राजस्थान बीजेपी की कार्य​समिति की बैठक आज

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राजस्थान बीजेपी की कार्य​समिति की बैठक आज जयपुर में होगी. यह बैठक नारायण सिंह सर्किल स्थित तोतुका भवन में आयोजित की जाएगी. पार्टी के मिडिया प्रभारी विमल कटियार ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता आएंगे. इस बैठक में केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, अविनाश राय खन्ना, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अर्जुनराम मेघवाल और कैलाश चौधरी सहित अन्य बीजेपी नेता शामिल होंगे.

चुनाव खत्म होते ही विस्तारकों से BJP ने छीनी बाइक

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मतलब निकल गया तो पहचानते ही नहीं. कुछ ऐसा ही किया है बीजेपी ने अपने विस्तारकों के साथ. राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विस्तारकों को दी गई बाइक अब पार्टी ने वापस लेना शुरु कर दी है. करीब एक दर्जन बाइक बीजेपी दफ्तर में जमा भी हो चुकी है. दो सौ विस्तारकों को करीब 150 बाइक पिछले साल अक्टूबर माह में बांटी गई थी. साथ ही हर माह 8 हजार रुपए फ्यूल के भी दिए गए थे. अब शनिवार को बीजेपी कार्यालय में विस्तारकों को बैठक के बहाने बुलाया गया और जल्द बाइक जमा कराने के निर्देश दिए गए. कुछ खुद्दार विस्तारकों ने तो पहले ही दिन करीब एक … Read more

राजस्थान से ‘तीन रत्न’ चुनने के पीछे मोदी की क्या रणनीति है?

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर देश में बीजेपी की सरकार बनी है. मोदी दोबारा देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं और उनके मंत्री शपथ ले चुके हैं. इस मंत्रिमंडल में राजस्थान के गजेंद्र सिंह शेखावत को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई तो अर्जुनराम मेघवाल और कैलाश चौधरी को राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई. जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर नरेंद्र मोदी ने कई सियासी समीकरण साधने का प्रयास किया है. गजेंद्र सिंह शेखावत को कैबिनेट मंत्री बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा राजे को भी संदेश देने का प्रयास किया है कि आने वाले … Read more

अबकी बार लोकसभा में आधी आबादी की धाक, 78 ने लहराया जीत का परचम

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लोकसभा चुनाव के आए नतीजों के बाद हर किसी का ध्यान बीजेपी की प्रचंड जीत पर है, लेकिन इन सबके बीच एक जीत ऐसी है जो भारत की सियासत के भविष्य में मील का पत्थर साबित हो सकती है. जी हां, हम बात कर रहे हैं आधी आबादी की. 17वीं लोकसभा में 78 सीटों पर महिलाओं का काबिज होना सियासत में महिलाओं की स्थिती को मजबूत करता है. महिला सांसदों की अब तक की सबसे ज्यादा भागीदारी के साथ, नई लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या, कुल सदस्य संख्या का 17 प्रतिशत हो जाएगी, जो एक तिहाई से कम जरूर है, लेकिन उस ओर बढ़ते मजबूत कदम है. आंकड़ों पर … Read more

राजस्थान: इन 6 नेताओं और संघ की मेहनत से प्रदेश में खिलेगा कमल

तमाम एग्ज़िट पोल राजस्थान में बीजेपी को 25 में से 19 या उससे भी ज्यादा सीटें दे रहे हैं. हालांकि इस बात में कोई शक नहीं है कि बीजेपी प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन करने जा रही है. इसका क्रेडिट जाता है बीजेपी के छह प्रमुख नेताओं को. पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, वसुंधरा राजे, सुंधाशु त्रिवेदी और चंद्रशेखर ने विधानसभा चुनाव में हार होने के बावजूद राज्य में बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया.

