वसुंधराजी कहती थी-गहलोत सड़कों पर घूमकर भीख मांग रहा है: गहलोत

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आखिरकार अपने बेटे वैभव गहलोत को प्रदेश की सक्रिय राजनीति में प्रवेश कराने के लिए जोधपुर आ ही गए. उन्होंने वैभव की लोकसभा सीट और अपनी कर्मस्थली में वैभव के लिए शहर की जनता के आशीर्वाद के साथ वोट भी मांगे. इस दौरान उन्होंने प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुन्धरा राजे पर भी निशाना साधा. वसुंधराजी कहती थी ‘गहलोत सड़कों पर घूमकर भीख मांग रहा है।’ मैंने कहा कि वसुंधराजी, मुझे गर्व हो रहा है कि मैं लोगों के बीच जा रहा हूं. यह भी पढ़ें: जोधपुर में गर्माया ‘स्थानीय’ का मुद्दा, एक-दूसरे पर बाहरी होने का तंज जोधपुर से मेरा … Read more

उत्तर प्रदेश: जातिगत और सांप्रदायिक राजनीति से हाशिए पर पहुंचे वाम दल

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में लेफ्ट पार्टियां (वामदल) हाशिए पर आ खड़ी हुई हैं. कभी यूपी की राजनीति का केंद्र बिन्दु रहने वाली लेफ्ट पार्टियां (वाम दल) 1991 के बाद एक सांसद तक को जिता कर दिल्ली नहीं भेज पाईं. स्थिति यह है कि आज सीपीआई के अलावा कोई यहां से लोकसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारने की स्थिति में भी नहीं हैं. सीपीआई ने तीन सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं और सात से आठ सीटों पर प्रत्याशियों की घोषित करने जा रहे हैं. यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं. आजादी के बाद की बात करें तो 1957 से 1991 के बीच हुए लोकसभा चुनावों में यूपी से … Read more

राजस्थान: जोधपुर में गर्माया ‘स्थानीय’ का मुद्दा, एक-दूसरे पर बाहरी होने का तंज

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देश में होने वाले आम चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों का अपना महत्व होता ही है लेकिन राजस्थान की सबसे हॉट सीट जोधपुर में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ ही इस बार स्थानीय होने का मुद्दा काफी गर्मा रहा है. हालांकि इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे वैभव गहलोत और बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत दोनों ही प्रत्याशियों की जन्मभूमि जोधपुर नहीं है. इसके बावजूद दोनों अपने आप को स्थानीय बताने के लिए अलग-अलग दलीलें पेश कर रहे हैं. जोधपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को फिर एक बार मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों को दरकिनार करते हुए प्रदेश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे को चुनावी मैदान में उतारा है.

एक अप्रैल को जब वैभव गहलोत जोधपुर आए तो बीजेपी प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि प्रवासी (बाहरी) का जोधपुर में स्वागत है. शेखावत की ओर से वैभव गहलोत को बाहरी बताए जाने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ता भी आक्रामक नजर आ रहे हैं. इसके बाद तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गजेंद्र सिंह को ही बाहरी प्रत्याशी बताना शुरू कर दिया है. वैसे देखा जाए तो वैभव और गजेंद्र सिंह दोनों की जन्मभूमि जोधपुर नहीं है.

बात करें गजेंद्र सिंह शेखावत की तो वह मूल रूप से सीकर जिले के मेहरोली से हैं. उनका जन्म जैसलमेर में हुआ था. उनके स्कूली शिक्षा बीकानेर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में हुई थी. कॉलेज शिक्षा जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में हुई और यही से उन्होंने छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ते हुए अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. छात्रसंघ अध्यक्ष चुने जाने के बाद शेखावत ने जोधपुर संभाग के अलग-अलग जिलों में संगठनात्मक दृष्टि से काम किया और इसी को आधार बनाते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत अपने आप को जोधपुर का साबित कर रहे हैं.

बात की जाए वैभव गहलोत की तो उनका जन्म जयपुर में हुआ. स्कूल शिक्षा दिल्ली तो उच्च शिक्षा पूना में हुई. वैभव लंबे समय से जयपुर में ही रह रहे हैं लेकिन 2003 के बाद से सभी विधानसभा, लोकसभा और नगर निगम के चुनावों में वैभव गहलोत जोधपुर की राजनीति में सक्रिय नजर आए. खुद वैभव भी अपने हर संबोधन में खुद को जोधपुर का बेटा बताते हुए कहते हैं कि उनके दादा बाबू लक्ष्मणसिंह में जोधपुर की सेवा की और उसके बाद उनके पिता अशोक गहलोत पिछले 40 वर्षों से जोधपुर की जनता के बीच रहकर कार्य कर रहे हैं. गजेंद्र सिंह के तंज का जवाब देते हुए वैभव गहलोत कहते हैं कि उन्हें प्रवासी बताने वाले पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें कि वह स्वयं कहां से आए हैं.

खैर, कौन प्रवासी है, यह मुद्दा तो चुनावी है लेकिन इस बार जोधपुर में दोनों ही पार्टियों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा है. यह सीट अशोक गहलोत के होने से कांग्रेसी गढ़ है और वैभव खुद अपने पिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं. वहीं गजेंद्र सिंह को भी इस बात का अहसास है और वें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों एक-एक वोट को अपने पक्ष में करने के लिए दमखम लगा रहे हैं. ज्यो-ज्यो चुनाव की तारीख नजदीक आती जाएगी, जबानी हमले तो तेज होंगे ही लेकिन प्रवासी और स्थानीय का यह मुद्दा अपनी गर्माहट बनाए रखेगा.

