कांग्रेस में होगी बड़ी सर्जरी, हटेंगे एक दर्जन से ज्यादा प्रदेशाध्यक्ष और प्रभारी

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान संगठन की सर्जरी करने में जुटे हुए हैं. हाईकमान राहुल गांधी ने अपना इस्तीफा मंजूर होने से पहले कईं राज्यों के पीसीसी चीफ और प्रदेश प्रभारी बदलने का खाका तैयार कर लिया है. बताया जा रहा है कि करीब एक दर्जन से ज्यादा राज्यों के चीफ और प्रभारी नए बनाए जाएंगे. जब तक नई नियुक्तियां इन पदों पर नहीं हो जाती, तब तक इस्तीफा दे चुके पीसीसी चीफ को पद पर रहते हुए काम करने के निर्देश दिए गए हैं.

गौरतलब है कि 24 मई से 30 मई के बीच करीब एक दर्जन पीसीसी चीफ अपना इस्तीफा राहुल को भेज चुके हैं. नए पीसीसी चीफ और प्रभारियों में मेहनती नेताओं को इस बार ज्यादा मौका दिया जाएगा. यह तमाम बदलाव राहुल गांधी के इस्तीफा मंजूर होते ही शुरु हो जाएगा. इसे लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कवायद में जुटे हुए हैं.

अधिकतर राज्यों में राहुल गांधी अपनी पसंद के नेताओं को कमान सौपेंगे. वहीं मुकुल वासनिक जैसे अच्छा काम करने वाले नेताओं का प्रमोशन हो सकता है. इस बदलाव पर तमाम नेताओं की नजरें बनी हुई हैं. सभी एक-दूसरे से संपर्क साध ‘क्या हो सकता है’ इसकी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं.

इन राज्यों के बदले जाएंगे पीसीसी चीफ:
कांग्रेस जिन राज्यों में पीसीसी चीफ नए बनाएगी उनमें महाराष्ट्र, बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश और पंजाब के चीफ बदले जाने तय हैं. इनमें से कई राज्यों के अध्यक्ष तो अपना इस्तीफा भी भेज चुके हैं. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के पीसीसी चीफ सीएम बन चुके हैं. राजस्थान के पीसीसी चीफ के कार्यकाल को साढ़े पांच साल हो चुके हैं. वहीं जाटलैंड हरियाणा में दलित चेहरे अशोक तंवर के पीसीसी चीफ बनाने का प्रयोग असफल होने पर उन्हें भी बदला जाना तय है. महाराष्ट्र के पीसीसी चीफ अशोक चव्हाण खुद ही चुनाव हार गए हैं. ऐसे में पीसीसी चीफ बनाने के लिए राहुल गांधी नया प्रयोग भी कर सकते हैं.

प्रदेश प्रभारी भी होंगे चेंज:
प्रदेशाध्यक्ष के साथ एक दर्जन से अधिक राज्यों के प्रभारी भी बदले जा सकते हैं. जिन राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया या उम्मीद से कम सीटें आई हैं, वहां नए नेताओं को प्रभारी बनाया जाना तय है. हालांकि छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मौजूदा प्रभारियों को बरकरार रखा जा सकता है. प्रभारियों के साथ सहप्रभारी लगाने का प्रयोग एकदम बंद किए जाने की तैयारी है.

‘यदि झूठी रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई तो मीडिया के दफ्तर खाली हो जाएंगे’

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पत्रकार और एक्टिविस्ट प्रशांत कनौजिया को आज सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने के आदेश जारी किए हैं. उनपर यूपी सीएम योगी ​आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक ट्वीट पोस्ट करने का आरोप लगा था. उनकी गिरफ्तारी का कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे. आज उनका यह मामला जमकर वायरल हो रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और बसपा सुप्रीमो ममता बनर्जी सहित कई राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनका समर्थन किया है और बीजेपी पर निशाना साधा है. @RahulGandhi If every journalist who files a false report or peddles fake, vicious RSS/BJP sponsored propaganda about me is put in jail, most newspapers/ … Read more

गुलाबी गैंग के खात्मे के लिए हरियाणा में कांग्रेस को खत्म कर देंगे राहुल गांधी!

