राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कैसे बने हुए हैं?

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) पद से इस्तीफा देने के बाद अपने आप कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कैसे बन गए, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं. सोनिया की अध्यक्षता वाली कांग्रेस कार्यसमिति ने राहुल गांधी को सदस्य नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, फिर भी पार्टी की वेबसाइट पर कार्यकारिणी के 24 सदस्यों की सूची अपडेट करते हुए मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के बाद दूसरे नंबर पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का नाम दर्ज कर दिया गया है. कांग्रेस के … Read more

अशोक तंवर ने कहा था हुड्डा नहीं बन पाएंगे अध्यक्ष, कोई ओर ही बनेगा

कुमारी शैलजा की नियुक्ति के बाद, साल 2017 में अशोक तंवर की तरफ से कही वो बात याद आती है जिसमें तंवर ने कहा था कि मेरे हटने के बाद हुड्डा नहीं ओर कोई पार्टी की कमान संभालेगा. आज शैलजा की नियुक्ति के बाद तंवर को वो बयान बिल्कुल सही साबित हुआ हैं.

प्रदेश में अपराध का बोलबाला, अपराधियों के हौसले हैं बुलन्द

गहलोत सरकार में अपराध का बोलबाला बढ़ता जा रहा है. वहीं अपराधियों के हौसले बुलन्द हैं. जयपुर के खो-नागोरियन में न्यूजपेपर हॉकर की हत्या और अलवर में बढ़ता अपराध का ग्राफ इस बात को साबित करते हैं.

किरोड़ी मीणा ने नैतिकता के आधार पर मांगा गहलोत से इस्तीफा

BJP के राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने प्रदेश में बढ़ती अपराधिक घटनाओं पर राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है.

आखिर पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा क्यों नहीं बन पाये प्रदेश अध्यक्ष?

हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) में आलाकमान ने बड़ा बदलाव करते हुए अशोक तंवर (Ashok Tanwar) की जगह कुमारी शैलजा (Kumari Shailja) को प्रदेश अध्यक्ष (State President) बनाया है. शैलजा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब यह सवाल हर किसी के मन में हैं कि 13 वर्तमान विधायक और लगभग 70 के करीब पूर्व विधायक पूर्व मुख्यमंत्री (Ex-Chief Minister) भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hudda) के पक्ष में होने के बावजूद सोनिया गांधी ने हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस की कमान क्यों नहीं सौंपी?

हुड्डा की जगह शैलजा को कमान सौंपने के पीछे कांग्रेस आलाकमान का मत यह रहा कि हुड्डा के प्रदेश अध्यक्ष बनने से हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी कम होने के बजाय ज्यादा बढ़ती. अशोक तंवर के साथ-साथ, कैथल विधायक रणदीप सूरजेवाला, किरण चौधरी, पार्टी के दिग्गज नेता कैप्टन अजय यादव सभी खुलेआम भूपेन्द्र हुड्डा की मुखालफत करते नजर आते. इन सब के खुले विरोध से बचने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने बीच का रास्ता चुना.

पूर्व सीएम हुड्डा के प्रदेश अध्यक्ष बनने में सबसे बड़ा रोड़ा हाल में हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर हुआ जननायक जनता पार्टी (जजपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गठबंधन रहा. अशोक तंवर दलित समाज से आते हैं. तंवर प्रदेश के साथ-साथ देश की राजनीति में भी कांग्रेस के बड़े दलित चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं. अगर कांग्रेस उनके स्थान पर भूपेन्द्र हुड्डा को अध्यक्ष बनाती तो प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी इसे दलित समाज के अपमान के रुप में चुनावी प्रचार में पेश करती. जिसका नुकसान कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता था.

जजपा-बसपा के गठबंधन ने पहले ही कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं. प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने परिवर्तन रैली के बाद सोनिया गांधी से हुई मुलाकात में यह बात साफ कही थी कि तंवर को हटाने के बाद अगर हुड्डा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में अपना मूल वोटबैंक (दलित समाज) हमारे से दूर जा सकता है. गुलाम नबी आजाद की दलित वोट छिटकने की संभावना के बाद सोनिया गांधी ने शैलजा कुमारी को अध्यक्ष बनाने का फैसला किया. शैलजा को अध्यक्ष बनाकर पार्टी आलाकमान ने एक-तीर से दो निशाने साधे. पहला तो अशोक तंवर के नाम से उठ रहे विद्रोह को शांत करते हुए तंवर को अध्यक्ष पद से हटा दिया.

दूसरा, हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेन्द्र हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाकर उनके बगावती तेवर को कुछ ही समय के लिए ही सही लेकिन शांत कर दिया गया. हुड्डा गुट पिछले दो साल से अशोक तंवर को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग कर रहा था, लेकिन 90 प्रतिशत बड़े नेता अपना पाले में होने के बावजूद भी हुड्डा तंवर को हटवा नहीं पा रहे थे. हुड्डा को तंवर को हटवाने के लिए आखिरकार अपने बगावती तेवर दिखाने ही पड़े. रोहतक में पार्टी से इत्तर अलग रैली करनी पड़ी. पार्टी आलाकमान को तंवर को नहीं हटाने पर नई पार्टी बनाने की धमकी दी, जिसके बाद आखिरकार हुड्डा लंबे संघर्ष के बाद तंवर की अध्यक्ष पद से छुट्टी कराने में कामयाब हुए.