मोदी ने जहां ताबड़तोड़ सभाएं करते हुए अपने भाषणों से कार्यकर्ताओं को जोश दिलाया. शाह के नेतृत्व में मजबूत रणनीति को इन नेताओं ने अंजाम दिया. वसुंधरा राजे ने टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक कमान संभाले रखी. वहीं संघ ने कमजोर सीटों पर विशेष फोकस रखते हुए प्रत्याशियों को जीत की दहलीज पर ला खड़ा किया. अगर एग्ज़िट पोल के दावे नतीजों में तब्दील होते हैं तो बीजेपी का कम से कम 20 सीटों पर जीत तय है. पांच महीने पहले ही विधानसभा चुनाव में हारने वाली बीजेपी का कांग्रेस पर यह करारा पलटवार होगा.

आइए जानते हैं प्रदेश में कमल खिलाने में बीजेपी के किन छह नेताओं का अहम योगदान रहा …

पीएम नरेंद्र मोदी
बीजेपी की अगर एग्ज़िट पोल के तहत 20 सीटें आ रही हैं तो इसके रियल हीरो होंगे पीएम मोदी. मोदी का चेहरा और राष्ट्रवाद बीजेपी के लिए राजस्थान में संजीवनी बूंटी बन गया. हर प्रत्याशी बस ‘मोदी को ही वोट’ देने की रट लगा रहा था. जहां बीजेपी कमजोर थी, वहां मोदी ने ताबड़तोड सभाएं करते हुए अपने प्रत्याशियों को टक्कर में ला दिया. मोदी ने अपने ओजस्वी भाषण से कार्यकर्ताओं में जोश फूंक दिया. यह मोदी का ही करिश्मा था कि राजस्थान में फर्स्ट टाइमर्स वोटर्स थोक के भाव बीजेपी के पाले में गए.

अमित शाह
प्रदेश में कमल खिलाने में नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का अहम रोल रहा. शाह ने विधानसभा चुनाव में हार की भनक लगते ही राजस्थान पर ध्यान देना शुरु कर दिया था. इसके लिए शाह लगातार राजस्थान में दौरे करते रहे. इस दौरान शाह ने मौजूदा सांसदों की परफॉर्मेंस जानी. शाह ने ही रणनीति के तहत प्रकाश जावड़ेकर को राजस्थान चुनाव का प्रभारी बनाने का फैसला लिया. शाह की राय से ही टिकट वितरण से लेकर प्रचार प्रसार की रणनीति को अंजाम दिया गया था.

प्रकाश जावड़ेकर
केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर आलाकमान के चयन पर एकदम खरे साबित होते दिख रहे हैं. हर टास्क को जावड़ेकर ने बखूबी अंजाम दिया. जावड़ेकर ने कमान तब संभाली जब विधानसभा चुनाव में बीजेपी हार चुकी थी. जावड़ेकर ने हर सियासी और जातिगत समीकरण पर फोकस रखा. जातिगत समीकरण साधने के लिए नागौर की सीट हनुमान बेनीवाल को देने की चाल जावड़ेकर की ही थी. इसका फायदा बीजेपी को कईं सीटों पर मिलता दिख रहा है.

सुधांशु त्रिवेदी
सुधांशु त्रिवेदी को सहप्रभारी बनाकर चुनाव से पहले राजस्थान में भेजा गया था. त्रिवेदी ने हर जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए लगातार गहलोत सरकार पर आक्रामक हमले किए. कर्ज माफी और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने जैसे वादों की जमकर पोल खोली. साथ ही जमकर केंद्रीय योजनाओं के फायदे गिनाएं. त्रिवेदी ने प्रदेश सरकार पर जमकर आरोप लगाते हुए कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाए रखा.

वसुंधरा राजेे
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का प्रदेश की हर रणनीति में अहम रोल रहा. राजे ने टिकटों के बंटवारों से लेकर जातिगत समीकरण साधने और तूफानी चुनाव प्रचार तक पूरी कमान संभाले रखी. प्रदेश के तमाम नेताओं को राजे ने एकजुट बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां तक की राजे नाराजगी के बावजूद राज्यवर्धन सिंह और गजेंद्र सिंह का प्रचार करने गई थी.

