आज शाम प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे नरेंद्र मोदी, 8 हजार मेहमान करेंगे शिरकत

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लोकसभा चुनाव में बड़ी और शानदार जीत हासिल करने वाले नरेंद्र मोदी आज शाम 7 बजे राष्ट्रपति भवन में एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने वाले हैं. मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. समारोह की सभी तैयारियां करीब-करीब पूरी हो चुकी हैं. खास बात यह है कि इस बार का मोदी शपथ ग्रहण समारोह पिछले बार से कहीं भव्यता लिए हुए नजर आएगा. इसका अंदाजा केवल इस बात से ही लगाया जा सकता है कि समारोह में करीब 8 हजार मेहमानों के आने की उम्मीद है. समारोह में मोदी के साथ करीब 50 मंत्री भी अपने पद और गोपनियता की शपथ ग्रहण करेंगे. बीजेपी … Read more

मोदी सरकार को ‘मन के काम’ करने के लिए करना होगा 2020 तक का इंतजार

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लोकसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को 303 सीटों पर फतह हासिल हुई है. सीटों की ये संख्या पूर्ण बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक है. लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद यह तो सुनिश्चित हो गया है कि बीजेपी को लोकसभा के अंदर कोई भी बिल पास कराने में परेशानी नहीं आएगी. लेकिन लोकसभा चुनाव में मिली इतनी भारी जीत के बाद भी बीजेपी को राज्यसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 2020 तक का इंतजार करना होगा. वर्तमान में बीजेपी के राज्यसभा में 73 सदस्य है जो बहुमत के आंकड़े से करीब 50 कम हैं . हालांकि बीजेपी की राज्यसभा सीटों में बढ़ोतरी की शुरुआत जून महीने से … Read more

मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं आएंगी ममता बनर्जी, बताया ये कारण

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक बड़ी जीत हासिल कर सत्ता में लौटा एनडीए नई सरकार के गठन की तैयारी में है. कल 30 मई को नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने वाले हैं. इस समारोह के लिए कई विदेशी मेहमानों को भी आमंत्रित किया गया है. साथ ही देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता भी इसका हिस्सा बनने वाले है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पीएम के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित है. अब तक ममता दीदी की तरफ से इस समारोह में शरीक होने के लिए हामी भरने की बात सामने आ रही थी, लेकिन एक दिन पहले … Read more

पहले से भी भव्य होगा मोदी का शपथ ग्रहण समारोह, शामिल होंगे 6500 मेहमान

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लोकसभा चुनाव में बड़ी और शानदार जीत हासिल करने वाले नरेंद्र मोदी 30 मई (गुरूवार) को एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने वाले हैं. शपथ ग्रहण की सभी तैयारियां करीब-करीब पूरी हो चुकी हैं. मोदी के साथ कई मंत्रियों के भी शपथ ग्रहण करने के कयास हैं. खास बात यह है कि इस बार का मोदी शपथ ग्रहण समारोह पिछले बार से कहीं भव्यता लिए हुए नजर आएगा. बीजेपी की ओर से शपथ ग्रहण समारोह में देश के करीब-करीब सभी प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया गय है जिसमें ममता बनर्जी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि इस समारोह में … Read more

गुटों में विभाजित कांग्रेस कहां कर पाती मोदी लहर का मुकाबला

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देश में लोकसभा चुनाव के नतीजों में नरेंद्र मोदी की सुनामी देखने को मिली जिसमें कांग्रेस पूरी तरह धाराशायी हो गई. कई राज्यों में तो उसके हालात 2014 से भी बुरे थे. कांग्रेस का 18 राज्यों में खाता तक नहीं खुला. हार के इन नतीजों की समीक्षा की जाए तो कांग्रेस को मिली करारी हार का सबसे बड़ा कारण राज्यों की कांग्रेस लीडरशिप में चल रही जबरदस्त गुटबाजी है. हमारे इस खास आर्टिकल में विभिन्न राज्यों की गुटबाजी के बारे में विस्तृत रुप से बता रहे हैं…

