



विपक्ष ने सरकार से पूछा- सरकार राइट टू हेल्थ एक्ट लागू करेगी या नहीं ?, मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा- MAA योजना, मुफ्त दवा योजना में हो रहा फ्री इलाज, स्टेट हाईवे पर टोल फ्री नहीं होंगे निजी वाहन
राजस्थान विधानसभा में आज कांग्रेस ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लाये गए राइट टू हेल्थ एक्ट को लेकर तीखी नोकझोंक हुई. कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने ये सवाल उठाया था जिस पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने पूर्ववर्ती सरकार की मंशा पर सवाल उठाये. गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि कांग्रेस आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले ये एक्ट को लेकर आई थी. इस पर सदन में विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया. वहीं, हंगामे से नाराज स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि अगर यही रुख रहा तो सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दूंगा. इसके बावजूद सदन में हंगामा जारी रहा और मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक सदन से बाहर चले गए.
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नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन में कहा कि राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि सरकार का राइट टू हेल्थ कानून लागू करना चाहती है या नहीं ? विपक्ष ने सरकार से अपना रुख साफ करने की मांग की. विपक्ष का कहना है कि सबसे पहले राजस्थान में यह कानून लाया गया था. सरकार नियम क्यों नहीं बना रही है ? सरकार जनता के स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहती है या नहीं ? इस पर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि आप बताइए ये एक्ट आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले क्यों लेकर आए ? इसी बीच स्पीकर वासुदेव देवनानी अगला सवाल पुकार लिया है. इससे नाराज विपक्ष के सदस्य सदन से वॉकआउट करके चले गए हैं.
विधानसभा में राइट टू हेल्थ एक्ट को लेकर कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चुनावी फायदे के लिए जाते-जाते कांग्रेस सरकार यह बिल लाई थी. इसमें सबकी राय नहीं ली गई थी. आचार संहिता से ठीक पहले यह कानून लाए. पूर्ववर्ती सरकार ने इसके नियम क्यों नहीं बनाये. मंत्री के जवाब पर पहले गोविंद सिंह डोटासरा ने टोका तो हल्की नोकझोंक हुई. इसके बाद हरिमोहन शर्मा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंत्री के जवाब पर सवाल उठाते हुए राइट टू हेल्थ कानून के नियम लागू करने या ना करने पर सरकार का रुख साफ करने की मांग की. इस पर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि मां योजना और मुफ्त दवा योजना के तहत सभी तरह का फ्री इलाज मिल रहा है, इसलिए इस कानून की जरूरत ही नहीं है.
स्टेट हाईवे पर टोल फ्री नहीं होंगे निजी वाहन
वहीं, सरकार ने विधानसभा में आज यह भी साफ कर दिया कि निजी वाहनों को स्टेट हाईवे पर टोल फ्री नहीं किया जाएगा. भाजपा विधायक विक्रम बंशीवाल के सवाल के जवाब में डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने ये जानकारी दी. उन्होंने ने कहा कि 14 मई 2018 को निजी हल्के वाहनों को स्टेट हाईवे से टोल मुक्त करने की अधिसूचना को 31 अक्टूबर 2019 को राज्य सरकार ने वापस ले लिया था और अब निजी वाहनों को स्टेट हाईवे पर टोल मुक्त करने का राज्य सरकार के पास वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. आपको बता दें कि वसुंधरा राजे सरकार के समय 2018 में छोटे निजी वाहनों को स्टेट हाईवे पर टोल फ्री करने का फैसला किया था लेकिन, इस फैसले को गहलोत सरकार ने पलट दिया था.