चंद्रशेखर
बीजेपी प्रदेश संगठन मंत्री चंद्रशेखर के प्रयास भी पार्टी के लिए काम आए. चंद्रशेखर के प्रयासों के चलते ही संघ का बीजेपी को पूरा साथ मिला. शाह के निर्देशन में चंद्रशेखर पर्दे के पीछे हर रणनीति को अंजाम देते बखूबी नजर आए. चंद्रशेखर संघ के साथ मिलकर प्रत्याशियों को जिताने में जुटे रहे. यही वजह रही कि इस बार राजस्थान में संघ ने बीजेपी के लिए जमकर पसीना बहाया.

आरएसएस का रोल
जानकारों की माने तो संघ ने पहली बार राजस्थान में सक्रिय होकर अपना रोल निभाया. इस बार वसुंधरा राजे के बजाय चुनाव की कमान केंद्रीय नेताओं के हाथ में थी इसलिए संघ ने मोदी को दोबारा पीएम बनाने के लिए जी-जान से मेहनत की. बीजेपी का जीत के लिए अन्य राज्यों के स्वयंसेवक भी राजस्थान में आए. संघ ने सबसे ज्यादा ध्यान कमजोर सीटों पर दिया. यह संघ की मेहनत का ही कमाल था कि जहां कांग्रेस लाखों से जीत का दावा कर रही थी, वहां अब जीत का टोटा पड़ रहा है. यही वजह रही कि सीएम अशोक गहलोत ने संघ को राजनीतिक पार्टी बनाने की नसीहत दे दी.

अगर एग्ज़िट पोल के दावे सही साबित होते हैं तो इन छह धुंरधंर बीजेपी नेताओं का कद बढ़ना तय है. क्योंकि भीषण गर्मी में भी इन नेताओं ने दिन-रात एक कर दिया और सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस के ‘मिशन 25’ को फेल करने की दिशा में जुट गए.

सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस राजस्थान में बीजेपी से ​क्यों पिछड़ रही है?

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लोकसभा के पिछले कई चुनावों से राजस्थान में यह ट्रेंड बना हुआ है कि जिसकी सत्ता होती है उसकी ज्यादा सीटें आती हैं, लेकिन इस बार यह सियासी परंपरा टूटती हुई​ दिखाई दे रही है. राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है मगर पार्टी को बीजेपी के मुकाबले कम सीटें जीतने की उम्मीद है. दोनों चरणों का मतदान पूरा होने के बाद कांग्रेस ने यह मान लिया है कि राजस्थान में बीजेपी उस पर भारी पड़ेगी.

आलाकमान को सौंपी रिपोर्ट में कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने यह माना है कि पार्टी के शीर्ष नेता चुनाव से पहले मोदी और राष्ट्रवाद के अंडर करंट को नहीं भांप पाई. मतदान के बाद मिले फीडबैक के आधार पर कांग्रेस के नेताओं ने यह माना है कि कुछ सीटों पर उम्मीदवार कमजोर रह गए. इससे उक्त सीटों पर बीजेपी को वॉकओवर मिल गया है. यदि मोदी और राष्ट्रवाद के अंडर करंट को अंदाजा पहले लगा ​लिया होता तो मजबूत उम्मीदवार उतारे जा सकते थे.

ताज्जुब की बात यह है कि टिकट बंटवारे के बाद राहुल गांधी ने प्रभारी अविनाश पांडेय, सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट को दिल्ली बुलाकर इस गलती के बारे में रिपोर्ट मांगी थी. आलाकमान ने राजसमंद, उदयपुर, चितौड़गढ़, अजमेर, चूरू, भीलवाड़ा, झुंझुनूं और झालावाड़ में कमजोर उम्मीदवार होने की बात कही थी. इन सीटों पर उम्मीदवार बदलने पर भी चर्चा हुई लेकिन प्रदेश के नेताओं ने यहां के प्रत्याशियों के मुकाबले में होने की बात कही.