सुमित्रा महाजन नहीं लड़ेंगी लोकसभा चुनाव, पार्टी को पत्र लिखकर किया मना

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लोकसभा स्पीकर और आठ बार की सांसद सुमित्रा महाजन ने बीेजेपी के एक पत्र लिखकर लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया। उनके अनुसार, बीजेपी उनके टिकट को लेकर असमंजस में है और उन्हें निर्णय लेने में दिक्कत हो रही है. ऐसे में उन्होंने निर्णय लिया है कि अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि अब असमंजता की स्थिति समाप्त हो गई है और पार्टी को इंदौर सीट पर जल्द नाम तय करना चाहिए. अपने पत्र की शुरूआत करते हु सुमित्रा महाजन ने लिखा है, ‘भारतीय जनता पार्टी ने आज दिनांक तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. संभव है कि पार्टी को​ निर्णय लेने में संकोच … Read more

राजस्थान: गुर्जर व अन्य जातियों के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार

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प्रदेश में गुर्जरों को पांच फीसदी आरक्षण का मामले में सुप्रीम कोर्ट से राजस्थान सरकार को बड़ी राहत मिली है. राजस्थान में गुर्जरों सहित अन्य 5 जातियों को पांच फीसदी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश है और कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा. बता दें, राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गुर्जर आरक्षण मामले में नोटिस तो जारी किया लेकिन आरक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान पिछड़ा वर्ग संशोधन अधिनियम-2019 के तहत गुर्जर … Read more

मध्यप्रदेश: मतदान से पहले ही इन पांच सीटों पर हार मान चुकी है कांग्रेस

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मध्य प्रदेश में 29 में से पांच सीटों पर कांग्रेस ने मतदान से पहले ही हार मान ली है. इसकी बड़ी वजह इन सीटों पर सपा-बसपा का जनाधार है. पिछले लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर सपा और बसपा ने कांग्रेस का खेल खराब कर दिया था. इस बार यह नुकसान और ज्यादा होने की के कयास लगाए जा रहे हैं, क्योंकि सपा-बसपा एक साथ मैदान में हैं. कांग्रेस के नेता दबे हुए स्वर में यह स्वीकार करते हैं कि मायावती और अखिलेश यादव के गठबंधन को मध्यप्रदेश में जितने भी वोट मिलेंगे यह उनके वोट बैंक में सेंधमारी होगी. 2014 के चुनाव नतीजों को आधार बनाएं तो मध्यप्रदेश की … Read more

कमलनाथ के मंत्री का लालच ऑफर! ‘बूथ जिताओ, नौकरी पाओ’

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लोकसभा चुनावों में कार्यकर्ताओं को चुनाव और प्रत्याशियों से जोड़ने के लिए मंत्री क्या कुछ नहीं करते. यह बात मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के एक मंत्री पर सटीक बैठती है. मंत्री महोदय ने भोपाल में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को ‘बूथ जिताओ नौकरी पाओ’ लालच भरा ऑफर देते हुए चुनाव में जुट जाने का आव्हान किया. मंत्री पीसी शर्मा सरकार में जनसंपर्क मंत्री हैं.

शर्मा नर्मदीय भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं सम्मेलन में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल से कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे. असल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष गांधी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 22 लाख नौकरियां देने का वादा किया है. लगता है, पीसी शर्मा इसी वादे को लोकसभा चुनाव में भुनाने का प्रयास कर रहे हैं. बता दें, पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मध्य प्रदेा में केवल दो सीटों पर सिमट गई थी.

दरअसल, लोकसभा चुनाव को लेकर दक्षिण पश्चिम विधान सभा के कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई गई थी. यहां पर कांग्रेस के भोपाल लोकसभा प्रत्याशी दिग्विजय सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा, कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह बघेल समेत भोपाल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैलाश मिश्रा शामिल हुए थे. कमलनाथ के मंत्री के इस नारे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. बीजेपी ने इस पर आपत्ति जताई है. भाजपा नेताओं के अनुसार कांग्रेस नेता का इस तरह के नारे लगाना या लालच देना आचार संहिता का उल्लंघन है.

‘किस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं पंडित जवाहर लाल नेहरू, उन्हीं को वोट दूंगी’

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वैसे तो सोशल मीडिया पर केवल ट्रोलिंग का फंडा ही चलता है लेकिन कई बार जान-बूझकर दिया गया बयान भी जमकर सुर्खियां बटोर लेता है. सोशल मीडिया पर अपनी बात बेबाकी से रखने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने आज कुछ ऐसा ही किया जिसके चलते वह ​मीडिया में छायी रहीं. दरअसल उन्होंने अपने बयान से मौजूदा राजनीतिक हालातों पर करारा तंज कसा है. लोकसभा चुनाव को लेकर दिया गया उनका यह बयान खूब वायरल हो रहा है. वहीं एक्टर केआरके ने प्रधानमंत्री मोदी पर सोशल मीडिया के जरिए वार किया. @ReallySwara Which constituency is #PanditJawaharlalNehru standing from in #LokSabhaElection2019 ??? Heard about him so much these last 5 years, … Read more