Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव द्वारा भीमराव अंबेडकर के अपमान का मामला इन दिनों गरमाया हुआ है. इस पर पूरा एनडीए लालू परिवार पर हमलावर है. इस संबंध में बिहार राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को नोटिस तक भेज दिया है. हालांकि इस मामले में राजद सुप्रीम को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक विधायक का साथ मिला है. एनडीए विधायक ने न केवल लालू की जमकर तारीफ की, बल्कि उन्हें पिछड़ों और दलितों का मसीहा बताया.
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जदयू विधायक गोपाल मंडल ने कहा, 'लालू यादव कभी भीमराव अंबेडकर का अपमान नहीं कर सकते. जब उनकी सरकार बनी तो उन्होंने पिछड़े वर्गों को आवाज दी. उन्होंने पिछड़े समुदायों को जगाया और ऊंची जातियों के वर्चस्व को खत्म करने की कोशिश की. अब उनकी सेहत ठीक नहीं रहती और वो पैर चढ़ा कर बैठते हैं. पैर नहीं हठाया उन्होंने ध्यान नहीं दिया. इसका ये मतलब नहीं कि वो भीमराव अंबेडकर का अपमान कर रहे हैं. उन्होंने दलितों के लिए बहुत कुछ किया है. दलित बस्ती में जाकर वो उनसे मिलते थे. उनके हालात को सुधारने की पूरी कोशिश उन्होंने की है.'
इससे पहले बिहार राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का अपमान करने के आरोप पर संज्ञान लेते हुए आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को नोटिस भेजा है. 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है. दरअसल आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने बीती 11 जून को अपना 78वां जन्मदिन मनाया था. उसके बाद 14 जून को एक वीडियो सामने आया, जिसमें लालू यादव एक कुर्सी पर बैठे हैं और सामने एक दूसरी कुर्सी पर रखे हैं.
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इसी बीच एक समर्थक हाथ में अंबेडकर की तस्वीर लेकर आता है और लालू के साथ फोटो खिंचवाने लगता है. जिस तरह से फोटो खींची गई है, उससे लग रहा है कि अंबेडकर की तस्वीर लालू यादव के पैरों के पास है. अब इसी पर विवाद खड़ा हो गया है. एनडीए के कई नेता इस मामले को लेकर लालू पर निशाना साध चुके हैं. अब देखना ये होगा कि नीतीश गुट के विधायक गोपाल मंडल की इस तारीफ का इनाम लालू उन्हें देते हैं या फिर नीतीश गुट की ओर से मंडल को सजा का भागी बनना पड़ेगा.