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राहुल गांधी कांग्रेस के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं को पसंद नहीं करते हैं. उन्होंने इन नेताओं को लंबे समय से राज्यों की राजनीति से साइड लाइन कर रखा है. ऐसे ही श्रेणी के नेता हैं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा. हुड्डा ने लगातार दो बार प्रदेश की कमान संभाली है. अब राहुल गांधी प्रदेश के भीतर हुड्डा के इतर कांग्रेसी नेतृत्व खड़ा करना चाहते हैं. यही कारण है कि पांच साल के लंबे अंतराल के बाद भी हुड्डा हरियाणा में पार्टी अध्यक्ष बनने की बांट जोह रहे हैं.

2014 लोकसभा-विधानसभा चुनावः
2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सिर्फ भूपेन्द्र हुड्डा के पुत्र दीपेन्द्र ही चुनाव जीत पाए. इन नतीजों के बाद हरियाणा की राजनीति में हुड्डा के बुरे दिन शुरु हुए. लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी को विधानसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा. हार भी इतनी बुरी कि पार्टी प्रदेश में तीसरे दर्जे की पार्टी बन गई.

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद राहुल गांधी ने भूपेन्द्र हुड्डा को झटका देते हुए युवा नेता अशोक तंवर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. तंवर इससे पूर्व कांग्रेस के छात्र संघटन एनएसयूआई की कमान संभाल चुके थे. तंवर को राहुल की नजदिकियों का लाभ मिला. उन्हें पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. तंवर का अध्यक्ष बनाना हुड्डा के लिए साफ संदेश था कि अब राहुल उनकी प्रदेश से रवानगी का मन बना चुके हैं.

विधानसभा में पार्टी की हैसियत नेता विपक्ष का पद हासिल करने की तो बची नहीं थी. लेकिन विधानसभा में पार्टी का नेता चुनने के दौरान भी राहुल ने तंवर के जरिए हुड्डा को झटका दे दिया. हुड्डा विरोधी माने जाने वाली किरण चौधरी को विधायक दल को नेता चुना गया. किरण का विधायक दल का नेता चुना जाना हुड्डा के लिए एक और बड़ा झटका था.

लेकिन हुड्डा हरियाणा की राजनीति की इतनी बड़ी शख्सियत है कि वो इतनी आसानी से हार मान जाए, यह मुमकिन नहीं है. हुड्डा ने राहुल के करीब जाने के प्रयास शुरु किए. माध्यम अपने सांसद पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा को बनाया जो राहुल के साथ सदन में अक्सर देखे जाते रहे हैं. हालांकि हुड्डा के इस प्लान से उन्हें कोई खास फायदा नहीं हुआ. राहुल ने प्रदेश की कमान दोबारा हुड्डा को सौंपने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

2016 में हुड्डा के लिए कुलदीप विश्नोई के रुप में बड़ी मुसीबत सामने आई. कुलदीप विश्नोई ने अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस का विलय कांग्रेस में कर लिया. विलय के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी ठोंक दी. अब प्रदेश कांग्रेस के भीतर अध्यक्ष पद के दो दावेदार हो गये थे. दावेदारों की सूची का बढ़ना तंवर के लिए भी बहुत सुखद था.

लेकिन राहुल गांधी का वरदहस्त होने के बावजूद भी अशोक तंवर प्रदेश कांग्रेस में हुड्डा के जाल को नहीं तोड़ पाए. हुड्डा के एक इशारे पर पार्टी के करीब 14 विधायक एक-साथ कदमताल करते नजर आते जबकि तंवर की बैठकों में हुड्डा गुट का एक भी विधायक शामिल नहीं होता था.

इन विधायकों ने कईं बार राहुल गांधी के समक्ष अशोक तंवर को हटाकर भूपेन्द्र हुड्डा के हाथ में प्रदेश की कमान सौपने की मांग की. प्रदेश में पार्टी की खराब होती दशा को देखते हुए राहुल ने तंवर को हटाकर किसी अन्य को अध्यक्ष बनाने का मन बनाया लेकिन उसी समय प्रदेश में एक बड़ी सियासी घटना हो गई.

