राजस्थान: दूसरे चरण में 2.3 करोड़ मतदाता, जयपुर में सबसे ज्यादा, दौसा में सबसे कम

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राजस्थान में दूसरे चरण का मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में प्रदेश की 12 सीटों के लिए मतदान होना है. मतदान सोमवार सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा. आज प्रदेश की जनता जर्नादन सत्ता चाहने वालों का फैसला वोट देकर तय करेगी. इन 12 सीटों पर 134 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इनमें 118 पुरूष और 16 महिला उम्मीदवार हैं. इस लिस्ट में कांग्रेस से 12, बीजेपी से 11, बसपा से 10, कम्यूनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया से एक, माक्सवाद से तीन और आरएलपी से एक, अन्य दलों से 29 और 68 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं. प्रदेश में चुनाव का पहला चरण 29 अप्रैल को … Read more

लोकसभा चुनाव: पांचवें चरण के लिए मतदान शुरू, शाम 6 बजे तक होगी वोटिंग

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देश की सबसे बड़ी पंचायत के चुनाव यानि लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के मतदान आज शुरू हो गए हैं. वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी. इस चरण में विभिन्न राज्यों की 51 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. राजस्थान में भी दूसरे चरण के चुनाव के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं. चौथे चरण में 59.25 फीसदी मतदान हुआ था. 5वें चरण में वोटिंग प्रतिशत बढ़ने की पूरी उम्मीद है. इस चरण में होने वाली वोटिंग कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी की संसदीय सीटों पर भी वोटिंग होनी है. इस चरण में यूपी की अमेठी, रायबरेली, लखनऊ, बिहार की सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, सारण, राजस्थान की … Read more

तीन सरकारी छुट्टियां न बन जाएं जी का जंजाल, बीजेपी-कांग्रेस परेशान

देश में लोकसभा चुनाव का 5वां चरण का मतदान कल है. इस दौरान राज्यों की 51 संसदीय सीटों पर मतदान होगा. सोमवार को ही प्रदेश में लोकसभा चुनावों का दूसरा चरण है जिसमें प्रदेश की 12 सीटों पर 2.30 करोड़ से अधिक मतदाता सत्ताधारियों की किस्मत का फैसला करेंगे. लेकिन दौरान कांग्रेस और बीजेपी के चेहरों पर चिंता की गहरी लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं. वजह है तीन सरकारी अवकाश, जो लगातार आ रहे हैं. 5 मई को रविवार, 6 मई को मतदान और 7 मई को अक्षय तृतीया की सरकारी छुट्टी है. ऐसे में दोनों ही राजनीतिक दलों को यह चिंता सता रही है कि अधिकांश … Read more

राजस्थान: दूसरे चरण की 12 सीटों में तीन पर बीजेपी, दो पर कांग्रेस मजबूत

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राजस्थान में दूसरे चरण की 12 लोकसभा सीटों पर प्रचार का आज अंतिम दिन है. दोनों दलों के दिग्गजों ने ताबड़तोड़ सभाएं करते हुए सियासी फिज़ा अपने पक्ष में बहाने की खूब कोशिशें की. ऐसे में दूसरे चरण की प्रदेश की कईं सीटों पर मुकाबला पहले फेज़ की तुलना में रोचक और कांटे का हो गया है. सात सीटों पर मुकाबला बराबरी का दिख रहा है. वहीं जयपुर शहर, चूरु और श्रीगंगानगर सहित तीन सीटों पर बीजेपी मुकाबले में कहीं आगे दिख रही है. सीकर और करौली में कांग्रेस बेहद मजबूत स्थिति में है. सबसे कांटे की टक्कर नागौर, अलवर, दौसा, बीकानेर और जयपुर देहात में दिख रही है. झुंझुनूं और भरतपुर में मुकाबला बराबरी का बनता जा रहा है.

बीजेपी इन सीटों पर बेहद मजबूत…

श्रीगंगानगर:
यहां मुकाबला बीजेपी केे निहालचंद मेघवाल और कांग्रेस के भरत मेघवाल के बीच है. दो मेघवालों में मुकाबला होने के चलते जातिगत समीकरणों के आधार पर हार-जीत का आकलन करने का कोई तुक नहीं है. निहालचंद मेघवाल पूरी तरह से मोदी चेहरे और मोदी लहर के भरोसे वोट मांग रहे हैं. यहां मोदी इम्पैक्ट की बदौलत निहालचंद शुरुआत से ही बढ़त बनाते हुए दिखे. भरत मेघवाल को अपनों के ही विरोध से जूझना पड़ रहा है.

