यूपी में शिवसेना की एंट्री क्या बिगाड़ेगी बीजेपी का सियासी गणित?

shiv sena prepares to contest up assembly elections, putting bjp in a difficult position
14 Jan 2026
महाराष्ट्र में महायुति सरकार में सहयोगी शिवसेना अब उत्तर प्रदेश में भी सियासी जमीन तलाश रही है. इसके लिए पार्टी ने साल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है. पार्टी का लक्ष्य महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों में अपनी जड़े फैलाने का है, जिसके लिए पार्टी फिलहाल संघर्ष कर रही है. वजह है कि शिवसेना की अधिकांश राजनीति महाराष्ट्र और मराठी क्षेत्रों में रही है. इससे पहले पार्टी ने राजस्थान में भी पैर पसारने की कोशिश की थी और गहलोत सरकार से बर्खास्त एवं लाल डायरी प्रकरण से चर्चित राजेंद्र गुढ़ा को पार्टी टिकट थमाया था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे समर्थित शिवसेना के यूपी की सियासी जंग में उतरने से बीजेपी को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. https://youtu.be/HyyhSZBlP58 शिव सेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा ने एक बयान जारी करते हुए इस बात की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि यूपी में जिला पंचायत, नगर पंचायत और निकाय चुनावों और वर्ष 2027 में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. हालांकि शिवसेना बीजेपी के साथ गठबंधन में ही चुनाव लड़ने की इच्छुक है. वर्मा ने ये भी कहा कि शिवसेना, बीजेपी को बड़ा मान कर चुनाव लड़ेगी और उत्तर प्रदेश में कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. वर्मा ने कहा कि हमने बीजेपी से यह मांग की है और आगे भी करेंगे कि कुछ सीटों पर हमें भागीदारी दी जाए. यह भी पढ़ें: दिग्गी राजा को राज्य की राजनीति में फिर से उतारने का फैसला सही या दबाव भरा फैसला? गौरतलब है कि एनडीए में शामिल सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वे एनसीपी की तर्ज पर पंचायत चुनाव अकेले लड़ेंगे, जबकि विधानसभा चुनाव के लिए अभी से ही रणनीतिक दावेदारी पेश कर रहे हैं. बता दें कि अजित पवार की एनसीपी भी महायुति सरकार का हिस्सा है लेकिन निकाय चुनाव महायुति से अलग होकर लड़ रही है. इतना ही नहीं, अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से निकाय चुनावों के लिए हाथ मिलाया है और एनसीपी एसपी के साथ मिलकर महायुति के समक्ष ही चुनौती पेश कर रहे हैं. अब महाराष्ट्र के सियासी समीकरणों का असर उत्तर प्रदेश की सियासत पर पड़ता लाजमी है. एनसीपी की तर्ज पर एनडीए में शामिल कई राजनीतिक दल अब यूपी पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव में उतरने की मंशा रखते हैं. ऐसे में शिवसेना सहित अन्य दलों की एंट्री से किसका खेल बिगड़ेगा और किसका बनेगा, यह देखना दिलचस्प रहने वाला है.