इनेलो-बसपा गठबंधनः
लंबे समय से सत्ता में आने की बांट जो रही इनेलो ने 2018 में बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया. यह गठबंधन प्रदेश की सियासत में दलित-जाट समीकरण पैदा करने के लिए किया गया था. लेकिन यह गठबंधन इन दोनों पार्टियों के अलावा अशोक तंवर के लिए भी फायदेमंद होने वाला था. जिस समय यह गठबंधन हुआ, राहुल गांधी उसी समय तंवर की जगह किसी और को प्रदेश की कमान सौंपने का मन बना चुके थे. लेकिन दलित चेहरा होने के कारण राहुल उन्हें हटाने की हिम्मत नहीं कर पाए. हालांकि यह गठबंधन जींद उपचुनाव के बाद टूट गया.

लोकसभा चुनाव कांग्रेस और हुड्डा परिवार दोनों के लिए झटके जैसा रहा. भूपेन्द्र हुड्डा स्वयं सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से बड़े अंतर से चुनाव हार गए. उन्हें बीजेपी के अपेक्षाकृत छोटे नेता रमेश कौशिक ने मात दी. वहीं कांग्रेस के मजबूत गढ़ रोहतक में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. यहां बीजेपी के अरविंद शर्मा ने दीपेन्द्र हुड्डा को शिकस्त दी

सुरजेवाला की राहुल गांधी से बढ़ती नजदीकियां:
हुड्डा गुट लंबे समय से कांग्रेस की कमान किसी जाट चेहरे को सौंपने की मांग कर रहा है. राहुल ने विधायकों की इस मांग का भी तोड़ निकाल लिया है. अब वो प्रदेश में जाट चेहरे के तौर पर कैथल विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला को प्रोजेक्ट कर दिया है. सुरजेवाला की राहुल से बढ़ती नजदिकियां भी हुड्डा की राजनीति के लिए खतरा है.

वजह है- हुड्डा प्रदेश के जिस जाट वोटबैंक के भरोसे आलाकमान के सामने दम भरते है, पार्टी ने उसी समाज में से अब हुड्डा के इतर रणदीप के रुप में विकल्प तलाश लिया है. आगामी विधानसभा चुनाव में संभावना जताई जा रही है कि पार्टी रणदीप सिंह सुरजेवाला को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाएगी. हालांकि रणदीप सुरजेवाला को हाल में हुए जींद उपचुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था. यहां सुरजेवाला तीसरे नंबर पर रहे थे. हालांकि उन्होंने इस हार के लिए कांग्रेस गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया था. इस दौरान उनका सीधा निशाना भूपेन्द्र सिंह हुड्डा पर था.

हालांकि सुरजेवाला की उम्मीदवारी की कांग्रेस के किसी बड़े नेता की तरफ से पुष्टि नहीं की है. लेकिन इन दिनों हुड्डा की छटपटाहट तो इसी की ओर इशारा कर रही है कि पार्टी सुरजेवाला को सीएम फेस बनाने का मन बना चुकी है. हुड्डा इसीलिए भी आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए अलग से विधायकों की बैठक लेकर पार्टी के सामने अपनी ताकत दिखा रहे हैं ताकि पार्टी को अपने विचार बदलने पर मजबूर किया जा सके.

राजस्थान: आलाकमान ने गुटबाजी को बढ़ावा देने वाले बयानवीरों की मांगी रिपोर्ट

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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी को लेकर आलाकमान बेहद नाराज है. हाईकमान ने बाकायदा संगठन महासचिव वेणुगोपाल से हार के बाद बयान देने वाले नेताओं के नामों की लिस्ट मांगी है. राहुल गांधी ने पार्टी के फैसले के खिलाफ बयानबाजी को अनुशासनहीनता के दायरे में माना है. माना जा रहा है कि आलाकमान रिपोर्ट मिलने के बाद इन बयानवीरों पर कड़ी कार्यवाही कर सकता है.

