राजस्थान (Rajasthan) में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण फैसले पर यू-टर्न लेते हुए नया फैसला लिया कि अब पार्षद ही करेंगे महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव. गहलोत केबिनेट (Gehlot Cabinet) की एक अहम बैठक में ये फैसला लिया गया.
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वीडियो खबर: कांग्रेस में फूट की बात करने वाले पहले अपना घर संभालें- गहलोत
राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जोधपुर में BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा हमारी पार्टी में फूट की बात करते हैं लेकिन उन्हें पहले अपना घर संभालना चाहिए. भाजपा में फूट से सतीश पूनिया (Satish Poonia) के पदभार ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने शिरकत तक नहीं की. उनका समारोह में न आना क्या संकेत करता है? उपचुनाव के बारे में गहलोत ने कहा कि पूरी कांग्रेस एकजूट है और हम उपचुनाव हर हाल में जीतेंगे.
राजस्थान में मीसाबंदी पेंशन योजना बंद, भाजपा ने बताया तानाशाही निर्णय
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान की गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने भी आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदियों की पेंशन योजना (Misabandi Pension Scheme) सहित अन्य सुविधाएं बंद कर दी हैं. पिछली वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) सरकार ने मीसा व डीआरआई बंदियों को ‘लोकतंत्र रक्षक’ का नाम देते हुए उन्हें पेंशन, निशुल्क चिकित्सा, निशुल्क बस सुविधा सहित कई अन्य तरह की सुविधाएं प्रदान की थी. सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री गहलोत (Ashok Gehlot) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में रोक लगा दी. प्रदेश सरकार के इस कदम को बीजेपी ने औछी मानसिकता का उदाहरण बताते हुए तानाशाही निर्णय बताया. मीसा बंदियों की … Read more
गहलोत केबिनेट का फैसला- पार्षद ही चुनेंगे महापौर, बीजेपी ने बताया- थूंककर चाटने वाला कदम
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण फैसले पर यू-टर्न लेते हुए नया फैसला लिया कि अब पार्षद ही करेंगे महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव. सोमवार को हुई गहलोत केबिनेट (Gehlot Cabinet) की एक अहम बैठक में ये फैसला लिया गया. सीएम गहलोत के पिछले कार्यकाल में बने महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव के कानून को पिछ्ली वसुंधरा राजे सरकार ने सत्ता में आने के बाद खत्म कर दिया था मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. इसी साल यह कानून बनाया गया था जिसके तहत मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा. वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के इस फैसले पर कहा कि निकाय चुनाव में हार के डर से सरकार ने यू-टर्न लिया है. पूर्व मंत्री और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ ने बताया थूंककर चाटने वाला कदम.
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गहलोत मंत्रिमंडल की बैठक (Gehlot Cabinet) में पिछली सरकार के निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली को जारी रखते हुए बैठक में अप्रत्यक्ष प्रणाली से निकाय चुनाव (Nikay Chunav) कराने पर सहमति बनी है. इससे पहले 2009 में राजस्थान की गहलोत सरकार ने प्रत्यक्ष निकाय चुनाव आयोजित कराए थे जिसे वसुंधरा सरकार ने बदल दिया था. मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री धारीवाल ने बताया कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव इसलिए भी जारी रखा गया है ताकि अगर किसी वार्ड में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़े तो वो केवल एक ही इलाके में बिगड़े, उससे आगे न बढ़े. इसी प्रकार किसी एक वार्ड में कोई समस्या होती है तो वो अन्य वार्डो में न फैले. धारीवाल ने इसे लोकतांत्रिक पद्धति बताया.
यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि पार्षद और पूर्व पार्षदों से चर्चा कर नवंबर में होने वाले नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के चुनावों को अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने का फैसला मंत्रीमंडल की बैठक में लिया गया. धारीवाल ने बताया कि मौजूदा समय में विपक्ष द्वारा जनता के बीच भय, आक्रोश, असहिष्णुता और साम्प्रदायिक माहौल पैदा किया जा रहा है, उन परिस्थितियों में प्रत्यक्ष चुनाव कराना कतैई सही नहीं है.
