‘फिर से गुलामी नहीं आएगी, इसकी गारंटी क्या?’—RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा सवाल

7 Feb 2026

भारत में हिन्दू ही हैं कोई और नहीं, RSS पॉलिटिकल नहीं है, पावर और पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए, पूरे समाज को संगठित करना ही संघ का काम, देश का भाग्य तब बदलता है जब पूरा समाज एकजुट हो

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज” के कार्यक्रम में कई मशहूर हस्तियों ने शिरकत की. इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई मुद्दों पर बेबाक बयान दिये. उन्होंने इस संबोधन में साफ कहा कि संघ कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोग पॉलिटिक्स में हैं. इस दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि फिर से गुलामी नहीं आएगी, इस बात की गारंटी क्या है? हमारे समाज में कमी है कि हम में एकता नहीं है.

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समाज को संगठित करना ही संघ का काम
मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ का और कोई दूसरा काम नहीं करना है. जिसको आप RSS कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं. बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं. RSS के प्रधानमंत्री हैं. उनकी एक पॉलिटिकल पार्टी है. वो बीजेपी है, जो अलग है. उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी है. संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है. हमारा काम बिना किसी के विरोध के है. देश में जितने भी अच्छे काम हो रहे हैं वे ठीक से हो जाए, इसके लिए संघ काम कर रहा है.

संघ को जानना है तो अनुभव लेना जरूरी
मोहन भागवत ने कहा कि संघ में भारतीय रागदरबारी के आधार पर घोष की धुनें बजती है. व्यक्तिगत गीत होते हैं, सांगिक गीत होते हैं. लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय संगीत शाला नहीं है. संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी है, लेकिन संघ पॉलिटिकल पार्टी नहीं है. मोहन भागवत ने कहा कि सतही तौर पर देखने में गलतफहमी होगी इसलिए संघ को जानना है तो संघ का अनुभव लेना जरूरी है. RSS प्रमुख ने कहा कि एक बार 100 साल बाद हम आपको बता रहे हैं कि ये संघ क्या है ? संघ का काम संघ के लिए नहीं है बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए हैं. मोहन भागवत ने भाषण में कहा, ‘RSS न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है और न ही कोई पॉलिटिकल पार्टी है. संघ से जुड़े लोग भले ही पॉलिटिक्स में एक्टिव हों, लेकिन संगठन खुद पॉलिटिकल नहीं है. यह कोई रिएक्शनरी संगठन भी नहीं है. संघ किसी के खिलाफ नहीं है. संघ को पब्लिसिटी, पावर या पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए.

भारत में हिन्दू ही हैं और कोई है ही नहीं
मोहन भागवत ने कहा कि संघ को समाज में अलग संगठन खड़ा नहीं करना है, क्योंकि संघ का पहला सिद्धांत है कि देश के भाग्य में परिवर्तन तब आता है जब उसका पूरा समाज एकजुट होता है. उन्होंने कहा जो आज हमारा विरोध करते हैं वो भी इस ही समाज एक अंग हैं. उनको भी हमें संगठित करना ही है. भारत में हिन्दू ही हैं और कोई है ही नहीं. हिन्दू कहने से हम उसको रिलिजन ना मानें. हिन्दू एक विशिष्ट समुदाय का नाम नहीं है. हिन्दू शब्द बाहर से आया है. उन्होंने कहा कि कहते हैं कि पारसी और ईरान से आया. संत गुरु नानक जी ने सबसे पहले हिन्दू शब्द का प्रयोग किया.

मोहन भागवत डॉ. हेडगेवार का जिक्र करते हुए कहा कि बहुत कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना और दूसरा देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना. ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे. संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है.