जयपुर शहर:
यह सीट बीजेपी का परम्परागत गढ़ रही है. चुनाव की शुरुआत से ही कांग्रेस यहां संघर्ष करती नजर आई. यहां से बीजेपी ने मौजूदा सांसद रामचरण बोहरा और कांग्रेस ने पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को उम्मीदवार बनाया है. सीट पर परिणाम क्या रहेगा, यह तो सीएम अशोक गहलोत के बयान से साफ समझा जा सकता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जयपुर में विकास तो खूब कराया लेकिन पता नहीं जयपुर शहर की जनता क्या चाहती है. दूसरी ओर, पीएम मोदी की सभा ने बीजेपी की रही सही कसर पूरी कर ली. कांग्रेस गुलाबी नगर में अभी तक तीन बार ही चुनाव जीत पाई है. भितरघात कांग्रेस के लिए अंतिम दौर तक बड़ी चुनौती साबित होगा.

चूरु:
चूरु में कांग्रेस ने अपने अल्पसंख्यक वोटर्स को खुश रखने के लिए मुस्लिम को टिकट देने का प्रयोग जारी रखा. जाट बाहुल्य इलाके में कांग्रेस ने रफीक मंडेलिया के रूप में मुस्लिम को मौका देकर वाकई में बहुत बड़ा रिस्क लिया है. बीजेपी ने जाट कार्ड और मौजूदा सांसद राहुल कस्वां पर फिर दांव खेला है. हालांकि मंडेलिया ने पैसों की बदौलत माहौल में गर्माहट बनाने की कोशिशें की लेकिन जातिगत समीकरण साधने में नाकाम रहे.

कांग्रेस दो सीटों पर मजबूत…

सीकर:
यहां कांग्रेस ने मैनजेमेंट के माहिर सुभाष महरिया को मैदान में उतारा है. हालांकि पहले बीजेपी मुकाबले में बेहद पिछड़ी नजर आ रही थी लेकिन संघ की मेहनत और मोदी की सभा के बाद सुमेधानंद सरस्वती ने खूब कवर किया है. महरिया बीजेपी में पहले रह चुके हैं इसलिए उनकी हर रणनीति से वाकिफ है. लिहाजा महरिया मोदी लहर में अपने कौशल और मैनजमेंट से अभी भी मुकाबले में बहुत आगे दिख रहे हैं. हालांकि अब उनकी जीत का अंतर पहले के मुकाबले ज्यादा होता नहीं दिख रहा है.

करौली-धौलपुर:
इस सीट पर कांग्रेस सियासी और जातिगत समीकरण सहित दोनों क्षेत्रों में बेहद अच्छी स्थिति में है. लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक पर बीजेपी विधायक है. एक पर बसपा और अन्य छह सीटों पर कांग्रेस के विधायक है. जातिगत समीकरणों से कांग्रेस यहां बेहद मजबूत है. इस सीट पर कांग्रेस अच्छे अंतर से जीत का दावा कर रही है.

सात सीटों पर कड़ी टक्कर…
प्रदेश की शेष सात सीटों में से कहीं पर मुकाबला बेहद कांटे का तो कहीं पर सीधी टक्कर है. नागौर, जयपुर देहात, बीकानेर, अलवर और दौसा में मुकाबला बेहद दिलचस्प है. झुंझुनूं और भरतपुर में भी मुकाबला मतदान की तारीखों तक बराबरी पर आने के पूरे आसार है. कुल मिलाकर कह सकते है कि पहले चरण के मुकाबले कांग्रेस दूसरे चरण में ज्यादा सीटें जीत सकती है. लेकिन मोदी लहर और साइलेंट वोटर्स ने अपना काम कर दिया तो फिर कांग्रेस की टक्कर वाली सीटों पर समीकरण बिगड़ सकते हैं.

पांचवें चरण की 51 सीटों पर थमा प्रचार का शोर, 6 मई को मतदान

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देश में लोकसभा चुनाव के मतदान के चार चरण संपन्न हो चुके हैं. पांचवें चरण के लिए मतदान 6 मई को है जिसमें 7 राज्यों की 51 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. पांचवें चरण के लिए चुनाव प्रचार आज खत्म हो चुका है. मतदान का ये चरण अहम है क्योंकि इसी चरण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी की किस्मत का फैसला होगा. इस चरण में उत्तर प्रदेश की अमेठी, रायबरेली, लखनऊ, धौरहरा, सीतापुर, मोहनलाल-गंज, बांदा, फतेहपुर, कौशाम्बी, बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, कैसरगंज, गोंडा और बिहार की सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण, हाजीपुर सीट पर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला इसी चरण में होगा. राजस्थान की श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, … Read more

क्या नागौर में जाट-राजपूत एकता की नई मिसाल देखने को मिल सकती है?