मतदान के बाद मिले फीडबैक के आधार पर कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने यह मान लिया है उन्होंने आलाकमान के सामने 8 सीटों पर उम्मीदवारों के मुकाबले में होने की बात कहकर चूक की. सूत्रों के अनुसार इस बारे में अविनाश पांडेय ने एक रिपोर्ट राहुल गांधी को भेजी है. इसके मुताबिक सात सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार भारी अंतर से चुनाव हार रहे हैं. आइए जानते हैं इन सात सीटों के बारे में —

अजमेर
अजमेर से कांग्रेस ने रिजु झुंझुनवाला को टिकट देकर सबको चौंका दिया. चुनाव खत्म होने तक कई कांग्रेस नेता तो यही पूछते रहे कि रिजु कौन है. रिजु जातिगत और सियासी, दोनों समीकरणों से बेहद कमजोर रहे. उन्हें स्थानीय नेताओं का भी पूरा सहयोग नहीं मिला. महज पैसों के दम पर उन्होंने चुनाव में संघर्ष किया. अजमेर सीट पर रिजु की जगह अगर सचिन पायलट या रघु शर्मा को टिकट दिया जाता तो पार्टी सीट निकाल सकती थी. आपको बता दें कि रघु शर्मा ने डेढ़ साल पहले हुए उपचुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज की थी.

चितौड़गढ़
चितौड़गढ़ में कांग्रेस की स्थिति पहले से ही कमजोर मानी जा रही थी, क्योंकि पार्टी को मजबूत उम्मीदवार नहीं मिल रहा था. स्वास्थ्य खराब होने के चलते गिरिजा व्यास ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया. कांग्रेस ने यहां गोपाल सिंह ईडवा को टिकट थमा दिया. उन्हें पीसीसी चीफ सचिन पायलट का करीबी माना जाता है. उन्हें टिकट इस आधार पर मिला कि वे पांच साल तक कंधे से कंधा मिलाकर साथ रहे. चुनाव में स्थानीय नेताओं ने ईडवा का साथ नहीं दिया. यहां कांग्रेस अगर किसी स्थानीय नेता को टिकट देती तो मुकाबला बराबरी का बन सकता था.

उदयपुर
उदयपुर सीट पर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव हारने वाले रघुवीर मीणा पर दांव खेला. आपको बता दें कि यहां से 200 किलोमीटर की दूरी पर गुजरात की सीमा शुरु हो जाती है. इस वजह से मोदी का असर यहां सबसे ज्यादा दिख रहा था. कांग्रेस यदि यहां किसी नए चेहरे को मौका देती तो बात बन सकती थी. चुनाव में गिरिजा व्यास और सीपी जोशी की निष्क्रियता रघुवीर मीणा को बड़ा नुकसान दे गई.

राजसमंद
राजसमंद में कांग्रेस ने किसी भी रणनीति पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया. टिकट वितरण में बस यह ध्यान रखा गया कि सीपी जोशी देवकीनंदन काका की पैरवी कर रहे हैं. परिसीमन के बाद हुए दो चुनाव में अब तक राजपूत ही यहां से जीत दर्ज कर पाया है. गुर्जरों की संख्या कम होने के बावजूद कांग्रेस ने काका को सीपी की जिद के चलते मौका दिया. यहां से यदि रावत जाति के किसी नेता पर दांव खेला जाता तो दीया कुमारी से मुकाबला किया जा सकता था.

भीलवाड़ा
भीलवाड़ा से रामपाल शर्मा को टिकट मिलने की काबिलियत यह थी कि स्पीकर सीपी जोशी ने उनकी पैरवी की थी. जबकि धीरज गुर्जर और विधायक रामलाल जाट ने खुलेआम शर्मा का विरोध किया. गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में भीलवाड़ा से सिर्फ कांग्रेस का एक विधायक चुनाव जीता था. संघ की सक्रियता की वजह से भीलवाड़ा को मिनी नागपुर कहा जाता है. यहां से रिजु झुंझुनवाला को मौका दिया जाता तो वे ही रामपाल शर्मा से बेहतर उम्मीदवार साबित होते.

