प्रयागराज माघ मेले में 5 दिन से धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. वहीं, शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई. इसके चलते उन्होंने वसंत पंचमी पर भी प्रयागराज संगम में स्नान नहीं किया.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फिलहाल सुबह से वैनिटी वैन में ही आराम कर रहे हैं. शिष्यों का कहना है कि सर्दी के चलते उनकी तबीयत बिगड़ गई है. हालांकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले ही कहा था कि जब तक उनसे माफी नहीं मांगेंगे, प्रोटोकॉल और सम्मान के साथ मेला प्रशासन उन्हें स्नान नहीं कराया जाएगा तब तक वे संगम में स्नान नहीं करेंगे. इस बीच मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 2 नोटिस जारी किये थे. इससे विवाद और भी गहरा गया है. फिलहाल ये टकराव खत्म होता नजर नहीं आ रहा.
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आपको बता दें कि ये विवाद तब शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या यानी 18 जनवरी को पालकी लेकर संगम में स्नान के लिए जा रहे थे और प्रशासन ने उनकी पालकी रोक दी और उनके शिष्यों पर बलप्रयोग किया. उस घटनाक्रम के बाद से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं. इससे पहले, गुरुवार को सीएम योगी ने एक कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं. वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी कहा था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ बल्कि उन्होंने अन्याय किया है.
जानकारी के मुताबिक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में अपने साथ मिट्टी से बने सवा लाख शिवलिंग लेकर आये थे. लेकिन पालकी को लेकर हुए विवाद के बाद वे शिवलिंग भी स्थापित नहीं कर पाए.
जानिये पूरा घटनाक्रम
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा. विरोध करने पर पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई. इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए.
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प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए. पहले नोटिस में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने पर सवाल पूछे जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल को लेकर सवाल पूछे। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेले में बैन करने और जमीन आवंटन रद्द करने की भी चेतावनी दी थी. इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब मेला प्रशासन को भेज दिये हैं.