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देशभर में हो रहे लोकसभा चुनाव का पांचवा चरण 6 मई को संपन्न होगा. राजस्थान में भी इस बार 2 चरणों में चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो रही है. पहले चरण के चुनाव 29 अप्रैल हो चुके हैं, जिसमें प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई. बाकी बची 12 सीटों पर 6 मई को वोट डाले जाएंगे. इन 12 सीटों में नागौर सीट पर सबसे दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है.

नागौर में जहां एक और मिर्धा परिवार की राजनीतिक दांव पर है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की राजनीति में अपने बूते अलग तरह की धाक रखने वाले हनुमान बेनीवाल के राजनीतिक कौशल की भी परीक्षा है. आपको बता दें कि कांग्रेस ने नाथूराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा को नागौर के चुनावी रण में उतारा है जबकि बीजेपी ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी के साथ गठबंधन करते हुए हनुमान बेनीवाल को मौका दिया है.

दोनों उम्मीदवार धुंआधार प्रचार में लगे हुए हैं. हनुमान बेनीवाल खुद की छवि और नरेंद्र मोदी का नाम लेकर वोट मांग रहे हैं तो ज्योति मिर्धा सांसद रहते हुए करवाए विकास कार्यों को गिनाकर वोट मांग रही हैं. प्रचार के इस प्रपंच के बावजूद चुनाव जाति की जाजम पर पसरता हुआ दिखाई दे रहा है. सबकी निगाह जाट और राजपूत समाज पर टिकी हुई हैं. राजनीति के जानकार यह मानकर चल रहे हैं कि इन दोनों जातियों का रुख ही इस चुनाव में हार-जीत तय करेगा.

दोनों उम्मीदवार जाट और राजपूतों को अपने-अपने पाले में लाने की मशक्कत कर रहे हैं. इस बीच यह सवाल भी नागौर की जनता के मन में उठ रहा है कि क्या एक बार फिर जाट और राजपूत एक मंच पर आकर राजनीति का नया अध्याय लिखेंगे. आपको बता दें कि प्रदेश की राजनीति में दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा और कल्याण सिंह कालवी पहले भी दोनों जातियों को एक पाले में ला चुके हैं.

आमतौर पर जाट और राजपूत जातियों के बीच हमेशा तनाव की स्थिति रहती है, लेकिन राजनीति में कभी कोई स्थाई शत्रु और मित्र नहीं होता. क्या इस चुनाव में भी जाट और राजपूत एक जाजम पर बैठने वाले हैं? बता दें कि नागौर सीट पर लगभग 2 लाख राजपूत मतदाता हैं. वैसे तो राजपूतों को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है, लेकिन इस बार बीजेपी ने आरएलपी से गठबंधन कर हनुमान बेनीवाल को मैदान में उतारा है, जिनकी छवि कट्टर जाट नेता की रही है.

बेनीवाल के मैदान में आने के बाद से नागौर के राजपूत बीजेपी से छिटकते हुए दिखाई दे रहे हैं. कई राजपूत संगठन हनुमान बेनीवाल का विरोध करने के लिए मैदान में उतर चुके हैं. करणी सेना के लोकेंद्र सिंह कालवी भी बेनीवाल के खिलाफ वोट देने की अपील कर चुके हैं. दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत राजपूत समाज को बेनीवाल के पक्ष में करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं.

गौरतलब है कि गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर से बीजेपी के उम्मीदवार हैं. उनकी सीट पर पहले चरण में मतदान हो चुका है. हनुमान बेनीवाल ने उनके समर्थन में दो सभाओं को संबोधित करते हुए जाट समाज से गजेंद्र सिंह शेखावत के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी. अब गजेंद्र सिंह शेखावत ने बेनीवाल का सियासी कर्ज उतारने के लिए नागौर में डेरा डाल रखा है.

गजेंद्र सिंह शेखावत हर भाषण में यह संदेश दे रहे हैं कि नागौर लोकसभा सीट से हनुमान बेनीवाल नहीं गजेंद्र सिंह शेखावत चुनाव लड़ रहा है. शेखावत भावुक अपील के जरिए एक बार फिर राजपूत समाज को भाजपा के पक्ष में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं. यदि उनकी अपील ने असर किया तो नागौर में जाट-राजपूत एकता की नई मिसाल देखने को मिल सकती है. बहरहाल, सबको 6 मई को वोटिंग और 23 मई को काउटिंग का इंतजार है.