हरियाणाः कांग्रेस गुटबाजी का सबसे बड़ा नमुना देखना है तो हरियाणा होकर आइए. यहां कांग्रेस के भीतर कई धड़े सक्रिय मिलेंगे जो परोक्ष रुप से बीजेपी के पक्ष में कार्य करते हुए नजर आए. इस राज्य में कांग्रेस के भीतर खींचतान काफी लंबे समय से है लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कभी इस अस्थिरता को थामने की कोशिश नहीं की. प्रदेश कांग्रेस के भीतर 2 धड़े पूर्ण रुप से सक्रिय हैं जिन्होंने चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया है.

तंवर गुटः इस गुट की कमान हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक तंवर के हाथ में है. हालांकि यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उनके अध्यक्ष बनने के बाद से ही हरियाणा में कांग्रेस गर्त की ओर है. राहुल गांधी की तरफ से अशोक तंवर को अध्यक्ष बनाने के तुरंत बाद ही विधायकों ने उनका विरोध शुरु कर दिया था. कई बार राहुल गांधी को विधायकों ने तंवर को हटाने की गुहार की लेकिन राहुल ने उनकी मांग को हर बार अनसुना किया. तंवर के साथ उनके कार्यकाल के दौरान एक भी विधायक उनके साथ खड़ा नजर नहीं आया. यही हरियाणा में कांग्रेस को मिली करारी हार का कारण रहा.

हुड्डा गुटः हरियाणा कांग्रेस के चेहरों में आज भी अगर कोई बीजेपी से चुनौती दे सकता है तो वो है भूपेन्द्र सिंह हुड्डा. उनकी संगठन पर पकड़ आज भी पहले की तरह ही मजबूत है. पार्टी के 90 फीसदी से भी ज्यादा विधायक भूपेन्द्र हुड्डा के एक इशारे पर लाइन में कदमताल करते नजर आते हैं. लेकिन संगठन पर उनकी इस जबरदस्त पकड़ को राहुल गांधी पिछले पांच साल में भांप ही नहीं पाए.

विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की तरफ से कई बार भूपेन्द्र हुड्डा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग की गई लेकिन उनकी मांग को हर बार दरकिनार किया गया. लोकसभा चुनाव में मिली हार का एक बड़ा कारण भूपेन्द्र हुड्डा को नजरअंदाज कराना भी रहा. तंवर और हुड्डा के अलावा हरियाणा कांग्रेस में किरण चौधरी, कुलदीप विश्नोई, रणदीप सुरजेवाला जैसे नेताओं के भी धड़े सक्रिय हैं जो बीजेपी से मुकाबला कम और कांग्रेस का नुकसान करने के ज्यादा प्रयास करते हैं.

राजस्थानः राजस्थान में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत मिलने की आशंका थी. लेकिन कांग्रेस को जीत मिली सिर्फ 100 सीटों पर यानि बहुमत से भी एक सीट कम. कांग्रेस के पक्ष में जबरदस्त माहौल होने के बावजूद कांग्रेस का 100 सीटों पर सिमटना आलाकमान के लिए चिंताजनक था. कारण तलाशे गए तो सामने निकलकर आया कि गुटबाजी के कारण टिकट वितरण में काफी गलतियां हुई जिससे कई स्थानों पर पार्टी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा.

विधानसभा चुनाव के बाद सरकार के गठन में राहुल गांधी ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों को साधते हुए गहलोत को मुख्यमंत्री और पायलट को उप-मुख्यमंत्री बनाया. लेकिन लोकसभा चुनाव में भी विधानसभा चुनाव की तरह ही गुटबाजी के कारण टिकट वितरण में भारी गलतियां की गई. जिससे अनेक लोकसभा क्षेत्रों में तो कांग्रेस चुनाव लड़ने से पहले ही हार गई. ये टिकट इसलिए गलत बांटे गए ताकि अपने चहेते व्यक्ति को टिकट मिल सके. इन नेताओं को टिकट वितरण के दौरान जिताऊ चेहरों से कोई सरोकार नहीं रहा.