उन्होंने कहा कि हमने वर्तमान और पूर्व पाषदों के साथ उन संभावित लोगों से भी बात की जो पार्षद का चुनाव लड़ने वाले हैं, उन सभी ने एक स्वर में निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली का समर्थन किया. उक्त का कहना है कि प्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा जीतकर आने वाले व्यक्ति के सामने पार्षद अपने आपको कमजोर महसूस करते हैं. दोनों के बीच तालमेल की कमी भी रहती है. ऐसे में अगर बहुमत ज्यादा हो लेकिन जीतकर आया प्रमुख व्यक्ति दूसरी पार्टी का हो तो विकास का मुद्दा गौण हो जाता है.
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सरकार के इस फैसले पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार केवल डर और तबादलों की आड में निकाय चुनावों में जीत का ख्वाब देख रही है जो मुंगेरीलाल के हसीन सपने से ज्यादा कुछ भी नहीं. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ये साफ-साफ लिखा है कि सरकार में आने के बाद निकाय चुनाव प्रत्यक्ष पद्धति से कराए जाएंगे लेकिन सरकार ने निकाय चुनाव में हार के डर से यु-टर्न लेकर प्रदेश की जनता को ठगा है.
वहीं पूर्ववर्ती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे कालीचरण सर्राफ ने भी निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली पर गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा. सर्राफ़ ने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के बाद सरकार ने विपक्ष के विरोध के बावजूद बिल को विधानसभा में पास कराया था. (Gehlot Cabinet) अब अपने ही लिए गए फैसले पर यू टर्न लेना न सिर्फ जनता को धोखा देना है, बल्कि ये एक थूक कर चाटने जैसा कदम है.
मोदी घोंट रहे हैं लोकतंत्र का गला, बीजेपी में फूट से राजे नहीं गईं पुनिया के समारोह में: गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पीएम मोदी (PM Modi) द्वारा समुद्र तट पर सफाई करने और उसका वीडियो वायरल करने पर करारा हमला करते हुए कहा है कि मोदी सफाई करें या मैसेज दें इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं है. लोगों को इससे प्रेरणा मिलती है, लेकिन मैसेज की आड़ में जिस तरह लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं, वो सही नहीं है. वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पुनिया पर निशाना साधते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि पूनिया के पदभार ग्रहण करने के समारोह में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे नहीं पहुंचीं, उनका नहीं आना क्या संकेत करता है? वे कांग्रेस में फूट की बात करते हैं, उन्हें अपना घर संभालना चाहिए.
रविवार को जोधपुर पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी पर धावा बोलते हुए कहा कि मोदी जी अमेरिका जाएं, इंग्लैंड जाए या चाइना जाकर वहां के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलें, इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन पीएम मोदी मैसेज देने की आड़ में जिस तरह से लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं, वो सही नहीं है. पीएम मोदी द्वारा चेन्नई के समुद्र तट पर सफाई करने की बात पर सीएम गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार मैसेज की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन मैसेज की राजनीति एक सीमा तक ही अच्छी लगती है. यदि कोई अच्छा काम करता हैं तो लोग स्वतः ही प्रेरित होते हैं, लेकिन उसकी आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए.
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी कमाई यही है कि कांग्रेस ने 70 साल तक देश में लोकतंत्र को कायम रखा और उसी की बदौलत ही नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन पाए, अगर पाकिस्तान की तरह यहां भी लोकतंत्र कायम नहीं रहता तो मोदी कभी भी प्रधानमंत्री नहीं बन पाते. इस बात को प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) को समझना होगा. सीएम गहलोत ने कहा कि देश में एनडीए सरकार ने जो माहौल बना रखा है उसका अब अंत आ गया है. मैं पीएम मोदी से कहना चाहूंगा कि डेमोक्रेसी को खत्म करेंगे तो देश की जनता बहुत समझदार है, वह उठ खड़ी होगी और लोग सड़कों पर उतरेंगे.
