जानिए क्यों है सचिन पायलट को राजस्थान से इतना प्यार

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) का जन्म उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ. उनकी प्रारंभिक और कॉलेज शिक्षा नयी दिल्ली और मास्टर्स अमरीका स्थित पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के व्हॉर्टन स्कूल में हुई. राजनीति में आने से पहले सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने दिल्ली (Delhi) में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन और उसके बाद दो साल जनरल मोटर्स के लिए काम किया. इसके बावजूद उन्हें राजस्थान (Rajasthan) की मरूभूमि से अथाह प्यार है और यही उनकी कर्मस्थली भी है. ऐसा क्यों, इसका उत्तर वीडियो में छिपा है.

क्यों पायलट का खुलकर समर्थन नहीं कर पा रहे उनके करीबी

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) की अंदरूनी राजनीति में सत्ता के केंद्र बदल गए. सोनिया के विश्वस्त माने जाने वाले एक गुट को मानो अभय दान मिल गया हो. सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद एक खेमा अधिक पावरफुल हो गया. यही वजह रही कि पहले जो नेता और कार्यकर्ता सचिन पायलट (Sachin Pilot) का खुल कर समर्थन करते थे यहां तक कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाये जाने की खुलकर पैरवी करते थे, उनमें से कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर उनके जन्मदिन के मौके पर भी कन्नी काटते नजर आये.

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पलवल विधानसभा सीट पर इस बार करण सिंह दलाल को करना पड़ सकता है हार का सामना

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election) – पलवल (Pawal) विधानसभा सीट हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनावों (Assembly Election) की तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है, ऐसी संभावना है की हरियाणा में नवंबर माह में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके मद्देनजर विभिन्न दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क अभियान छेड़ दिया है, प्रचार साधनों के माध्यम से वे उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. आज हम आपको हमारी खास रिपोर्ट में हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में हरियाणा के पलवल जिले की पलवल (Palwal) विधानसभा सीट के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे. हरियाणा के पलवल (Palwal) जिले के अंदर तीन विधानसभा सीटें आती … Read more

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री गहलोत को दी चेतावनी

नागौर सांसद (Nagaur MP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के मुखिया हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री (Rajasthan CM) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की सरकार को जंगलराज बताते हुए पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने अलवर में बढ़ते अपराधिक ग्राफ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा. उन्होंने हाईकोर्ट के पूर्व मुख्यमंत्रियों के घर खाली कराने के फैसले पर राजस्थान सरकार की चुप्पी को गहलोत-वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) की मिली भगत बताते हुए कहा कि वे इसके लिए आंदोलन करते हुए गहलोत के आवास का घेराव करेंगे.

प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर ये बोले पायलट

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने अपने जन्मदिन के अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बीजेपी के सदस्यता अभियान पर तंज कसते हुए कहा कि हमारी पार्टी में मिस कॉल देकर सदस्यता नहीं दी जाती बल्कि पूरी कार्यवाही करते हुए पार्टी का सदस्य बनाया जाता है. वहीं उन्होंने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कहा कि जिस तरह एक पत्रकार के साथ स्थानीय पुलिस ने बर्ताव किया और जो भी वहां हुआ, गृह मंत्रालय को इसकी जांच करनी चाहिए.

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बेरी सीट पर रघुवीर कादयान की सल्तनत को चुनौती दे पाएंगे मनोहर लाल खट्टर?

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) की घोषणा चुनाव आयोग की तरफ से जल्द की जा सकती है. संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग अक्टूबर और नवंबर के महीने में हरियाणा में विधानसभा चुनाव करवा सकता है. पॉलिटॉक्स न्यूज ने हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर एक विशेष कार्यक्रम शुरु किया है. जिसमें हम आपको रोज एक नए विधानसभा क्षेत्र की ग्राउंड रिर्पोट (Ground Report) से अवगत करवाते है. आज हम आपको हरियाणा की बेरी विधानसभा सीट (Beri Assembly Constituency) के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे.

बेरी विधानसभा क्षेत्र झज्जर जिले के अन्तर्गत आता है, लेकिन बेरी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा क्षेत्र रोहतक लगता है. विधानसभा क्षेत्र पर पिछले काफी समय से कांग्रेस का एक-क्षत्र राज है. कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और भूपेन्द्र हुड्डा के खास सिपहसालार चौधरी रघुवीर सिंह कादयान (Choudhary Raghuveer Singh Kadayan) पिछले चार चुनाव से यहां लगातार अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं.

राजनीतिक इतिहासः
हरियाणा गठन के साथ ही बेरी विधानसभा भी अस्तित्व में आई. बेरी विधानसभा सीट से सर्वप्रथम 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रताप सिंह दौलुता विधायक चुने गए थे. 1968 के चुनाव में पार्टी ने प्रताप सिंह की जगह रण सिंह को प्रत्याशी बनाया और रण सिंह ने प्रताप सिंह को मात दी. साल 1972 में प्रताप सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जीत हासिल की. 1977, 80 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की.