उत्तराखंड़ः इस पहाड़ी क्षेत्र में 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश संगठन के अंदर गुटबाजी अपने चरम पर है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के बीच कोई सामंजस्य नहीं है. दोनों अधिकतम समय एक-दूसरे को कमजोर करने के प्रयास में दिखाई देते हैं. लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला. पार्टी को राज्य की पांचों सीटों पर बड़ी पराजय नसीब हुई.

उधमपुर लोकसभा क्षेत्र से हरीश रावत चुनाव लड़े. उनका सामना बीजेपी के अजय भट्ट से था. पार्टी की आंतरिक गुटबाजी का नुकसान हरीश रावत को चुनाव में हुआ और वो भारी अंतर से अजय भट्ट के सामने चुनाव हारे. टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने चुनाव लड़ा. यह इलाका हरीश रावत के प्रभाव क्षेत्र वाला माना जाता है. हरीश रावत यह कभी नहीं चाहते थे कि प्रीतम सिंह चुनाव जीते. उन्होंने और उनके कार्यकर्ताओं ने प्रीतम सिंह की जमकर कारसेवा की. नतीजा रहा कि प्रीतम सिंह भारी मतों से चुनाव हारे.

हिमाचलः हिमाचल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की खबर अकसर अखबारों में देखने को मिलती है. चाहे अदावत सुखविंद्र सिंह और वीरभद्र सिंह के मध्य हो या पूर्व मंत्री जीएस बाली और वीरभद्र के बीच. नुकसान संगठन का ही हुआ है. इस गुटबाजी ने कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में भी नुकसान पहुंचाया था. लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पूरी तरह गुटों में बंटी हुई नजर आई. नेता कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने के लिए नहीं बल्कि हराने के लिए मेहनत करते दिखे. परिणाम यह रहा कि कांग्रेस का प्रदेश से सूपड़ा साफ हो गया. हिमाचल में पार्टी के हालात इतने बुरे रहे कि सभी प्रत्याशी 3.50 लाख से अधिक मतों से चुनाव हारे.

मध्यप्रदेशः मध्यप्रदेश में कांग्रेस की लुटिया कांग्रेस संगठन में फैली भयंकर गुटबाजी ने डुबोई. यहां कांग्रेस मुख्यतः तीन गुट में विभाजित है. पहला मुख्यमंत्री कमलनाथ धड़ा, दूसरा गुट राहुल गांधी के करीबी और पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया. तीसरे धड़े के मुखिया का हाथ तो कांग्रेस की लुटिया डुबोने में अहम है. उन महाशय का नाम है दिग्विजय सिंह. गुटबाजी के कारण कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार होना तो दूर, 2014 की तुलना से भी खराब हो गया.

दिग्विजय सिंह भोपाल संसदीय क्षेत्र से साध्वी प्रज्ञा के सामने बुरी तरह चुनाव हारे. हालात कुछ ऐसे रहे कि जो सीट पार्टी पिछली बार में जीतने में कामयाब रही थी, इस बार हाथ से फिसल गई. गुना लोकसभा क्षेत्र से पार्टी के दिग्गज़ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार का सामना करना पड़ा.

मोदी की टीम में शामिल हो सकते हैं UP के ये खिलाड़ी, स्मृति ईरानी पर होगी नजर

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लोकसभा चुनाव में धुंआधार वापसी के बाद एनडीए ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि मोदी लहर आज भी कायम है. देश की राजनीति में सबसे अहम माने जाने वाले राज्य उत्तरप्रदेश पर सबकी निगाहें टिकी हुई थी. सबसे ज्यादा सीट रखने वाले इस राज्य की सियासी नब्ज को टटोलने में हर कोई लगा हुआ था. तरह-तरह के आंकड़ें भी सामने आ रहे थे लेकिन बीजेपी वहां इस बहुमत के साथ इतिहास रचेगी, ये शायद किसी को अंदाजा नहीं था.