भूपेन्द्र हुड्डा और उनके समर्थित (13) विधायकों ने पिछले काफी समय से अशोक तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. भूपेन्द्र हुड्डा ने हरियाणा की राजनीतिक राजधानी रोहतक में परिवर्तन रैली कर कांग्रेस आलाकमान को तंवर को हटाने का आखिरी अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी में होने वाली किसी प्रकार की टूट से बचने के लिए अशोक तंवर को हटाकर उनके स्थान पर कुमारी शैलजा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी हैं.

गौरतलब है कि बुधवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा में अशोक तंवर की पार्टी अध्यक्ष पद से छुट्टी करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री शैलजा कुमारी को पार्टी का अध्यक्ष बनाया जिसकी घोषणा हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने की. वहीं कांग्रेस पार्टी से बगावत का झंडा बुलंद कर रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा चुनाव कमेटी के प्रधान के साथ-साथ किरण चौधरी की जगह कांग्रेस विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी दी गई है.

कुमारी शैलजा की नियुक्ति के बाद, साल 2017 में अशोक तंवर की तरफ से कही वो बात याद आती है जिसमें तंवर ने कहा था कि मेरे हटने के बाद हुड्डा नहीं ओर कोई पार्टी की कमान संभालेगा. आज शैलजा की नियुक्ति के बाद तंवर को वो बयान बिल्कुल सही साबित हुआ हैं.

आखिर ऊंट आ ही गया पहाड़ के नीचे

चिदंबरम (P.Chandamama) ने साबित कर दिया कि वह जेल जाने से बहुत डरते हैं. खुद सुप्रीम कोर्ट वकील हैं. देश के वित्त मंत्री और गृहमंत्री रह चुके हैं. उस समय वह इतने मगरूर थे कि कुछ भी कर डालने का आत्मविश्वास रखते थे. कानूनिविद होने के बावजूद उन्होंने कानूनों का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया. लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं. ऊंट पड़ाड़ के नीचे आ चुका है और वह डर रहा है. उसका अभिमान चूर-चूर हो रहा है कि यह पहाड़ तो मुझसे बहुत ऊंचा है. जो भी इस तरह का अतिरिक्त आत्मविश्वास पाल लेता है, वह चिदंबरम हो जाता है. चिदंबरम अब कुछ दिन तिहाड़ जेल के बैरक नंबर सात में रहेंगे.

चिदंबरम ने जेल जाने से बचने की बहुत कोशिश की. इसके लिए उन्होंने अपनी हिरासत अवधि भी बढ़वा ली थी. उनके वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पूरी ताकत लगाए हुए थे. उन्होंने यह साबित करने की पूरी कोशिश की कि जेल भेजने के कानून सब के लिए समान नहीं हैं. चिदंबरम को सीबीआई ने INX मीडिया (INX Media) मामले में गिरफ्तार किया था. उनकी रिमांड अवधि दो बार चार-चार दिन बढ़ी. उसके बाद सीबीआई ने अदालत से कहा कि अब रिमांड की जरूरत नहीं है. उसके बाद चिदंबरम को तिहाड़ जेल भेजा जाता. तिहाड़ जेल में रात गुजारने से बचने के लिए उन्होंने अदालत से मांग की कि उन्हें रिमांड में ही रहने दिया जाए. यह मांग इसलिए कि वह तिहाड़ जेल की कोठरी की बजाय सीबीआई के गेस्टहाउस में रह सकें.

चिदंबरम की सीबीआई हिरासत पांच सितंबर तक ही बढ़ सकी. इसके बाद वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शिकंजे में आ गए. उन्हें जिसका डर था, वही हुआ. वह गुरुवार शाम तक तिहाड़ जेल पहुंचा दिए गए. सिब्बल और सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि चिदंबरम की उम्र और सेहत का ध्यान रखते हुए उन्हें तिहाड़ जेल न भेजा जाए. चिदंबरम की उम्र 76 साल है. हालांकि यह बात अलग है कि 70 पार कई बुजुर्ग तिहाड़ जेल में बंद हैं. गिरफ्तार होने के बाद रिमांड अवधि खत्म होने पर आरोपी को जेल भेज दिया जाता है. यह कानून सबके लिए समान बताया जाता है, लेकिन चिदंबरम इसके अपवाद साबित हो रहे थे. अदालत ने उनकी रिमांड अवधि बढ़ा दी थी.