साल 1987 में लोकदल उम्मीदवार के रुप में रघुवीर सिंह कादयान ने जीत हासिल की, लेकिन कादयान जीत के इस सिलसिले को बरकरार नहीं रख पाये और 1991 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश से हार बैठे. 1996 के चुनाव में बाजी वीरेन्द्र ने मारी. साल 2000 को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रघुवीर कादयान को उम्मीदवार बनाया. बेरी की जनता ने इस बार रघुवीर को निराश नहीं किया और रघुवीर बड़े अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब हुए.

साल 2000 में शुरु हुआ रघुवीर कादयान की जीत का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है. साल 2014 के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर होने के बावजूद भी रघुवीर कादयान चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. उन्होंने इंडियन नेशलन लोकदल के चतर सिंह को लगभग 4500 मतों से मात दी थी.

सामाजिक समीकरणः
बेरी विधानसभा सीट रोहतक लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है. बेरी विधानसभा सीट में जाट समाज बहुतायात में है. जाट वोटर्स के कारण ही रघुवीर लगातार चुनाव जीतने में कामयाब हो रहे हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में कादयान को इनेलो के कमजोर होने का भी फायदा मिलेगा. इस चुनाव में रघुवीर कादयान को जाट वोट एकमुश्त मिलने का अनुमान है, जैसा लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से जाट समाज का समर्थन दीपेन्द्र हुड्डा को एकतरफा मिला था.

2019 विधानसभा चुनावः
विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम पार्टियों ने प्रत्याशी चयन की प्रकिया शुरु कर दी है. पार्टियों के वरिष्ठ नेता इलाकों में अपने मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में लग गए है. कांग्रेस के सामने प्रत्याशी चयन में कोई समस्या नहीं है. तंवर के हटने के बाद पार्टी पर पुरा नियंत्रण भूपेन्द्र हुड्डा का होगा इसलिए टिकट एक बार फिर रघुवीर कादयान को मिलना तय है. रघुवीर कादयान, हुड्डा के करीबी है, तो इसलिए भी उनके टिकट पर कोई संशय नहीं है.

बीजेपी की तरफ से बेरी विधानसभा सीट को लेकर दावेदारों की सूची काफी लंबी है. इन दावेदारों में विक्रम सिंह कादयान, प्रदीप अहलावत, शिव कुमार रंगीला प्रमुख दावेदार है. जजपा की तरफ से उपेन्द्र कादयान का टिकट लगभग पक्का है. इनेलो इस बार प्रमोद राठी पर दांव लगाने का मन बना चुकी हैं.

जीत की संभावनाः
रघुवीर कादयान के लिए इस बार का चुनाव पिछले चुनावों की तरह आसान नहीं होने वाला है. हमारे इस तर्क के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश कांग्रेस के अंदर मची भारी गुटबाजी है. कादयान हुड्डा गुट के नेता हैं तो दुसरे गुट के नेता उन्हें चुनाव में कमजोर करने के पुरे प्रयास करेगें. जिसका नुकसान सीधा-सीधा रघुवीर सिंह कादयान को चुनाव में होगा. 2019 में बीजेपी और कांग्रेस के मध्य रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा यह तय है.

मैं मध्य प्रदेश का सुपर सीएम नहीं हूं: दिग्विजय सिंह

Digvijay Singh on Mohan bhagwat

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने इन आरोपों का जोरदार शब्दों में खंडन किया है कि वह मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) में सुपर सीएम के रूप में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमलनाथ (Kamalnath) अपने आप में मजबूत नेता हैं और उन्हें किसी सुपर सीएम की जरूरत नहीं है. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन पर आरोप कि वह गैर जरूरी तरीके से सरकार के काम में रुकावटें पैदा करते रहते हैं. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh)  ने कहा कि मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला है. वे सरकार … Read more

युवा दिलों की धड़कन पायलट हुए 42 के

युवा दिलों की धड़कन (Heart Beat of Youth), राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan Pradesh Congress President) और उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) सचिन पायलट (Sachin Pilot) का आज जन्मदिन है. पायलट ने आज अपने जीवन के 42 (42Years) सावन पूरे कर लिए हैं. विधायक के रूप में पहली बार 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में पायलट ने टोंक जिले से जबरदस्त जीत दर्ज की. यहां उन्होंने वसुंधरा सरकार में मंत्री रहे यूनुस खान को भारी मतों से पटखनी दी. सचिन पायलट की पहचान आज एक युवा चेहरे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी और एक उच्च कोटि के भारतीय राजनीतिज्ञ के तौर पर है.