बयानबाजी से कार्यकर्ता हो रहे हताश
हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल वैसे ही कमजोर हो गया है. उसके बाद मंत्रियों और विधायकों के आए बयानों से वे अधिक निराश हो रहे हैं. राजस्थान में जब से नेतृत्व परिवर्तन के बयान आने लगे हैं, तब से कार्यकर्ता और पशोपेस में पड़ गए हैं. उनमें यह मैसेज भी जा रहा है कि आलाकमान का अपने नेताओं पर कोई प्रभाव नहीं रह गया है. लिहाजा आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल के लिए बयानवीर नेताओं पर एक्शन लेने का मन बना लिया है. इससे न केवल नेताओं की जुबान पर कंट्रोल होगा, आलाकमान का कद भी बना रहेगा.

सीएम गहलोत ने भी जताई नाराजगी
बताया जा रहा है कि सीएम अशोक गहलोत ने भी आलाकमान से नेताओं की बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग की है. गहलोत ने कहा कि आलाकमान जो फैसला करता है, वो सर्वमान्य होगा. लेकिन बयानबाजी से गलत संदेश जा रहा है और माहौल पार्टी के खिलाफ बन रहा है. उसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव वेणुगोपाल से रिपोर्ट तलब की है. जल्द ही प्रदेश कांग्रेस की तरफ से संगठन महासचिव को इस बारे में रिपोर्ट भेज दी जाएगी.

कई मंत्रियों और विधायकों ने की थी बयानबाजी
चुनाव के परिणाम आते ही मंत्री उदयलाल आंजना और रमेश मीणा ने हार की जिम्मेदारी तय करने को लेकर सीएम पर निशाना साधा था. उसके बाद हरीश मीणा ने अपनी ही सरकार को हत्यारी बताते हुए मोर्चा खोल दिया था. एक ओर रामनारायण मीणा ने सरकार बर्खास्त होने का दावा कर डाला तो वहीं विधायक पी.आर. मीणा ने सीधे सीएम को टार्गेट कर दिया. ऐसे में विपक्ष का रोल कांग्रेस विधायक ही निभाने लग गए थे. आनन-फानन में प्रभारी अविनाश पांडेय ने भी एडवायजरी जारी की लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ. ऐसे में अब आलाकमान को दखल देना पड़ा. रिपोर्ट मिलने के बाद बयानवीरों पर अनुशासन का डंडा चलाया जा सकता है.

राहुल-प्रियंका से मिले नवजोत सिंह सिद्धू, दे सकते हैं मंत्रीपद से इस्तीफा

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लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में उठापटक का दौर थम नहीं रहा है. प्रदेशों में कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को आलाकमान के सामने हार के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए लालायित दिख रहे हैं. पहला मामला राजस्थान से सामने आया जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पुत्र की हार के लिए पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराया. इसके बाद कांग्रेस में अशोक गहलोत गुट के उपर सचिन पायलट गुट के विधायकों ने जुबानी प्रहार करते हुए पार्टी की हार के लिए मुख्यमंत्री गहलोत को जिम्मेदार ठहरा दिया. ऐसे ही हालात कुछ पंजाब कांग्रेस के भीतर फैले हैं. हालांकि यहां पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, … Read more

केरल के त्रिसूर पहुंचे पीएम मोदी, गुरुवायूर मंदिर में की पूजा-अर्चना

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प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी पहली यात्रा पर हैं. पीएम मोदी आज केरल के त्रिसूर पहुंचे और यहां प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर में भगवान के दर्शन किए. यहां उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान का आशीर्वाद लिया. मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद पीएम मोदी बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित भी करेंगे. ഗുരുവായൂര്‍ ക്ഷേത്രം ദിവ്യവും പ്രൗഢഗംഭീരവുമാണ്. ഇന്ത്യയുടെ പുരോഗതിക്കും സമൃദ്ധിക്കും വേണ്ടി ചരിത്രപ്രസിദ്ധമായ ഈ ക്ഷേത്രത്തില്‍ പ്രാര്‍ത്ഥിച്ചു pic.twitter.com/fQpK3JWuB7 — Narendra Modi (@narendramodi) June 8, 2019 बता दें, गुरुवायूर मंदिर इतिहास काफी पुराना है. मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण की मूर्ति है. पीएम शुक्रवार रात से ही केरल दौरे पर है. वो रात में ही कोच्चि पहुंच गये थे. आज सुबह वो नेवी … Read more