सपा-बसपा और लोकदल के गठबंधन के बावजूद यूपी में एनडीए ने 64 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है. इस प्रचंड जीत के बाद अब सुगबुगाहट तेज हो चुकी है कि उनकी इस टीम में कौन मंत्री बनेगा. साथ ही यहां से चुनाव जीते कई सांसदों की उम्मीदें आसमान छूने लगी हैं. नरेंद्र मोदी कैबिनेट में उत्तरप्रदेश से छह नए मंत्री भी शामिल हो सकते हैं. प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मिलाकर उत्तरप्रदेश से एक दर्जन से अधिक मंत्री केंद्र सरकार में रहेंगे. इसके लिए अंदर खाने प्रयास भी शुरू हो गए हैं और मोदी की सूची में शामिल होने के लिए हर संभव कोशिश हो रही है.

यह संकेत साफ है कि सरकार में उत्तरप्रदेश को विशेष महत्व मिलेगा क्योंकि यह नरेंद्र मोदी का राज्य है. जातीय संतुलन के साथ क्षेत्रीय समीकरण भी साधे जाएंगे. बीजेपी ने उत्तरप्रदेश में सहयोगी समेत 64 सीटें जीती हैं. 2014 में 73 सीटें जीतने के बाद मोदी सरकार में उत्तरप्रदेश से दर्जनभर मंत्री शामिल किए गए थे. अब जीते हुए मंत्रियों में किसे दोबारा शपथ लेने का मौका मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन कुछ सांसदों की तकदीर का ताला जरूर खुल सकता है. अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पराजित करने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का मंत्रिमंडल में महत्व बढ़ेगा. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ से अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को सहेजते हुए रिकॉर्ड जीत दर्ज की है इसलिए उनके महत्व को कमतर नहीं किया जा सकता है.

उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन के जातीय समीकरण को ध्वस्त करने और 2022 में आने वाले विधानसभा चुनाव को लक्ष्य करते हुए बीजेपी पिछड़ों और दलितों के बीच कुछ चेहरे जरूर उभारेगी. सहयोगी अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं और अबकी बार उनका कद बढ़ सकता है. कुर्मी बिरादरी पर मजबूत पकड़ बनाएं रखने के लिए आठ बार के सांसद संतोष गंगवार को फिर शामिल किये जाने की संभावना है. पहले भी मोदी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को कैबिनेट में जगह मिल सकती है.

योगी सरकार के मंत्री आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल व इलाहाबाद से जीतीं रीता बहुगुणा जोशी, कल्याण सिंह के पुत्र एटा सांसद राजवीर सिंह भी इस दौड़ में हैं. मेनका गांधी और वरुण गांधी में भी किसी एक की ताजपोशी हो सकती है. देवरिया में कलराज मिश्र की सीट पर जीते बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ब्राह्मणों के बड़े नेता डॉ. रमापति राम त्रिपाठी भी मोदी टीम में शामिल किए जा सकते हैं.

निषाद, कश्यप और बिंद बिरादरी में पकड़ बनाए रखने के लिए साध्वी निरंजन ज्योति की दोबारा ताजपोशी हो सकती है. सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाले वीके सिंह, महेश शर्मा, डॉ. सत्यपाल सिंह का दावा फिर बरकरार है. तीन-चार बार के सांसद गोंडा के कीर्तिवर्धन सिंह, फैजाबाद के लल्लू सिंह, बलिया के वीरेंद्र सिंह मस्त, डुमरियागंज के जगदंबिका पाल और देवेंद्र सिंह भोले में से किसी न किसी को क्षत्रिय समाज के कोटे में मौका मिल सकता है.

दलित वर्ग में कोरी समाज के प्रतिनिधि के रुप में जालौन के भानुप्रताप सिंह की भी पैरवी हो रही है. अबकी बार संचार मंत्री मनोज सिन्हा को छोड़कर बाकी सभी मंत्री चुनाव जीत गए. सिन्हा का भी समायोजन हो सकता है.