ़ और पिलीबंगा विधानसभा सीट शामिल हैं. 2018 की आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में इस 8 सीटों में से 4 पर बीजेपी, 3 पर कांग्रेस और 1 पर निर्दलीय उम्मदीवार ने जीत दर्ज की. जिसमें बीजेपी ने सूरतगढ़, रायसिंह नगर, सांगरिया और पीलीबंगा सीटें जीती, जबकि कांग्रेस ने सादुलशहर, करनपुर और हनुमानगढ़ की सीट पर कब्जा जमाया, वहीं गंगानगर सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की.

अब बात करते हैं गंगानगर लोकसभा सीट पर अब तक बने सांसदों की तो शुरू से ही कांग्रेंस का इस सीट पर दबदबा रहा है. आजादी के बाद हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर 10 बार जीत दर्ज की, जबकि 4 चार बार बीजेपी का कब्जा रहा. वहीं 1 बार जनता पार्टी और 1 बार भारतीय लोकदल ने इस सीट पर जीत दर्ज की. साल 1952 से 1971 तक लगातार 5 बार कांग्रेस के पन्नाराम बारूपाल यहां से सांसद रहे, जबकि साल 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर बेगाराम ने इस सीट पर कब्जा जमाया. साल 1980 और 1984 में कांग्रेस के बीरबल राम यहां से सांसद रहे, लेकिन 1989 में जनता पार्टी के टिकट पर बेगाराम ने एक बार फिर वापसी की.

तो वहीं, साल 1991 में कांग्रेस से बीरबल राम एक बार फिर सांसद बने. तो वहीं साल 1996 के चुनाव में बीजेपी ने युवा नेता और पूर्व सांसद बेगाराम के पुत्र निहालचंद मेघवाल को टिकट दिया जिन्होंने कांग्रेस के बीरबल राम को शिकस्त दी. साल 1998 के हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शंकर पन्नू ने जीत दर्ज की तो वहीं साल 1999 में बीजेपी से निहालचंद मेघवाल ने वापसी की. इसके बाद साल 2004 का चुनाव में निहालचंद फिर सांसद बने लेकिन साल 2009 के चुनाव में निहालचंद कांग्रेस के भरतराम मेघवाल से चुनाव हार गए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में निहालचंद मेघवाल ने चौथी बार इस सीट पर कब्जा जमाया और केंद्र सरकार में मंत्री बने.