वहीं प्रदेश में चल रही सियासत की बात पर सीएम गहलोत ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा और प्रदेश भाजपा में गुटबाजी का आरोप लगाया. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि भाजपा की फूट तो सतीश पूनिया के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद उनके पदभार ग्रहण करने के समारोह में सामने आ गई. पूनिया के समारोह में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे नहीं पहुंचीं, उनका नहीं आना क्या संकेत करता है? पूनिया हमेशा कांग्रेस में फूट की बात करते हैं, उन्हें अपना घर संभालना चाहिए. प्रदेश में दो सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव पर मीडिया से बातचीत में सीएम गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा कि दोनों सीटों पर प्रचार व जन संपर्क अच्छा चल रहा है, पूरी कांग्रेस एकजुट है और हम ही ये चुनाव जीतेंगे.
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हाल ही में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय रक्षा मंत्री के बयान कि राफेल पहले होता तो सर्जिकल स्ट्राइक देश से ही संभव हो जाती, इस पर सीएम गहलोत ने कहा कि अभी तक राफेल आए नहीं हैं और आने में अभी आठ माह का समय लगेगा, ये जनता को मैसेज दे रहे हैं. अभी केंद्रीय रक्षा मंत्री वहां जाकर पूजा करके भी आ गए हैं, राफेल अभी 8 महीने नहीं आएगा तो पहले कैसे आता? ये (PM Modi) जनता को गुमराह कर रहे हैं. वहीं विपक्षी नेताओं पर सीबीआई और ईडी की ओर से कार्रवाई किए जाने पर गहलोत ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश में लोगों को चुन चुन कर टारगेट किया जा रहा है, छापेमारी की जा रही है.
अपने गृहक्षेत्र जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पीएम नरेंद्र मोदी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अभी सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स दबाव में है, न्यायपालिका में हस्तक्षेप हो रहा है. दिल्ली में कांग्रेस ऑफिस के अकाउंट के अधिकारी, कर्मचारियों के यहां छापेमारी हो रही है जबकि भाजपा का ऑफिस भी वहीं पर है, उनके किसी कर्मचारी या अधिकारी के घर तो छापेमारी नहीं हुई. (PM Modi) डेमोक्रेसी का क्या होगा, यह चिंता का विषय बना हुआ है, आज डेमोक्रेसी को खतरा है.
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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डूडी ने कहा कि मैंने जाट नेता के रुप में 20 साल तक जाट समाज और किसानों के लिए संघर्ष किया, पिछले पांच साल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मैंने किसानों की आवाज उठाई है, मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई है
वीडियो खबर: बेनीवाल ने दी गहलोत को चेतावनी- पुलिस के दम पर चुनाव करवाने की मत सोचना
राजस्थान (Rajasthan) में विधानसभा उपचुनाव (Assembly By-Poll Election) के मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने कहा है कि खींवसर में मेरा मुकाबला हरेंद्र मिर्धा (Harendra Mirdha) से नहीं है बल्कि इस चुनाव में मेरा मुकाबला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) से है, वहीं मंडावा में यह मुकाबला किसानों और गहलोत के बीच है. इसके साथ ही बेनीवाल ने कहा कि अशोक गहलोत इस उपचुनाव में पुलिस के दम पर मतदान करवाने की सोच रहे हैं तो मैं यह चेतावनी देना चाहता हूं कि ऐसी गलती मत करना, नहीं तो इसका खामियाजा पूरे राजस्थान में सरकार को भुगतना पडेगा.
वीडियो खबर: मंडावा विधानसभा उपचुनाव में कांटे की टक्कर, बीजेपी में हो सकता भितरघात
मंडावा (Mandawa) विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर होने के बावजूद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने का रीटा चौधरी का फायदा मिल सकता है, वहीं सुशीला सिंगड़ा चूंकि डेढ़ घण्टे पहले पार्टी में शामिल हुईं ऐसे में टिकट की आस लगाए बैठे भाजपा के अन्य दावेदारों की नाराजगी पड़ सकती है सिंगड़ा को भारी. अब ये तो 24 अक्टूबर की सुबह ही पता चलेगा कौन पड़ा किस पर भारी.
वीडियो खबर: ‘हनुमान मंत्री बनने के लिए नहीं, आंदोलन करने के लिए पैदा हुआ है’- बेनीवाल
खींवसर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल अपने छोटे भाई नारायण बेनीवाल के चुनाव प्रचार में जी-जान से जुटे हुए हैं….