



विपक्ष ने बजट 2026-27 में बड़े उद्योगपतियों को राहत, जबकि आम युवा और मध्यम वर्ग को अपेक्षित फायदा न दिए जाने का लगाया आरोप, बीजेपी ने किया युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा
नई दिल्ली. केंद्रीय बजट 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एनडीए सरकार की ओर से लगातार 9वीं बार लोकसभा में बजट पेश किया. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को 'युवा शक्ति का बजट' बताते हुए कहा कि यह देश के युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप के नए अवसर देगा. वहीं विपक्ष ने बजट को निराशाजनक बताया और सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए इसे खोखला वादा करार दिया.
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पीएम मोदी बनाम राहुल गांधी
पीएम मोदी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया मिशन के लिए बड़े प्रावधान किए हैं. उन्होंने दावा किया कि यह बजट युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा और भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगा.
वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार वाला बजट नहीं है. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर गिर रहा है. निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं. घरेलू बचत में भारी गिरावट आ रही है.
शाह बनाम दीदी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम बजट को लेकर कहा कि मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक, स्वास्थ्य से पर्यटन तक, ग्रामीण क्षेत्रों से एआई तक, खेल से तीर्थ स्थलों तक विकसित भारत बजट ऐसा बजट है जो हर गांव, हर कस्बे और हर शहर के युवाओं, महिलाओं और किसानों के सपनों को सशक्त करता है और उन्हें साकार करने में सक्षम बनाता है.
इधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं टीएमसी सुप्रीम ममता बनर्जी ने कहा, 'तीन कॉरिडोर के बारे में वित्तमंत्री जो कहा वह सरासर झूठ है. यह प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहे हैं. हमने इस पर काम शुरू कर दिया है. पुरुलिया में जंगलमहल जंगल सुंदरी परियोजना के लिए, इस आर्थिक कॉरिडोर में 72,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा. उन्होंने बंगाल को एक पैसा भी नहीं दिया है. सिर्फ एक ही टैक्स है, जीएसटी. दरअसल वित्त मंत्री ने आज बजट में तीन फ्रेट कॉरिडोर, डंकुनी (प. बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक, दुर्गापुर में ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक रेल कॉरिडोर के बारे में जिक्र किया.'
अठावले बनाम अखिलेश यादव
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, 'ये बहुत क्रांतिकारी बजट है. देश को सुंदर बनाने वाला बजट है. देश के हर वर्ग पर ध्यान दिया गया है. व्यापारी, उद्योगपति और मजदूरों पर ध्यान दिया गया है. ये सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक न्याय देने वाले बजट है.'
सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा, 'यह बजट गरीबों और गांवों में रहने वालों की समझ से परे है. इस बजट में न तो नौकरी दी गई है और न ही रोजगार के अवसर. उन्होंने कहा कि ये बजट गरीब का पेट नहीं भर सकता है. नौकरी रोजगार दिए नहीं. सपने दिखाने वाला बजट है. जिस सरकार से कोई उम्मीद ही न हो, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है? यह बजट सिर्फ पांच प्रतिशत लोगों के लिए बनाया गया है.'
सिंधिया बनाम शिवकुमार
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक, 'यह एक प्रगतिशील बजट है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर पर फोकस करता है. यह हर नागरिक के लिए बजट है. खासकर टेलीकॉम और डीओएनईआर के क्षेत्रों को इस बजट में मजबूत बढ़ावा मिला है. यह भारत को सशक्त और शक्तिशाली बनाएगा. पूर्वोत्तर के लिए बहुत सारे संस्थानों और जलमार्गों का आवंटन किया गया है.'
इधर कर्नाटक के डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा, 'केंद्रीय बजट से कर्नाटक को कोई लाभ नहीं मिला. केंद्र सरकार ने एक कार्यक्रम का नाम Mahatma Gandhi के नाम पर रख दिया है, जबकि पहले गांधी जी के नाम से जुड़े रोजगार कानून को समाप्त कर दिया गया. VB-G RAM G जिसे केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के फंड शेयरिंग फार्मूले पर लागू किया गया है, जिसे कर्नाटक में लागू नहीं किया जा सकता.'
बीजेपी बनाम कांग्रेस
भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय बजट 2026–27 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए क्षमता, कौशल और लचीलेपन पर विशेष जोर दिए जाने की बात कही. बीजेपी ने कहा कि इस बजट में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, अगले 5 वर्षों में एक लाख से अधिक एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स को जोड़ने और 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने के प्रस्ताव के साथ राज्यों को 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने के लिए सहायता देने की नई योजना उन्नत उपचार और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ावा देगी.
वहीं कांग्रेस ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'ये बजट GDP ग्रोथ, निवेश और रोजगार के लिए कुछ भी ख़ास नहीं करता है. काश निर्मला सीतारमण जी ने अपना इकनोमिक सर्वे पढ़ा होता तो शायद उन्हें समझ आ जाता कि देश और अर्थव्यवस्था के सामने क्या चुनौतियां हैं.'
अन्य विपक्षी दलों ने बजट में बड़े उद्योगपतियों को राहत, जबकि आम युवा और मध्यम वर्ग को अपेक्षित फायदा नहीं दिए जाने के आरोप लगाए हैं. बजट 2026 पर सत्ता और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है.