इतनी कोशिशों के बाद भी भाग्य ने साथ नहीं दिया. माथे पर रखा अक्ल का टोकरा भी कोई काम न आया. सीबीआई से मुक्ति मिली तो ED ने पकड़ लिया और हिरासत मांगने की बजाय न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध कर दिया. पूछताछ बाद में होती रहेगी, फिलहाल चिदंबरम ने अपराध के मामले में जेल में दिन काटने वाले देश के पहले पूर्व गृहमंत्री होने का कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है. जब चिदंबरम गृहमंत्री थे, तब अमित शाह को तिहाड़ जेल में रहने का अनुभव प्राप्त हुआ था. अब अमित शाह गृहमंत्री है. चिदंबरम को भी जेल में रहने का अनुभव होना चाहिए.

चिदंबरम जब देश के गृहमंत्री थे, तब उन्होंने हिंदू आतंकवाद की फाइल तैयार करवाई थी. बाबा रामदेव (Baba Ramdev) के निहत्थे सत्याग्रहियों पर आधी रात को पुलिस का हमला करवाया था. यह कार्रवाई उन्हें दिल्ली से रातोंरात खदेड़ने के लिए की गई थी. उस समय चिदंबरम के दिमाग में यह बात बिलकुल नहीं थी कि वह कुछ गलत कर रहे हैं. दुनिया में कई बड़े नेताओं को इस तरह की गलतफहमी होती रहती है. समय पलटने के बाद सारी गलतफहमी धरी रह जाती है, जैसा चिदंबरम के साथ हो रहा है.

चिदंबरम अगर जेल जाने से किसी भी तरह बचते रहते तो लोग यही समझते कि कानून सबके लिए समान नहीं है. अब यह आरोप नहीं लगेगा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से पहले ही इनकार कर दिया था और उन्हें जमानत के लिए स्थानीय अदालत में अर्जी देने को कहा था. जिस कानून का विकट जानकार होने का दम भरते हुए चिदंबरम तीसमारखां बनते थे, आज वह खुद उसी कानून के शिकंजे में फंस चुके हैं. कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी उनके लिए वकालत कर रहे हैं. हकीकत यह है कि फिलहाल चिदंबरम जमानत के लिए तरस रहे हैं.

राजधानी नहीं महफूज़, अखबार के पैसे मांगने पर युवक की निर्मम हत्या, राजनीति शुरू

राजस्थान (Rajasthan) प्रदेश में कानून व्यवस्था (Law & order) की स्थिति दिनोंदिन भयावह होती जा रही है. पिछले एक महीने में ही कई अन्य अपराधों (Crime) के अलावा राजधानी जयपुर (Jaipur) में तीन बार और गंगापुर सिटी में एक साम्प्रदायिक उन्माद की गम्भीर स्थिति बनी. ये हालत तो तब हैं जब गृह विभाग (Home Department) की जिम्मेदारी खुद प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पास है. एक तरफ सरकार (Government) जहां राज्य में अच्छा शासन देने के दावे के साथ राजधानी जयपुर में प्रदेश के आला पुलिस अधिकारियों (Police Officers) के साथ दो दिवसीय संवाद कर रही है तो वहीं को राजधानी के जयपुर के खोह-नागोरियान थाना क्षेत्र … Read more

राहुल के जमाने से उलझा मामला सोनिया की टीम ने सुलझाया

कांग्रेस (Congress) में हरियाणा (Haryana) का जो मामला राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने उलझा दिया था, वह सोनिया गांधी (Soniya Gandhi) की टीम ने सुलझा दिया है. लेकिन नेताओं के आपसी विवाद कहां तक सुलझ पाएंगे, यह समय तय करेगा. हरियाणा में दो साल से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hudda) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (State Congress President) अशोक तंवर (Ashok Tanwar) के बीच तलवारें खिंची हुई थी. बड़े-बड़े नेताओं के अलग-अलग गुट बन रहे थे और हुड्डा तो बगावती तेवर दिखाने लगे थे. ऐसे में हरियाणा में पार्टी को एकजुट बनाए रखने के लिए संगठन में फेरबदल जरूरी था. अशोक तंवर अब हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं … Read more

‘विपक्ष ने टीचर्स बनके मुझे बहुत कुछ सिखाया, उनका धन्यवाद’

शिक्षक दिवस (Teachers Day) पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने विपक्ष का धन्यवाद कहा है. सोशल मीडिया (Social Media) पर एक​ ट्वीट करते हुए उन्होंने विपक्ष के कई नेताओं, पत्रकारों और ट्रोलर्स को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके झूठे प्रचार और गुस्से ने मुझे बहुत कुछ सिखाया और मजबूत बनाया है. ट्वीट करते हुए राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने लिखा, ‘टीचर्स डे पर मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिनसे वर्षों से मैंने सीखा है. इसमें सोशल मीडिया (Social Media) ट्रोलर्स की सेना, कुछ पत्रकार-एक-एजेंडा और मेरे राजनीतिक विरोधी शामिल हैं जिनके झूठे प्रचार और गुस्से ने मुझे बहुत कुछ सिखाया और मुझे बहुत … Read more