झालावाड़-बारां
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के गढ़ और बेटे दुष्यंंत सिंह के सामने कांग्रेस ने लड़ाई लड़ने से पहले ही हथियार डाल दिए. बीजेपी से कांग्रेस में आए प्रमोद शर्मा को यहां से टिकट दिया. कांग्रेस के नेताओं ने ही उन्हें स्वीकार ही नहीं किया. यहां से यदि प्रमोद जैन भाया को टिकट दिया जाता तो बात बन सकती थी, लेकिन मंत्री को टिकट नहीं देने के फार्मूले के तहत भाया को मैदान में नहीं उतारा गया. यहां भी भारी अंतर से कांग्रेस की हार के संकेत साफ तौर पर मिल रहे हैं.

चूरू
पहले कांग्रेस ने राजस्थान में किसी भी मुस्लिम नेता को टिकट नहीं देने की रणनीति बनाई थी, लेकिन आखिर में चूरू में कांग्रेस अपने टिकट वितरण के पुराने ढर्रे पर आ गई और रफीक मंडेलिया को टिकट दे दिया. मंडेलिया विधानसभा चुनाव हार चुके हैं. अगर यहां पर कांग्रेस किसी राजपूत या ब्राह्मण प्रत्याशी को मौका देती तो मुकाबले में आ सकती थी.

झुंझुनूं
झुंझुनूं में कांग्रेस ने सूरजगढ़ से विधानसभा चुनाव हार चुके श्रवण कुमार को टिकट दिया. श्रवण की जगह राजबाला ओला को मैदान में उतारा जाता तो वे बेहतर उम्मीदवार साबित होतीं. श्रवण की व्यक्तिगत इमेज और पकड़ वोटर्स के बीच अच्छी नहीं थी. उन्हें ओला परिवार की गुटबाजी का भी सामना करना पड़ा.

कुल मिलाकर चुनाव प्रचार और मतदान के बाद कांग्रेस नेताओं को यह अहसास हुआ है कि इन आठ सीटों पर कमजोर उम्मीदवार मैदान में उतार दिए. पार्टी के नेताओं को अपनी गलती का अहसास तब हुआ है जब तीर कमान से निकल चुका है. ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि चुनाव परिणाम आने के बाद इस गलती का ठीकरा किसके सिर फूटता है.

वसुंधरा राजे ने बीकानेर में अर्जुन मेघवाल के प्रचार से परहेज क्यों किया?

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‘मिशन-25’ के तहत राजस्थान की सभी सीटों पर जीत का दावा करने वाली बीजेपी भले ही मोदी के नाम पर वोट मांग कर एकजुटता का दावा करे, लेकिन बीकानेर में पार्टी का यह दावा खोखला साबित होता नजर आ रहा है. प्रदेश में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा होने के बावजूद वसुंधरा राजे ने बीकानेर में चुनाव प्रचार से पूरी तरह से दूरी बनाए रखी. वसुंधरा की इस दूरी ने सियासी हल्कों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है. दरअसल, अर्जुनराम की गिनती प्रदेश के उन बीजेपी नेताओं में होती है, जिन्हें वसुंधरा के विरोधी खेमे और केंद्रीय नेतृत्व के नजदीक माना जाता है. केंद्र की राजनीति में अपने … Read more

बांसवाड़ा में बीटीपी के चलते त्रिकोणीय मुकाबला होने से अच्छी वोटिंग

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राजस्थान में पहले चरण के चुनाव के तहत 13 सीटों के लिए वोटिंग जारी है. दोपहर एक बजे तक तक निर्वाचन विभाग के मतदान प्रतिशत पर नजर डाले तो सबसे ज्यादा 51 फीसदी वोटिंग बाड़मेर लोकसभा सीट पर हुई. उसके बाद बंतदान प्रतिशत बढ़ने से दोनों प्रत्याशियों के धड़कने बढ गई है. शिव, जैसलमेर, पोकरण और बायतु में वोटिंग अच्छी हो रही है. जैसलमेर और शिव में हो रही अच्छी वोटिंग कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है. वहीं बायतु से कैलाश चौधरी विधायक रह चुके हैं. ऐसे में बायतु का बढ़ रहा मतदान प्रतिशत कैलाश चौधरी अपने पक्ष में मानकर चल रहे है. पोकरण में जानकारों की माने तो दोनों … Read more