सचिन पायलट एक राजनेता होने के साथ साथ युवाओं के लिए आदर्श व मोटिवेशनल वक्ता भी हैं. पायलट को भारतीय राजनीति (India Politics) का युवा रूप माना जाता हैं जो आपके व्यक्तित्व में साफ़ झलकता है. सचिन पायलट को राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है. वर्तमान में वे प्रदेश के डिप्टी सीएम के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व भी निभा रहे हैं. कम ही लोगों को पता है कि राजनीति में आने से पहले सचिन पायलट दिल्ली में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन और उसके बाद दो साल जनरल मोटर्स के लिए काम कर चुके हैं.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) का जन्म 7 सितम्बर, 1977 को उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले में एक गुर्जर परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम राजेश पायलट (Rajesh Pilot) और माता का नाम रमा पायलट (Rama Pilot) है. हालांकि सचिन का जन्म यूपी में हुआ लेकिन राजस्थान का दौसा जिला उनके पिता की कर्मभूमि बना रहा. यही वजह रही कि सचिन का राजस्थान (Rajasthan) से खास जुड़ाव रहा. उनके पिता स्वर्गीय राजेश पायलट (Rajesh Pilot) कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से एक रहे.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) की प्रारंभिक शिक्षा नयी दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में हुई. उन्होंने अपने स्नातक की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज और उसके बाद एमबीए की डिग्री अमरीका स्थित पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के व्हॉर्टन स्कूल से हासिल की.

सचिन के पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) के 11 जून, 2000 में दौसा से जयपुर लौटते हुए एक सड़क हादसे में निधन के बाद सचिन पायलट देश वापिस लौटे. यहां उन्होंने अपने पिता के जाने के बाद घर का दायित्व पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया. 10 फरवरी, 2002 को अपने पिता के जन्मदिन के दिन ही सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. इस अवसर पर उन्होंने एक बड़ी किसान सभा का आयोजन किया जिसमें भारी संख्या में दौसा जिले के किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. 13 मई, 2005 को पायलट 14वीं लोकसभा के लिए दौसा सीट से सांसद चुने गये और 26 साल की आयु में सचिन पायलट लोकसभा में पहुंचने वाले देश के सबसे युवा सांसद बने. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 1.2 लाख मतों से हराया.

15वीं लोकसभा में दौसा की सीट एसटी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्होंने अजमेर सीट से चुनाव लड़ा और एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की. वे भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रीमंडल में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रहे. इसके अलावा कांग्रेस की सरकार में गृह विभाग के स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य एवं नागरिक उड़्डयन मंत्रालय के सलाहकार समिति के सदस्य रहे. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में सचिन पायलट जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गए. उन्हें बीजेपी के सांवरलाल जाट के हाथों हार का सामना करना पड़ा. बाद में सांवरलाल के निधन के बाद वर्तमान सरकार में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने ये सीट वापिस से कांग्रेस को दिला दी थी.

2014 में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद सचिन पायलट ने न केवल 2013 के विधानसभा चुनावों में उलटे मुंह गिरी पार्टी को फिर से उठाया, बल्कि उसके बाद में हुए सभी चुनावों में कांग्रेस को जीत दिलाते हुए खड़ा किया. हालही 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में अपने नेतृत्व में कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराते हुए सरकार बनवाई. 2018 में सरकार बनने के बाद अशोक गहलोत ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. वहीं सचिन पायलट ने डिप्टी सीएम का पदभार संभाला.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने 2005 में सारा अब्दुल्लाह (Sara Abdullah) से हिंदू पद्धति से विवाह किया. सारा तीन बार के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे कश्मीरी नेता फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की सुपुत्री और उमर अब्दुल्ला (Umar Abdullah) की बहन हैं. उनके दो बच्चे हैं जिनका नाम आरान और वेहान है.

सचिन पायलट एक अच्छे स्पोर्ट्स पर्सन भी हैं. उन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद है. वे समय-समय पर राजनीति का मैदान के साथ-साथ क्रिकेट के पिच पर गेंद बल्ला थामे देखे जाते हैं. वे एक अच्छे स्पिंन गेंदबाज हैं.

तीन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए भाजपा की मजबूत तैयारी

देश में तीन राज्यों हरियाणा (Haryana), झारखंड (Jharkhand) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) होने वाले हैं. भाजपा की तैयारियां जोरों पर है जबकि विपक्ष लड़ाई से पहले ही हारने की स्थिति में दिख रहा है. चुनाव आयोग ने इन राज्यों में चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं किया है. लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने अपने चुनाव अभियान का पहला चरण करीब-करीब पूरा कर लिया है. विपक्षी पार्टियां अभी सीटों के तालमेल में ही उलझी हुई हैं और किस नेता के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा, यह तय नहीं है.