राजस्थान: नागौर सीट पर अपनों की अदावत से परेशान हनुमान और ज्योति

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प्रदेश में लोकसभा के चुनाव का दूसरा चरण 6 मई को होगा. दूसरे चरण में नागौर लोकसभा सीट पर सभी की निगाहें टिकी हुई होंगी. इस सीट पर काफी रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है. कांग्रेस ने दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा को एक बार फिर चुनावी समर में उतारा है, वहीं भाजपा ने आरएलपी के साथ चुनावी गठबंधन करते हुए यह सीट आरएलपी उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल को दी है.

दोनों ही प्रत्याशी की पार्टी और विचारधारा की लड़ाई तो समझ में आती है, लेकिन वास्तविक जिंदगी में भी दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते हैं. ऐसे में दोनों पार्टियों की प्रतिष्ठा से कहीं ज्यादा स्वयं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. तीन दशक बाद भाजपा ने किसी सहयोगी दल से गठबंधन किया है. इस चुनावी समर में सबसे बड़ी खास बात यह है कि दोनों ही उम्मीदवारों को अपने प्रतिद्वंदी के साथ ही खुद ही पार्टी के दिग्गज नेताओं से भी लड़ना होगा.

कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा के टिकट को लेकर काफी विवाद हुआ था. कांग्रेस के अधिकांश विधायक ज्योति मिर्धा को टिकट देने का विरोध कर रहे थे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले नावां विधायक एवं उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी, डेगाना विधायक विजय मिर्धा, डीडवाना विधायक चेतन डूडी, पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश शर्मा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष जाकिर हुसैन सहित सभी कई नेताओं ने ज्योति मिर्धा को उम्मीदवार नहीं बनाने के मांग की थी.

पार्टी के दिग्गज नेताओं के विरोध के चलते आलाकमान ने एक बार तो ज्योति मिर्धा का टिकट काटने का मानस बना लिया था, लेकिन ऐन वक्त पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की दखलंदाजी के बाद आखिरकार आलाकमान को उन्हें प्रत्याशी बनाना पड़ा. ऐसे में ज्योति मिर्धा के साथ भितरघात की बात से इनकार नहीं किया जा सकता. नागौर की राजनीति में महेंद्र चौधरी, रिछपाल मिर्धा, हरेंद्र मिर्धा, चेतन डूडी का भी काफी बड़ा प्रभाव है. ऐसे में ज्योति मिर्धा इन दिग्गजो से कैसे निपट पाती है यह देखने वाली बात होगी.

बात करें आरएलपी के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल की तो उनकी राह भी आसान नहीं है. भाजपा के अधिकांश नेता आरएलपी के साथ गठबंधन से खुश नहीं हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी रहे पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान और गजेंद्र सिंह खींवसर को हनुमान बेनीवाल का कट्टर विरोधी माना जाता है. इन दोनों नेताओं का नागौर में काफी प्रभाव है.

इधर केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी का टिकट काटे जाने से भी एक बड़ा खेमा नाराज नजर आ रहा है. सीआर चौधरी आम मतदाताओं के बीच शालीन ओर विनम्र नेता के रूप में अपनी पहचान रखते हैं. उनका टिकट काटे जाने से उनके समर्थक खुश नहीं हैं. हालांकि कहने को तो सीआर चौधरी हनुमान बेनीवाल के साथ चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं, लेकिन मतदान के दौरान हनुमान बेनीवाल का कितना साथ निभा पाते हैं, यह देखना रोचक होगा.

आनंद पाल प्रकरण के बाद राजपूत वर्ग में भी हनुमान बेनीवाल को लेकर विपरीत माहौल बना हुआ है. नागौर लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा क्षेत्र हैं जिसमें से पांच कांग्रेस के पास, दो भाजपा के पास और एक आरएलपी के पास है. कुल 8 सीटों में से 1 सीट रिजर्व है शेष 7 सीटों पर सभी विधायक जाट समाज से हैं. ऐसे में जाट मतदाताओं का रूझान किस ओर होता है इस पर सभी की निगाहें टिकी होगी. जहां युवाओं में नरेंद्र मोदी और हनुमान बेनीवाल के प्रति जबरदस्त क्रेज है तो वहीं बुजुर्ग और कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में ज्योति मिर्धा की पहचान बाबा की पोती के नाम से है.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि नागौर का मुकाबला भी काफी कड़ा होने वाला है. देखना होगा कि क्या अपने दादा नाथूराम मिर्धा की राजनीतिक विरासत पर सवार ज्योति मिर्धा इस बार अपनी जीत सुनिश्चित कर पाती हैं या भाजपा के साथ गठबंधन करने वाले हनुमान बेनीवाल अपनी चुनावी वैतरणी को पार लगाते हैं.