हरियाणा में भाजपा के चुनाव अभियान के तहत बड़े नेताओं के दौरे शुरू हो चुके हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दो रैलियां कर चुके हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोहतक में विजय संकल्प रैली कर रहे हैं. इस तरह भाजपा का चुनाव अभियान पूरी गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस स्थानीय नेताओं के आपसी मतभेदों को दूर करने में जुटी हुई है. हाल की कांग्रेस ने नेताओं के आपसी विवाद थामने के लिए कुमारी शैलजा को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hooda) को विधायक दल नेता बना दिया है. चुनाव अभियान समिति के प्रमुख भी हुड्डा ही रहेंगे.

इसके बावजूद यह पूरी तरह तय नहीं है कि कांग्रेस के भीतरी मतभेद, विवाद आसानी से हल हो पाएंगे. हरियाणा में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस कभी भी किसी भी मुद्दे पर भाजपा सरकार को न तो घेर पाई है और न ही चुनौती दे पाई है. एक स्थानीय कांग्रेस नेता का कहना है कि इतने सालों से चल रहे झगड़े एकदम से खत्म होना मुश्किल है.

हरियाणा में राजनीतिक रूप से मजबूत चौटाला परिवार (Chautala Family) में भी फूट पड़ी हुई है. इसको देखते हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो अपनी मौजूदगी दिखा पाएगी, इसमें संदेह है. अजय चौटाला (Ajay Chautala) ने अपनी अलग जननायक जनता पार्टी (JJP) बना ली है. उनकी पार्टी का बसपा से तालमेल हो चुका है. उनका दावा है कि इस बार हरियाणा में चारकोणी मुकाबला होगा. भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जेपीपी के बीच टक्कर होगी.

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस अपनी महाजनादेश यात्रा पूरी कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ राज्य के हर क्षेत्र के लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की. दूसरी तरफ महाराष्ट्र का मुख्य विपक्षी गठबंधन कांग्रेस और राकांपा आपसी झगड़ों में उलझा हुआ है. दोनों ही पार्टियों के प्रमुख नेताओं में पार्टी छोड़ने का रुझान बढ़ता जा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद दोनों ही पार्टियों में उत्साह की कमी नजर आ रही है.

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिया है, लेकिन पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं. दोनों ही पार्टियां प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीएस) से तालमेल करना चाहती हैं. लोकसभा चुनाव में वीबीएस के कारण दोनों पार्टियां कम से कम आठ सीटों पर नुकसान उठा चुकी हैं. कांग्रेस के सामने वीबीएस ने शर्त रखी है कि वह राकांपा को गठबंधन से अलग करे. यह शर्त मानना कांग्रेस के लिए मुश्किल है.

महाराष्ट्र में एक हद तक राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MANS) का भी असर है. लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार किया था. विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर मनसे के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस और राकांपा, दोनों पार्टियां अभी राज ठाकरे से गठबंधन के बारे में कोई फैसला नहीं ले पाई है.

झारखंड की राजधानी रांची में 12 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी की रैली का कार्यक्रम तय हो चुका है. विपक्षी खेमे को अब तक कांग्रेस के साथ बैठक का इंतजार है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) के नेता हेमंत सोरेन अपने स्तर पर 26 अगस्त को साहेबगंज से राज्य में बदलाव यात्रा शुरू कर चुके हैं. वह पूरे राज्य का दौरा करने के बाद 19 सितंबर को रांची में बड़ी रैली को संबोधित करेंगे. कांग्रेस अभी तक अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझी हुई है. पार्टी को एकजुट करने के लिए कांग्रेस ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार को हटाकर उनकी जगह रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. लेकिन इसका उलटा असर हो रहा है. कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में जाने की योजना बना रहे हैं.

इस तरह तीनों राज्यों में साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी अभी से काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. एक तरफ तीनों राज्यों में जहां कांग्रेस या अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं और जो बचे हुए हैं वो आपसी खींचतान के चलते एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी लोकसभा में मिले भारी बहुमत और उसके बाद के ताबड़तोड़ लिए गए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (Jammu Kashmir Reorganization) जैसे कई बिलों को लागू करवाने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज है.

राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कैसे बने हुए हैं?

Poli Talks News

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) पद से इस्तीफा देने के बाद अपने आप कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कैसे बन गए, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं. सोनिया की अध्यक्षता वाली कांग्रेस कार्यसमिति ने राहुल गांधी को सदस्य नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, फिर भी पार्टी की वेबसाइट पर कार्यकारिणी के 24 सदस्यों की सूची अपडेट करते हुए मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के बाद दूसरे नंबर पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का नाम दर्ज कर दिया गया है. कांग्रेस के … Read more